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आपको क्या चाहिये (लघुकथा) - देवी नागरानी

(देवी नागरानी के लघुकथा संग्रह - और गंगा बहती रही से लघुकथाएँ)


7. आपको क्या चाहिये (लघुकथा)

घर की चौखट से बाहर पड़ते ही जैसे सड़क पर पाँव रखा, सामने से आती हुई जानी पहचानी महिला मिली जो संवाद का सहारा लेकर मेरे साथ-साथ राह पर चलती रही. मेरे साथ चलते हुए मेरे मेहमान प्रोफेसर दीक्षित जी, मर्यादा का दुशाला ओढ़े हम दोनों के पीछे-पीछे तन्मयता से चलते रहे.

वह महिला बार-बार पीछे मुड़कर देखती रही और फिर एक जगह अचानक रूककर पीछे मुड़ी और उस अपरिचित प्रोफेसर की ओर देखते हुए बोली ''आपको क्या चाहिये ? क्यों हमारा पीछा कर रहे हैं आप? ''

मैं हक्की-बक्की विस्मयता के महाजाल में फंसी रही. यकायक मैंने उस महिला को संबोधित करते हुए कहा । ''ये मेरे साथ हैं। ''

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