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प्यार की मिठास - लघुकथा - नमिता वर्मा

          
              प्यार की मिठास
    
   पति महोदय सुबह-सुबह उठकर ड्राईंग रूम में बैठे हुए थे। उन्हें जोर की प्यास लगी थी और उन्हें पानी की तलब थी। मैं अभी सोई हुई थी। उन्हें मेरे के उठने का इंतजार था। कुछ देर बाद मैं उठी और आंखें मलते हुए ड्राईंग रूम में दाखिल हुई। मुझ पर नज़र पड़ते ही पति ने कहा, ‘‘प्रिये, जरा एक ग्लास ठंडा पानी पिलाना।’’
मैं उनींदी दशा में थी। मैं झल्लाने लगी, ‘‘तुम भी हद करते हो ! खुद से नहीं ले सकते ? मेरा इंतजार करते रहते हो। तुम सब मर्द एक जैसे हो। सुबह होते ही पत्नी को मशीन की तरह काम करते देखना चाहते हो....’’
मेरी इस प्रातःकालीन झिड़की से पति महोदय सकपका गए। मगर चुप रहे। मैं पानी ले आई। पति महोदय ने वह पानी किस मनोदशा के साथ पीया, यह उनके चेहरे से बड़ा साफ दिख रहा था।
अगली सुबह पति फिर उठकर ड्राईंग रूम में बैठे हुए थे। आज वे उदास थे। रोज की तरह मैं उठकर सीधे ड्राईंग रूम में गई। पति को उदास देख मैं समझ गई कि आज भी उन्होंने खुद से पानी नहीं लिया है। मैं किचेन में गई और एक ग्लास पानी लेकर उनके सामने हाजिर हो गईं।
  तभी मैंने देखा, उनके बगल में साईड टेबल पर एक ग्लास पानी पहले से रखा हुआ। मैं चिहुंक पड़ी। मैंने पूछा, ‘‘तुमने खुद से पानी लिया तो फिर पीया क्यों नहीं ?’’
  पति महोदय मुझे और उनके हाथ में लिए पानी को एकटक देखने लगे। बोले, ‘‘मैंने खुद से पानी लिया। मगर पीया नहीं गया।’’
  मैंने पूछा, ‘‘क्यों ?’’
  पति महोदय ने जवाब दिया, ‘‘क्या बताऊं, तुम अपने हाथ से जो पानी देती हो उसकी बात ही कुछ और होती है।’’

                                               -   नमिता वर्मा                                                                           
                                             
                                     पता-
                                              फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,
                                              अल्पना मार्केट के पास,
                                              न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी
                                              पटना-800013 (बिहार)

e-mail address - gyandevas@rediffmail.com

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