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देखो, हम ऐसे मिले हैं - काव्य संग्रह - रतन लाल जाट

1.गीत- देखो, हम ऐसे मिले हैं

जैसे फूल में खुशबू है,
सागर में मिलती नदी।
वैसे ही मोती सीप में,
और बादल में चमकती बिजली॥
दीपक की ज्योति, पूजा की थाली।
सूरज की रश्मि, चाँद की चाँदनी॥
देखो, हम ऐसे मिले हैं,
लेकर सात जन्मों के फेरे॥1

जैसे मिल गयी तोते से मैना।
या चकोर को दिखा है चन्दा॥
ऐसी प्रेम की बरसातें।
नाचे मन मीत रे॥
एक मूरत है तो एक माला।
कृष्ण-राम है तो वह सीता-राधा॥
स्वर्ग से प्यारा जीवन लगता है।
अटूट यह धागा इस बंधन का है॥2

कभी ना रात हो।
खुशियों का प्रभात हो॥
सोने-चाँदी की बरसात हो।
और सदा सावन-मधुमास हो॥
तू गजल मैं शायर हूँ
तू सुन्दर मैं पावन हूँ
एक-दूजे के बिना हम अधूरे हैं।
संग है तो समझो धरती-अंबर हैं॥3

अच्छी लगती है जोड़ी अपनी।
पक्की लगती है प्रीत की डोरी॥
कोरे कागज पर कलम है रँगी।
सच्चा प्यार है जैसे दीया और बाती॥
यही तमन्ना और दुआ है।
हर तरफ प्यारी दुनिया है॥4

विश्वास की नैया, प्रेम की नदी।
सुख-दुख की जीवनधारा में, चल रहे हम बटोही।।
आँखों का काजल है तू।
दिलों की धड़कन भी तू॥
मैं रूपवती हूँ।
मैं सिंगार हूँ॥
तुझ पर कुर्बान मैं।
तेरे प्राण हूँ मैं॥
मेरा नाम तू है।
तेरी जान हूँ मैं॥5

- रतन लाल जाट

2.गीत- यह हम नहीं जानते

यह हम ना जानते कि कौन क्या हैं?
मगर दिल की बातें बिन कहे जानते हैं॥

अब तक अनजान क्यों हैं?
जो भी कुछ कहना कह दे॥
हर दिल को बताना, कोई तो सुनेगा।
चाहत का मोल भी एकदिन तो बढ़ेगा॥
उस रब ने सबको ही जीवन दिया है।
किसी को कम कुछ नहीं दिया है॥
फिर अपनी-अपनी तकदीरें।
हैं अपने ही हाथों में॥

इस दिल के भीतर, छुपी हुई शक्ति है।
जो हर तमन्ना अपनी पूरी करती है॥

- रतन लाल जाट

3.गीत- ऐसा मेरा ये हाल है क्यों

ऐसा मेरा ये हाल है क्यों?
कोई तो बतलाये मुझको॥
एक पल भी चैन ना है क्यों?
एक पल भी मुश्किल है क्यों?

जब तक मैं उसके साथ हूँ।
तो लगता जैसे खुशनसीब हूँ॥
रंगीन नजारे और हसीन लगते।
गम सारे भूलकर खूब हँसते॥
और तब ना कोई होश है।
ऐसा लगता जन्नत में हूँ मैं॥
सौ-सौ उलझन तू एक पहेली बन सुलझाती हो।
जैसे मौत के आगे भी एक नयी जिन्दगी खड़ी हो॥

फिर क्यों ऐसा है?
जग मुझे बेगाना लगे॥
या तो दिलबर तू साथ मेरे आजा।
या मुझको तू अपने में छुपा जा॥
तेरे बिन जिन्दगी भी मौत है।
कैसे बताऊँ हाल तू जान ले।।
और कितना मैं चाहूँ।
ये तू समझती है ना क्यों?

