|नाटक_$type=sticky$au=0$label=1$count=4$page=1$com=0$va=0$rm=1$d=0$tb=black

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका। प्रकाशनार्थ रचनाएँ इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी इस पेज पर [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

आबे-हयात - प्रांत-प्रांत की कहानियाँ - 3 - संकलन व अनुवाद - देवी नागरानी

साझा करें:

प्रांत -प्रांत की कहानियाँ (हिंदी-सिन्धी-अंग्रेजी व् अन्य भाषाओँ की कहानियों का अनुवाद) देवी नागरानी -- पश्तू कहानी आबे -हयात नसीब अलशाद सीम...

प्रांत-प्रांत की कहानियाँ

(हिंदी-सिन्धी-अंग्रेजी व् अन्य भाषाओँ की कहानियों का अनुवाद)

देवी नागरानी

--

पश्तू कहानी

आबे-हयात

नसीब अलशाद सीमाब

‘मैं अमर होना चाहता हूँ और मौत को किसी सूरत में भी क़बूल नहीं करूँगा...’ वह अकसर अपनी दिली ख़्वाहिश का इज़हार करता।

मैं उसकी बेतुकी बातों को हंसी में उड़ाते हुए छेड़-छाड़ के लहज़े में जवाब देता&‘अगर तुम अनश्वर दुनिया की ख़्वाहिश रखते हो तो आबे-हयात ढूँढो। उसको पीकर ही तुम अमर हो सकते हो, वरना मौत तो एक अटल हक़ीक़त है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता।’ यह सुनकर उसके चेहरे पर एक मासूम-सी मुस्कराहट ज़ाहिर होती और वह बड़ी ही अधीरता से पूछता&‘यार! उस दूत का कोई पता तो चले। मैं सच में उसे तलाश रहा हूँ ताकि चंद घूँट पीकर मौत के खौफ़ से निजात पा सकूँ।’

मैं उसकी अनश्वर ज़िन्दगी की ख़्वाहिश और मौत के मुंतज़र मंज़र में उसके विगत काल में झाँकता तो वह बेक़सूर नज़र आता। हक़ीक़त में वह अपनी माँ का इकलौता और लाडला बेटा था। उसकी पैदाइश के बाद उसके घर में मौत ने खेमे गाड़ लिये थे। सारे बहन-भाई पैदाइश के कुछ अरसे बाद ही मौत का निवाला बन जाते। उसकी कोख जली माँ उस ग़म से नीम पागल हो चुकी थी। वह अपने इकलौते बेटे को बाहों में ज़ोर से यूँ समेट लेती, जैसे मौत उसके दर पर खड़ी हो और उसे छीन कर ले जाना चाहती हो। वह दर्द भरे लहज़े में कहती.

‘बेटा तुम कहीं न जाना, अगर तुम भी बिछड़ गए तो मैं ज़िन्दा न रह सकूँगी।’ उसके तसव्वुर में अपनी माँ के चेहरे पर पड़े आँसुओं का गहरा असर था। उसके बहते हुए आँसू और बेअख़्तियार ख़ुद क़लामी ने उसके दिल और दिमाग़ पर सम्पूर्ण कब्ज़ा कर लिया था। तभी तो वह माँ के उन बहते आँसुओं की ख़ातिर नश्वर ज़िन्दगी के ख़्वाब देखता रहता और हमेशा मौत के खौफ़ से घिरा रहता।

हम दोनों एक ही कक्षा में थे और बचपन से हमारी गहरी दोस्ती थी। वह अपनी तनहाई की आदत और माँ पर कड़ी निगरानी रखने के कारण से घर से बाहर नहीं निकलता था। मैं हर रोज़ उनके घर जाता और हम मिलकर घंटों खेलते रहते। घर का आँगन हर शाम हमारी बातों और कहकहों से गूँज उठता। उसकी माँ मुझे अपने बेटे की तरह चाहती थी। कभी-कभार वह हमारे साथ मिलकर बच्चों की तरह भी खेलती।

