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ममता - कविताएँ - विनोद सिल्ला

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

1.
प्‍यार

प्‍यार शब्द भले ही
छोटा हो
लेकिन इसका अर्थ
बहुत बड़ा है
बहुत गहरा है
शायद आशमां से भी बड़ा
शायद सागर से भी गहरा
परन्तु तह तक
जाता है कौन?

-विनोद सिल्‍ला©

2.
पीड़ा

मोहब्बत होती है
दिल को द्रवित
करने वाली पीड़ा
जिसे न तो
ढंग से कहा जाता
और न ही
ढंग से सुना जाता
मात्र दफन किया जाता है
दिल के तहखाने में

-विनोद सिल्‍ला©

3.
अथाह प्रेम

मेरे घर के आगे
बैठा रहता है
एक लाल कुत्ता
जो रोटी के
एक टुकड़े के बदले
लुटाता है हम पर
अथाह प्रेम
इस स्वार्थ के युग में

-विनोद सिल्‍ला©

4.
मैं क्‍या करता

उसकी दोस्ती से
साजिशों की
बू आ रही थी
उससे
पीछा न छुड़ाता तो
क्‍या करता
भले ही
वह आज मुझे
बेवफा कहे

-विनोद सिल्‍ला©

5.
सर्दी का सुस्‍वागतम्‌

सर्दी ने दी दस्तक
ठंडी चली हवा
लगी सुहावनी
करा दिया अहसास कार्तिक मास
गर्मी ने कहा अलविदा
बैर-सी लगने वाली
सूर्य की किरणों ने
बढाया हाथ मित्रता का
मैंने सर्दी से कहा
सुस्‍वागतम्

-विनोद सिल्‍ला©

6.
स्‍नेह

स्‍नेह का होना
कितना है सुखद
स्‍नेह है कुदरती सौगात
नहीं हो सकती
इसमें मिलावट
होता है ये विशुद्ध
हो सकता है स्‍नेह
कहीं भी, किसी से भी
यह होता है निस्‍वार्थ
स्वार्थ में स्‍नेह नहीं, स्‍नेह का स्‍वांग होगा

-विनोद सिल्‍ला©

7.
उसकी मेहनत

वो सुबह मुंह अंधेरे
पूरे परिवार के पहले
उठ जाती है
संभालनी होती है
घर-गृहस्थी
निभानी होती हैं जिम्‍मेदारी
सोती भी है सबसे आखिर में
लगाता हूँ जब हिसाब
उसकी मेहनत का तो
खुद को निठल्‍ला पाता हूँ

-विनोद सिल्‍ला©

8.
साथ ले जाती है

वो
चली जाती है मायके
अपने साथ
कुछ जोड़ी
कपडे़ ही नहीं ले जाती
साथ में
ले जाती है
घर की रौनक भी

-विनोद सिल्‍ला©

9.
घर

वो है घर में
तो घर
घर है
उसके बिना
रह जाता है घर
मकान बनकर
मात्र दीवार-छत
खिड़की-दरवाजों से
घर नहीं बनते

-विनोद सिल्‍ला©

10.
ममता

सूर्य
इस शीतकाल में
बिखेर रहा है ममता
मां की तरह
यह तब तक रहेगा बिखेरता
जब तक धुंध
दुलहन बनकर
नहीं आ जाती
इस ममता से
वंचित करने

-विनोद सिल्‍ला©

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