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कहानी // कचरा व्यवस्थापन - सुधीर ओखदे

कार्यालय में भयंकर तनाव था .आज दोपहर को मंत्री जी के हाथों स्वच्छता पखवाड़े का शुभारंभ था और कचरा,कार्यालय से यूँ नदारद था जैसे नोट बंदी के बाद कालाधन नदारद हो गया था.

जिसे देखो वही कचरा ढूँढने में लगा था ...

-अरे अभी कल तक तो यहीं ढेर पड़ा हुआ था .

-अरे आप कल की बात कर रहे हैं. मैं आज सुबह जब वॉक को निकला था तब भी कचरा यहीं गेट के पास पड़ा हुआ था .

-रघु कहाँ है !साफ़ सफ़ाई का ज़िम्मा तो उसका है .उसी नालायक ने साफ़ कर दिया होगा .

-रघु क्या साफ़ करेगा .यदि वो और उसके जैसे लोग अपने-अपने काम ज़िम्मेदारी से करते तो क्या ये दिन देखना पड़ता ?

-फिर कौन साफ़ कर सकता है ?

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जितने मुँह,उतनी बातें. दोपहर बारह बजे पालक मंत्री का ज़िला दौरा था .और इस कार्यालय से ही वे स्वच्छता पखवाड़े का शुभारंभ करने वाले थे .

नई झाड़ू मँगवा ली गयी थी .कचरा उठाने के लिए बड़ी बड़ी टोकरियों का इंतज़ाम भी कर लिया गया था .सारे स्टाफ़ को छुट्टी होने के बावजूद भी कार्यालय में उपस्थित रहने का फ़तवा निकाल दिया गया था . सारी तैय्यारियां थीं. लेकिन जिसकी सफ़ाई करने से पखवाड़े का आरम्भ होने वाला था वो कचरा ही ग़ायब था .

रोज़ कार्यालय के परिसर की तो बात छोड़िये,कार्यालय के अंदर भी इतनी गंदगी रहती थी कि लोगों को बच बच कर निकलना पड़ता था .इधर कचरा ,उधर कचरा .

कार्यालय में पड़े बेंच और कुर्सियों पर इतनी धूल होती थी कि अपनी बारी आने की प्रतीक्षा करते लोग उन पर अपने नाम अंग्रेज़ी और हिंदी में बारी बारी से लिखा करते थे . जब अपने घर के सभी सदस्यों के नाम लिखने के बावजूद भी उनका नाम नहीं पुकारा जाता तो वे पड़ोसियों के नामों की भी आज़माईश कर लिया करते थे .

अभी परसों की बात है ,उपाध्याय जी ने अपने बड़े लड़के को नंबर लगाने लाइन में बैठा दिया था और स्वयं राशन सब्ज़ी लेने बाज़ार चले गए थे. व्यवस्था पर उनका विश्वास कितना अटूट था इसका उदाहरण तो तब देखने को मिला ,जब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ वापस लौटे तो अपने बेटे को अभी भी प्रतीक्षा करते कुर्सी पर बैठे पाया .जब वो राशन सब्ज़ी लेने गए थे तब भी साहेब दस मिनिट में आने वाले थे और दो घंटे बाद जब वो वापस लौट भी आए है तब भी साहेब दस मिनिट में बस आने ही वाले हैं.

उपाध्याय जी के सुपुत्र पिताश्री के इंतज़ार में सामने पड़ी मेज़ की धूल में अपने सुवर्ण हस्ताक्षरों से कुछ लिख रहे थे .अचानक पिताश्री के आगमन से हड़बड़ाए लेकिन पिताश्री की नज़र मेज़ की धूल पर अनगिनत बार लिखे कीर्ति कीर्ति कीर्ति शब्दों पर गयी और पिताश्री ने एक धौल अपने पुत्र की पीठ पर जमाते हुए कहा -अच्छी है .मुझे भी पसंद है .

