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प्रबंधन में भविष्य की उजली लकीरें डॉ.चन्द्रकुमार जैन


आपने उस छोटी चिड़िया की कहानी तो सुनी ही होगी, जो खुद को बदसूरत मानते-मानते इस कदर आत्मविश्वासहीन हो गयी कि अपनी बोली भी भूल गयी। एक दिन अचानक उसने साफ जल में खुद को देखा, तो महसूस किया कि वह अब छोटी चिड़िया नहीं, बल्कि एक खूबसूरत हंस हो चुकी है। खुद को पहचान कर वह इतनी खुश हुई कि उसके मुँह से उसकी स्वाभाविक बोली निकल पड़ी। और वह सिंह-शावक, जो परिस्थितिवश भेड़ों के बीच पला-बढ़ा और खुद को भेड़ का मेमना ही समझने लगा, उन्हीं की तरह व्यवहार करने लगा ! एक शेर ने जब उसे जबरन पकड़कर नदी के पानी में उसके अपने रूप का दर्शन कराया, तब कहीं जाकर उसके मुँह से मिमियाहट के बजाय दहाड़ निकली। इसलिए,खुद को पहचानिए।  कहीं आप तो अपने को उस चिड़िया की तरह नहीं समझते ? उस सिंह-शावक की तरह अपने असली रूप को भुला तो नहीं बैठे ? अगर हाँ, तो अपने को पहचानने की कोशिश करें। आपके भीतर भी कोई हंस, कोई सिंह छिपा है, जो बाहर आने को बेताब है। इसके लिए आपको अपने जीवन और कार्य के प्रबंधन की कला सीखनी होगी।


प्रबंधन एक ऐसा शब्द है जिसके अनेक अर्थ हैं। प्रबन्धन का लोकप्रिय अर्थ है -उपलब्ध संसाधनों का दक्षतापूर्वक तथा प्रभावपूर्ण तरीके से उपयोग करते हुए लोगों के कार्यों में समन्वय करना ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके। प्रबन्धन के अन्तर्गत नियोजन,संगठन-निर्माण, स्टाफिंग, नेतृत्व करना या निर्देशन करना तथा संगठन अथवा पहल का नियंत्रण करना आदि शामिल हैं। एक कला,विज्ञान और पेशे के रूप में प्रबंधन का महत्त्व बढ़ता जा रहा है।


गौर करें तो प्रबंधन आत्म-विकास की सतत प्रक्रिया है। अपने को व्यवस्थित-प्रबंधित किए बिना आदमी दूसरों को व्यवस्थित-प्रबंधित करने में सफल नहीं हो सकता, चाहे वे दूसरे लोग घर के सदस्य हों या दफ्तर या कारोबार के। इस प्रकार आत्म-विकास ही घर-दफ्तर, दोनों की उन्नति का मूल है। इस लिहाज से देखें तो प्रबंधन का ताल्लुक कंपनी-जगत के लोगों से ही नहीं, मनुष्य मात्र से है। वह इंसान को बेहतर इंसान बनाने की कला है,क्योंकि बेहतर इंसान ही बेहतर कर्मचारी, अधिकारी,प्रबंधक या कारोबारी हो सकता है।


प्रबंधन में पारस्परिक रूप से संबंधित वह कार्य सम्मिलित हैं जिन्हें सभी प्रबंधक करते हैं। प्रबंधक अलग-अलग कार्यों पर भिन्न समय लगाते हैं। संगठन के उच्चस्तर पर बैठे प्रबंधक नियोजन एवं संगठन पर नीचे स्तर के प्रबंधकों की तुलना में अधिक समय लगाते हैं।


कार्य-क्षेत्र
व्यावसायिक प्रबंधकों के लिए मुख्य रूप से पांच कार्य-क्षेत्र होते हैं और छात्र इनमें से किसी क्षेत्र में जाने का प्रयास कर सकता है और उसमें विशेषज्ञता प्राप्त कर सकता है। ये क्षेत्र निम्नलिखित हैं - 1.कार्मिक या मानव संसाधन विकास, 2.वित्त उत्पादन या परिचालन कार्य, 3 विपणन तथा सूचना सेवा, 4.सूचना सेवाएं।


