प्रबंधन में भविष्य की उजली लकीरें डॉ.चन्द्रकुमार जैन

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आपने उस छोटी चिड़िया की कहानी तो सुनी ही होगी, जो खुद को बदसूरत मानते-मानते इस कदर आत्मविश्वासहीन हो गयी कि अपनी बोली भी भूल गयी। एक दिन अचा...


आपने उस छोटी चिड़िया की कहानी तो सुनी ही होगी, जो खुद को बदसूरत मानते-मानते इस कदर आत्मविश्वासहीन हो गयी कि अपनी बोली भी भूल गयी। एक दिन अचानक उसने साफ जल में खुद को देखा, तो महसूस किया कि वह अब छोटी चिड़िया नहीं, बल्कि एक खूबसूरत हंस हो चुकी है। खुद को पहचान कर वह इतनी खुश हुई कि उसके मुँह से उसकी स्वाभाविक बोली निकल पड़ी। और वह सिंह-शावक, जो परिस्थितिवश भेड़ों के बीच पला-बढ़ा और खुद को भेड़ का मेमना ही समझने लगा, उन्हीं की तरह व्यवहार करने लगा ! एक शेर ने जब उसे जबरन पकड़कर नदी के पानी में उसके अपने रूप का दर्शन कराया, तब कहीं जाकर उसके मुँह से मिमियाहट के बजाय दहाड़ निकली। इसलिए,खुद को पहचानिए।  कहीं आप तो अपने को उस चिड़िया की तरह नहीं समझते ? उस सिंह-शावक की तरह अपने असली रूप को भुला तो नहीं बैठे ? अगर हाँ, तो अपने को पहचानने की कोशिश करें। आपके भीतर भी कोई हंस, कोई सिंह छिपा है, जो बाहर आने को बेताब है। इसके लिए आपको अपने जीवन और कार्य के प्रबंधन की कला सीखनी होगी।


प्रबंधन एक ऐसा शब्द है जिसके अनेक अर्थ हैं। प्रबन्धन का लोकप्रिय अर्थ है -उपलब्ध संसाधनों का दक्षतापूर्वक तथा प्रभावपूर्ण तरीके से उपयोग करते हुए लोगों के कार्यों में समन्वय करना ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके। प्रबन्धन के अन्तर्गत नियोजन,संगठन-निर्माण, स्टाफिंग, नेतृत्व करना या निर्देशन करना तथा संगठन अथवा पहल का नियंत्रण करना आदि शामिल हैं। एक कला,विज्ञान और पेशे के रूप में प्रबंधन का महत्त्व बढ़ता जा रहा है।


गौर करें तो प्रबंधन आत्म-विकास की सतत प्रक्रिया है। अपने को व्यवस्थित-प्रबंधित किए बिना आदमी दूसरों को व्यवस्थित-प्रबंधित करने में सफल नहीं हो सकता, चाहे वे दूसरे लोग घर के सदस्य हों या दफ्तर या कारोबार के। इस प्रकार आत्म-विकास ही घर-दफ्तर, दोनों की उन्नति का मूल है। इस लिहाज से देखें तो प्रबंधन का ताल्लुक कंपनी-जगत के लोगों से ही नहीं, मनुष्य मात्र से है। वह इंसान को बेहतर इंसान बनाने की कला है,क्योंकि बेहतर इंसान ही बेहतर कर्मचारी, अधिकारी,प्रबंधक या कारोबारी हो सकता है।


प्रबंधन में पारस्परिक रूप से संबंधित वह कार्य सम्मिलित हैं जिन्हें सभी प्रबंधक करते हैं। प्रबंधक अलग-अलग कार्यों पर भिन्न समय लगाते हैं। संगठन के उच्चस्तर पर बैठे प्रबंधक नियोजन एवं संगठन पर नीचे स्तर के प्रबंधकों की तुलना में अधिक समय लगाते हैं।


कार्य-क्षेत्र
व्यावसायिक प्रबंधकों के लिए मुख्य रूप से पांच कार्य-क्षेत्र होते हैं और छात्र इनमें से किसी क्षेत्र में जाने का प्रयास कर सकता है और उसमें विशेषज्ञता प्राप्त कर सकता है। ये क्षेत्र निम्नलिखित हैं - 1.कार्मिक या मानव संसाधन विकास, 2.वित्त उत्पादन या परिचालन कार्य, 3 विपणन तथा सूचना सेवा, 4.सूचना सेवाएं।