शाम को पिताश्री जब अपने पुत्र के साथ भटनागर जी के घर गए तो उन्हें पता चला प्रेम ख़ुलासा भटनागर जी के घर भी हो चुका है .

बिजली का बिल चुकाने गयी उनकी कन्या ने भी लम्बी लाइन में अपनी प्रतीक्षा को उनके सुपुत्र के नाम ही समर्पित किया था .उस दिन उनकी कन्या ने भी धूल भरी मेज़ पर बीस बार आलोक आलोक आलोक लिख कर अपने प्यार का इजहार किया था .

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आप कहेंगे बात कहाँ से कहाँ पहुँच गयी .धूल का फूल हो गयी .

कार्यालय प्रमुख इन छोटी छोटी बातों की तरफ़ कम ही ध्यान देता था .जब वो नया आया था तब एक बार उसने रघु को सबके सामने इतना डाँटा था कि दोपहर को रघु ने ख़ूब चढ़ाई थी .और उस दिन रघु के सामर्थ के सामने साहेब को घुटने टेकने पड़े थे .उस दिन के बाद से रघु बंधनों से मुक्त हो गया था सो कचरा भी उन्मुक्त सा यहाँ वहाँ बिखरा रहता था .

लेकिन आज की बात अलग थी .रघु ने भी साहेब को आश्वस्त किया था परंतु ...

कार्यालय अधीक्षक मित्तल जी ने तुरंत आपातकालीन बैठक का आदेश जारी किया .

बैठक में सभी उपस्थित थे .मित्तल जी ने बिना लाग लपेट के बात की समझाने का प्रयत्न किया .मंत्री जी का आगमन दोपहर बारह बजे अपेक्षित है और उनके हाथो आज से स्वच्छता पखवाड़े का आरम्भ होने जा रहा है .आप सभी चुस्त दुरुस्त रहें. मंत्री जी को किसी भी बात की कमी नहीं पड़नी चाहिये .कचरा नहीं है तो कचरा पैदा करो .

मिसेस गोंसालविंस आप और मिस लता आप तुरंत घर जायें और घर की सारी सब्ज़ियाँ ऑफ़िस में ले कर आयें ,जैसे आप हमेशा लाती हैं लेकिन छुपा कर .आज डंके की चोट पर लायें और गेट के पास ही बैठ कर उन्हें छीलें,काटें,चुनें.कुछ भी करें लेकिन आप दोनों से दो दो किलो कचरे की मेरी अपेक्षा है .

वर्मा जी आप तुरंत अपने साथ दी तीन कर्मचारियों को लें और घर घर जा कर कचरे की डिमांड करें. लोगों को समझाने की चेष्टा करें कि उनके कचरा देने से ही हमारे कार्यालय की सदगति है .आप की टीम से १० किलो कचरे की अपेक्षा है .

मिस्टर पांडे आप केयर टेकर हैं .कैसे केयर टेकर हैं आप !जब कचरे की ज़रूरत है ,आप कचरा उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं .

पांडे ने साहेब की तरफ़ देखते हुए कहा ,सर केयर टेकर का काम कचरा साफ़ करवाना होता है.कचरा जमा करना नहीं .

⁃ हम कुछ नहीं जानते. आप कचरा स्टॉक में रखा कीजिये ताकि वक़्त ज़रूरत उसे उपयोग में लाया जा सके .अब मंत्री जी कचरा माँगेंगे तो हम क्या पेश कर पायेंगे. ये सरकारी कार्यालय है .इसे कारपोरेट की तरह रहने का कोई हक़ नहीं .

⁃ सर अब कचरा स्टॉक में रखा करूँगा .

तभी ज़ोर का शोर उठा रघु आ गया .रघु आ गया ...

बुलाओ उसे .साहेब ने आदेश दिया .

-क्यूँ रे रघु !सालों कचरा साफ़ नहीं करता और जब स्वच्छता पखवाड़ा आया तो सारा परिसर साफ़ कर दिया .शर्म नहीं आयी तुझे ?