प्रवेश
प्रबंधन में किसी करियर में जाने के मूल रूप में दो मार्ग हैं -सम्पूर्ण-कार्यों/विशेषज्ञता क्षेत्रों में से किसी एक में विशेषज्ञ बनना।•किसी संगठन में एक प्रशिक्षणार्थी के रूप में कार्य प्रारंभ करके प्रबंधन में करियर बना सकते हैं, तथापि इसके लिए कुछ विगत योग्यताएं और अनुभव आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, अधिकांश संगठन योग्यता प्राप्त प्रबंधन स्नातकों को वरीयता देते हैं। इसलिए प्रबंधन व्यवसाय में जाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण होना अनिवार्य है ।


क्या पढ़ना होगा ?
प्रबंधन-पाठ्यक्रम निजी तथा राजकीय प्रबंधन संस्थानों द्वारा मुख्य रूप से अधिस्नातक स्नातकोत्तर डिग्री/डिप्लोमा स्तर पर चलाएं जाते हैं। सामान्यतः 10+2 उत्तीर्ण उम्मीदवार अधिस्नातक प्रबंधन डिग्री (जैसे बी.बी.ए.,बी.बी.एस.,बी.एम.एस.) कर सकते हैं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (एम.बी.ए., पी.जी.डी.बी.ए.) के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना और प्रवेश चयन प्रक्रिया उत्तीर्ण करना एम.बी.ए., पी.जी.डी.एम., प्रबंधकीय अर्थशास्त्र आदि जैसे कार्यक्रमों के लिए पात्र बनाते हैं। विभिन्न संस्थानों में अंकों की निर्धारित प्रतिशतता मामूली रूप में भिन्न हो सकती है, किंतु प्रवेश के लिए कुल न्यूनतम प्रतिशतता सामान्यतः 50% से कम नहीं होती है। स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र भी प्रबंधन पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञता दिलाई जाती है। कार्यरत व्यवसायियों के लिए एक कार्यपालक एम.बी.ए. पाठ्यक्रम भी चलाया जाता है। कुछ सीमित संस्थाएं अंशकालिक प्रबंधन पाठ्यक्रम भी चलाती हैं ।


चयन
अधिकांश प्रबंधन विद्यालय एक मानक चयन पद्धति का अनुसरण करते हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आई.आई.एम.एस) तथा कुछ प्रबंधन संस्थान प्रत्येक वर्ष दिसंबर में सामान्य प्रवेश परीक्षा (कैट) नामक एक लिखित परीक्षा आयोजित करते हैं। अन्य संस्थाएं प्रबंधन अभिरुचि परीक्षा (एम.ए.टी.) जैसी पृथक प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती हैं। बड़े समाचार पत्र इनके विज्ञापन प्रकाशित करते हैं। जिसमें आवेदन पद्धति, परीक्षा के स्थान, तारीख एवं समय का उल्लेख होता है। परीक्षा में मौखिक अभिव्यक्ति एवं समस्या समाधान क्षमताओं एवं व्याख्या ज्ञान जांच शामिल होती है ।


कैट या मैट एक ऐसी अनिवार्य पद्धति है जो उम्मीदवार के व्यक्तित्व एवं ज्ञान का विश्लेषण करती है.प्रश्न-पत्रों का कोई निर्धारित ढांचा नहीं है. प्रश्न-पत्र ऑबजेक्टिव प्रकृति के होते हैं। कैट परीक्षा की तैयारी करने में उम्मीदवारों की सहायता के लिए प्रत्येक वर्ष कैट नामक एक पुस्तक प्रकाशित की जाती है। विभिन्न प्रबंधन संस्थाओं द्वारा ली जाने वाली ऐसी प्रवेश परीक्षाओं के लिए स्थानीय प्रशिक्षण विद्यालय भी छात्रों की तैयारी कराते हैं ।


लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, उम्मीदवार अपनी पसंद के किसी एक या अधिक संस्थाओं को निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं। सामान्य रूप से उनका चयन सामूहिक विचार-विमर्श (जी.डी.) और उसके बाद एक व्यक्तिगत साक्षात्कार (पी.आई.) में उनके निष्पादन के आधार पर किया जाता है अधिस्नातक पाठ्यक्रमों की अवधि 3 वर्ष होती है। तथापि, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की अवधि 1-2 वर्ष होती है ।


