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एक कवयित्री की प्रेम कथा (समीक्षा)

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विभिन्न विधाओं में हाथ- पैर मारते हुए अनेक मंजिलों को पार करते हुए अंतत: सुरेश सौरभ एक उपन्यासकार के रूप में हम सब पाठकों के सम्मुख उपस्थित हुए हैं, जो इस पाठक वर्ग हेतु ऐसी देन है,जो नारी जीवन के विभिन्न आयामों को अपनी गहराइयों से उकेरते हुए मनो मस्तिष्क को झंकृत करती है।


    एक कवयित्री की प्रेम कथा नाम से ऐसा लगता है मानो बुक स्टॉल की पत्रिकाओं में प्रकाशित कोई कथा होगी, पर जब हम उसके चार पृष्ठ पढ़ने के बाद अपने मन को संयोजित करते हैं , तो जिज्ञासाओं के द्वार खुलते चले जाते हैं। जैसा कि शीर्षक से ही लगता है कि यह एक प्रेम कथा है परन्तु नहीं यह एक नारी के अंतर्मन की उत्थान, प्रस्फुटन, लीनता और निर्वाण का दस्तावेज है। सुमन की कहानी सामान्य परिवार से उठकर मनो भावनाओं को उकेरने के प्रयास और उसके लेखन को मान्यता मिलने से पूर्व की स्वच्छन्दता व उससे मिलने वाले प्रोत्साहन व शोषण एक ओर उसमें लालसा का संचार करती है तो उद्देश्य की मरीचिका का दर्शन भी कराती है। शिक्षा के साथ विद्यालयी व स्थानीय स्तर पर उसकी प्रतिभा का उत्थान शने: शने: उसे आधार प्रदान करने लगता है,और सुमन अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु समर्पण की सीढ़ी के सहारे मंच पर चढ़ती जाती है। मंचो का विस्तार रूप रस व स्वर के साथ ऊंचाइयों को छूता जाता है साथ ही संबंधों में   प्रगाढ़ता व प्रेम भी विस्तार को प्राप्त होता है। यही वह मोड़ है जब व्यक्ति सुरक्षा की स्वीकृति भी चाहता है, वहीं अधिकार की इच्छा भी बलवती होती जाती है  एवं अतिरेक की सीमा तक पहुंच जाती है, और स्वीकारोक्ति न मिलने पर लांछन व आत्म ग्लानि का भी बोध होने लगता है। यही उत्पन्न होता है विक्षोभ और उदासी, यही वह समर्पण  करने ,अधिकार न प्राप्त होने पर विद्रोह की चिंगारियों से घिर जाती है और पूर्ति न होने पर उग्रता का निरूपण भी उपन्यास व नारी को जागृत करता है। प्रेम समर्पण, निकटता व विश्वास की परिणति जीव रूप में पल्लवित होने लगतीं हैं तभी चिंगारियॉ ज्वाला का रूप ले लेतीं हैं। अन्तत:निर्वाण को प्राप्त होतीं हैं।


    उपन्यास के भाव पक्ष के साथ ही भाषा पक्ष भी सुदृढ़ है। अवध क्षेत्र की रचना होने के कारण अवधी का कहीं-कहीं पुट भी मिलता है। शायद ही कोई पृष्ठ हो जहां दो- चार मुहावरे व लोकोक्तियॉ याद न आती हो। रचना विधान जहां कथ्यपरक है वहीं विवेचना व दृष्टान्त भी हैं। उपन्यास का डायरी के भाव में लेखन अलग ही सोपान प्रदान करता है। कभी लगता है पूरा उपन्यास ही डायरी शैली में लिखा जा सकता था। भाई सुरेश सौरभ को हमारी शुभकामनाएं । उनकी कलम से साहित्य के अनेक पुष्प पुष्पित होते रहे यही मेरी आन्तरिक कामना है।


एक कवयित्री की प्रेम कथा ( उपन्यास)-
लेखक- सुरेश सौरभ
प्रकाशक: रवीना प्रकाशन नई दिल्ली ।
मूल्य: २००/
आवरण: पेपर बैक।
समीक्षक- डॉ० राकेश माथुर


पता- माथुर क्लीनिक बस स्टेशन रोड लखीमपुर खीरी पिन -२६२७०१

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