370010869858007

---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

बाल कहानी - समीर यूसुफ़

 

दोस्ती

चीनू चूहा अपने बिल के आगे उदास बैठा था. चीनू को उदास देखकर उसके दोस्त हैरी खरगोश ने उससे पूछा, “क्या हुआ चीनू ऐसे मुंह लटका कर क्यों बैठे हो भाई?

‘’क्या बताऊं हैरी भाई, कैटी बिल्ली ने हम सब चूहों की नाक में दम करके रखा हुआ है. कल भी हमारे समूह के एक चूहे को कैटी ने अपना शिकार बना लिया” चीनू भरे गले से बोला. “ऐसे तो एक एक करके हम चूहों का अस्तित्व ही मिट जाएगा”.

“ऐसा कुछ नहीं होगा मेरे दोस्त, हम कैटी से बचने का कोई न कोई हल अवश्य निकाल लेंगे. हैरी ने चीनू को समझाते हुए कहा.

“लेकिन हम ऐसा क्या कर सकते हैं, जिससे हमें कैटी से छुटकारा मिल जाए? चीनू ने हैरी से पूछा.

“क्यों न हम कैटी के गले में एक घंटी बांध दें? जिसके बजते ही सारे चूहे सतर्क हो जाएंगे, और उनकी जान बच जाएगी? हैरी ने चीनू को सुझाव दिया.

“कोई फायदा नहीं, उसके गले में घंटी बांधना आसान काम नहीं है, हम पहले भी कोशिश कर चुके हैं, कैटी बहुत चालाक है”. चीनू ने निराशा से कहा.

‘’यह काम तुम मुझ पर छोड़ दो, मेरे पास एक योजना है”. कह कर हैरी ने अपनी योजना चीनू को बताई. योजना सुन चीनू खुशी से उछल पड़ा.

हैरी और चीनू दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे. हैरी बहुत समझदार था. वह हर मुसीबत में चीनू की मदद करता था. दोनों की दोस्ती के दूर दूर तक चर्चे थे.

”एक खरखोश जो न तो हमारी जात का है और न ही हमारी बिरादरी का? हमारी क्या मदद करेगा? चीनू के दादाजी ने हैरी की योजनी सुनकर कहा.

“किसी की मदद करने में जात- बिरादरी नहीं देखी जाती दादाजी, और वैसे भी हैरी मेरा बहुत अच्छा दोस्त है, मुझे उस पर पूरा भरोसा है”. चीनू दादाजी को समझाते हुए बोला. “बस आप अपनी इजाजत दे दीजिए”.

दादाजी की इजाजत मिलते ही चीनू और हैरी अपनी योजना के अनुसार कैटी के घर जा पहुंचे. हैरी ने चीनू को छिप जाने का इशारा किया और कैटी के घर का दरवाजा खटखटाने लगा.

“कैसी हो कैटी मौसी? हैरी कैटी को देख कर बोला. “मैं तो ठीक हूं पर तुम यहां? “अपनी जान प्यारी नहीं है क्या?. कैटी ने आंखे तरेरते हुआ कहा.

“अरे कैटी मौसी अपने मेहमान से डरना कैसा, मैं तो आपको अपने यहां दावत का बुलावा देने आया हूं”. हैरी बात को संभालते हुए बोला.

“दावत का बुलावा? ‘’क्या मतलब? कैटी ने उत्सुकता से पूछा.

“कैटी मौसी हमारे खानदान में एक रिवाज होता है, जब भी हम खरगोशों में नया घर बनता है तो उसका उद्घाटन हमारी मौसी करती है, अब मेरी तो कोई मौसी है नहीं, तो मैं चाहता हूं कि कल मेरे घर का उद्घाटन आप करें. हैरी ने बात बनाते हुए कहा.

कैटी की आंखे चमक उठीं. “वाह मुफ्त की दावत! कैटी ने मन ही मन खुश होते हुए सोचा, और हैरी को हां कर दी.

अगले दिन कैटी सजधज कर हैरी के घर पहुंच गई. कैटी के स्वागत के लिए हैरी ने जोर जोर से बैंड बाजे बजवाने शुरू कर दिए.

हैरी ने दरवाजे पर ही कैटी से कहा, “स्वागत है मौसी, मेरे नए घर में प्रवेश करने से पहले रिवाज के अनुसार आपको तीन मालाएं पहनाई जाएंगी”. कहते हुए हैरी ने फूलों की एक माला कैटी के गले में डाल दी.

इस तरह इज्जत मिलने से कैटी अपने आपको किसी महारानी से कम नहीं समझ रही थी. थोड़ा आगे चलने पर हैरी ने दूसरी माला भी कैटी के गले में डाल दी. तीसरी माला डालने के बाद हैरी ने कैटी से कहा, “अब आप सामने वाले दरवाजे में प्रवेश करिए”. कैटी ने शाही तरीके से दरवाजे में प्रवेश किया.

मगर यह क्या प्रवेश करते ही कैटी ने खुद को सड़क पर अकेला खड़ा पाया. उसने पीछे मुड़ कर देखा तो दरवाजा अंदर से बंद हो चुका था. कैटी ने माथा पीट लिया, वह समझ चुकी थी कि उसे बेवकूफ बनाया गया है.

अब सिर्फ उसे एक ही आवाज सुनाई दे रही, वह थी उसके गले में पड़ी घंटियों की, जिन्हें मालाओं के बीच में बांधा गया था.

अब कैटी जहां भी जाती सारे चूहे पहले ही सतर्क हो जाते. पूरे वन ने हैरी की चतुराई का लोहा मान लिया था.

---

बालकथा 3377533520166358252

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

---प्रायोजक---

---***---

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव