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दावत (लघुकथा) - देवी नागरानी

(देवी नागरानी के लघुकथा संग्रह - और गंगा बहती रही से लघुकथाएँ)


९. दावत (लघुकथा)

"नमस्कार जी" फोन का रिसीवर उठाते ही आवाज़ सुनी।

"नमस्कार अंकुर जी, कैसे हैं आप?" मैंने रवायती तौर पर पूछ लिया.

"एक निवेदन था आपसे मैडम, अगले रविवार हमारी सालियाना काव्य गोष्टी है और आप की उसमें भागीदारी दर्ज है। पूरे चार बजे पहुँच जाना"

"धन्यवाद अंकुर जी, मैं समय पर आ जाऊँगी"

"मैडम एक निवेदन और था आपसे, वो अगले साल आप जो कैमेरा लाई थीं वो ज़रूर ले आइयेगा। ग्रूप फोटो ख़ीचने के लिये."

"धन्यवाद अंकुर जी, उसे भी न्यौता देकर बुलाने के लिये."

फ़ोन रखते ही अनायास हंसी के फुव्वारे फूट पड़े. सवाल उठा "मुझे बुलाया है या मेरी कैमेरा को?

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