विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका। प्रकाशनार्थ रचनाएँ इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी इस पेज पर [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

कहानी– "सच्ची श्रद्धांजलि" - डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"

साझा करें:

गर्मी का मौसम था, सूरज भी दिन भर अपनी प्रचण्ड किरणें बिखेरता रहता, गर्म-गर्म हवाएँ भी खूब झुलसाने में लगी रहतीं। गर्मी की छुट्टियों में विद्...

गर्मी का मौसम था, सूरज भी दिन भर अपनी प्रचण्ड किरणें बिखेरता रहता, गर्म-गर्म हवाएँ भी खूब झुलसाने में लगी रहतीं। गर्मी की छुट्टियों में विद्यालय भी एक महीने के लिए बन्द हो चुके थे। मेरी बी0ए0 की परीक्षा भी समाप्त हो चुकी थी, बस परीक्षा-परिणाम आना बाकी था। मेरे माता-पिता फॉर्म हाउस में रहते और मैं शहर में रहकर अपनी पढ़ाई करती । कॉलेज में छुट्टी हो जाने पर मैं भी फॉर्म हाउस जाने की तैयारी करने लगी।

           एक दिन सुबह होते ही तैयार होकर मैंने गाड़ी निकाली और ड्राइव करती हुई अपने फॉर्म हाउस के लिए रवाना हो ली। फॉर्म हाउस की दूरी तकरीबन 60 किलोमीटर थी। सबेरे-सबेरे मन्द-मन्द बहती हुई शीतल वायु, हरे-हरे खेत और नहर में तीव्र वेग से बहता हुआ कलकल करता हुआ पानी, ये सब कुछ मेरे कोमल मन को बहुत ही आनन्दित कर रहा था।

           कहीं खेत में मोर नाचते हुए केहाँउ-कहाँउ करते दिख रहे थे, तो कहीं हाथियों का झुण्ड एक साथ प्रसन्नतापूर्वक नहर में पानी पीता हुआ नज़र आ रहा था। गाड़ी की गति धीमी करके मैं इन सारे ख़ूबसूरत नज़ारों का आनन्द लेती हुई अपने फॉर्म हाउस पहुँचने वाली ही थी कि फॉर्म हाउस वाले गाँव के बाहर पेड़ के नीचे बैठे एक युवक को देखा, जो देखने में अत्यन्त उदास और दुखी लग रहा था।

            मैंने गाड़ी रोकी और गाड़ी से उतर कर मैं उस युवक के पास गई। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे वह पूरी तरह से टूट चुका हो और उसके जीवन में अब कुछ भी शेष न हो।

          "तुम कौन हो ? यहाँ क्या कर रहे हो ? इतने मायूस और दुखी होकर क्यों बैठे हो ? वैसे तुम्हारा नाम क्या है ? तुम्हारा घर कहाँ है ? कहाँ के रहने वाले हो ?"

             मेरे द्वारा उसके बारे में इतना सब कुछ बार-बार पूछने पर उस युवक ने बताना शुरू किया–

        "मैडम, मैं अखिल हूँ, इसी कल्याणपुर गाँव का रहने वाला हूँ। मेरे माता-पिता गरीब थे, उनकी इच्छा थी कि मैं खूब पढ़-लिख कर इंजीनियर बनूँ। इसलिए उन्होंने शुरू से ही मुझे बाहर अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया। मेरे पिता के पास चार बीघा खेत था, उसमें वो कड़ी मेहनत करके मेरी फीस भरते और मेरा पूरा खर्चा उठाते। मैं जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे ही मेरी फीस और अन्य खर्चे बढ़ते गए, इसलिए पिता जी साहूकार से भी रुपये उधार ले-लेकर मुझे पढ़ाते जाते और साहूकार को विश्वास दिलाते रहते – "कि जब अखिल इंजीनियर बन कर आएगा, तब सारा का सारा उधार का रुपया चुका देगा" ऐसा कहते-कहते अत्यन्त भाव-विभोर हो जाते, उनकी आँखों से खुशी के आँसू बहने लगते।"

       मैं भी पूरी लगन और कठिन परिश्रम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने लगा।

       कुछ देर तक चुप रहने के बाद अखिल ने फिरसे बोलना शुरू किया–

           एक बार मेरी फीस भरने के लिए मेरे पिता साहूकार के पास रुपये उधार लेने के लिए गए। मेरे माता-पिता पढ़े-लिखे तो थे नहीं, इसका फायदा उठाते हुए खेत और मकान के काग़ज़ों पर उनका अँगूठा लगवाकर खेत और मकान धोखे से अपने नाम करवा लिया, जब मेरे पिता अपना खेत जोतने गए, तब साहूकार के नौकरों ने खेत जोतने को मना कर दिया और कहा–

