परीक्षा पास करने के लिए नहीं, जीवन संवारने के लिए पढ़ें किताबें - डा. सूर्यकांत मिश्रा

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परीक्षा पास करने के लिए नहीं, जीवन संवारने के लिए पढ़ें किताबें ० ज्ञान के परिमार्जन के लिए मोबाइल नहीं किताबें पढ़ें हम सदियों से यह सुनते चल...

परीक्षा पास करने के लिए नहीं, जीवन संवारने के लिए पढ़ें किताबें

० ज्ञान के परिमार्जन के लिए मोबाइल नहीं किताबें पढ़ें

हम सदियों से यह सुनते चले आ रहे हैं कि किताबें इंसान की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। उसमें लिखी बातें हमारा मार्गदर्शन करती हैं। हमें जीवन की स्वर्णिम राहें दिखा सकती हैं। हमारे व्यवहार में मिठास घोल सकती हैं। बावजूद इन सारी खूबियों के आज हम इन्हीं किताबों से दूर होते जा रहे हैं। वर्तमान व्यस्त समाज पर इस दृष्टिकोण से नजर डाली जाए तो हमें यह तस्वीर स्पष्ट दिखाई पड़ती है। आज के युग में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो किताबें पढ़ने की आदत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हो। वास्तव में यह एक ऐसी आदत है जिसमें मनोरंहन नहीं बल्कि भविष्य की सुनहरी किरणें आगे का मार्ग प्रशस्त करती दिखाई पड़ती हैं। हमें इस बात पर चिंतन करने की जरूरत है कि आखिर हमारी पीढ़ी किताबों से किनारा क्यों कर रही है? टीव्ही, स्मार्टफोन, वीडियोगेम, इंटरनेट और आधुनिक रंग में रंगे व्हाट्सएप्प तथा इंस्टाग्राम ने हमारी पीढ़ी के हाथ से किताबों को छीन लिया है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के चलते आज लोगों के पास इतना वक्त नहीं कि वे किताबें पढ़ सकें। आज के समय में किताबें केवल परीक्षा पास करने के लिए ही पढ़ी जा रही हैं, ज्ञान के परिमार्जन के लिए नहीं ! हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतवर्ष में ज्ञान की गंगा बहाने में पंचतंत्र से लेकर हितोपदेश, रामायण, गीता और महापुरुषों के जीवनगाथा से परिपूर्ण किताबों की अहम भूमिका रही है। पुस्तकें मात्र ज्ञान के अभिवर्धन के लिए आवश्यक नहीं होतीं वरन वे हमारी कल्पना शक्ति तथा वैचारिक क्षमता में भी वृद्धि करती हैं।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि किताबें हमें एक अच्छा संचारक बनाती हैं। अपने जीवन में सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने में किताबों की बैसाखी बेहतर साथी होती हैं। किसी अन्य पर अपना प्रभाव जमाने में भी एक अच्छे संचारक को जल्द सफलता मिलती है एजो किताबों में छिपी बहुमूल्य कला है। कम्युनिकेशन शैली उतनी ही ज्यादा निखरती जाती है, जितनी ज्यादा किताबों की संगति हमारे मस्तिष्क को प्राप्त होती है। हमारी अपनी शब्दों की डिक्सनरी भी उतनी ही समृद्ध होगी जितनी उसे किताबों में समायी शब्दों की दुनिया से अवगत करा सकेगी। अधिक से अधिक किताबें पढ़ने वाला हर विषय पर अपने विचारों को बेहतर तरीके से प्रुफ करते हुए अपना प्रभुत्व स्थापित कर सकता है। लिखने की कला से लेकर हर तरह की समस्या से निपटने के तरीकों को भी हम इन किताबों से ही भलीभांति समझ सकते हैं। आज जिस तरह से हमारी वर्तमान पीढ़ी किताबों से दूर हो रही है, उससे एक भय उत्पन्न हो रहा है कि हमारी पीढ़ी को स्मृति क्षमता, कल्पनाशक्ति, विचारशक्ति, रचनात्मकता कहां से मिल पाएगी? कारण यह कि हमारे नव-निहाल अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आज मनोरंजन की दुनिया में गोते लगा रहे हैं। जीवन के समग्र विकास का मार्ग उन्हें दिखाई नहीं पड़ रहा है। जब हम पुस्तकें पढ़ते हैं, घटनाओं, कहानियों तथा उदाहरणों को पढ़ते हुए बातों को समझते हैं तो यह निश्चित है कि हम सकारात्मक ढंग से जिंदगी को देख और समझ पाते हैं।