- रतन लाल जाट

4.गीत- जी चाहता है

जी चाहता है
मैं एक बार तुझको देखूँ
मेरे वश में ना है
बताओ क्या मैं करूँ
मगर तुम मौन हो क्यूँ
दिल ये रात-दिन जलाती हो क्यूँ

हर पल ये अग्नि जल रही है।
फिर भी तन-मन छाया अंधकार है॥
आँखों से बह रही है नदियाँ।
तो भी सूख रही है बगियाँ॥
दिल में हलचल होती है क्यूँ?
मेरी जान बिन तेरे तड़पती है क्यूँ?

तेरे चुप लबों से मैंने एक कहानी पढ़ी थी।
बहुत कोशिश पर मैं समझा नहीं।।
राह नजर नहीं कुछ आ रही है।
लेकिन चला आ रहा हूँ मैं।।
बता अपना भी हाल मुझे तू।
बात मेरी ना सुन रही है क्यूँ?

मैं आहें भरता हूँ।
तेरी यादें सँजोता हूँ॥
और दिन-रात जपता हूँ।
तेरा ही नाम मैं हूँ॥
एक चेहरा नजर मुझे आता है।
दिल को वो बहुत भाता है?
उसको ही देख-देख जीता?
कभी मैं हँसता और रोता॥
हाल-ए-दिल कोई ना समझता।
दर्द-ए-दिल की ना कोई दवा॥
बाहर से लगता मैं जैसे ठीक हूँ।
वरना मैं एक पागल मरीज हूँ?

- रतन लाल जाट

5.गीत- हम कौन हैं?

हम कौन हैं? क्या कर रहे हैं?
परिणाम क्या होगा? नहीं फिक्र है॥
बस, हर बात की जिद्द है।
सब अपने वास्ते खास है॥

सारी रात ना सोयें।
सपने औरों के हम देखें॥
सदा ही दिल में दर्द कोई रखते।
एकपल भी चैन कभी ना पाते॥

कैसी मोहब्बत है? और क्या खूमारी?
इश्क एक रोग है, नहीं कोई दवा इसकी॥
फिर भी लबों पर नाम वो है।
आँखों में भी चेहरा कोई है॥

जब तक ना मिलन होगा।
सीने में एक दर्द हमेशा रहेगा॥
पता नहीं कितना तरसते हैं।
दिन-रात मिलने की कोशिशें हैं॥

खुद अपनों से हम रूठे हैं।
क्यों नहीं बात समझते हैं॥
तभी तो अब तक एक दूरी है।
जिन्दगी भी लगती जैसे अधूरी है॥

- रतन लाल जाट

6.गीत- दिन-रात तेरा ही ख्याल है

दिन-रात तेरा ही खयाल है।
तेरे सिवा नहीं कोई और है॥
बस, तेरा ही नाम जपते हैं।
खुद अपने को ही भूल गये हैं॥

तेरी बिना जिंदगी मेरी कुछ नहीं है।
एक पल भी आता नहीं कभी चैन है॥
जब तक ना अपना मिलन है।
तब तक करूँ इन्तजार तेरा मैं॥

एक मंदिर मेरा तन है।
दीपक-सा जलता मन है॥
बस तू ही एक मूरत है।
जपती साँसे तेरा नाम है॥

अब नहीं कोई दूरी रह गयी है।
आँखों में बसी तस्वीर तेरी है॥
जुड़ गया अपने बीच बंधन है।
वो ना टूटेगा लगता अटूट है॥

जीवन के इस उपवन में,
कोयल बन तू कूकती है।
कभी प्रेम की बौछार से,
यह बगिया महकती है॥

कब यह मौसम बदल जाता है?
कब छा जाती रंगीन फिजाएँ?
कभी तो दिन गुजरता नहीं है।
कभी पल में ही गुजर जाता है॥

बसंत आता है बरसों में।
और सदियों जलाती धूप है॥
कभी दिन में भी रात है।
कभी जैसे रात भी रात ना है।।

