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लघुकथा - शक का भूत -ज्ञानदेव मुकेश

शक का भूत


       आधी रात को मम्मी ड्राईंग रूम में गईं और वहां से बदहवास-सी भागती हुई मेरे कमरे में आयीं। आहट सुनकर मेरी नींद खुल गई। मैंने नाईट लैम्प की रोशनी में देखा, मम्मी कांप रही थीं और उनके माथे पर पसीने की बूंदे चुहचुहा आई थीं। मैंने मेन लाईट ऑन कर पूछा, ‘‘मम्मी, क्या हुआ ?’’
      उन्होंने उखड़ती सांसों के साथ कहा, ‘‘बाहर...बाहर... ड्राईंग रूम में दो चोर सो रहे हैं। उन्हें जल्दी से भगाओ।’’
      मैं चकित हुआ। मैंने कहा, ‘‘मम्मी, वे चोर नहीं हैं। अपने गांव से आ हुए दो ग्रामीण हैं, जिन्हें आपने रात बिताने के लिए अपने घर में शरण दी है।’’
     मम्मी ने थोड़ी राहत महसूस करते हुए कहा, ‘‘हां, याद आया। मगर वे मुझे चोर क्यों लग रहे हैं ?’’


     मैं कुछ सोचने लगा। फिर मुझे कुछ याद आया। मैंने मम्मी से कहा, ‘‘मम्मी, याद करो। उनके आने के बाद आपने क्या-क्या किया था ?’’
    मम्मी ने हैरानी से पूछा, ‘‘क्या किया था ?’’
    मैंने कहा, ‘‘आपने ड्राईंग रूम में रखे कीमती सामान को बेड रूम में छुपाकर रखा। टेबुल के ड्रावर में पड़े गहने-पैसों को आलमारी के लॉकर में रखा। रोज तुम अपने बेड रूम कर दरवाजा खुला छोड़कर सोती थी। मगर आज तुमने दरवाजा बंद रखा। यह सब क्यों किया ?’’
    मम्मी चुप रही। मैंने कहा, ‘‘मम्मी, तुम्हारे मन में उनके बारे में जो अनावश्यक विचार आए थे, उन्हें बाहर निकालो। उनसे डरो मत। विश्वास करना सीखो। वे अपने लोग हैं। निशि्ंचत हो जाओ और कल रात जो तुमने हरकतें कीं, उन्हें ठीक करो।’’
    मम्मी ने मेरी बात रखी। वे कीमती सामान वापस ड्राईंग रूम में वापस रख आईं। लॉकर से गहना-पैसा निकालकर उन्हें वापस ड्रावर में रख दिया। उन्होंने तय किया कि वे बेड का दरवाजा खोलकर ही रखेंगी।


    यह सब करने के बाद जब मम्मी वापस ड्राईंग रूम में उन ग्रामीणों को देखा तो वे अब कहीं से भी चोर नहीं लग रहे थे। वे गांव के सीधे-सादे और सच्चे ग्रामीण लग रहे थे। मम्मी बेड रूम में वापस आकर निशि्ंचत होकर सो गईं। वे अगले ही पल खर्राटे भरने लगी थीं।
   मैं समझ गया कि वह एक काला साया था, जिसे मम्मी ने अपने दिमाग पर से अब उतार दिया था।

                                                   -ज्ञानदेव मुकेश
                                            पता-                                                 
                                                 फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,
                                                 अल्पना मार्केट के पास,
                                                 न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी
                                                 पटना-800013 (बिहार)

e-mail address - gyandevam@rediffmail.com

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