वीरेन्द्र खरे ‘अकेला’ (virendra khare ‘Akela’) की 10 ग़ज़लें

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ग़ज़ल-1 छूना नहीं है चाँद को तकने दें दूर से बस इल्तजा यही है हमारी हुज़ूर से साक़ी ने बेहिसाब पिला दी है, क्या करूँ उसकी ख़ता भी कम नहीं...

ग़ज़ल-1

छूना नहीं है चाँद को तकने दें दूर से
बस इल्तजा यही है हमारी हुज़ूर से

साक़ी ने बेहिसाब पिला दी है, क्या करूँ
उसकी ख़ता भी कम नहीं मेरे क़ुसूर से

इतराते माहताब से मैंने भी कह दिया
तुझ पर ये आबो-ताब है सूरज के नूर से

गर हैं नवाब आप तो फ़नकार हम भी हैं
करियेगा हमसे बात अदब से, शऊर से

कुछ बातें काम-धाम की समझा भी दूँ मगर
फ़ुरसत मिले तो दिल को मुहब्बत के टूर से

मैं तिश्नगी फिर अपनी छुपा कर गुज़र गया
तकता ही रह गया मुझे दरिया गुरूर से

तासीर ही 'अकेला' ग़मों की बदल गयी
राहत बहुत मिली है ग़ज़ल के सुरूर से

ग़ज़ल-2

हुआ जादू सा रग-रग में खुशी दौड़ी चली आई
ज़ुबाँ पर नाम क्या आया तुम्हारा ज़िन्दगी आई

किसी ने छत पे चढ़कर भीगी ज़ुल्फों को झटक डाला
घटाओं से झरा अमरित फ़ज़ा में ताज़गी आई

जो देखा जाये तो अपनी जगह दोनों अनाड़ी हैं
न हमको दुश्मनी आई न उसको दोस्ती आई

तो ये तुम हो जो अंदर से निकल आये हो छज्जे पर
वही सोचूँ अमावस में कहाँ से चाँदनी आई

अब इतना भी न इतरा ऐ अँधेरी शब, ज़रा सुन ले
तराना सुब्ह छेड़े है 'अभी आई अभी आई

मैं कैसे मान लूँ मुझसे बिछड़ने का है ग़म तुझको
न माथे पर शिकन तेरे न आँखों में नमी आई

ग़मों के नाज़-नखरे उम्र भर मैंने उठाये हैं
'अकेला' तब कहीं जाकर मुझे ये शायरी आई

ग़ज़ल-3

कुसूर क्या है जो हमसे ख़ताएँ होती हैं
हुज़ूर आपकी क़ातिल अदाएँ होती हैं

बरसना आता नहीं इनको है यही रोना
फ़लक पे रोज़ ही काली घटाएँ होती हैं

गुनाहे-इश्क़ तो आँखों का मशग़ला ठहरा
ये क्या सितम है कि दिल को सज़ाएँ होती हैं

ज़रा सी ओट अगर ले सको तो अच्छा है
दिये की ताक में शातिर हवाएँ होती हैं

हमारे पास भला क्या है और देने को
तुम्हारे वास्ते दिल में दुआएँ होती हैं

तुझे भी सैकड़ों सम्मान मिल गए होते
‘अकेला’ तुझसे कहाँ इल्तिजाएँ होती हैं

ग़ज़ल-4

इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे
टूटा हुआ हूँ पहले से कुछ और तोड़ दे

