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अंतिम पायदान का व्यक्ति // विनोद सिल्ला की कविताएँ

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1.
अंतिम पायदान का व्यक्ति

वो है
अंतिम पायदान पर
धकेला गया व्यक्ति

उसके द्वार पर
होती है दस्तक
धर्माचार्यों की
इस आग्रह के साथ
धर्म है असुरक्षित
करो शामिल
अपने नवयुवकों को
धर्म की लड़ाई में

कभी होती है दस्तक
सफेदपोशों की
इस आग्रह के साथ
देश और उसकी सीमाएं
हैं असुरक्षित
देकर उसको वोट
करो देश मजबूत

कभी होती है दस्तक
तथाकथित स्वदेशीवादियों की
इस आग्रह के साथ
देश और उसकी अर्थव्यवस्था
है असुरक्षित
स्वदेशी अपनाओ
अर्थव्यवस्था मजबूत करो

जबकि वह स्वयं
है असुरक्षित
उसकी चिंता
नहीं करता कोई

-विनोद सिल्ला©
2.
कमाल का हुनर

रखती हैं
पूरे परिवार का
ख्याल
सभी परिजनों की
पसंद-नापसंद
का ख्याल
सबकी
इच्छा-अनिच्छा
का ख्याल
इतना सुनियोजित
प्रबन्धन
कमाल का हुनर
रखती हैं
गृहिणियाँ
इनके हुनर का
समूचा मूल्यांकन
अभी बाकी है 

-विनोद सिल्ला©
3.
जड़ें

जब
मेरी बेटी
पूछती है मुझसे
कैसे थे मेरे
पड़दादा जी
क्या करते थे वे
पहनते थे क्या
उनके फोटो को
देखती है गौर से
तो मुझे लगता है
जैसे वह
खोज रही है
अपनी जड़ों को
होती है मुझे
सुखद अनुभूति

-विनोद सिल्ला©
4.
अलविदा

वो मेरा
नहीं था परिजन
नहीं था
दूर का या
नजदीक का रिश्तेदार
परन्तु स्नेह था अपार
आज वो नहीं है
दुनिया में
कह गया था अलविदा
दुनिया को
चंद रोज पहले ही
लेकिन मेरे
दिलो-दिमाग को
नहीं कह पाया अलविदा
आज भी

-विनोद सिल्ला©
5.
पावनता

नहर का नीला पानी
लगा मुझे चिरयात्री
आया पहाड़ों से
चलता रहा है निर्बाध
थकान भी नहीं है
ऊबा भी नहीं सफर से
जाना भी है बहुत दूर
चला जा रहा है चुपचाप
गतिशीलता ने
रखी है महफूज
इसकी पावनता
अगर ये
कहीं ठहर जाता
किसी तालाब में
तो खो देता
अपनी पावनता

-विनोद सिल्ला©
6.
उनके शब्द

उनके शब्द थे
हृदय स्पर्शी
कर्णप्रिय
ढूबे हुए मिठास में
करा रहे थे अहसास
अपनेपन का
जैसे ही मैं
नहीं कर सका पूरी
उनकी अपेक्षा
शब्दों की मिठास
होती गई कम
शनै-शनै
उनके शब्द
हो गए तबदील
कटुता में

-विनोद सिल्ला©
7.
मेहमान की तरह

लगभग
दो दशक पहले
कह दिया था अलविदा
अपनी जन्मभूमी को
अपने गाँव को

चला था गाँव से
यह सोचकर
कि लौट आऊंगा वापिस
दाना-चुगा लेने निकली
चिड़िया की तरह
लेकिन नहीं हो पाई वापसी
दो दशक बाद भी

अब गाँव में जाता हूँ
मेहमान की तरह
पहुंचने से पहले ही
सोचने लगता हूँ
वापसी की

-विनोद सिल्ला©
8.
चला आया वापिस

बहुत पहले
आया था यहाँ
तब यह स्थान
नहीं था यूं वीरान
खिले हुए थे फूल
महक रहा था आंगन
झूम रहे थे पौधे
होता था सुखद अहसास
यहाँ ठहर कर

आज फूल और खुशबू
खो चुके हैं
अपना अस्तित्व
पेड़-पौधे खड़े हैं
सहमे-सहमे
आज नहीं हुआ अहसास
अपनेपन का
सो चला आया वापिस

-विनोद सिल्ला©
9.
डाकबाबू

जब भी आता था
डाक बाबू
लिए हुए डाक
मुहल्ले भर की
उत्सुकतावश
हो जाते थे एकत्रित
उसके चारों ओर
मुहल्ले भर के लोग
करते थे चेष्टा
जानने की
किसकी आई है चिट्ठी
आजकल तो
लाता है डाकबाबू
कोई न कोई नोटिस
या मोबाइल का बिल
प्रेम-पत्र या सुख संदेश
लाने वाली
चिट्ठियों का
कत्ल कर दिया
मोबाइल व लैपटॉप ने

-विनोद सिल्ला@
10.
सफर

चल पड़ी रेलगाड़ी
पीछे छूट रहा है स्टेशन
उतर गई सवारियाँ
चल पड़ी अपने-अपने
गन्तव्य को
सफर हो गया पूरा
परन्तु नहीं हुआ मोह
रेलगाड़ी से
सहज ही कह दिया
अलविदा
परन्तु जीवन के सफर में
ऐसा क्यों नहीं?
क्यों कर बैठते हैं हम
रेलगाड़ी से स्नेह
क्यों नहीं छोड़ पाते
सहज ही उसे

-विनोद सिल्ला©
11.
बिना भेदभाव

आ रही है
सुहानी हवा
कर रही है पुलकित
तन-मन को
करा रही है
सुखद अहसास
लिए हुए है
फाल्गुन का
अल्हड़पन
मस्ती भरी ताजगी
बाँट रही है मस्ती
बिना भेदभाव किए
कर रही है निहाल
सबको

-विनोद सिल्ला©

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - राजकीय विद्यालय में शिक्षक

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)


सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना.) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

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