नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

कौमी एकता मुशायरे का आयोजन

image

यमुना विहार स्थित सेंट मोरल ग्लोबल स्कूल के वातानुकित सभागार में कौमी एकता मुशायरे का आयोजन किया गया तथा क्षेत्र के करीब दो सौ शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। मुशायरे का आयोजन अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति तथा दिल्ली सरकार की उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में लोकप्रिय कवि भुवनेश सिंघल के संयोजन में किया गया। राष्ट्रीय एकता के ज्वलंत संदर्भ पर आयोजित भव्य गंगा-जमुनी मुशायरे का संयोजन राष्ट्रीय कवि व शायर भुवनेश सिंघल ने किया। मुशायरे की सदारत उर्दू के मशहूर शायर पी. पी. श्रीवास्तव रिंद ने की तथा संचालन भुवनेश सिंघल ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में लोकप्रिय समाजसेवी अजय महावर उपस्थित रहे। मुशायरे के स्वाताध्यक्ष प्रतिष्ठित समाजसेवी डॉ. यू.के.चौधरी तथा मनी बंसल ने सभी शायरों का शाल पहनाकर स्वागत किया।

मुशायरे के मुकद्दस मौके पर अपना कलाम पेश करते हुए जनाब भुवनेश सिंघल ने सुनाया कि ‘पाप के बढ़ चले हैं चरण देख लो, पुण्य के तन-बदन का क्षरण देख लो। नज़्म में खांसियां भी अमर हो रहीं, गीत की हिचकियों का मरण देख लो। वहीं सिंघल ने राजनीति पर व्यंग्य करते हुए आगे कहा कि ‘आप’ भी आज से बदचलन हो गए ‘आप’ का ये नया अवतरण देख लो, मीर जाफर भरे हैं यहां देश में कौरवों के हुए हैं करण देख लो’। वहीं सिंघल ने आजकल प्यार के नाम पर हो रहे मनुष्य के नैतिक पतन पर कहा कि ‘बाजुओं में सनम है निगाहें कहीं, प्रेम का ये नया संस्करण देख लो। वहीं उन्होनें एक अलहदा कलाम पेश करते हुए कहा कि ‘पक गए जख्मों के टांके, छांव में अपनों की आके। पंख छोटे से मिले हैं, हौसले पर हैं बला के।

इस मौके पर अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव ने कहा कि आज जब सियासी चपकलिशों और रेवादवानियों ने मांजाई दो जबानों का एकदूसरे का हरीफ़ बना दिया है इस गंगा-जमुनी मुशायरे को दो जबानों को एक दूसरे के बगलगीर और क़रीबतरीन लाने की बेशकीमती पेशरफ्त बताया। वहीं सुरेश नीरव ने अपने कलाम पेश करते हुए कहा कि ‘जब भी दिल से तुझे याद करता हूँ मैं, खुशबुओं के नगर से गुजरता हूँ मैं। नर्म एहसास का रेशमी अक्स बन लफ्ज़ के आईने में संवरता हूं मैं।’

वहीं मो.अनस फ़ैज़ी ने कहा कि ‘ बाद शादी के मिरा ख़ुद पर यक़ीं बढ़ने लगा, क्या पता था दिल का पौधा फिर हरा हो जाएगा , देखता हूं जब कभी मैं फूल सा चेहरा कोई, सोचता हूं एक दिन ये भी मिरा हो जाएगा।

इसके अलावा अमीर अमरोही ने कहा कि ‘हुस्न फूलों पे करवट बदलता रहा इश्क जब बिस्तरे खार पर सो गया, सरहदों ने हमें यू जुदा कर दिया वो उधर सो गया मै इधर सो गया।

वहीं रऊफ रामिश ‘लुत्फ देती हैं धडकने दिल की अब ना दिल की दवा करे कोई, मुझको उस पर यकीन-ए-कामिल है मेरा दुश्मन हुआ करे कोई।

इस गंगा-जमुनी मुशायरे में जनाब पी.पी. श्रीवास्तव रिंद, जनाब पंडित सुरेश नीरव जनाब कुमार संजय, जनाब मुईन शादाब, जनाब रऊफ रामिश, जनाब भुवनेश सिंघल, जनाब फरमान चौधरी, जनाब अनस फैज, जनाब दिनेश वत्स और जनाब अमीर अमरोही जैसे मुनफरीद और मक़बूल शायरों ने अपने क़लामों से इस मुकद्दस मुशायरे को नवाजा। जिसका कि मुदर्रिस श्रोताओं ने जी भरकर लुत्फ उठाया।

उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर दिल्ली के दो सौ शिक्षकों को उनके अच्छे कार्य को रेखांकित करने की दृष्टि से शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.