कफ़न : संवेदना के बुझते अलाव की मर्मभरी दास्तान - डॉ. चन्द्रकुमार जैन

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उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए और हिन्दी के महान लेखक बने। उन्होंने हिन्दी को अपना खास मुहावरा और खुलापन...

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए और हिन्दी के महान लेखक बने। उन्होंने हिन्दी को अपना खास मुहावरा और खुलापन दिया। कथा लेखन के क्षेत्र में उन्होंने युगान्तरकारी परिवर्तन किए। आम आदमी को उन्होंने अपनी रचनाओं का विषय बनाया और दमन, शोषण और भ्रष्ट चेहरों की गिरफ्त में पिसती उनकी ज़िन्दगी की समस्याओं पर खुलकर कलम चलाते हुए उन्हें समाज के सही नायकों के पद पर आसीन किया।

प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना लोक से सच्चाई के धरातल पर उतारा। वे साम्प्रदायिकता, भ्रष्टाचार, जमींदारी, कर्जखोरी, गरीबी, उपनिवेशवाद, पूंजीवाद, सामाजिक विषमता, विसंगति और संवेदना के तिरोभाव  पर आजीवन लिखते रहे। वे आम भारतीय जीवन के सहज व सजग रचनाकार थे। प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के युग प्रवर्तक हैं। उन्होंने हिन्दी कहानी में समाज को खोखला करने वाले भ्रष्ट और दोहरे चरित्रों का खुलासा करते हुए ज़मीनी सच्चाई को स्वर देने की एक नई परम्परा शुरू की। आज भी प्रेमचंद के ज़िक्र के बगैर हिन्दी भाषा और  साहित्य की विरासत या भारत के भविष्य का कोई भी विमर्श यदि अधूरा माना जाता है तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है।


प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियां लिखकर राष्ट्र भारती के कोष को समृद्ध किया है। उनकी कहानियों में जगह-जगह पर वंचितों के लिए संवेदना और सोये हुए लोगों के लिए झकझोर कर जगा देने वाली भाषा और विचार का सशक्त रूप देखा जा सकता  है। भाषा को संवेदना और संवेदना को भाषा बना देने वाली कला का अनोखा उदाहरण है मुंशी प्रेमचंद की विश्व प्रसिद्द कहानी कफ़न। हिन्दी में इसे प्रगतिशीलता और नई कहानी की ज़मीन पर बार-बार देखने और समझने-समझाने का दौर चला, वह आज भी निरंतर है। लेकिन, कफ़न कहानी की दर्दबयानी को किसी सांचे में ढालकर देखना आज भी मुमकिन नहीं है। दरअसल ऎसी कहानियाँ अपनी मिसाल आप हुआ करती हैं।


एकबारगी देखें तो कफ़न में कहानीकार ने महज़ तीन दृश्य उपस्थित किये हैं। पहले में घीसू और माधव के आलू खाकर अजगर की तरह पड़ जाने और बुधिया के प्रसव पीड़ा से कराहते रहने का है। दूसरे  में बुधिया की मृत्यु और बाप-बेटे द्वारा कफ़न के लिए पैसे माँग लाने का है। तीसरा दृश्य कफ़न खरीदते हुए 'दैव कृपा'  से मधुशाला में पहुँचने और नशे में मदमस्त होकर डूब जाने का है। कहानी के पहले और तीसरे दृश्य में विरोधी रंगों का प्रयोग कर कहानीकार ने जिस तल्ख़ अंदाज़ में व्यंग्य का सहारा लेकर समाज की विसंगत और दोमुंही व्यवस्था का रेशा-रेशा अनावरण किया है, उससे कफ़न कहानी को बेजोड़ होने का दर्ज़ा स्वाभाविक रूप से मिल गया है।

पहले दृश्य में लेखक ने ठाकुर की बारात का स्मृति-दृश्य उपस्थित किया है। जीवन की एक मात्र लालसा वह भोजन ही है, किन्तु वास्तविक धरातल पर पिता-पुत्र में चोरी के भुने हुए आलुओं पर टूट पड़ने की प्रतिस्पर्धा है। भूख को बेसब्र कर देने वाला वातावरण स्वादिष्ट भोजन के सौभाग्य की लालसा को चरम तक पहुंचा देता है। यही कारण है कि कहानी के अंत में घीसू और माधव मधुशाला पहुंचकर अपने 'अनपेक्षित सौभाग्य' पर खूब खुश होते हैं और बुधिया की तरफ संकेत कर कहते हैं कि मरते-मरते हमारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी लालसा पूरी कर गई। इस तरह कफ़न कहानी का पहला दृश्य ही कहानी के अंत की आधार  बन जाता है।

