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पुस्तक समीक्षा : राजा सोलोमन और शीबा की रानी – सुषमा गुप्ता

राजा सोलोमन

लोककथा संग्रह

सुषमा गुप्ता

प्रभात पेपरबैक्स, दिल्ली

पृष्ठ 150, मूल्य 150 रुपए

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शीबा की रानी मकेडा

लोककथा संग्रह

सुषमा गुप्ता

प्रभात पेपरबैक्स, दिल्ली

पृष्ठ 160, मूल्य 150 रुपए

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सुषमा गुप्ता ने देश-विदेश की हजारों लोककथाओं को संकलित कर उन्हें हिंदी में प्रस्तुत करने का महती कार्य किया है. उनकी सैकड़ों लोककथाएँ रचनाकार.ऑर्ग के पन्नों पर तो यूनिकोड में प्रकाशित हैं ही, लगभग संपूर्ण रचनावली पीडीएफ फ़ॉर्मेट में उनके जाल स्थल http://www.sushmajee.com/ पर उपलब्ध हैं. सुषमा गुप्ता ने लोककथाओं के अलावा भी विविध विधाओं में साहित्य सृजन किया है.

राजा सोलोमन और शीबा की रानी मकेडा भी लोककथा संग्रह की श्रेणी में आते हैं, हालाकि इनका ऐतिहासिक महत्व भी है. राजा सोलोमन इजरायल देश का एक बहुत ही मशहूर राजा था उसकी यह कहानी है. राजा सोलोमन व शीबा की रानी मकेडा के पुत्र के किस्से तो हैं, मगर उनके बीच हुए विवाहादि का विवरण किस्से कहानियों में नहीं मिलता. राजा सोलोमन और शीबा की रानी मकेडा के बारे में संदर्भ कुरान और बाइबिल में भी हैं. इन्हीं किस्सों में से कुछ दिलचस्प कथाओं को बहुत ही दिलचस्प और पठनीय अंदाज में संकलित व अनुवादित किया गया है.

पुस्तक के अंत में आवश्यक संदर्भ भी दिए गए हैं जिससे इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है तथा शोघादि कार्यों के लिए भी प्रयुक्त की जा सकती है.

भाषा सरल है और प्रवाहमय है. पुस्तकों को अध्यायों में बांटा गया है जिससे दिलचस्पी बनी रहती है. एक उदाहरण-

7 – रानी मकेडा का सोलोमन को पहली बार देखना

चौथे दिन सुबह रानी मकेडा ने अपने खेमे के बाहर देखा. रात जब कारवां के लोगों ने खेमे लगाए थे, तब तक अंधेरे की चादर फैल चुकी थी, इसलिए उसको कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था.

पर अब तो उजाला ही उजाला था और वह चारों ओर देख सकती थी. कुछ दूरी पर ही उसको यरूशलम शहर की दीवारें दिखाई दीं.

.....

रानी ने जाडोक से पूछा – “वह कौन है जो सफेद कपड़ों में है, जिसकी त्वचा सूर्य की गरमी से लाल है, जिसके होंठ धनुष की आकृति के हैं, जिसकी आँखें मखमली हैं और जिसके हाथ में अभी भी तलवार है.”

मुख्य पुजारी ने उसके बराबर से नीचे झांककर कहा, “यही तो राजा साहब हैं.”

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पुस्तक न केवल दिलचस्प है, ऐतिहासिक जानकारी से परिपूर्ण भी है. दोनों किताबें अलग होते हुए भी एक दूसरे की पूरक भी हैं. इतिहास और लोककथाओं में दिलचस्पी हो तो इन्हें अवश्य पढ़ें.

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