सदमें में सुदामा -1 : सुरेश खांडवेकर

SHARE:

आय की परिभाषा आय एक पारिश्रमिक हैं। श्रम अथवा सेवा के बदले मिलने वाली मजदूरी, वेतन, भत्ता आदि पारिश्रमिक कहलाता है।’ बस इतनी सी परिभाषा? लो,...

आय की परिभाषा

आय एक पारिश्रमिक हैं। श्रम अथवा सेवा के बदले मिलने वाली मजदूरी, वेतन, भत्ता आदि पारिश्रमिक कहलाता है।’

बस इतनी सी परिभाषा?

लो, और विस्तार से बता देता हूं।

आय, यानी मुद्रा या उसके अनुरूप वस्तुयें जो श्रम, सेवा अथवा पूंजीनिवेश से मिलती है और जिसे प्रतिदिन के खर्चों व उन्नति के लिए कमाया जाता है उसे आय कहते हैं। इनमें पूंजी निवेश, पेंशन, सोशल सिक्योरिटी, ब्याज भी सम्मिलित है। लेकिन सामान्यतः वेतन और मजदूरी को आय कहा जाता है। समझ गये?’

भीख मांगना भी आय है, चोरी करना भी आय है और दान लेना भी आय है। आप जरा दान लेकर तो देखो किसी से? दान के लिए दो कदम बढ़ो तो पता चल जायेगा कि यह चीजें बेचने से भी बहुत टेढा काम है। इसलिए आय और दान की परिभाषा करने में बहस करना ठीक नहीं है।

‘तो 72 हजार जिसे न्यूनतम आय कहा जाता है। मिनिमम इनकम स्कीम के नाम से जानते हैं इसे। यह आय कैसे हुई? इसमें किसी ने कौन-सी मेहनत की। ये तो सरकारी दान है। कुछ लोग इसे खैरात कहते हैं, तो आप इन गरीबों को आय दे रहे हैं कि दान दे रहे हैं? इनमें से जो गरीब स्वाभिमानी हैं वे नहीं चाहते कि उन्हें दया का पात्र बनना पड़े। वे कहते हैं कि हमसे काम लो और उसके बदले में रकम दो। इस तरह इन गरीबों में भी दो दल हो गये हैं। एक जुझारू दल और दूसरा लुटारू, निकम्मा दल।’

अर्थशास्त्र के यहां विद्यार्थियों में ‘दान और आय’ पर चर्चा चल रही थी। यह रिसिप्ट और पेमेंट के तहत खातों में लिखा जाता है। बाकी किसी संस्था को दिया दान उस संस्था की आवक राशि ही होती है। आप जो कहें पर ये दान है।

एक गरीब कमर में धोती लपेटे, छाती से नंगा था। सिर पर पगड़ी थी, बोला, ‘हम गरीब जरूर हैं, पर स्वाभिमानी हैं, हम दान या भीख मांगकर गुजारा नहीं करना चाहते। हमें काम दो बदले में जो मजदूरी मिले, ले लेंगे। हम इतने लाचार नहीं हैं। हम पुरुषार्थ से धन अर्जन करना चाहते हैं।

मनरेगा से मन टूटा

सुदामा एक गांव में चबुतरे के पास खड़ा था। कुछ गरीब, मजदूर किसान, अनाथ बातें कर रहे थे।

‘अब मनरेगा में काम करने का मन नहीं है।’

‘क्यों?’

‘जब ऐसे ही छः हजार महिना मिलेंगे तो वहां भरी धूप या बर्फिली ठंड में पत्थर काटने से क्या मतलब? अब मनरेगा में मन रहेगा की नहीं कह नहीं सकते। कुछ ना कुछ खांसी-बुखार का बहाना तो बनाना ही पड़ेगा।’

अरे साल में सौ दिन ही तो करना है, वो नहीं करोगे तो रजिस्टर में तुम्हारा नाम कट जायेगा।

ना ना, नाम नहीं कटेगा, तनख्वाह भी नहीं कटेगी। अभी भी वहां चार भ्रष्टाचारी बैठे हैं। रिश्तेदारी और मित्रता बनाये रखनी पड़ती है। सब कुछ कर देंगे।

