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कुछ बाल कवितायेँ // सुशील शर्मा

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हम बच्चे

हम सभी प्यारे से बच्चे,
नहीं अक्ल के हैं हम कच्चे।
हम में न अभिमान है ,
न मान है सम्मान है।
न जात है न पांत है
ख़ुशी की बरसात है।
न सुख है न दुःख है ,
प्रेम ही प्रमुख है।

जल की रानी
 
मछली जल की रानी है,
ये तो बात पुरानी है। 
लहराती बल खाती चलती,
पानी में ये खूब उछलती।
नदी समंदर में रहती है ,
नीचे से ऊपर बहती है।
कभी झांकती ऊपर आकर,
वापस लौटे नीचे जाकर।
मछुआरे के जाल में फंस कर ,
ये मर जाती तड़फ तड़फ कर।
इसकी अज़ब कहानी है,
मछली जल की रानी है।


मौसम

बाग़ बगीचे सुंदर सुंदर
पेड़ों पर बैठे हैं बंदर। 
कोयल काकी कूक रही है ,
मैना मौसी ढूँक रही है।
खेत में फसलें चहक रहीं हैं
बैग में कलियाँ महक रहीं हैं।
सुंदर सुंदर फूल खिलें हैं ,
कितने अच्छे दोस्त मिलें हैं।

ठंडी 

मौसम कितना ठंडा ठंडा
मुर्गी भूली देना अंडा।
ओस की बूंदें जैसे मोती ,
धूप सुनहली दिन में सोती।
साल ओढ़ दादाजी आये ,
दादी मन मंद मुस्काये।
गर्म पकोड़े तलती मम्मी,
गर्म जलेबी यम्मी यम्मी।
पापा कहते रोज नहाओ,,
कोई इनको तो समझाओ।

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