स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए प्राणघातक ही नहीं अपितु जीवन्त मृत्यु - डॉ. शारदा मेहता

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स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए प्राणघातक ही नहीं अपितु जीवन्त मृत्यु विज्ञान के अनेक चमत्कारपूर्ण आविष्कार प्रतिदिन होते रहते हैं। स्मार्ट फ...

स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए

प्राणघातक ही नहीं अपितु जीवन्त मृत्यु

विज्ञान के अनेक चमत्कारपूर्ण आविष्कार प्रतिदिन होते रहते हैं। स्मार्ट फोन भी उनमें से एक ऐसा ही आविष्कार है। वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व के ताजा तरीन समाचार पल भर में एक कोने से दूसरे कोने तक पहॅुच जाते हैं। अनेक घटनाओं को तो हम अपने टी.वी. स्क्रीन पर जीवन्त होते हुए ही देख लेते हैं। वास्तव में यह एक अद्वितीय चमत्कार ही है। जरा सोचिए हमारी पीढ़ी पूर्व के व्यक्ति आज तक जीवित होते तो दैनिक जीवन में आये परिवर्तन को देखकर उनकी मन:स्थिति क्या होती? शायद वे किंकर्तव्यविमूढ़़ होकर दांतों तले उँगली दबा लेते।

आज प्रत्येक घर में हर सदस्य के पास स्मार्ट फोन है। घर के वरिष्ठ सदस्य अपने आवश्यक कार्य के लिए इनका उपयोग करते ही हैं, यह तो उचित है पर शिशु जो अपनी जननी की गोद में है वे भी स्मार्ट फोन को देखकर रोना बंद कर हँसने का उपक्रम करने लगते हैं। माताएँ भी अपने ममता भरे हाथों से उन्हें स्मार्ट फोन दे देती हैं मानो कोई खिलौना है।

वर्तमान में बाजार की हर वस्तु स्मार्ट फोन के माध्यम से ऑनलाइन क्रय की जाती है। न पर्स में पैसे रखने की झंझट, न घर से थैला ले जाने का कार्य। ऑनलाइन पेमेन्ट करो और मनचाही वस्तु आपके द्वार पर। आज से पाँच-दस वर्ष पूर्व हमें बाजार जाते समय साथ में नोटों की गड्डी लेना, खुल्ले पैसे का भी ध्यान रखना, जेब कतरों से सावधान रहना, थैले ले जाना, सारा सामान उठाना, टेम्पो टेक्सी या सीटी बस की प्रतीक्षा करना, इसमें अच्छी खासी कसरत हो जाती थी। चार पहिया वाहन तो सभी के पास था नहीं। पैदल चलना और हाँफते हुए घर आना यही जीवन था।

अध्ययन करने वाले बच्चे तो अपना अधिकांश गृह कार्य स्मार्ट फोन के माध्यम से ही करते हैं, वो इसका उपयोग खेल के लिए करते हैं। अभी कुछ समय पूर्व 'ब्लू व्हेल गेम के कारण कई बालक अपना जीवन समाप्त कर चुके हैं। स्मार्ट फोन के माध्यम से बच्चे वे सब जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जिन्हें इस उम्र में अभी नहीं जानना चाहिये। इस कारण समाज में चारित्रिक पतन होता जा रहा है। नर्सरी तथा प्रायमरी कक्षा में पढ़ने वाले बालक भी इससे अछूते नहीं हैं। गुरुग्राम में एक नन्हें बालक की हत्या टायलेट में कर दी गई। आये दिन अबोध बालक-बालिकाएँ जिनमें कुछ तो एक-दो वर्ष की थी के साथ गलत कार्य किया गया। ये घटनाएँ सभ्य समाज को शर्मसार करने के लिए पर्याप्त है।

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हमारी गरिमामय संस्कृति कलंकित हो रही है। हमारे समाज के प्रबुद्धवर्ग आगे आएं और इस नई स्मार्ट फोन पीढ़ी को पतन की और जाने से बचाएँ। माता-पिता को अपने लाड़ले-लाड़लियों के स्मार्ट फोन-ज्ञान पर गौरवान्वित नहीं होना चाहिए। उनका यह ज्ञान उन्हें पतन की ओर धकेल सकता है। हायस्कूल तथा इससे बड़ी कक्षाओं में स्मार्ट फोन विद्यार्थियों के लिए अध्ययन में सहायक हो सकता है किंतु माध्यमिक स्तर तक के बच्चे मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें तो इस डिवाइस से दूर ही रखना चाहिए। स्मार्ट फोन पर समय व्यतीत करने के बजाय यदि वे खेल के मैदान में शारीरिक खेल खेलेंगे तो वे तंदुरुस्त रहेंगे। उनका मानसिक व शारीरिक विकास भी होगा। खेल भावना का विकास होने से वे सक्षमतापूर्वक किसी समस्या का समाधान कर पायेंगे। तैराकी, संगीत, मलखंभ, कबड्डी, फुटबाल, क्रिकेट आदि खेलों की ओर पर्याप्त रुझान होने पर बालक स्वयं ही गजेट से दूरी बनाये रखेगा तथा उसका सीमित उपयोग करेगा। योग कक्षाओं में जाना, वहाँ योग सीखने से उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास होगा। वे स्वस्थ रहेंगे। आने वाली पीढ़ी को भी अच्छा संदेश देंगे। भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी वहाँ के निवासी योग शिक्षा से प्रभावित हो रहे हैं। वे उत्तम स्वास्थ्य के लिए इसे उचित मानते हैं।

