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लघुकथा - राजनेता - दीपक दीक्षित

dípak díkhchit


राजनेता


पल्टूरामजी का मंत्रालय में आज पहला दिन था। इससे पहले वह एक समाजसेवी संस्था चलाते थे जो लोगों को शराब, सिगरेट और गुटका आदि छोड़ने के लिए प्रेरित करती थी। इससे धीरे धीरे उन्होंने कई लोगों की जिंदगी बदल डाली और उनकी प्रसिद्धि भी बढ़ती गयी। वह शहर की एक बड़ी हस्ती माने जाने लगे और उनके चाहने वालों ने उन्हें विधायक का चुनाव लड़ने पर मज़बूर कर दिया और उन्हें जिता कर ही दम लिया।

उनकी अपार लोकप्रियता के दम पर उन्हें वित्त मंत्री का पद भी मिल गया। अब लोगों की उम्मीद थी कि राज्य से शराब, सिगरेट और गुटके का पूरी तरह से सफाया हो जायेगा।

मंत्रालय में स्वागत आदि की औपचारिकताओं के बाद विभाग के सचिव ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक प्रेजेंटेशन दिया। बीस मिनट के उस प्रेजेंटेशन से उनके दिमाग में दो बातें बिलकुल साफ़ हो गयीं। एक तो राज्य की वित्तीय स्तिथि काफी बुरी थी और दूसरी यह कि राज्य की आय का लगभग आधा हिस्सा शराब, सिगरेट और गुटके पर लगे राजस्व से आता था।

पल्टूरामजी का दिमाग़ अब तेजी से काम कर रहा था। नशाबंदी का मुद्दा जो उनके मंत्रित्व पद पर पहुंचने की एक सीढ़ी मात्र था अब उसे ठन्डे बस्ते में डालना होगा। अगले चुनाव आने से पहले उन्हें फिर कोई नया मुद्दा लोगों की आस जगाने के लिए खोजना और भुनाना होगा। नशाबंदी तब तक जनता की कमजोर याददाश्त में काफी नीचे दब चुका होगा।

अब ये पांच ल तो उन्हें मलाई खाने और सम्बन्ध बनाने में बिताने थे।

एक समाजसेवी से वे अब एक मंजे हुए नेता बन चुके थे।

तरक्की की यह पायदान उन्हें मुबारक।

दीपक दीक्षित

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लेखक परिचय

रुड़की विश्विद्यालय (अब आई आई टी रुड़की) से इंजीयरिंग की और २२ साल तक भारतीय सेना की ई.ऍम.ई. कोर में कार्य करने के बाद ले. कर्नल के रैंक से रिटायरमेंट लिया . चार निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी कुछ समय के लिए काम किया।

पढने के शौक ने धीरे धीरे लिखने की आदत लगा दी । कुछ रचनायें ‘पराग’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘अमर उजाला’, ‘नवनीत’ आदि पत्रिकाओं में छपी हैं।

भाल्व पब्लिशिंग, भोपाल द्वारा 2016 में "योग मत करो,योगी बनो' नामक पुस्तक तथा एक साँझा संकलन ‘हिंदी की दुनिया,दुनियां में हिंदी’ (मिलिंद प्रकाशन ,हैदराबाद) प्रकाशित हुयी है।

कादम्बिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण सेवा समिति , भोपाल तथा नई लक्ष्य सोशल एवं एन्वायरोमेन्टल सोसाइटी द्वारा वर्ष २०१६ में 'साहित्य सेवा सम्मान' से सम्मानित किया गया।

वर्ष 2009 से ‘मेरे घर आना जिंदगी​’ ​(http://meregharanajindagi.blogspot.in/ ​) ब्लॉग के माध्यम से लेख, कहानी , कविता का प्रकाशन। कई रचनाएँ प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं तथा वेबसाइट (प्रतिलिपि.कॉम, रचनाकार.ऑर्ग आदि) में प्रकाशित हुई हैं।

साहित्य के अनेको संस्थान में सक्रिय सहभागिता है । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई गोष्ठियों में भाग लिया है। अंग्रेजी में भी कुछ पुस्तक और लेख प्रकाशित हुए हैं।

निवास : सिकंदराबाद (तेलंगाना)

सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन

संपर्क​ : coldeepakdixit@gmail.com

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