नशा प्यार का बिना पीये ही चढ़ता है।
छू जाने से ही पागल कर देता है॥
असर इसका सबको नजर नहीं आता है।
बस, दिल के अन्दर ही सबकुछ होता है॥

बाहर-भीतर एक परछाई है।
कभी हँसी कभी रूलाई है॥
खामोशी में भी छायी मुस्कान है।
भीड़ में भी लगता सुनसान है॥

- रतन लाल जाट

7.गीत- दिल के धागे

दिल के धागे बड़े नाजुक हैं।
देर ना लगती इनको टूटते॥
कब मिल गये थे?
और ना जाने कब टूट गये?

धागे कभी दिल के जोड़ना नहीं।
और जुड़े धागे कभी तोड़ना नहीं॥
धागे मिलते, तो स्वर्ग बनता है।
मगर जब टूटते, तो यही नरक हो जाता है॥

खबर ना होती प्यार में थोड़ी भी।
कब प्यार हो जाता है कहीं भी?
पता चलता तब तक दुनिया कहती है।
पागल हमको और हँसने लगती है।।
कुछ दिनों यह खेल चलता।
फिर एकदिन कोई तूफान आता॥
टुकड़े-टुकड़े दिल के कर देता है।
और खत्म हो जाती हसीन दुनिया है॥

एक पल में महकती बगिया।
उजाड़ देती है वो ज्वाला॥
फिर लगने लगता पल-पल मुश्किल है।
हाल-ए-दिल वो बयां करना नामुमकिन है।।

- रतन लाल जाट

8.गीत- धीरे-धीरे हम

धीरे-धीरे हम कितने करीब आ गये?
होले-होले दिल अपने मिल गये।।
आँखों-आँखों में बातें कई होने लगी हैं।
कुछ कहने की जरूरत अब नहीं रही है॥

एक-दूजे के संग, प्यार में हम।
बहुत ही अच्छा लग रहा है अब।।
मेरी जान है तू, तेरा दिलबर हूँ मैं।
आज कह दे तू, तो राज खोल दूँ मैं॥
प्यारी-प्यारी बातों का कितना मजा है?
मीठी-मीठी मुलाकातों का रंग कितना गहरा है?

देखो, तुमको भी कुछ यही तो नहीं कहना है?
कहो, मुझको क्यों अजब लगने लगा है?
दिल की कहानी, कब से तुमने पढ़ ली?
मैंने तो कभी नहीं फुर्सत में सुनायी थी॥
कुछ कहने की प्यार में नहीं कोई जरूरत है।
खुशबू और फिजाएँ हमको सब बतला देती है॥

- रतन लाल जाट

9.गीत- बदल गयी है रूत यहाँ

बदल गयी है रूत यहाँ।
अब ना कोई दुख रहा॥
चारों तरफ छाया नशा और खुमारी है।
मधु-मास भी सज-धज कर आज खड़ा है॥

लिखा है पेड़ों पर पत्तों में।
गा रहे हैं पंछी कई तराने।।
सुन रहा है दिल भी ईशारे।
मगर कहना है बाकी औरोँ से॥

कहीं खिले हैं फूल रंग-बिरंगे।
कहीं लदी मंजरियाँ आम के पेड़ों पे॥
सन-सनाती हवाएँ चल रही है।
रातें भी अब अच्छी लगने लगी है ॥

बीत गयी घड़ियाँ दुख की है।
दिल की पुकारें अब सुनायी दे रही है॥
खुलके मिलन के दिन ये मौसम लाया है।
फिर हमें डर क्यों और किस बात का है?

ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों पर बहती धारा में।
ठण्डी छाया में बैठे दूर कहीं अकेले॥
मिलना है अब इन्तजार नहीं होता है।
जीना नहीं बिना एकपल तुम्हारे॥

मधुमास में मधु है अब जरूरी पीना।
कब तक रहेंगे प्यासे बढ़ रही बेचैनियाँ॥
बदल गयी है रूत यहाँ।
अब ना कोई दुख रहा॥

- रतन लाल जाट

10.गीत- दीवानों को कभी ना ऐसी जुदाई देना

दीवानों को कभी ना ऐसी जुदाई देना।
कि- मिल सके फिर कभी जिन्दगी में ना।।
वो पल कितने दर्द भरे होते हैं तू जाने ना?
जब वो एक-दूजे से बिछुड़ते हैं मेरे खुदा॥

दिलों में उनको बहुत पीड़ा होती।
लबों पर हँसी कभी नजर ना आती॥
कहते कुछ नहीं आँखें सब बता देती।
चेहरे की रंगत भी बयां करती है कहानी॥
नहीं सजा देना कि- पड़ जाये जीते-जी मरना।
मौत से तो डर नहीं, डर है इस जुदाई का॥

जब तक पलकें बन्द ना हो अपनी।
एक-दूजे को बस देखते रहें सदा ही॥
दिल और जान है जब तक अपनी।
प्यार अपना कम ना हो कभी॥
अगर खुदा ने भी किसी से प्यार किया होगा।
तो प्रेम-दर्द दिवानों की तकदीर में ना लिखेगा॥

बाग में चाहे फूल सभी सूख जाये?
पर खुशबू उसकी कभी ना मिट पाये॥
वैसे ही दिलों में प्रेम की बगिया है।
जिसमें यादों के फूल खिलते हैं॥
धरती से अम्बर कभी जुदा नहीं होता।
और मिल ही जाती सागर से नदियाँ॥

- रतन लाल जाट

11.गीत- कहो प्यार में

चाहे कुछ भी कहो प्यार में,
हँसना भी है और रोना भी।
दिलों में हमेशा एक दर्द है,
लबों पर है हँसी और खामोशी॥

यादों में एक चेहरा।
आँखों से आँसू बहना॥
और अहसास दर्द का।
पल-पल जो रहता॥
वादे और कसमें,
  ना भूलने हैं कभी।
मरते दम तक ये,
प्यार मिटता नहीं॥

जीवन में आग-सी लगी रहती है।
दूर-दूर तक कोई दरिया ना दिखता है॥
सूख गया मधुवन भरी बरसात में।
धूप में भी घना अंधकार छाने लगा है॥
इतना तो विश्वास है,
बात सच्चे दिल की।
प्यार करता है तो सुन ले,
कभी ना होगी हार अपनी॥

- रतन लाल जाट

12.गीत- प्यार में क्यों ऐसा होता?

जब तुझसे बोले बिना, होना पड़े मुझको जुदा।
तब दिल होके भारी-भारी हरपल है रूलाता।।
समझ में नहीं कुछ आता।
कि प्यार में क्यों ऐसा होता॥

हालत ऐसी हो जाती।
जैसे होती है दिवानों की॥
फिर देखते हैं अकेले तुमको भी।
कि रहते हो खोये-खोये कहीं॥
तब और सताती है तन्हाइयाँ।
दिन-रात पीछा करती है परछाइयाँ॥

आँखों में सूरत एक ही बस जाती है।
दुनिया भी बहुत बेगानी-सी लगती है॥
अपनों से दूर अकेले रहते हैं।
और हरपल तड़पते रहते हैं॥
थोड़ा भी दिल को शकुन ना मिलता।
बस रहता है एक ही गीला-शिकवा॥

तभी तो मिलके भी हम मिले थे ना।
अब जुदा होकर भी एक-दूजे के साथ हैं सदा॥
और देखो अन्दाज अपने दूर होकर भी।
मिलन से भी कुछ अच्छी है दिवानगी॥
मैं ढ़ँढ़ता हूँ उसको जो मुझमें है छिपा।
मैं जानता हूँ उसको जो है अनजाना॥