स्मार्ट फोन ने बालकों की दिनचर्या को बिगाड़ दिया है। देर रात तक गजेट पर आँखें गड़ाए सीरियल, कार्टून तथा फिल्म देखते रहना फिर प्रात: देर से सोना, जिससे उनकी पाचन क्रिया प्रभावित होती है। अँाखों पर मोटा चश्मा लग जाता है। सम्पूर्ण शारीरिक क्रियाएँ अस्त-व्यस्त हो जाती हैं। देर रात तक जागरण करने के कारण कई बालक विद्यालयों में डेस्क पर सिर रखकर सोते हुए देखे जा सकते हैं। यदि यही बच्चे प्रात: जल्दी उठे, सैर पर जावे, दौड़ें, स्नान करें तो जीवन में सफलता मिलती जावेगी। बच्चे यदि ग्रीष्मावकाश में अपने गृह के सदस्यों को उनके कार्य में सहयोग करें। माँ को रसोई घर में मदद कर नाश्ता आदि बनाना सीखें। ये कार्य भविष्य में आपको काम आवेगा। बेस्ट आउट आफ वेस्ट बनाकर अपनी सुप्त प्रतिभा को जाग्रत करें।

गेजेट के लुभावने विज्ञापनों से बच्चे-बड़े सभी इतने प्रभावित होते हैं वे उन्हीं वस्तुओं को घर में लाना पसंद करते हैं। टूथपेस्ट, ब्रश, तेल, मसाले, शेम्पू, पाउडर, साबुन, बिस्किट, चाय, कॉस्मेटिक, जूते, चप्पल, कपड़े आदि आदि सभी कुछ विज्ञापनों के आधार पर ही खरीदा जाता है। नाश्ता तथा भोजन की बात करे तो ऑनलाइन आर्डर कर घर बैठे बुलवाया जा सकता है। पिछले पाँच-छ: वर्षों में हम जब भी किसी वैवाहिक कार्यक्रम पारिवारिक समारोह, सामाजिक कार्यक्रम यहाँ तक की धार्मिक आयोजन में उपस्थित होतेे हैं तो औपचारिक चर्चा के पश्चात् उपहार देकर लगभग सभी आगन्तुक अपने-अपने स्मार्ट फोन निकाल कर अपने आपको व्यस्त कर लेते हैं। बतलाइयें इसे हम अपनी संस्कृति की कौन सी अवस्था कहेंगे। एक समय था जब आगन्तुक अतिथि परस्पर चर्चा करते थे। सुख-दु:ख पूछते थे। हँसी ठिठोली होती थी। अब सब लुप्त प्राय: है।

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''१९ मार्च २०१९ के दैनिक ''पत्रिका समाचार पत्र में मैंने समाचार पढ़ा कि दिमाग शांत रखने के लिए लोग कर रहे हैं, ''इन्टरनेट उपवास। इनमें ७० युवा वर्ग सम्मिलित है। इनमें इरान, इराक तथा ब्राजील के भी चालीस व्यक्ति सम्मिलित हैं। जसपुर के समीप गलता पहाड़ियों के बीच धम्मस्थली विपासना मेडिटेशन सेंटर है। यहाँ डॉक्टर से लेकर ब्यूरोके्रट्स दस दिन का कोर्स कर रहे हैं। वे सभी मौन रहते हैं। मोबाइल, इन्टरनेट, परिजन तथा रिश्तेदारों से दूर रहकर ध्यान करते हैं। प्रात: चार बजे उठना, नौ बजे सोना होता है। यह कोर्स नि:शुल्क है। सभी डिवाइस से दूर रहना होता है। खाने-पीने की व्यवस्था सेंटर करता है। केवल व्यक्ति को अपने कपड़े लेकर वहाँ जाना है। एक बार में तीन सौ लोगों की क्षमता वाला एक सेंटर होता है। यह एक अतुल्य प्रयास है। इससे मानसिक शांति मिलती है।

कई बार नेट पर जिन सूचना को स्थान दिया जाता है, वे भ्रामक भी होती है। किशोर वय बालक पब जी, ब्लू व्हेल आदि गेम के इतने आदि हो जाते हैं कि यदि उन्हें स्मार्ट फोन न मिले तो वे आत्महत्या कर लेते हैं या हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। अभी ग्रेडर नोयडा से समाचार है कि एक किशोर ने अपनी माँ और बहन की हत्या कर दी क्योंकि उन्होंने उसके हाथ से स्मार्ट फोन छीन लिया था।

बच्चों को महानगरों में निवास स्थान से काफी दूर विद्यालय जाना होता है। किसी आवश्यक कार्य से उन्हें घर से संपर्क करना होता है। ऐसे समय यदि उनके पास छोटा मोबाइल फोन हो, जिनमें कुछ आवश्यक नम्बरों के द्वारा घर के सदस्यों से बात कर उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत करा सके तो उचित होगा। स्मार्ट फोन का उपयोग यदि करना ही हो घर के किसी बड़े व्यक्ति के सम्मुख उनके निर्देशन में करे, ताकि अध्ययन सम्बन्धी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लेवें। अकेले में स्मार्ट फोन का उपयोग बालक के स्वर्णिम भविष्य में घातक सिद्ध होगा।

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डॉ. शारदा मेहता

सीनि. एमआईजी-१०३, व्यास नगर,

ऋषिनगर विस्तार, उज्जैन (म.प्र.)

Email : drnarendrakmehta@gmail.com

पिनकोड- ४५६ ०१०

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए प्राणघातक ही नहीं अपितु जीवन्त मृत्यु - डॉ. शारदा मेहता
स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए प्राणघातक ही नहीं अपितु जीवन्त मृत्यु - डॉ. शारदा मेहता
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