प्रवेश
प्रबंधन में किसी करियर में जाने के मूल रूप में दो मार्ग हैं -सम्पूर्ण-कार्यों/विशेषज्ञता क्षेत्रों में से किसी एक में विशेषज्ञ बनना।•किसी संगठन में एक प्रशिक्षणार्थी के रूप में कार्य प्रारंभ करके प्रबंधन में करियर बना सकते हैं, तथापि इसके लिए कुछ विगत योग्यताएं और अनुभव आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, अधिकांश संगठन योग्यता प्राप्त प्रबंधन स्नातकों को वरीयता देते हैं। इसलिए प्रबंधन व्यवसाय में जाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण होना अनिवार्य है ।


क्या पढ़ना होगा ?
प्रबंधन-पाठ्यक्रम निजी तथा राजकीय प्रबंधन संस्थानों द्वारा मुख्य रूप से अधिस्नातक स्नातकोत्तर डिग्री/डिप्लोमा स्तर पर चलाएं जाते हैं। सामान्यतः 10+2 उत्तीर्ण उम्मीदवार अधिस्नातक प्रबंधन डिग्री (जैसे बी.बी.ए.,बी.बी.एस.,बी.एम.एस.) कर सकते हैं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (एम.बी.ए., पी.जी.डी.बी.ए.) के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना और प्रवेश चयन प्रक्रिया उत्तीर्ण करना एम.बी.ए., पी.जी.डी.एम., प्रबंधकीय अर्थशास्त्र आदि जैसे कार्यक्रमों के लिए पात्र बनाते हैं। विभिन्न संस्थानों में अंकों की निर्धारित प्रतिशतता मामूली रूप में भिन्न हो सकती है, किंतु प्रवेश के लिए कुल न्यूनतम प्रतिशतता सामान्यतः 50% से कम नहीं होती है। स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र भी प्रबंधन पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञता दिलाई जाती है। कार्यरत व्यवसायियों के लिए एक कार्यपालक एम.बी.ए. पाठ्यक्रम भी चलाया जाता है। कुछ सीमित संस्थाएं अंशकालिक प्रबंधन पाठ्यक्रम भी चलाती हैं ।


चयन
अधिकांश प्रबंधन विद्यालय एक मानक चयन पद्धति का अनुसरण करते हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आई.आई.एम.एस) तथा कुछ प्रबंधन संस्थान प्रत्येक वर्ष दिसंबर में सामान्य प्रवेश परीक्षा (कैट) नामक एक लिखित परीक्षा आयोजित करते हैं। अन्य संस्थाएं प्रबंधन अभिरुचि परीक्षा (एम.ए.टी.) जैसी पृथक प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती हैं। बड़े समाचार पत्र इनके विज्ञापन प्रकाशित करते हैं। जिसमें आवेदन पद्धति, परीक्षा के स्थान, तारीख एवं समय का उल्लेख होता है। परीक्षा में मौखिक अभिव्यक्ति एवं समस्या समाधान क्षमताओं एवं व्याख्या ज्ञान जांच शामिल होती है ।


कैट या मैट एक ऐसी अनिवार्य पद्धति है जो उम्मीदवार के व्यक्तित्व एवं ज्ञान का विश्लेषण करती है.प्रश्न-पत्रों का कोई निर्धारित ढांचा नहीं है. प्रश्न-पत्र ऑबजेक्टिव प्रकृति के होते हैं। कैट परीक्षा की तैयारी करने में उम्मीदवारों की सहायता के लिए प्रत्येक वर्ष कैट नामक एक पुस्तक प्रकाशित की जाती है। विभिन्न प्रबंधन संस्थाओं द्वारा ली जाने वाली ऐसी प्रवेश परीक्षाओं के लिए स्थानीय प्रशिक्षण विद्यालय भी छात्रों की तैयारी कराते हैं ।


लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, उम्मीदवार अपनी पसंद के किसी एक या अधिक संस्थाओं को निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं। सामान्य रूप से उनका चयन सामूहिक विचार-विमर्श (जी.डी.) और उसके बाद एक व्यक्तिगत साक्षात्कार (पी.आई.) में उनके निष्पादन के आधार पर किया जाता है अधिस्नातक पाठ्यक्रमों की अवधि 3 वर्ष होती है। तथापि, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की अवधि 1-2 वर्ष होती है ।