-ए लो साहेब !भलाई का तो कौनौ ज़माना ही नहीं है .साफ़ करो तो परेशानी ना करो तो परेशानी .

-अरे लेकिन मंत्री जी उद्घाटन कैसे करेंगे .झाड़ू कहाँ मारेंगे .जब कचरा होगा तब तो सफ़ाई होगी ना ?

-अरे इत्तु सी बात साहेब .अरे हम कचरा साफ़ किये हैं लेकिन बाहेर थोड़ी ना फेंक आये है .कहें तो पेश करें हुज़ूर के सम्मान में दो चार बालटी कचरा .

-अबे क्या बोलता है ! कचरा है .सचमुच है .जियो मेरे शेर .तू तो सबसे काम का आदमी निकला रे .

-हाँ साहेब कचरा है न .वो कहाँ जायेगा .बस छुपा दिए थे .अब बाहर जा कर कचरा टंकी तक कौन ले जाय सो हमने स्टोर रूम के पीछे जो महत्वपूर्ण फ़ाइल वाला कमरा है ना ,उसी कमरे में हम कचरा उँड़ेल आये हैं .कहें तो पेश करूँ सर .

साहेब ने उठ कर रघु को गले से लगा लिया .पूरा स्टाफ़ हाँथों में टोकरियाँ ले कर महत्वपूर्ण फ़ाइल वाले कमरे की तरफ़ कूच कर गया .

कचरा उठाया गया .यहाँ वहाँ उँडेला गया .स्टाफ़ जोश में था .कचरा कचरा करते हुए महत्वपूर्ण फ़ाईलों को भी फाड़ फाड़ कर कचरे में तब्दील कर दिया गया .

अब इंतज़ार था पखवाड़े के उद्घाटन का .

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परिचय

सुधीर ओखदे

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जन्म -21 दिसम्बर 1961 (बीना मध्य प्रदेश)

शिक्षा -रीवा ,शहडोल और छतरपुर मध्य प्रदेश में .....

1-कला स्नातक -(B.A.)

2-पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान स्नातक -(B.Lib.I.sc)बी.लीब .आई एस सी

लेखन -सभी प्रतिष्ठित हिंदी पत्र पत्रिकाओं में व्यंग्य ,आलोचना , कवितायें और संस्मरण प्रकाशित .

प्रकाशित पुस्तकें -(व्यंग्य)

1-बुज़दिल कहीं के ...

2-राजा उदास है

3-सड़क अभी दूर है

4-गणतंत्र सिसक रहा है

विशेष -1-मुंबई विश्वविद्यालय के B.A. (प्रथम वर्ष) में 2013 से 2017 तक “प्रतिभा शोध निकेतन “व्यंग्य रचना पाठ्यक्रम में समाविष्ट

2-अमरावती विश्वविद्यालय के B.Com (प्रथम वर्ष) में 2017 से “खिलती धूप और बढ़ता भाईचारा”व्यंग्य रचना पाठ्यक्रम में शामिल .

सुधीर ओखदे की अनेक रचनाओं का मराठी और गुजराती में उस भाषा के तज्ञ लेखकों द्वारा भाषांतर प्रकाशित

इंडिया टुडे साहित्य वार्षिकी सहित अनेक साहित्य वार्षिकी और महाराष्ट्र में प्रसिद्ध दीपावली अंकों में रचनाओं का प्रकाशन

आकाशवाणी के लिए अनेक हास्य झलकियों का लेखन जो “मनवा उठत हिलोर“और “मुसीबत है “शीर्षक तहत प्रसारित

सम्प्रति -आकाशवाणी जलगाँव में कार्यक्रम अधिकारी

सम्पर्क -33, F/3 वैभवी अपार्टमेंट व्यंकटेश कॉलनी

साने गुरुजी कॉलनी परिसर जलगाँव(महाराष्ट्र)425002

ईमेल -ssokhade@gmail.com

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