           "ये तो साहूकार के खेत हैं" , जब मेरे पिता ने जाकर साहूकार से सारी बात बताई , तब साहूकार ने मेरे पिता को फ़टकार लगाते हुए कहा–

         "कैसा तुम्हारा मकान ? और कैसा तुम्हारा खेत ? वो मकान और खेत तो तुमने मेरे नाम कर दिया है। वो सब कुछ मेरा है, तुम्हारा कैसे हो गया ?" ऐसा कहकर साहूकार ने मेरे पिता को वहाँ से भगा दिया।

           मेरे पिता ने घर आकर सारी बात मेरी माँ को बताई। इतना बड़ा धोखा खाकर दोनों बहुत दुखी हुए और अपने आप को कोसने लगे–

        "हम अनपढ़ हैं, अँगूठा छाप हैं, इसीलिए उस साहूकार ने हमारे साथ धोखा करके हमारा सब कुछ हड़प लिया।"

         इसी चिन्ता, दुख और आत्मग्लानि से मेरे माता-पिता अस्वस्थ रहने लगे और एक दिन वे दोनों इस संसार से विदा होकर चले गए, मुझे बिलकुल अकेला छोड़कर। सूचना पाकर जब मैं यहाँ घर आया, तब लोगों ने मुझे सारी बात बताई।

            अखिल का गला बोलते -बोलते रुँध गया, फिर बोला–

         "अब मैं क्या करूँ ? मेरे जीवन का अब तो कोई उद्देश्य ही नहीं रहा। माता-पिता ने भी मेरा साथ छोड़ दिया। मैं पूर्णरूप से असहाय हो गया हूँ, अनाथ हो गया हूँ, अनाथ व्यक्ति भला क्या कर सकता है ?"

          वह रोता हुआ मुझसे कहता जा रहा था और मैं स्तब्ध होकर खड़ी-खड़ी सुनती जा रही थी। मेरी आँखों से भी आँसुओं की अविरल धारा बहे जा रही थी। मेरा मन भी बहुत दुखी हो गया।"

           थोड़ी देर बाद मैँने अपने आप को सम्हाल कर उसे सान्त्वना देते हुए कहा–

         "देखो अखिल ! तुम बिलकुल भी निराश मत हो, तुम्हारे माता-पिता तुम्हें पढ़ा-लिखा कर इंजीनियर बनाना चाहते थे। कितने कष्टों को सहन करके तुम्हें पढ़ाया-लिखाया, लेकिन तुम्हें अपनों कष्टों, अपनी परेशानियों की भनक तक नहीं लगने दी और तुम अपनी हिम्मत हारकर हताश होकर बैठ गए ? तुम्हें तो अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए दृढ़ संकल्प लेकर अत्यधिक उत्साहपूर्वक कड़ी मेहनत करनी चाहिए।"

         अब तुम्हें हिम्मत, साहस, धैर्य और लगन के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। सुख-दुख तो आते-जाते रहते हैं। परिस्थितियाँ भी कभी एक जैसी नहीं रहती, हमेशा बनती-बिगड़ती रहती हैं। बादल अचानक आकर सूरज को ढक लेते हैं, लेकिन हमेशा के लिए ढक नहीं पाते।

        इसलिए तुम्हें आगे बढ़ना होगा, दृढ़ निश्चयी बन कर अपना लक्ष्य हासिल करना होगा, अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करनी होगी, इंजीनियर बनना होगा, यही तुम्हारे माता-पिता के प्रति तुम्हारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

          इतना कहकर मैं अपनी गाड़ी में बैठ गई और उस युवक के विषय में सोंचती हुई धीरे-धीरे गाड़ी ड्राइव करती हुई अपने फॉर्म हाउस पहुँच गई।

         मैं तो प्रकृति के बीच अपने माता-पिता के पास छुट्टियाँ मनाने के लिए खुशी-खुशी गई थी, पर मैं  अत्यन्त थकान का अनुभव कर रही थी और मानसिक शान्ति का तो दूर-दूर तक वास्ता ही न था।

         मैं कुछ देर ही फॉर्म हाउस में रुकी थी, किन्तु मेरा मन अत्यधिक विचलित था। मैं पुनः उसके पास गई और बार-बार उसे सान्त्वना देती रही। मेरा उससे न जाने कैसा आत्मिक लगाव-सा हो गया था। मैं उसे बार-बार समझाती रही। मेरी एक महीने की छुट्टी तो थी ही, वहीं फॉर्म हाउस में अपने माता-पिता के साथ रहने लगी। अब अखिल भी वहाँ आने-जाने लगा और मैं लगातार उसे समझाती रहती, उत्साहित करती रहती।