अब देके ज़ख्म मेरे सितमगर खड़ा है क्यों
मिर्ची भुरक दे ज़ख्म पे नीबू निचोड़ दे

बर्बाद हम हुए कि तेरे मन की हो गई
अब जा के नारियल किसी मन्दिर में फोड़ दे

उकता गया क़फ़स में है सय्याद अब तो दिल
ऐसा न कर कि तू मेरी गर्दन मरोड़ दे

तुझको भी पत्थरों से रहम की उमीद है
नाहक़ पटक पटक के न सर अपना फोड़ दे

क़ातिल ही ऐ ‘अकेला’ अचानक पलट गया
मैंने कहाँ कहा था मुझे ज़िन्दा छोड़ दे

ग़ज़ल- 5
 
चाह छुपती है कहाँ लाख छुपाई जाये
एक भी झूठी क़सम और न खाई जाये
 
मैं भी हाज़िर हूँ हुज़ूर आपकी इस महफिल में
इस तरफ़ को भी नज़र थोड़ी घुमाई जाये
 
मेरा इज़हारे-वफ़ा वो कहीं ठुकरा ही न दें
डर है फोकट में न लाखों की कमाई जाये
 
कोशिशे-गुफ्तगू नाकाम न हो जाये कहीं
हम नहीं चाहते तलवार उठाई जाये
 
दोस्ती करनी नहीं थी तो न करते लेकिन
दोस्ती हो ही गई है तो निभाई जाये
 
हौसला तोड़ना मत कोशिशें जारी रखना
जीतने की भले उम्मीद न पाई जाये
 
राह में छोड़ गया है जो 'अकेला' मुझको
उस फ़रेबी की न फिर याद दिलाई जाये

ग़ज़ल-6

सच्ची अगर लगन है सफल हो ही जायेगी
मतला हुआ है पूरी  ग़ज़ल हो ही जायेगी
 
माना कि पूर्णिमा की खिली चाँदनी है वो
शरमा गई तो नीलकमल हो ही जायेगी
 
यूँ ही बनी रही जो इनायत ये आपकी
ये ज़िन्दगानी रंग महल हो ही जायेगी
 
उम्मीद है रिज़ल्ट तो अच्छा ही आयेगा
सख्ती हो चाहे जितनी नक़ल हो ही जायेगी
 
छिड़ ही गया है बज़्म में जब उसका ज़िक्र तो
लाज़िम है आँख मेरी सजल हो ही जायेगी
 
माना कि प्रॉब्लम है बड़ी फिर भी क्या हुआ
हिम्मत से काम लोगे तो हल हो ही जायेगी
 
घबराइए न, चार क़दम चल के देखिए
बेहद कठिन ये राह सरल हो ही जायेगी
 
माना 'अकेला' आज है रूठी सी ज़िन्दगी
हम पर भी मेहरबान ये कल हो ही जायेगी

ग़ज़ल-7
 
जो जैसा दिख रहा है उसको वैसा मत समझ लेना
खड़ी हो जायेगी वरना बड़ी दिक्कत समझ लेना
 
उसे तो बेसबब ही मुस्कुरा देने की आदत है
सो उसके मुस्कुराने को न तुम चाहत समझ लेना
 
कभी सोचा नहीं था तुम भी धोखेबाज़ निकलोगे
सरल होता नहीं इंसान की फ़ितरत समझ लेना
 
भरोसा ख़ुद पे कितना भी हो लेकिन जंग से पहले
ज़रूरी है ज़रा दुश्मन की भी ताक़त समझ लेना
 
अदावत  की डगर पे आखि़रश चल तो पड़े हैं हम
न होगी वापसी की कोई भी सूरत समझ लेना
 
तुम्हारी सात पुश्तें भी चुका पायें नहीं मुमकिन
लगाते हो मिरे ईमान की क़ीमत, समझ लेना
 
किसी की भी मदद को ‘ऐ अकेला’ दौड़ पड़ते हो
कहीं का भी नहीं छोड़ेगी ये आदत समझ लेना
 
  ग़ज़ल-8
 
कुछ ऐसे ही तुम्हारे बिन ये दिल मेरा तरसता है
खिलौनों के लिए मुफ़लिस का ज्यों बच्चा तरसता है
 
गए वो दिन कि जब ये तिश्नगी फ़रियाद करती थी
बुझाने को हमारी प्यास अब दरिया तरसता है
 
नफ़ा-नुक़सान का झंझट तो होता है तिज़ारत में
मुहब्बत हो तो पीतल के लिये सोना तरसता है
 
न जाने कब तलक होगी मेहरबानी घटाओं की
चमन के वास्ते कितना ये वीराना तरसता है
 
यही अंजाम अक्सर हमने देखा है मुहब्बत का
कहीं राधा तरसती है कहीं कान्हा तरसता है
 
पता कुछ भी नहीं हमको मगर हम सब समझते हैं
किसी बस्ती की खातिर क्यों वो बंजारा तरसता है
 
कि आख़िर ऐ 'अकेला' सब्र भी रक्खे कहाँ तक दिल
बहुत कुछ बोलने को अब तो ये गूंगा तरसता है