रसुलमियां की तकरीर

आज सुदामा वृंदावन से आगरा गया। हींग की मंडी में मुस्लिम लोग बहुत हैं। यहां पर मौलाना रसुल तकरीर कर गरीब मुसलमानों को मश्वरा दे रहे थे। ‘दोस्तो, सरकार बनाने का टाईम आ गया है। इस समय सियासतदार कुछ नरम पड़ गये है। जम्मुरियत की यही खासियत है। इसलिए गरीबों को भी अपना हक अदा करने का बराबर मौका मिलता है। हक के मामले में, वोट के मामले में गरीब और अमीर बराबर हो जाते हैं। रोजी-रोटी से मोहताज लोगों को भी अपने अख्तियार का फायदा मिलता है। अगर वोट हमारा कीमती है तो हमारी जिल्लत भी कीमती है। मैं आप सभी से दरख्वासत करता हूं कि इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। जिससे हमारे सियासतदार अतिगरीब की लाईन बता रहे हैं उसमें कौम की गिनती के हिसाब से बटवारा बराबर होना चाहिए। यानी हिन्दुओं के बाद भारत में मुसलमानों की तादाद सबसे ज्यादा है। इसलिए ‘गरीबी की रेखा’ के तहत आनेवाले लोगों में हिन्दुओं के बाद मुसलमानों की तादाद आती है। लिहाजा हिन्दुस्तान में जितने भी लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं उसमें हमारे मुस्लिम भाई कम से कम 24 फीसद होने चाहिए।’

ये जो मैं 24 फीसद कह रहा हूं, हिसाब से कम है। क्योंकि अगर हिन्दुस्तान का इलाका दर इलाका घूम आओ तो आपको सबसे ज्यादा गरीब मुस्लिम परिवार मिलेगा। बस इतना ही इस मौके पर कहना था। ऐसा ना हो ये बीजेपी वाले हमारी कौम की गरीबी को भुला दें।’

‘इसलिए इस मौके को चूकना भारी नुकसान होगा इससे हमारी ताकत को कम से कम समझी जायेगी। मैं तो कहता हूं हमारे मुस्लिम भाई जिस तरह की जिल्लत की जिन्दगी जीते हैं वे हिन्दुओं से भी बुरे हालात में हैं। इसलिए हमें एक-दो परसेंट ज्यादा लोगों को 72 हजार रुपये मिलने चाहिए। याद रखो, हमारे 95 परसेंट मुसलमान भाई बड़ी मेहनत से जि़न्दगी काटते हैं और घिनौनी जिंदगी गुजारते हैं।

पिछड़ों के अगड़े नेता के विचार

सुदामा उधर नेहरू नगर गये, वहां पर छोटे-छोटे चर्मकार जूते चप्पल बनाते हैं। वहां पर गरीब, शिल्पकार और श्रमिक रहते हैं। वहां पिछड़ों के अगड़े नेता कह रहे थे, ‘यह हमारे लिए बहुत अच्छा अवसर है, हमें अपनी गरीबी को छुपाना नहीं है, उसे खुलकर सामने लाना है। भिखारी मेकअप करके भीख मांगते हैं। क्या तुम गरीब बनने के लिए इतना काम भी नहीं कर सकते?’

‘हम संख्या बल से सबसे अधिक हैं। इसलिए गरीबी की संख्या भी सबसे अधिक होना चाहिए। याद रखो गरीब का वोट भी प्राईम मिनिस्टर के बराबर है। अपने वोट को छोटा ना समझे।

यह हमारे नाक के साथ-साथ अधिकारों का सवाल है। 72 हजार सालाना कम रकम नहीं है। ऐसा ना हो नेता लोग अपने फायदे के लिए मुस्लिमों को इसका ज्यादा फायदा पहुंचाये और हम, एक दूसरे को ताकते रह जाये।’

इस बीच पंडित सोमदत्त भी कहने लगे, ‘भाईयो वैसे भी यदि हम पिछड़ी जाति, जनजाति और आरक्षण का ध्यान में रखें तो 27 प्रतिशत से ज्यादा गरीब और पिछड़े, तो हम गरीब हिन्दु ही हैं। इसलिए भी हमारा अधिकार है कि हम अपने आपको अतिगरीब, दीनहीन और दया के पात्रा साबित करें। कुछ लोग भाग्यशाली हैं जो टिकडमबाजी से पिछड़े बने, दलित बने और उनके बाल-बच्चे भी दलित हुए हैं। अब उन्होंने जोर से नारा लगाने का आग्रह किया-

‘न हल चलायेंगे, ना पत्थर फोड़ेंगें

‘हम गरीबी के 72 हजार ले के रहेंगे।’

पादरी के विचार

आगरा के अकबर चर्च के पास हजारों गरीब इकट्ठे हुए थे। यहां पादरी अपने विचार व्यक्त कर रहा था।

‘इशू ने जो कहा उसी को मदर टेरेसा ने निभाया है। यदि कोई सरकार पूअर पब्लिक को इयर्ली 72000 देने का वादा करती है, तो ये गुड न्यूज है। हम भी भारत में सालाना 25000 करोड़ रुपये गरीबों में खर्च करते हैं। कुछ अपोजिशन वाले कमेंट करते हैं कि हम यह रकम कन्वर्जन के लिए कर रहे हैं। यह बात रांग हैं। हम उनके वे ऑफ लीविंग को चेंज करते है। उनकी बहुत जरूरी नीड्स को पूरा करते हैं। हमें अपोज करने वालों की सोच में मिस्टेक है। हम गरीबों के माईंड को स्ट्रांग बनाना चाहते हैं। सो देट दे शुड लीव प्रॉपर्ली देअर लाईफ एंड विद रिस्पेक्टफूली।

