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बाप का खत एक अजन्मी बेटी के नाम...! // मीना रोहित 'कालेय'

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अजन्मी और आगामी बेटी के नाम पिता का पत्र...!!!
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प्रिय लाडो ,
                  पता है आज पूरा परिवार कितना खुश है। तेरी माँ तेरे नन्हे कोमल हाथों को सहलाती हुई अपनी बेटी के साथ अपने मातृत्व पर गर्वित हो रही है ; और मैं तो सुबह से ही एक नन्ही परी के जिंदगी में आने से एक अनजाना लेकिन पहचाना-सा हर्ष महसूस कर रहा हूँ। लाडो , तेरी दादी तो सुबह-सुबह जल्दी ही नहा-धोकर भगवान से तेरी ख़ुशी की मन्नतें मांग रही है और बुआ , ताऊ व तेरे बड़े भाई-बहन घर में नए मेहमान के रूप में तेरे आने से हर्षित है।
                          बेटा लाडो , इतनी ख़ुशी के बावजूद भी आज मैं एक अनजाने भय की छाया से खुद को डरा सहमा-सा पा रहा हूँ क्योंकि बाप होने के नाते तेरी सुरक्षा की जिम्मेदारी मुझ पर है। पता नहीं पहले तेरा बाप जो खुद की भी परवाह नहीं करता था वो खुद आज कमरे में भिनभिनाते एक मच्छर को देखकर इस पसोपेश और चिंता से ग्रस्त हो जाता है कि कहीं यह मच्छर मेरी बिटिया का खून न चूस जाये ; कहीं राह चलते दरिंदे मेरी बकरी चराती लाडो को अपनी हवस का शिकार न बना ले ; कहीं लड़की होने की वजह से मेरी बिटिया किसी भी प्रकार के भेदभाव का शिकार होकर खुद के 'जन्म' को न कोसने लग जाये।
                               लाडो बिटिया , क्या करूँ एक लड़की का बाप हूँ ना , चिंता तो होती है लेकिन तू घबरा मत तेरे पापा तेरे साथ है। तेरी खातिर तो मैं समाज , कुरीतियों , पश्चगामी प्रथाओं और ओछी मानसिकता वाले लोगों से भी दो-चार हो लूंगा लेकिन बेटा अंततः तेरी लड़ाई तुझे खुद ही लड़नी होगी , तुझे खुद ही पार पाना होगा इन तमाम अटकलों और बाधाओं से। आज के जमाने में जब तू भी तेरे भाई की तरह जीन्स और टी-शर्ट पहनकर बाहर निकलेगी तो लोग टकटकी लगाकर गन्दी नीयत से देखते हुए तुझ पर फब्तियाँ कसेंगे लेकिन तुझे बिल्कुल भी सकपकाना नहीं है क्योंकि तेरे टूटने में ही वे अपनी शक्ति को उभरते हुए देखेंगे। मैं तुझे बेटे की तरह यथासम्भव पालने की कोशिश करूंगा , तुझे अपना बेटा बनाकर उच्च शिक्षा दिलाऊंगा , तेरी शादी तेरे मनपसन्द लड़के से कराऊंगा बिना इस बात के इल्म के कि लड़के की जाति , धर्म क्या है।
‌                       लेकिन फिर भी लाडो तुझे तेरे अस्तित्व और खुद के 'होने' की लड़ाई तो स्वयं ही लड़नी होगी। तुझे खुद इतना सशक्त होना पड़ेगा कि कोई तुझे 'निर्भया' और 'आसिफा' न बना जाये। बेटा तुझे समाज और बहरूपियों के हर जाने-अनजाने शोषण का प्रतिकार करना होगा और अपनी पहचान को बुलंद बनाने के लिए पुरुषवादी सत्ता की भट्टी में तपकर खुद के 'खरा सोना' होने को प्रमाणित करना होगा। तुझे उड़ान भरनी होगी एक आजाद पंछी की तरह जो स्वाधीनता के लम्हों से औरों को भी अवगत करा सके और 'पराधीन सपनेहुँ सुख नाहि' की अनुभूति को साकार कर सके।।।
‌                             लाडो जाता-जाता मैं यहीं कहूँगा कि तेरी आगे की डगर इतनी आसान नहीं है लेकिन फिर भी तुझे रानी लक्ष्मीबाई होने का एहसास और लोगों को करवाना होगा।
‌                         
‌                         तेरी स्नेहिल भावनाओं के साथ ,
‌                                     तेरा पिता

© मीना रोहित ( आयकर अधिकारी , दिल्ली )

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