यूँ वक़्त का पहिया घूमता रहा और हमने जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखा। समय के साथ-साथ मेरे दोस्त के दिल में शाश्वत ज़िन्दगी की आरज़ू भी बढ़ती चली गई। आख़िर वह जुनून की शक्ल में तब्दील हो गई। उस एक ख़याल पर उसकी सुई हर वक़्त अटकी रहती, इसी कारण मुझे बहुत ज़्यादा दुख होता। वह जब बोलना शुरू करता तो उसके लहज़े में भरपूर यक़ीन और चेहरे पर एक निश्चित कठोरता के आसार दिखाई देते। उसके बात करने के अन्दाज़ से मेरे जिस्म में झुर-झुरी पैदा होती।

वह एक ऐसे सपने का पीछा कर रहा था जिसका वास्तविक दुनिया से कोई वास्ता न था। उसने इसे अपनी ज़िन्दगी का मक़सद बना लिया था। मुझे उसके बारे में यह डर लगा रहता था कि कहीं वह पागल न हो जाए। लेकिन दूसरी तरफ़ उसके मज़बूत इरादे को देखकर यह सोचने पर मजबूर हो जाता कि अगर किसी मक़सद की चाह में ईमान की सच्चाई की चाशनी शामिल हो तो आदमी अपनी मंज़िल ज़रूर पा सकता है।

स्कूल की पढ़ाई ख़त्म होने के बाद, आगे की पढ़ाई हासिल करने के लिये मैं शहर चला गया। उन दिनों मैं पढ़ाई और शहर की रंगीनियों में ऐसा खोया कि अपने घर और पुराने दोस्तों से मेरा वास्ता लगभग कटकर रह गया। कभी-कभार मेरे दोस्त का कोई ख़त मिलता, जिसमें हर बात ज़िन्दगी से शुरू होती और मौत पर ख़त्म होती। पढ़ने के बाद ऐसा महसूस होता जैसे वह पूरी दुनिया को जादुई ढंग से झाँसा देना चाहता हो। उस के अजीब-ओ-ग़रीब ख़यालात के बारे में सोचते हुए मैं परेशान हो जाता लेकिन उनकी सच्चाई को झुठला भी नहीं सकता था।

छुट्टियों के दौरान जब मैं घर लौटा तो पता चला कि वह न जाने कहाँ ग़ायब हो गया है। अगले दिन उसकी माँ की तबीयत पूछने गया तो वह ख़ौफ़ से डरी हुई हिरनी की तरह लगी, जिसके बच्चे को शेर उठा ले गया हो और वह बेबसी से चारों तरफ़ उसकी तलाश में भटक रही हो। उसकी तरसती आँखों में बेशुमार सवाल तैर रहे थे। आस भरी निगाहें मेरे चेहरे पर यूँ गड़ी थी जैसे मैं अपने दोस्त के बारे में कोई ख़ैर-ख़बर लाया हूँ। उसकी हालत देखकर मेरा दिल भर आया। वह ज़बान से कुछ न कह सकी पर डबडबाती आँखों से हाल बयाँ होता रहा। उसकी ख़ूबसूरत बड़ी-बड़ी आँखों से आँसुओं की लड़ी फूट पड़ी। ख़ामोशी से मेरी कलाई पकड़ी और अपने कमरे में ले गई। अलमारी से एक ख़ाली लिफ़ाफ़ा निकाल कर मुझे थमाया। लिफ़ाफ़े के अन्दर ख़त पड़ा था जो उसने अपनी माँ के नाम लिखा था। मैंने ग़ौर से देखा तो सफ़ेद कागज़ पर काले हर्फ़ो के बीच में मेरे दोस्त का मासूम चेहरा उभर आया जो रौशन लौ की तरह ज़हन के धुंधले आसमान पर बिखर कर गुम हो गया। उसकी माँ बेचैन निगाहों से मुझे घूर रही थी। मैं अपने जज़्बात को छुपाते हुए ठहर-ठहर कर ख़त पढ़ने लगा।

