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समीक्षा // एक कवयित्री की प्रेम कथा : उपन्यास लेखक- सुरेश सौरभ

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एक कवयित्री की प्रेम कथा : उपन्यास
लेखक- सुरेश सौरभ
प्रकाशक : रवीना प्रकाशन नई दिल्ली।
आवरण : पेपरबैक
मूल्य :  २००/
समीक्षक -सत्यप्रकाश "शिक्षक"

विगत 40 वर्षों के अध्यापन-अध्ययन में मैंने तमाम कथा साहित्य का अनुशीलन किया है , किंतु ऐसा उपन्यास प्रथम बार पढ़ने में आया जिसमें समकालीन युवा वर्ग की आत्मानुभूति को  ब्रह्मानुभूति में  तादात्मीकरण करके  लिखा गया हो  'यथा नाम  तथा गुणा" को चरितार्थ करता यह उपन्यास एक कवयित्री की प्रेमकथा को अपने वैचारिक स्पर्श से  पाठकों के विचारों को  उद्वेलित करता हुआ दीख पड़ता है। युवा मन में स्वप्न एवं यथार्थ से बुना ताना-बाना रोचक एवं प्रेरणास्पद है जो युवकों के लिए यह उपन्यास भटकाव से निकाल कर लक्ष्योन्मुख करता है।

मध्यमवर्गीय तथा निम्नवर्गीय पात्रों के साथ चलते-चलते उन्हें अपने साहित्य का किरदार बना लेना सुरेश सौरभ की विशेषता है । दुनिया भर की विसंगतियों में जीते भारतीय सभ्य समाज का चित्रण उपन्यास को सबसे अलग खड़ा कर देता है। जीवन की यादें ,कृत्रिम हंसी ,अकेलेपन की विवशता और स्त्री अस्मिता के अनेक प्रश्न उपन्यास के फलक को विस्तार देते हैं।

यत्र-तत्र- सर्वत्र कृतिकार  ने निजी अनुभूतियों को वाणी दी है। जिसमें कठोर वास्तविकताओं और विडंबनाओ  की दुश्चिंताओं का प्रभावी चित्रण किया गया है । उपन्यास में  कहीं भी  बनावटीपन या लेखन की श्रेष्ठता का दिखावा नहीं है अपितु ठेठ अवधी के कहीं-कहीं प्रचलित शब्दों का प्रयोग करते हुए मुहावरेदार गंगा-जमुनी खड़ी बोली के प्रवाहदार शब्दों के प्रयोग से भाषा-शैली अद्भुत बन पड़ी है जो कृति को लोकप्रिय बनाने में मुख्य भूमिका  निभायेगी । उपन्यास का अंत पारंपरिक प्रेम कथाओं की तरह दु:खांत हुआ है , जो कुछ प्रयास से प्रसादान्त हो सकता था, परंतु कृतिकार ने सहजता,स्वाभाविकता तथा यथार्थता के चलते उपन्यास को चरमोत्कर्ष पर छोड़कर पाठकों को सोचने के लिए विवश किया है ।

मैं ईश्वर से  कामना करता हूं कि सुरेश सौरभ और इसी प्रकार साहित्य साधना में सतत प्रयत्नशील रहे। रवीना प्रकाशन ने इसे रंगीन आकर्षक कवर और बढि़या कागज में छाप कर पाठकों के हाथों में पहुंचा कर बेहद प्रशंसनीय कार्य किया है।

  पता-कीरत नगर  (बीएसएनएल टेलीफोन एक्चेंज के पीछे ) लखीमपुर-खीरी पिन-262701

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