ग़ज़ल- 9
 
जिसपे मरते हैं उस पे मरते हैं
क्या बुरा है जो इश्क़ करते हैं
 
दिल की धड़कन सम्हल नहीं पाती
तेरी गलियों  से जब गुज़रते हैं
 
हमको परवाह जान की भी नहीं
आप रूसवाईयों से डरते हैं
 
देते क्यों हैं उड़ान की तालीम
बाद में पर अगर कतरते हैं
 
बात उनसे जो हो तो हो कैसे
वो फ़लक से कहाँ उतरते हैं
 
ज़िन्दगी उनको सौंप दी हमने
जिनसे गेसू नहीं संवरते हैं
 
अब के कैसी बहार आई है
पत्ता पत्ता शजर बिखरते हैं
 
सब्र से काम लें ‘अकेला’ जी
वक़्त के साथ ज़ख़्म भरते हैं

ग़ज़ल-10

वो चलाये जा रहे दिल पर कटारी देखिए
हँस रहे हैं फिर भी हम हिम्मत हमारी देखिए

पायलागी सामने और पीठ पीछे गालियाँ
आजकल के आदमी की होशियारी देखिए

एक हरिजन दर्द अपना क्या बयां कर पाएगा
सामने शुक्ला, दुबे, चौबे, तिवारी देखिए

सारे अपराधों पे है हासिल महारथ आपको
आप संसद के लिए उम्मीदवारी देखिए

मैकशों के साथ उठना-बैठना अच्छा नहीं
मौलवी जी आप अपनी दीनदारी देखिए

कब तलक लटका के रक्खेंगे ये दिल का मामला
सामने वाले की कुछ तो बेक़रारी देखिए

काम हो पाया नहीं तो घूस लौटा दी गई
बेईमानों की ज़रा ईमानदारी देखिए

ऐ ‘अकेला’ इक तमाशा बन गई जम्हूरियत
एक बंदर को नचाते सौ मदारी देखिए

वीरेन्द्र खरे 'अकेला' का परिचय
        
जन्म : 18 अगस्त 1968 को छतरपुर (म.प्र.) के किशनगढ़ ग्राम में
पिता : स्व० श्री पुरूषोत्तम दास खरे
माता : श्रीमती कमला देवी खरे
शिक्षा :एम०ए० (इतिहास), बी०एड०
लेखन विधा : ग़ज़ल, गीत, कविता, व्यंग्य-लेख, कहानी, समीक्षा आलेख ।

प्रकाशित कृतियाँ :
1. शेष बची चौथाई रात 1999 (ग़ज़ल संग्रह), [अयन प्रकाशन, नई दिल्ली]
2. सुबह की दस्तक 2006 (ग़ज़ल-गीत-कविता), [सार्थक एवं अयन प्रकाशन, नई दिल्ली]
3. अंगारों पर शबनम 2012(ग़ज़ल संग्रह) [अयन प्रकाशन, नई दिल्ली]

उपलब्धियाँ :
*वागर्थ, कथादेश,वसुधा सहित विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं रचनाओं का प्रकाशन ।
*लगभग 25 वर्षों से आकाशवाणी छतरपुर से रचनाओं का निरंतर प्रसारण ।
*आकाशवाणी द्वारा गायन हेतु रचनाएँ अनुमोदित ।
*ग़ज़ल-संग्रह 'शेष बची चौथाई रात' पर अभियान जबलपुर द्वारा 'हिन्दी भूषण' अलंकरण ।
*मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं बुंदेलखंड हिंदी साहित्य-संस्कृति मंच सागर [म.प्र.] द्वारा कपूर चंद वैसाखिया 'तहलका ' सम्मान
*अ०भा० साहित्य संगम, उदयपुर द्वारा काव्य कृति ‘सुबह की दस्तक’ पर राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान के अन्तर्गत 'काव्य-कौस्तुभ' सम्मान तथा लायन्स क्लब द्वारा ‘छतरपुर गौरव’ सम्मान ।
सम्प्रति :अध्यापन
सम्पर्क : छत्रसाल नगर के पीछे, पन्ना रोड, छतरपुर (म.प्र.)पिन-471001

संस्तुतियाँ

'अकेला' की ग़ज़लों में भरपूर शेरियत और तग़ज़्जुल है । छोटी बड़ी सभी प्रकार की बहरों मे उन्होंने नए नए प्रयोग किए हैं और वे खूब सफल भी हुए हैं । उनके शेरों में यह ख़ूबी है कि वे ख़ुद-ब-ख़ुद होठों पर आ जाते हैं जैसे कि यह शेर-
इक रूपये की तीन अठन्नी माँगेगी
इस दुनिया से लेना-देना कम रखना
  -पद्मश्री डॉ० गोपाल दास 'नीरज'
 
'अकेला' की ग़ज़ल वो लहर है जो ग़ज़ल के समुन्दर में नई हलचल पैदा करेगी ।
  - डॉ. बशीर बद्र

नाम

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया 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फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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रचनाकार: वीरेन्द्र खरे ‘अकेला’ (virendra khare ‘Akela’) की 10 ग़ज़लें
वीरेन्द्र खरे ‘अकेला’ (virendra khare ‘Akela’) की 10 ग़ज़लें
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