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अस्पताल में ताले - लघु कथा - सुशील शर्मा

" मैं ये परचा लिख देता हूँ आप भोपाल में डॉ मुखर्जी को दिखा दीजिये। "डॉ
चौधरी ने अशोक से कहा।

"डॉ साहब कोई गंभीर बात तो नहीं है। "अशोक की पत्नी ने चिंतित स्वर में कहा।

"देखिये ecg में तो कुछ आया नहीं एंजियोग्राफी से ही पता चलेगा आखिर बात क्या है ?"डॉ चौधरी ने बड़े गंभीर स्वर में कहा।

"हाँ उन्हें ये जरूर बता देना की मैंने तुम्हें भेजा है कुछ कंसेशन मिल जायेगा।" 'डॉ चौधरी ने परचा लिखते हुए कहा।

चिंतित अशोक अपनी पत्नी के साथ दूसरे दिन डॉ मुखर्जी के विशाल हृदय अस्पताल में दाखिल हुआ। काउंटर पर एक हज़ार फीस जमा करके 20 नंबर का टोकन मिला दोनों चुपचाप डॉ मुखर्जी के कक्ष के सामने चिंतित अवस्था में बैठ गए।
दो घंटे बाद चपरासी ने नाम पुकारा और अशोक पत्नी के साथ अंदर दाखिल हुए।

प्रौढ़ अवस्था के डॉ मुखर्जी उन्हें देख कर मुस्कुराए 'बैठिये ',कहिये क्या समस्या है।"

जी वो मुझे सीने में दर्द होता है "अशोक बहुत दबी आवाज़ में बोला।

"कोई बात नहीं चेक आकर लेते हैं क्या स्थिति है। "डॉ मुखर्जी ने बड़ी सहजता से उत्तर दिया।

पूरी तरह से चेक-अप के बाद डॉ मुखर्जी ने कहा "ECG में तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है एंजिओग्राफी से कुछ पता चले। "

"लेकिन डॉ साहब कितना खर्च आएगा ? हमें डॉ चौधरी ने भेजा है आपके पास।
"अशोक की पत्नी ने चिंतातुर स्वर में पूछा।

"अरे वो तो हमारे अच्छे मित्र हैं खर्च तो बहुत है लेकिन अब डॉ चौधरी का लिहाज़ तो करना पड़ेगा इस हिसाब से यही कोई पचास हज़ार के आसपास खर्च  आएगा।
"डॉ मुखर्जी ने प्रश्न वाचक दृष्टि से दोनों को देखा।

"लेकिन डॉ साहब हम लोग मजदूर हैं इतना पैसा नहीं है हमारे पास कोई सस्ता टेस्ट नहीं है जिससे पता चल जाये "अशोक की पत्नी के स्वर में निराशा थी।

डॉ मुखर्जी ने बुरा मुँह बनाया और मुस्कुरा कर बोले "कोई बात नहीं मैं कुछ कैप्सूल और टेबलेट्स लिख रहा हूँ वो ले लेना फिर ईश्वर की इच्छा है।
"

डॉ मुखर्जी ने दूसरे कमरे में जाकर डॉ चौधरी को फोन लगाया "यार चौधरी कम से कम पेशेंट की माली हालत देख कर रिफर क्या करो, लगता है तुम अस्पताल में ताले लगवा दोगे। "

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