संस्थाएँ
एम.बी.ए. डिग्री/डिप्लोमा की भारी मांग होने के कारण देश भर में व्यवसाय विद्यालयों की संख्या बढ़ी है। व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाने वाली कुछ संस्थाएं निम्नलिखित हैं :
• भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद, कलकत्ता, बंगलौर, लखनऊ, इंदौर, तथा कोझीकोड (कालीकट)
• जमनालाल बजाज प्रबंधन अध्ययन विद्यालय, मुम्बई
• जे़वियर्स श्रमिक संबंध संस्थान, जमशेदपुर
• प्रबंधन अध्ययन संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय
• नरसी मोनजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान, मुंबई
• सिम्बोसिस व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, पुणे
• व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल, कोलकाता
• अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली
• आई.आई.एफ.टी., नई दिल्ली
• एम.डी.आई.,गुड़गांव सहित कई अन्य संस्थाएं भी है।


सम्भावनाएँ
उदारीकरण, निजीकरण तथा सार्व-भौमिकरण होने के साथ ही अधिकाधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में आ रही हैं और अनेक भारतीय कंपनियां विदेश में संयुक्त उद्यम के लिए जा रही हैं। इससे योग्य प्रबंधकों को संगठनों के चलाने तथा उनके प्रबंधन के लिए करियर के आकर्षक विकल्प खुलते जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अत्यधिक कुशल व्यवसायियों की आवश्यकता के साथ-साथ प्रबंधन स्नातकों की व्यापक मांग रही है। ऐसे स्नातकों के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में अनेक संभावनाएं विद्यमान हैं।


कौशल एवं प्रतिभा
अधिकांश प्रबंधकों में विशेषज्ञतापूर्ण पृष्ठ-भूमि एवं प्रंबधकीय कौशल दोनों होते हैं। आपको किसी विशेष कार्य जैसे विपणन, परिचालन या विनिर्माण कार्य प्रांरभ करने में विशेषज्ञता प्राप्त करनी होती है। आप किसी भी प्रवेश स्तर के पद से अपने तरीके से काम प्रारंभ करें और सीखने तथा उपलब्धि प्राप्त करने की संभावना प्रदर्शित करें और इस तरह प्रबंध कौशल प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आप प्रबंधकीय रैंकों पर पदोन्नति ले सकते हैं। एक प्रबंधक बनने के लिए आपको तीन क्षेत्रों में अपनी सक्षमता प्रदर्शित करनी चाहिए। किसी विशिष्ट कार्य की व्यवस्था का ज्ञान एवं समझ।व्यक्तियों की समझ तथा व्यक्तियों के साथ प्रभावी रूप में कार्य करने की क्षमता और विभिन्न अंशों एवं पूर्ण के बीच संबंधों पर सोचने तथा देखने की क्षमता।


एक प्रबंधक के रूप में आप अपना अधिकांश कार्य व्यक्तियों के साथ और अपना कार्य व्यक्तियों से कराने पर व्यतीत करें। इससे आपके अंतर-वैयक्तिक कौशल के साथ-साथ सफलता के लिए आवश्यक कौशलों का विकास होगा। आप जैसे-जैसे करियर के मार्ग पर आगे बढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे आप तकनीकी कौशल पर कम और संकल्पनात्मक कौशल पर निर्भर होते चले जाएंगे।
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दिल से
एक अच्छा प्रबंधक सबको साथ लेकर चलता है और देखते ही देखते सबसे अलग किरदार बना लेता है। फिर भी वह कभी नहीं भूलता कि उसके कम को आसान बनाने में अनेक लोगों की भागीदारी है। लिहाज़ा,वह हमेशा शुक्रगुज़ार रहता है कि -

नशेमन पे मेरे एहसान पूरे चमन का है
कोई तिनका कहीं का और कोई तिनका कहीं का है

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प्राध्यापक, हिंदी विभाग
शासकीय दिग्विजय स्वशासी
स्नातकोत्तर महाविद्यालय
राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़ )

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