अच्छी किताबें

हमें जीवन जीने का सलीका सिखाती हैं। इनसे हमें एक नए दृष्टिकोण की प्राप्ति होती है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि वर्तमानकाल में हमारी पीढ़ी गूगल पर ही समस्याओं के समाधन ढूढने व फेसबुक पर दोस्त बनाने में इतनी व्यस्त हो गई है कि उनके लिए बाकी सब कुछ व्यर्थ ही प्रतीत होता हूं। सामान्य मनुष्यों के अलावा अब तो वैज्ञानिक नहीं इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि हमारी भावी पीढ़ी का किताबों से दूर होना एक बड़े खतरे का संकेत है। एक शोध का निष्कर्ष भी यही बताता है कि पुस्तकें पढ़ना न केवल हमारे मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी उपयोगी होता है, क्योंकि पुस्तकों के अध्ययन से सकारात्मक विचारों की त्रिवेणी हमारे मस्तिष्क को तरोताजा कर मन को सक्रिय कर जाती है। इन्हीं पुस्तकों के विषय में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड रीगन ने कहा था...मैं कई पुस्तकों को पलटकर देखता हूँ तो लगता है कि इन्हीं की बदौलत बुराई पर अच्छाई की एक दृढ़ आस्था मुझमे पैदा हुई है। पुस्तकें न केवल हमारी कल्पनाओं के द्वार खोलती हैं, बल्कि जीवन में विकास और तरक्की के स्वर्णिम अवसर भी प्रदान करती हैं। जो व्यक्ति जितनी किताबें पड़ता है उसका सीधा प्रभाव उसकी जीवन शैली और व्यक्तित्व तथा व्यवहार पर दिखाई पड़ता है। बेशक हमारे मन-मस्तिष्क पर टीवी, सिनेमा, इंटरनेट तथा गैजेट्स अपनी छाप छोड़ते हैं, किंतु इनसे हमारी रचनात्मक शक्ति का वह विकास नहीं होता जो, किताबों में लिखी बातों को पढ़ने से होता है।

21वीं शताब्दी की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग दिन-प्रति-दिन तनाव और अवसाद का शिकार हो रहे हैं। इस परिस्थिति से हमें केवल किताबें ही छुटकारा दिला सकती हैं। किताबें पढ़ने से हमारा ध्यान एकाग्र होता है, शरीर शांत रहता है, दिमाग पढ़ने में व्यस्त रहता है। परिणाम स्वरूप इधर-उधर और फालतू की बातें सोचने के लिए हमारा मन नहीं भटकता है। बड़े-बड़े मनोवैज्ञानिकों का भी यही मानना है कि किताबें यदि हमारे हाथ में हैं तो मन को शांत एवं फ्रेश करने के लिए ली जाने वाली चाय और काफी भी फेल हैं। किताबों को पढ़ते रहने के दौरान हमारे शरीर की नसों को आराम मिलता है और आनंद का अनुभव होता है। पढ़ाई एक ऐसा औजार है जिससे हमारी कल्पनाशक्ति को नए पंख मिलते हैं। हमारी सोच का दायरा विस्तृत होता है। परिपम्ता और विस्तार के चलते हम अच्छी और सकारात्मक पहल की ओर कदम बढ़ा पाते हैं। किताबों को पढ़ते समय हम लेखक की रची हुई दुनिया में खो जाते हैं। लेखक जो कहना चाहता है, हम उसके हर शब्द में छिपे हुए अर्थ को समझने का प्रयास करने लगते हैं। वास्तव में देखा जाए तो जिस तरह हम प्रतिदिन घर की सफाई के लिए झाड़ू लगाते हैं, उसी तरह मन में जमी धूल को झाड़ने के लिए हमें नियमित रूप से पुस्तकें भी पढ़नी चाहिए।

एक सामाजिक दृष्टिकोण का अध्ययन किया जाए तो आज के युवा समाज, संस्कृति और साहित्य से दूर होते जा रहे हैं, जिसका परिणाम भविष्य में अच्छा नहीं होगा। आज की मोबाइल संस्कृति पर हम जिस भाषा का प्रयोग कर अपने संदेश अन्य लोगों तक पहुंचा रहे हैं, उस भाषा का वास्तविक जीवन से कोई सरोकार नहीं है और न ही वह साहित्य का रूप पा सकती है। मैं तो उस दृश्य की कल्पना कर कांप उठता हूँ जब किताबों से दूरी के कारण हमारी पीढ़ी आने वाले समय में पुस्तकों में समाए ज्ञान को अर्जित करने के लिए इसे एक अबूझ पहेली मानकर और दूर भागने लगेगी। वैचारिक दृष्टि से अपरिपम् और परावलंबी होने वाली इस पीढ़ी को बचाने हमें स्वयं आगे आना होगा और पुस्तकों का महत्व अन्य उपकरणों की तुलना में कहीं अधिक है इसे इस पीढ़ी को समझना होगा।

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डा. सूर्यकांत मिश्रा

न्यू खंडेलवाल कालोनी

प्रिंसेस प्लेटिनम, हाऊस नंबर-5

वार्ड क्रमांक-19, राजनांदगांव (छ.ग.)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: परीक्षा पास करने के लिए नहीं, जीवन संवारने के लिए पढ़ें किताबें - डा. सूर्यकांत मिश्रा
परीक्षा पास करने के लिए नहीं, जीवन संवारने के लिए पढ़ें किताबें - डा. सूर्यकांत मिश्रा
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