संस्थाएँ
एम.बी.ए. डिग्री/डिप्लोमा की भारी मांग होने के कारण देश भर में व्यवसाय विद्यालयों की संख्या बढ़ी है। व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाने वाली कुछ संस्थाएं निम्नलिखित हैं :
• भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद, कलकत्ता, बंगलौर, लखनऊ, इंदौर, तथा कोझीकोड (कालीकट)
• जमनालाल बजाज प्रबंधन अध्ययन विद्यालय, मुम्बई
• जे़वियर्स श्रमिक संबंध संस्थान, जमशेदपुर
• प्रबंधन अध्ययन संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय
• नरसी मोनजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान, मुंबई
• सिम्बोसिस व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, पुणे
• व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल, कोलकाता
• अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली
• आई.आई.एफ.टी., नई दिल्ली
• एम.डी.आई.,गुड़गांव सहित कई अन्य संस्थाएं भी है।


सम्भावनाएँ
उदारीकरण, निजीकरण तथा सार्व-भौमिकरण होने के साथ ही अधिकाधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में आ रही हैं और अनेक भारतीय कंपनियां विदेश में संयुक्त उद्यम के लिए जा रही हैं। इससे योग्य प्रबंधकों को संगठनों के चलाने तथा उनके प्रबंधन के लिए करियर के आकर्षक विकल्प खुलते जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अत्यधिक कुशल व्यवसायियों की आवश्यकता के साथ-साथ प्रबंधन स्नातकों की व्यापक मांग रही है। ऐसे स्नातकों के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में अनेक संभावनाएं विद्यमान हैं।


कौशल एवं प्रतिभा
अधिकांश प्रबंधकों में विशेषज्ञतापूर्ण पृष्ठ-भूमि एवं प्रंबधकीय कौशल दोनों होते हैं। आपको किसी विशेष कार्य जैसे विपणन, परिचालन या विनिर्माण कार्य प्रांरभ करने में विशेषज्ञता प्राप्त करनी होती है। आप किसी भी प्रवेश स्तर के पद से अपने तरीके से काम प्रारंभ करें और सीखने तथा उपलब्धि प्राप्त करने की संभावना प्रदर्शित करें और इस तरह प्रबंध कौशल प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आप प्रबंधकीय रैंकों पर पदोन्नति ले सकते हैं। एक प्रबंधक बनने के लिए आपको तीन क्षेत्रों में अपनी सक्षमता प्रदर्शित करनी चाहिए। किसी विशिष्ट कार्य की व्यवस्था का ज्ञान एवं समझ।व्यक्तियों की समझ तथा व्यक्तियों के साथ प्रभावी रूप में कार्य करने की क्षमता और विभिन्न अंशों एवं पूर्ण के बीच संबंधों पर सोचने तथा देखने की क्षमता।


एक प्रबंधक के रूप में आप अपना अधिकांश कार्य व्यक्तियों के साथ और अपना कार्य व्यक्तियों से कराने पर व्यतीत करें। इससे आपके अंतर-वैयक्तिक कौशल के साथ-साथ सफलता के लिए आवश्यक कौशलों का विकास होगा। आप जैसे-जैसे करियर के मार्ग पर आगे बढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे आप तकनीकी कौशल पर कम और संकल्पनात्मक कौशल पर निर्भर होते चले जाएंगे।
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दिल से
एक अच्छा प्रबंधक सबको साथ लेकर चलता है और देखते ही देखते सबसे अलग किरदार बना लेता है। फिर भी वह कभी नहीं भूलता कि उसके कम को आसान बनाने में अनेक लोगों की भागीदारी है। लिहाज़ा,वह हमेशा शुक्रगुज़ार रहता है कि -

नशेमन पे मेरे एहसान पूरे चमन का है
कोई तिनका कहीं का और कोई तिनका कहीं का है

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प्राध्यापक, हिंदी विभाग
शासकीय दिग्विजय स्वशासी
स्नातकोत्तर महाविद्यालय
राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़ )

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ 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रचनाकार: प्रबंधन में भविष्य की उजली लकीरें डॉ.चन्द्रकुमार जैन
प्रबंधन में भविष्य की उजली लकीरें डॉ.चन्द्रकुमार जैन
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