मैं आँखें बन्द करके कुछ बातें करता हूँ।
और रूठकर अपनों से चुप रहता हूँ क्यों?
प्यार तो आँखें करती हैं।
लेकिन रोता यह दिल है॥
प्यार में कुछ अलग ही होता।
हजारों में एक लगता है प्यारा॥

- रतन लाल जाट

13.गीत- अगर किसी डोर की भाँति

अगर किसी डोर की भाँति,
घड़ियाँ होती इन्तजार की।

तो चन्द पलों में खींच लेता।
इस जुदाई की तन्हाईयाँ॥
जल्दी ही हम मिल जाते।
कभी ना रोते और जगते॥

मगर अब करो दुआ यही,
खत्म हो जाये दूरी अपनी।

नित रातों में सपने तुम्हारे देखता।
फिर दिनभर याद उसे मैं करता॥
अब गिन रहे हैं पल-पल ये।
कट रहे हैं दिन बरस हो जैसे॥

नजर में तस्वीर है तुम्हारी,
मिलने को तड़पाती-रूलाती।

हाथों में तीर-कमान यदि कोई मेरे होता।
तो दिन जुदाई के कभी से काट देता॥
और रूत मिलन वाली ला देते।
वो दिन बरसों तक ना गुजरते॥

मगर तकदीर कब बदलती,
रब के सामने एक ना चलती।

- रतन लाल जाट

14.गीत- हर एक छाया में

हर एक छाया में नजर आये।
बस तेरा ही तेरा चेहरा मुझे॥

बस, यूँ ही देखा करूँ।
सच है या सपना क्या कहूँ?
प्यार में पल-पल ऐसे।
हर दिन देखने को मिलते॥

जिन्दगी अजब है।
प्यार गजब है॥
बिन इसके सब अधूरे।
  जैसे हम-तुम दोनों हैं॥

प्रेम की खुशबू, सनम की सूरत।
जान की बाजी, लगाते दिलबर॥
साथ निभाते वो जीते और मरते।
मगर यारी अपनी कभी ना तोड़ते॥

हरदम चलना है इस सफर में।
कभी तो मिलेगी जीत हमें।।
कुछ बातें जरूरी और खास है।
वरना सब अपने लिए बकवास है॥

- रतन लाल जाट

15.गीत- वो प्यार करते हैं

जिससे जलते रहते।
नफरत भी खूब करते॥
फिर भी क्यों हमसे?
वो प्यार करते हैं॥

हररोज करते झगड़ा,
फिर भी वो मनाते।
क्या करें अब कोई बताये?
कभी ना वो साथ छोड़ते॥
मैं दू-दूर जाता हूँ,
वो पास-पास आते हैं।
जैसे कोई चुम्बक हो,
ऐसे खींच लेते हैं॥

करते हैं वो फिक्र हमेशा क्यों अपनी?
कर देते मना, फिर भी क्यों समझते नहीं।
पता नहीं इसमें किसकी जीत और हार है?
फिर भी कोशिश दिन-रात करते रहते हैं॥
आँखें देखो, प्यार बरसाती।
जैसे प्रेम की बौछार करती॥
हाथ पकड़कर धीरे-से चूम लेते।
कुछ सोचें उसके पहले बाँहों में गिर जाते॥

होले-होले जादू चल रहा।
ना जाने कैसे दिल खो रहा?
हाय! अब दिल पल-पल जलता है।
संग उनके जीने को तरसता है॥
बेवफाई छोड़ वफा कुछ होने लगे हैं।
फिर भी वो क्योँ नहीं बेवफा हुए हैं?
आते-जाते दिल हरकत करते।
कभी-कभी अजीब-सी हलचल करते॥

दिल में उनके भी कुछ होता है।
नशा खुशबू-प्यार, रंगीन चाँदनी रातें॥
आँधी-तूफां हररोज आते।
बादल-बिजली चमक बरसात लाते॥

