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हिंदी दिवस विशेष कविताएँ

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डॉ सुशील शर्मा

कुण्डलिया छंद
(हिंदी दिवस पर विशेष )

1
लहराती द्युति दामनी ,घोल मधुरमय बोल।
हिन्दी अविचल पावनी ,भाषा है अनमोल।
भाषा है अनमोल,कोटि जन पूजित हिंदी।
फगुवा रंग बहार ,गगन में चाँद सी बिन्दी।
कह सुशील कविराय ,प्रेम रंग रस बरसाती।
कोकिल अनहद नाद ,तरंगित मन लहराती।

2
हिंदी भाषा दिव्य है ,स्वर्ग सरिस संगीत।
हिन्दी ने ही रचे हैं ,दिव्य काल गत गीत।
दिव्य काल गत गीत ,रची तुलसी की मानस।
संस्कृत का आधार ,लिए हिन्दी का मधुरस।
कह सुशील कविराय ,मातु के माथे बिन्दी।
नेह नयन अनुराग ,समेटे सबको हिन्दी।

3
हिन्दी ही व्यक्तित्व है ,हिन्दी ही अभिमान।
हिन्दी जीवन डोर है ,हिन्दी धन्य महान।
हिंदी धन्य महान ,राष्ट्र की गौरव भाषा।
चेतन चित्त विभोर ,हृदय की चिर अभिलाषा।
आदि अनादि अमोघ ,मध्य जिमि नारी बिन्दी।
सुंदर सुगम सरोज ,हमारी प्यारी हिंदी।


[ हिंदी भाषा का इतिहास
(हिंदी दिवस पर विशेष)
छंद -दोहा

सुशील शर्मा
बारह वर्गों में बटा ,विश्व भाष अभिलेख।
"शतम "समूह सदस्यता ,हिंदी भाष प्रलेख।

देव वाणी है संस्कृत ,कालिक देशिक रूप।
हिंदी की जननी वही ,वैदिक लोक स्वरुप।

ईस पूर्व पंचादशी ,संस्कृत विश्व विवेक।
ता पीछे विकसित हुई ,पाली ,प्राकृत नेक।

अपभ्रंशों से निकल कर ,भाषा विकसित रूप।
अर्ध ,मागधी ,पूर्वी ,हिंदी के अवशेष।

एक हज़ारी ईसवी ,हिंदी का प्रारम्भ।
अपभ्रंशों से युक्त था ,आठ सुरों का दम्भ।

वाल्मीकि ,अरु व्यास थे ,संस्कृत के आधान।
माघ ,भास अरु घोष थे ,कालीदास समान।

आदि ,मध्य अरु आधुनिक ,हिंदी का इतिहास।
तीन युगों में बसा है ,भाषा रत्न विकास।

मीरा,तुलसी, जायसी ,सूरदास परिवेश।
ब्रज की गलियों में रचा ,स्वर्ण काव्य संदेश।

सिद्धो से आरम्भ हैं ,काव्य रूप के छंद।
दोहा ,चर्यागीत में ,लिखे गए सानंद।

संधा भाषा में लिखे ,कवि कबिरा ने गीत।
कवि रहीम ने कृष्ण की ,अद्भुत रच दी प्रीत।

पद्माकर ,केशव बने ,रीतिकाल के दूत।
सुंदरता में डूबकर ,गाये गीत अकूत।

भारतेन्दु से सीखिए ,निज भाषा का मान।
निज भाषा की उन्नति ,देती सब सम्मान।

"पंत "'निराला 'से शुरू ,'देवी 'अरु 'अज्ञेय '
'जयशंकर' 'दिनकर 'बने ,हिंदी ह्रदय प्रमेय।

अंग्रेजों के काल से ,वर्तमान का शोर।
हिंदी विकसित हुई है ,चिंतन सरस विभोर।

सब भाषाएँ पावनी ,सबका एकल मर्म।
मानव निज उन्नति करे ,मानवता हो धर्म।

हिंदी हिंदुस्तान है ,हिन्द हमारी शान।
जन जन के मन में बसी ,भाषा भव्य महान।

ग़ज़ल
कोई तो आगे बढ़ो
(हिंदी दिवस पर )
डॉ सुशील शर्मा
(2122 2122 2122 212 )


