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सुनो डॉक्टर - लघु कहानी - सुशील शर्मा

"डॉक्टर साहब मेरे बच्चे को बचा लो रात भर से बुखार में बेसुध है।
"चुन्नो अपने बच्चे को छाती से चिपकाये रो रही थी।
'ठीक है ठीक है देख रहे हैं हम मशीन तो नहीं हैं "डॉक्टर ने झल्ला कर कहा।
डॉक्टर घर जाने को थे दो दिन से लगातार डेरा डाल कर अस्पताल में ही बैठे थे, चारों ओर चमकी बुखार की महामारी फैली थी।

डॉक्टर साहब लोग कह रहे हैं चमकी बुखार है अगर जल्दी दवाई नहीं हुई तो मेरा लल्ला....... कहते कहते चुन्नो की आँखों में से अश्रुधार बह निकली।


नहीं कुछ नहीं होगा सिस्टर इस बच्चे को देखो क्या पोजीशन है ?डॉक्टर ने सिस्टर से कहा।


बच्चा बेसुध अपनी माँ के कंधे पर चिपका था। सिस्टर ने देखा आँखें जीभ,पल्स सब बंद थे।


शायद आखरी साँस चल रही थी।
सर हालत बहुत गंभीर है "सिस्टर ने चिंतित स्वर में कहा।

हरी अप ,जल्दी आई सी यू ले चलो "डॉक्टर के चेहरे पर बच्चे के लिए चिंता के भाव थे।

वार्डबॉय बच्चे को उठा कर आई सी यू की ओर दौड़ा।

"ऑक्सीजन लगाओ "डॉक्टर ने जल्दी से सारी मशीनें चालू कर बच्चे को हिलाने डुलाने की कोशिश की।


मॉनिटर पर पल्स धीरे धीरे सीधी  रेखा में जा रही थी।
कुछ मिनिट बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया।
हताश डॉक्टर बाहर आकर चुन्नो को दिलासा देने लगा।

"

तुम लोग हरामखोरी करते हो बच्चों को मार रहे हो। "चुन्नो का पति अपने छह सात साथियों के साथ डॉक्टर से झगड़ने लगा।


"तुम क्या बात करते हो मैंने पूरी कोशिश की बच्चे को बचाने की लेकिन नहीं बचा पाया ।"डॉक्टर ने प्रतिरोध किया।


"किस काम की डॉक्टरी पढ़ी है तुमने जब एक बच्चे को नहीं बचा सकते।"चुन्नो के पति के एक दादा टाइप के साथी ने कहा।


"घर बैठो पैसा कमाने में लगे हो, तुम्हें गरीब बच्चों की जिंदगी से थोड़े ही कोई मतलब है। "चुन्नो का पति चिल्लाया।


बहुत हंगामे के बाद मामला शांत हुआ।
डॉक्टर को गुस्सा आ रहा था तीन दिन से ठीक से सोया भी नहीं ,पूरे जिले में महामारी फैली है ,अधिकारियों का दबाव ,पब्लिक की अपेक्षाएँ ,अपनी नैतिक जिम्मेवारी ,आखिर कहाँ तक परिस्थितियों से तालमेल निभाये।

तभी डॉक्टर की पत्नी का फ़ोन आया "अनन्या को तेज फीवर है कौन सी दवाई दूँ। "

'सुनो डॉक्टर फणसलकर को दिखा लो मैं नहीं आ सकता मुख्यमंत्री जी आ रहे हैं। "डॉक्टर की आँखों में आँसू थे जिनमें उसे अपनी बेटी का चेहरा झिलमिलाता नजर आ रहा था।

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