- रतन लाल जाट

16.गीत- सोणी-सोणी धरती है

सोणी-सोणी धरती है, हरी-भरी चुनरिया।
सौंधी-सौंधी खुशबू ये, नाचती कोई दुल्हनिया॥

गीत गाती है, झूमके थिरकती है।
दुख ले जाती है, नगमें भरती है॥
रंगों में तू रंगी है, सतरंगी बनके।
गुलशन-सी खिली तू, जैसे चमन महके॥
सेज सजाये बैठी है, फिर रही है घूमरिया।
इन्तजार की ये, गुजर रही है धीरे-धीरे घड़ियाँ॥

पायल नदियाँ छम-छम बजाये।
ढ़ोल-मृदंग झरना मीठी धून सुनाये॥
गीत पंछी दिल खोल गुनगुनाये।
सारे जन्तु झूम-झूमकर नाचे॥
चल रही है हवाएँ, मधुर-मधुर पुरवइया।
मादकता घुल गयी ये, अपने अंग-अंगना॥

कितना भोला है वो इधर-उधर ढ़ूँढ़े?
तुम जन्नत देखो, वो यहीं पर है॥
रंग सब एक हैं, मगर यहाँ पल-पल बदलते।
सुख-दुख भी जीवन में, संग-संग है चलते॥
तन-मन पे छायी है, नयी-नयी हिलोरां।
रग-रग में उमड़ने लगी ये, अजब-सी लहरियाँ॥

- रतन लाल जाट

17.गीत- मेरे लबों की हँसी

मेरे लबों की हँसी, हवा हो चली।
जबसे हम-तुम में, खता हो गयी॥

दिल में है शोला, दिन-रात दहकता।
नींद में भी जागा, खयालों में रहता॥
पल-पल दिल मचल।
खुल-खुल बेचैन नयन॥
अब तो मुश्किल में है, जीने की घड़ी।
कितने दिनों बाद जुड़ेगी, फिर कड़ी॥
न जाने कब साँसें आयी कि थमी……

कँवल पत्ते मुरझा गये।
तन-मन सुर्ख हो गये॥
हाल अपना कोई और ना जाने।
चाहे सबको बताना मगर ना चाहे॥
ऐसी सजा है जो फाँसी से भी भारी।
रब करे यह मीठा जहर कोई ना दे कभी॥
जिन्दगी है ना जिन्दगी वो मौत बनी……

- रतन लाल जाट

18.गीत- कभी जन्नत लगती है

कभी जन्नत लगती है।
कभी सुन्दर दिखती है॥
दुनिया बड़ी रंगीन है।
कभी सुबह तो शाम है॥

किसी पल हमको,
मिल जाते हैं अपने।
अपनों से मिलकर हम,
भूल जाते गम हैं।।
कभी हँसते लबों की,
हँसी अपनी ले जाते।
हालत एक पल में ही,
दिल की नाजुक कर देते॥

रस्में-कसमें रंग भरती है।
जिन्दगी को रूप देती है॥

दिल लगा बैठे थे जो,
दिन-रात रोते हैं वो।
जुदाई में खुद ही खुद,
खो जाते हैं तन-मन।
एक मुस्कान ने, धोये सारे रंग।
इस खुमारी ने दिये हैं, कई जख्म॥

यही तस्वीर बनती है।
हर सूरत दर्द कहती है॥

- रतन लाल जाट

19.गीत- तुमने ही हमको हँसाया

तुमने ही हमको हँसाया,
और तू ही रूलाता।
मिलन की आयी है घड़ियाँ,
और गीत सुनाये जुदाई का॥

दिल को ना मेरे होश है।
जान देगा वो उस पे॥
अमृत पीया है।
जहर भी पीना है॥
तभी तो प्यारे सजना,
यह ईश्क कहलायेगा।

फूलों पर चलने वालों काँटों से ना डरो।
खुशबू में ही तुम अपने भूल बैठे हो॥
बात दिवानों-सी करते।
हर हाल में जीना चाहते॥
यदि मिलन है आशा,
तो जुदाई भी ना भूलना।

