नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

प्रेरणा के स्रोतः दिल बहादुर किरका // शशांक मिश्र भारती

एक पुराना प्रसंग

प्रेरणा के स्रोतः दिल बहादुर किरका

शशांक मिश्र भारती

कितने आश्चर्य की बात है कि हम लोगों में थोड़े से समय के बाद निराशा आ जाती है। अपने रास्ते से हट जाते हैं। कहते हैं हम नहीं करेंगे यह काम ,मुझसे नहीं होगा।हम थक गये , बहुत परेशान हो गये आदि-आदि। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा कहना व करना चाहिए। हमको अभी बहुत कुछ करना है। दूर तक बढ़का जाना है। जो आज तक की पीढ़ी न कर सकी। वह हम सबको करके दिखलाना है। संसार के मानचित्र पर अपने अपनों के भारत को सजाना है।

हम एक ऐसे व्यक्ति के सम्बन्ध में बताने जा रहे हैं, जिसकी आयु 83 वर्ष है। लेकिन आश्चर्य! उसमें हम बच्चों जैसा उत्साह है। वह अपने काम में लगा हुआ है जानते हो उसका काम? उसका काम है पढ़ाई करना जी हां पढ़ाई करना। वह व्यक्ति है काठमाण्डू-नेपाल से 260 किलोमीटर पूर्व में स्थित सोलू जुबना का रहने वाला दिलबहादुर किरका। जोकि इतनी बड़ी उम्र में भी पढ़ाई में लगा हुआ है।

आश्चर्य होगा कि एक तिरासी वर्ष का व्यक्ति पढ़ता होगा। हां यह महाशय हाईस्कूल की पढ़ाई कर रहे हैं जिस आयु में लोग किताब-कापियों को दूर से प्रणाम करते हैं उस उम्र में यह पढ़ रहे हैं और वह भी इतने साहस से, कि पिछले पचास वर्षों से यह हाईस्कूल की परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो रहे हैं। जी हां, पचास साल से। इस साल -2000 की परीक्षा में भी इन्होंने अपना भाग्य आजमाया है। इस बार जहां से इन्होंने परीक्षा दी है वह जन-जागृति सेकण्डरी स्कूल है। इनके साथ परीक्षा देने वाले बच्चों में एक की आयु इनके सबसे छोटे नाती के बराबर है। तुम सभी को यह जालकर आश्चर्य होगा कि इस व्यक्ति के कुल सत्रह नाती-पोते हैं। इस व्यक्ति का सबसे बड़ा बेटा परीक्षा केन्द्र वाले जिले में अरुणोदय सेकेण्डरी स्कूल का प्रधानाध्यापक है।

देखा कितना आश्चर्य! क्या इस व्यक्ति को इस आयु में परीक्षा उत्तीर्ण करने पर नौकरी मिलेगी ? बिल्कुल नहीं। आम सन्तुष्टि की बात है। लगन की बात है। उम्र कोई भी हो जिस कार्य में लगन हो उसे किये बिना छोड़ना नहीं चाहिए। हमें इस व्यक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए। उसकी 83 साल की आयु में भी बच्चों जैसी लगन को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए। भले ही यह प्रकरण प्रसंग पुराना है । आज से अठारह साल पहले सन 2000 का है पर प्रेरक होने के साथ प्रेरणा भी दे रहा है और इससे बच्चों को प्रेरणा अवश्य लेनी चाहिए विशेषकर उनको जो बहुत जल्दी हार मान लेते है या समस्याओं से भागते है।


हिन्दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर 242401 उ0प्र0

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.