        छुट्टियाँ खत्म होते ही मैं आगे की पढ़ाई करने के लिए वापस शहर आ गई, लेकिन उसका चेहरा मेरी नज़रों के सामने से हट ही नहीं पाता और हर क्षण मैं उसी के बारे में सोंचती रहती।

           कुछ दिनों के बाद ही मैं अपने माता-पिता से मिलने फॉर्म हाउस जाने के लिए निकली।

             गाड़ी ड्राइव करते हुए मैं अपने फॉर्म हाउस के पास पहुँची ही थी कि तभी मैंने एक बहुत बड़ा हॉल देखा, जिसकी सारी खिड़कियाँ और दरवाजे खुले हुए थे। मुझे यह देखकर काफी आश्चर्य हुआ और साथ ही तमाम सवालों को लेकर मेरे मन में काफी उत्सुकता भी जाग उठी। अपनी उत्सुकता को शान्त करने के लिए मैंने उस हॉल के पास जाकर अपनी गाड़ी रोक दी। गाड़ी से उतरते ही मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही न रहा। मैंने देखा कि गाँव के तमाम बच्चे और कई बुज़ुर्ग महिला-पुरुष कुर्सियों पर बैठे पढ़ाई कर रहे थे और उन्हें पढ़ाने वाला शिक्षक था-वही युवक अखिल।

          अखिल अब पहले वाला हताश, निराश युवक नहीं था। अब उसके चेहरे पर अनोखी चमक और जोश से भरा उत्साह था, सन्तोष था, धैर्य था, अपूर्व खुशहाली थी।

           अखिल मुझे देखते ही अत्यन्त खुश होकर हॉल के बाहर आकर मुझे धन्यवाद देकर कहने लगा–

          "मैडम मैं इंजीनियर बन गया। मेरी पोस्टिंग इसी गाँव से सटे हुए शहर फूलपुर में हुई है। मैंने ये हॉल गाँव के बच्चों और बुज़ुर्गों को पढ़ाने के लिए बनवाया है। नौकरी करने के बाद जब खाली समय मेरे पास होता है, तब मैं रोज़ इन सबको यहाँ पढ़ाता हूँ, सिर्फ यह सोंचकर कि कोई अनपढ़ न रहे।

             मेरे माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं थे, इसीलिए साहूकार ने उनके मकान और खेत के काग़ज़ों पर धोखे से अँगूठा लगवा लिया। यदि मेरे माता-पिता भी पढ़े-लिखे होते, तो कभी भी कोई उन्हें धोखा न दे पाता और न ही मुझे अनाथ होना पड़ता।

         अखिल बार-बार कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कह रहा था–

          "मैडम आपने तो मुझे नया जीवन दिया है। आपने ही मुझमें हिम्मत, साहस, धैर्य और लगन के साथ कड़ी मेहनत करना सिखाया है। मेरे अन्दर आपने ही नई ऊर्जा का संचार किया, जिसके कारण मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाया हूँ और अपने माता-पिता की इच्छा को पूरा कर पाया हूँ और यही मेरी अपने माता-पिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।"

          अखिल अबाध गति से बोलता चला जा रहा था, उसकी बातों में उसकी अथाह खुशी झलक रही थी। मैं भी उसके चेहरे और उसकी आँखों की चमक, विश्वास, लगन, परिश्रम, धैर्य, और दृढ़ आत्मविश्वास को देखकर उसकी तरफ स्वतः ही खिंचती चली जा रही थी, जिससे मेरा आत्मिक लगाव अत्यधिक बढ़ता ही चला जा रहा था। वह भी बहुत खुश था और उसे अत्यन्त खुश देखकर मैं भी बहुत खुश थी।

             उसकी प्रत्येक बात आज भी मुझे अद्वितीय अलौकिक आनन्द की प्राप्ति कराती है।

--


        कहानीकार

डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"

114, महराज-नगर

लखीमपुर-खीरी (उ0प्र0)

सम्पर्क सूत्र-9919168464

कॉपीराइट–लेखिका डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4099,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3065,कहानी,2276,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,112,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1271,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,340,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2014,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,714,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,803,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,92,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,212,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कहानी– "सच्ची श्रद्धांजलि" - डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"
कहानी– "सच्ची श्रद्धांजलि" - डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"
https://3.bp.blogspot.com/-iGwwnlrbRaA/XSW2Ry7QS7I/AAAAAAABPlQ/wVOe-ZTyHjUwUMstoR1CttOToyJB9DAxQCK4BGAYYCw/s320/IMG_20190710_113537-779687.jpg
https://3.bp.blogspot.com/-iGwwnlrbRaA/XSW2Ry7QS7I/AAAAAAABPlQ/wVOe-ZTyHjUwUMstoR1CttOToyJB9DAxQCK4BGAYYCw/s72-c/IMG_20190710_113537-779687.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/07/0_22.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/07/0_22.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