विडंबना देखिये कि बाप-बेटे दोनों अपनी ही बहू या पत्नी के मानवीय संबंधों को ताक़  पर रखकर ज़बान जल जाने की परवाह न करते हुए भुने हुए आलू खाने की स्पर्धा में जुटे हैं। यहाँ ठाकुर की बारात  के व्यंजनों की तुलना में घीसू और माधव की भूख को मापा जा सकता है। भूख और पचास पूरी के बीच अंतर समाज की विषमता का ही एक रूप है। इस अंतर को दोनों जैसे एक ही दिन में मिटा देने के लिए टूट पड़ते हैं।

घीसू के लिए ठाकुर का भोज परम मुक्ति का मार्ग है। माधव उसकी प्रत्याशा में बेचैन है। यहाँ मानवीय रिश्ते जड़ हो जाते हैं। आलू खाकर पिता-पुत्र पानी पीते हैं और पाँव पेट में डालकर सो जाते हैं। उधर बुधिया कराह रही है। पर दोनों बेखबर जैसे हैं। भूख के आगे उनकी चेतना जड़ हो गई है। कहानी के आरम्भ में मुंशी जी ने जिस बुझे हुए अलाव का उल्लेख किया है, वह वास्तव में मानवीय संबंधों के बुझते जाने का प्रतीक है।

कहानी के प्रारम्भ में  पाठक का आक्रोश घीसू और माधव की बेदर्दी पर हो सकता है, पर लेखक की दूरदृष्टि इस आक्रोश को सामाजिक व्यवस्था की कमजोरियों  की तरफ स्थानांतरित कर देती है। घीसू ने भली भांति जान लिया है कि जब सब कुछ झोंक देने का परिणाम भी कुछ नहीं है तो इतनी मेहनत  करने का क्या फायदा ? कहानी के दूसरे  दृश्य में चरित्र के दुहरे रंगों को उजागर किया गया है। घीसू और माधव को संवेदना का मुखौटा पहनाकर कहानीकार ने गहरा व्यंग्य किया है। जीवन भर यह दिल कठोर बना रहता है किन्तु मृत्यु के समय औपचारिक संवेदना व्यक्त कर वे कर्तव्यों की इति श्री समझ लेते हैं।

तीसरे दृश्य में बाप-बेटे कफ़न खरीदने बाज़ार जाते हैं। कफ़न पसंद नहीं आता और शाम ढल जाती है। दोनों समाज की व्यवस्था को जली-कटी सुनाते हुए दैवी  प्रेरणा  से मधुशाला पहुँच जाते हैं। उधर लोग बुधिया की मिट्टी को उठाने के लिए बांस-वांस की तैयारी करते हैं और उनके निकटतम जो लोग हैं वे इस वक्त शान से पूरियों पर टूटे हुए हैं। यद्यपि इस हालात में भी उन्हें लोक निंदा का ख़याल आता है पर दोनों दार्शनिकों वाले अंदाज़ में अपने मन को समझा लेते हैं। इस तरह चेतना का अलाव पूरी तरह बुझ जाता है। दोनों गाते हैं, नाचते हैं और मदमस्त होकर गिर पड़ते हैं और मानवीय संबंधों की जड़ता को सामाजिक यथार्थ के स्तर  पर उद्घाटित करने वाली इस कहानी का अंत हो जाता है। व्यवस्था की विषम चट्टान पर मानवीय चेतना खुद पथरा जाती है।

कहानी के अंत में यद्यपि  लगता है कि कोई समाधान नहीं मिलता किन्तु प्रेमचंद जी जैसे कथा लेखक समाधान से अधिक सवाल छोड़ जाने में यकीन करते थे शायद, यही कारण है कि  वे और उनके सवाल आज भी प्रासंगिक हैं।  इस तरह कफ़न, कहानी की शक्ति का परिचायक तो बना ही, वह भविष्य की कहानी का संकेत भी बन गया।

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प्राध्यापक एवं शोध निर्देशक

( राष्ट्रपति सम्मानित )

हिंदी विभाग

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय

राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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