आज हिन्दी को बचाने कोई तो आगे बढ़ो।
दर्द हिंदी का सुनाने कोई तो आगे बढ़ो।

हिन्द का अभिमान हिंदी हिन्द की पहचान है।
लाज भाषा की बचाने कोई तो आगे बढ़ो।

भक्ति मीरा ने लिखी है सूर ने दर्शन लिखा।
दास की मानस सुनाने कोई तो आगे बढ़ो।

दिव्य गीता गा रही है ज्ञान के गुणगान को।
ग्रंथ साहब को सुनाने कोई तो आगे बढ़ो।

आज वृन्दावन अकेला ढूँढता रसखान है।
कृष्ण के रस को सुनाने कोई तो आगे बढ़ो।

है कबीरा अब कहाँ जो मन को अनहद नाद दे।
आज केशव गुनगुनाने कोई तो आगे बढ़ो।

अब कहाँ वो 'उर्वशी' अब कहाँ 'आँसू' करुण।
ओज 'वीणा 'का सुनाने कोई तो आगे बढ़ो।

अब कहाँ 'कामायनी ' है अब कहाँ है "कनुप्रिया।
आज मधुशाला पिलाने  कोई तो आगे बढ़ो।

अब नहीं होमर व इलियट अब न रूमी को पढ़ें।
सूर तुलसी को पढ़ाने कोई तो आगे बढ़ो।

आज भारत का युवा डूबा है इंग्लिश भाष में।
भाष हिन्दी मन बसाने कोई तो आगे बढ़ो।

देव की भाषा सदा से नागरी लिपि बद्ध है।
विश्व की भाषा बनाने कोई तो आगे बढ़ो।

है हमारी मातृभाषा हिन्द की ये शान है।
हिन्द का गौरव बढ़ाने कोई तो आगे बढ़ो।

0000000000000

संजय कर्णवाल


1
अपने वतन की बेहतर पहचान है हिंदी।
अपनी हर भाषा की सारी जान है हिंदी।।
प्यारे प्यारे,न्यारे न्यारे शब्दों की मीठी
मुस्कान है हिंदी
हम सबका हर एक सुनहरा अरमान है जिंदगी
हिंदी से ही एक न्यारा हिंदुस्तान है हिंदी
शब्द नही बनते प्रशंशा में हमारी शान है हिंदी

2
अपनी मीठी भाषा की बात निराली
समझ रहे हैं जग वाले
बड़ी ही अनुपम लिपि है,यही बात
सोच रहे हैं जग वाले।
देश विदेश तक पहुँच रही है
अपनी विशिष्टता बता रही है
लौट कर घर आते हैं जब
नया मुकाम मन में बना रही 1


3
अपनी भाषा जन जन की भाषा बने हिंदी
है गर्व हमें इस पर आगे ही आगे बढ़े हिंदी
एक सूत्र में बांधे सबको
घोले मिश्री प्यारी हिंदी
सब भाषाओं से अनोखी लगे
दोस्तों हमारी हिंदी
हो संकल्प हमारा इसे बेहतर सुदृढ़ बनाएं
जग को इसकी उत्तम उपयोगिता समझाए


4
कोई जब समझे पीड़ किसी की
पहचान होती है सच्ची जिंदगी की
जो तरस रहे हम समझो उनकी परेशानी
उनको भी धीर बंधाओ न करो नादानी
ऐसी सारी बातें भूलकर सबके लिए हाथ बढाओ
जो भी कम बने तुमसे तो सहारा तुम बन जाओ

5
हो जाओ तैयार संघर्ष करने को
जीवन की डगर पर आगे बढ़ने को
कोई साथ चले न चले
ये रुत बदले या न बदले
पर सोचलो मन से
उम्मीदों का सूरज तो हर हाल में निकले
जो मुश्किलें आज खड़ी है
वो हार जायेगी एक दिन
यकीं तो करो खुद पर इतना
कुछ भी नहीं नामुनकिन
0000000000000

अविनाश ब्यौहार

नवगीत

हिंदी सुघड़
सलोनी है!

इसमें
लालित्य भरा!
मीठा
साहित्य भरा!!

हिंदी हुई
मघोनी है!

है संस्कृति
का गहना!
निर्झरिणी
सा बहना!!

बोलचाल में
नोनी है!

अरबी-तुर्की-
फारसी!
है भाषा में
आरसी!!

उर्दू बिना
अलोनी है!

अविनाश ब्यौहार
जबलपुर
000000000000000

पंकज जांगिड़

"हिंदी है हम"
समुंद्र में दमकते मोती सा नूर है हिंदी।
बूंद के अस्तित्व को बयां करता समुद्र है हिंदी।
दिल की वाणी को उसकी चौखट से उठाकर

भावों के धागे से बंधा कोहिनूर है हिंदी।
अटल जी का मान है हिंदी।
दिनकर जी का सम्मान है हिंदी।
कबीर दास जी की भक्ति है हिंदी।
निराला जी की शक्ति है हिंदी।
पंत जी की कलम का राज है हिंदी,
जयशंकर प्रसाद जी का साज है हिंदी।
मुट्ठी भर शब्दों में समुद्र सा भाव लिये,
अनंत गगन सा विस्तार है हिंदी।
देश की मिट्टी से रंगी,
हर हिंदुस्तानी की भावना से बंधी।
विश्व धरा पर छा रही
मेरी शान है हिंदी,
मेरा अभिमान है हिंदी,
मेरा सम्मान है हिंदी।।
                       ©Pankaj jangid
     pk1380150@gmail.com
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