‘प्यारी माँ! मैं मौत के ख़ौफ़ से छुटकारा पाने के लिये एक सफ़र पर रवाना हो रहा हूँ जो मुझे वह शाश्वत ज़िन्दगी बख़्श दे जिसके भविष्य में न कोई हद और न कोई इन्तहा हो। उसके बाद मेरा नाम कभी भी मुर्दों की सूची में न आएगा, क्योंकि मैं उनमें शुमार होना नहीं चाहता। मैं अमर होना चाहता हूँ और मुझे यक़ीन है कि मैं अपने मक़्सद में ज़रूर क़ामयाब हो जाऊँगा। ज़िन्दगी भर मेरी यह ख़्वाहिश रही है कि मैं अमर बन जाऊँ। तुम्हारे हसीन चेहरे पर सदा बहते हुए आँसुओं की क़सम मैं तुम्हारी ख़्वाहिश हर हाल में पूरी करूँगा। फ़क़त तुम्हारी दुआओं का मुहताज&बेटा।’

ख़त पढ़ने के बाद मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं उसके बारे में क्या कहूँ? मेरा दोस्त एक ऐसी मृगतृष्णा के पीछे भाग रहा था जिसको हासिल करना पाँवों को छालों से लहूलुहान करना था। मेरे पास उसकी माँ को झूठी तसल्ली देने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे, इसलिए ख़ामोश और ग़मगीन होकर अपने घर वापस आया।

जिस दिन मेरी छुट्टियाँ ख़त्म हुईं, मैं शहर जाने की तैयारियों में लगा हुआ था। सुबह सवेरे मेरे दोस्त के घर से दिल दहलाने वाला शोर उठा। मैं घबराकर हाल जानने उस ओर दौड़ा। दरवाज़े से जैसे ही अंदर दाख़िल हुआ तो आँगन में एक ताबूत दिखाई दिया।

मेरे दोस्त की माँ उसके सिरहाने खड़ी थी। उनकी ख़ुश्क आँखें और विश्वासपूर्ण अन्दाज़ देखकर हैरत से चकरा गया। मैं उनके क़रीब पहुँचा तो एक अजनबी को अफ़सोस के साथ कहते हुए सुना ‘आपके बेटे ने बड़गाम में मर्दाना लड़ाई लड़ते हुए भारतीय फौजियों के हाथों शहादत का जाम पिया है। वह बे-इन्तहा दिलेरी से लड़ा और दुश्मन की सब गोलियाँ अपने सीने पर झेल गया।’

यह सुनकर उसकी माँ के मुँह से उफ़ तक न निकली। उसने आस उम्मीद के विपरीत गर्व से अपना सीना चौड़ा करते हुए पूरे विश्वास के साथ कहा&‘ख़ुदा ने उसकी ख़्वाहिश पूरी कर दी। मेरा बेटा अमर हो गया...शहीद कभी नहीं मरते...उसने शाश्वत ज़िन्दगी पा ली...! मेरा बेटा ज़िन्दा है..। मेरा बेटा नहीं मरा...मेरे बेटे ने मौत को शिकस्त दे दी! मेरा बेटा ज़िन्दा है!’

--

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=three$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4121,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,343,ईबुक,198,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3096,कहानी,2309,कहानी संग्रह,246,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,544,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,123,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,69,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,17,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1278,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,348,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2021,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,715,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,815,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,19,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,93,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,212,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: आबे-हयात - प्रांत-प्रांत की कहानियाँ - 3 - संकलन व अनुवाद - देवी नागरानी
आबे-हयात - प्रांत-प्रांत की कहानियाँ - 3 - संकलन व अनुवाद - देवी नागरानी
http://1.bp.blogspot.com/-0KU8kvXy4aA/Xf7yGaxfWEI/AAAAAAABQiA/c6R1OSHUTB8W1Gpb2GrMT2i1Fgae5KGBgCK4BGAYYCw/s320/prant%2Bprant%2Bki%2Bkahani-706441.png
http://1.bp.blogspot.com/-0KU8kvXy4aA/Xf7yGaxfWEI/AAAAAAABQiA/c6R1OSHUTB8W1Gpb2GrMT2i1Fgae5KGBgCK4BGAYYCw/s72-c/prant%2Bprant%2Bki%2Bkahani-706441.png
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/12/3.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/12/3.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