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नाचे मन मोरा - खेमकरण 'सोमन' की सात बाल कविताएँ

खेमकरण 'सोमन' की सात बाल कविताएँ

1.

नाचे मन मोरा


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दही में कटोरा है या
कटोरा में दही,
एक कटोरा दही दूँगा
जो बोलेगा सही।

चुन्नू बोला-दही से
भरा हुआ है मटका,
इसका उत्तर यूँ हीं बस
दिमाग में खटका।

बस उसी मटके में
रखा है कटोरा,
इसी बात पे सच कहूँ
नाचे मन मोरा।

मैंने कहा-नाच-नाच
उत्तर है सही,
और ये ले, खा तू
एक कटोरा दही।

2.

चिड़िया उड़े आकाश में


--
झुल्लू कविता लिखकर गया
संपादक के पास में,
संपादक ने पढ़ी कविता-
चिड़िया उड़े आकाश में।

संपादक ने सोचकर कहा-
कविता है ठीक,
लेकिन प्यारे झुल्लू भाई
आगे भी तो लिख।

3.

तिरंगा झुकने न पाए


--
देखो पग रुकने ने पाए,
तिरंगा झुकने न पाए।

यह तो है सम्मान हमारा,
जो सबको लगता है प्यारा।

सदा हवा में ही लहराए,
तिरंगा झुकने न पाए।

भारतीयों की शान यही है,
हर एक जन की जान यही है।

आओ हाथ से हाथ मिलाएँ,
तिरंगा झुकने न पाए।

4.

तब सुंदर इनसान कहें


--
बात यदि पेट भरने की है
गदहा भी भर लेता है,
इधर-उधर से जैसे-तैसे
भोजन-पानी कर लेता है।

स्वार्थ के लिए जो जीता है
उसकी क्या शान कहें,
परमार्थ में जीना सीखो
तब सुंदर इनसान कहें।

5.

चींटी


--
काली हूँ, हल्की हूँ पर
वजन खूब उठाती हूँ,
मिठाइयाँ वाह-वाह
जीभर-भर खाती हूँ।

उसके बाद पेट भर
पानी खूब पीती हूँ,
छोटा सा बिल मेरा
मैं छोटी सी चींटी हूँ।

6.

आज सुबह अख़बार में


--
खबर पढ़ी है बच्चों ने
आज सुबह अख़बार में,
बम विस्फोट हुआ है
दिल्ली की बस-कार में।

दहेज के कारण एक दुल्हन
मरी निकली डोली से,
छह निर्दोष मारे गए
कश्मीर में गोली से।
बहुत भयंकर बाढ़ आई है
यूपी और बिहार में,
खबर पढ़ी है बच्चों ने
आज सुबह अख़बार में।

बीस बच्चों ने दम तोड़े
भोजन के अभाव में,
सुख-सुविधा कुछ नहीं है
इस पिछड़े गाँव में।
एक बस खाई में गिर गई
घटना घटी पहाड़ में,
खबर पढ़ी है बच्चों ने
आज सुबह अख़बार में।

7.

बिल्ला बोला-बिल्ली मेरी


--
दर्द से कराहती हुई जब
बिल्ली घर में आई,
बिल्ला बोला-बिल्ली मेरी
ये हालत क्या बनाई!

बिल्ली बोली धीरे से फिर
एक कुर्सी संभाले,
गरम दूध के कारण हाय
मुँह में पड़ गए छाले।

-
खेमकरण 'सोमन'
द्वारा श्री बुलकी साहनी,
प्रथम कुंज, अम्बिका विहार, ग्राम व पोस्ट-भूरारानी, रुद्रपुर, जिला- उधम सिंह नगर, उत्तराखंड-263153

ईमेल : khemkaransoman07@gmail.com

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