बिशप आगे कहता है, ‘ओ जिजस गॉड ब्लेस यू’ यू केन चूज एनी गवरमेंट। आप कोई भी सरकार चुनें। सरकार हमारी होगी। हमें लगता है, ‘ये सरकार हमारी मिशन का ही कुछ काम लाईट करना चाहती है। बट, वी नो, इंडिया में इससे भी ज्यादा पुअर लोग हैं। हम उन्हें जंगल में, दूर-दराज के गांव में, इंडिड, डीप में जाकर गरीबों को ढूंढ़ेंगे। अगर इंडियन गवर्नमेंट उनके लिए सेवेंटी टू थाउजेंड दे रही है तब भी हमारा मिशन काम करता रहेगा। हम पुअर के साथ-साथ है। इशु पुअर के साथ है। हमारा गॉड सबकी हेल्प करता है। तो हम भी उसमें कुछ कंट्रीब्यूशन करना चाहेंगे।’ इतना कहकर बिशप ने इत्तरदानी से पानी छिड़कना शुरू किया, जो लीडर 72 थाउजंड रुपीज पर ईयर देने की बात कर रहा है हमें लगता है वह हमारा ही काम कर रहा है। अगर सरकार के पास बजट की कमी हो तो हम भी मदद करने को तैयार हैं।’

सरदार दर्शनसिंह

सुदामा जब दिल्ली की ओर आने लगे तो पंजाब मेल में बैठा। शाम के आठे-साढ़े आठ का समय था। जनरल डिब्बे में सुदामा किसी तरह एडजेस्ट हुआ। बड़ी भीड़ थी। चुनाव की सरगर्मी थी। कुछ मोदी-मोदी कह रहे थे, कुछ राहुल-राहुल।

सरदार दर्शनसिंह ने इस कम्पार्टमेंट को अपने कब्जे में ले लिया था। बोला, ‘ये लीडर हमारे देश को पता नहीं कहां ले जाना चाहते हैं। सरकार गरीबों के लिए कुछ नहीं करना चाहती। बल्कि सरकार देश में इसाईयों की संख्या बढ़ाने का काम करना चाहती है। सारे धर्म के लोग अपने-अपने झंडे तले इन गरीबों को उकसा रहे हैं, क्योंकि इसी से उनकी जीत और हार तय होती है।’

‘मेरे प्यारे दोस्तो, मेरी बात समझो जरा ध्यान से। हमारे देश में ही नहीं दुनिया के देशों में थलसेना, जलसेना और वायु सेना के अलावा धर्मसेना की जरूरत बढ़ गयी है। ये धर्मसेनायें सारी दुनिया के तमाम मजहबों में इसीलिए बार-बार फल-फूल रही है। इसकी आड़ में आप सब कुछ कर सकते हो।’

‘बंदुकें और हथगोले चलाने के बजाय नारे चलाने पड़ते हैं। आंदोलन करना पड़ता है। 72 हजार सालाना देकर वे हम गरीबों की आबरू, इज्जत लूटना चाहते हैं। हमारा ईमान खरीदना चाहते हैं। हमें मानसिक रूप से गरीब, गुलाम और पंगु बनाना चाहते हैं। क्योंकि धर्म के झंडे तले भागने वाले गरीब लोग अंधे हो जाते हैं। ध्यान रखो, ये 72 हजार सालाना का शगुफा आपकी तरक्की रोक देगा। आपका स्वाभिमान मर जायेगा।’

इतना कहते ही कुछ लोग उठे और सरदार दर्शनसिंह को चुप कर कहने लगे, ‘नई बातें ना करो सरदारजी। हमें सालाना 72 हजार रुपये मिलने वाले हैं, आप को क्यों जलन हो रही है?’

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: सदमें में सुदामा -1 : सुरेश खांडवेकर
सदमें में सुदामा -1 : सुरेश खांडवेकर
https://4.bp.blogspot.com/-vQhOibQLa4w/XIjOiit_WII/AAAAAAABOnI/U3rnoxgnM3kdpX93IOPB8gM_Hpp_hzoRgCK4BGAYYCw/s320/suresh-738778.jpg
https://4.bp.blogspot.com/-vQhOibQLa4w/XIjOiit_WII/AAAAAAABOnI/U3rnoxgnM3kdpX93IOPB8gM_Hpp_hzoRgCK4BGAYYCw/s72-c/suresh-738778.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/12/1.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/12/1.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content