वसंत के पहले छा जाती है बहारें।
फिर होती है प्रेम की बौछारें॥
कभी एक-से हालात रहते नहीं।
हम-तुम कभी तो मिलेंगे सही॥
फिर जिन्दगी में क्यों खफा,
सुख-दुख तो आता-जाता।

खिला है जो फूल मुरझायेगा।
सूरज ढ़लकर फिर उगेगा॥

सोचो, जब हाल सबका ही ऐसा होना है।
तो क्यों सुख-दुख का रोना है॥
इसमें ही जीने का,
मजा अलग आयेगा।

- रतन लाल जाट

20.गीत- कितनी तेरी चुनरिया भीगी

कितनी तेरी चुनरिया भीगी?
कितनी तेरी गगरिया फूटी?
फिर भी तू क्यूँ ना बरसी?
दिल अपना रह गया खाली॥

सावन के बादल तो बरसकर चले गये।
बसंत की बहार के दिन चार भी बीत गये॥
रोकने की कोशिश की पर हार गये।
हम भीगे ना खिले बस इतना याद है।।
वो टपकती बूँदें तेरे भीगे केशों की,
मस्त बहार उड़ते तेरे आँचल की………॥

तेरे लबों की हँसी प्यारी है फूलों से भी ज्यादा।
तेरे गालों की कोमलता में कलियों-सी है नाजुकता॥
नशीली है तेरी आँखें और बलखाती कमर है।
हिरणी और कोयल जैसे तू मेरी सबकुछ है॥
मेरे दिल की बगिया है सूखी,
सींचे नैनों से लगी झड़ी………॥

- रतन लाल जाट

21.गीत- तेरे ही ख्यालों में

चलता रहा हूँ मैं अब तेरे ही खयालों में।
जगता हूँ मैं अब संग तेरे ही सपनों में॥

एकपल भी रह नहीं सकता हूँ अकेले।
जीने-मरने से भी नहीं कुछ डर है॥
कभी ना दिन ऐसे आये नसीब में।
कि कभी मुझको उससे बिछुड़ना पड़े॥

कि- एक-दूजे के बिन।
दिन निकले गिन-गिन॥
टूट ना जाये दिल।
कभी ना पाये मिल॥
रहता हूँ मैं दिन-रात इन चिंताओं में…….

आँखों में बसा लूँ,
बाँहों में छुपा दूँ।
कर दे इतना तू,
होले-होले इशारा यूँ॥
कोई भी ना देख ले हमको राहों में…….

- रतन लाल जाट

22.गीत- करता है जो बार-बार

करता है जो बार-बार
कोशिशें वो हजार।
हासिल है उसको यार
जीत एक नहीं कई बार॥
तुम भी बढ़ाओ, कदम अपने।
दिल में जगाओ, जोश नये॥

ऐसा कोई काम नहीं,
जो कर सको तुम नहीं।
पेड़ों पर चढ़के उतरना।
खेल अपने बाँये हाथ का॥
पहुँचेंगे एकदिन हम आसमां।
साथ दे यार अंत तक अपना॥
लाख कठिनाई को, हल कर दें………

चलते रहना ही नाम है जिन्दगी।
रूक जाना तो समझो मौत अपनी॥
गिरते हुए को हाथ अपना दो।
मरते हुए को जीवन नया दो॥
यही सबका सपना।
यही है धर्म अपना॥
कभी ना हो, शिकवे दिल में………

- रतन लाल जाट

23.गीत- काहे को तू खफा है मुझसे

काहे को तू खफा है मुझसे?
करती हो क्यों इतना गुस्सा मुझपे?

दिल अपना यूँ ही जलाती हो।
पल-पल इस आगि में तपाती हो॥
गुस्सा छोड़ो, प्रेम से देखो।
रोना-धोना भूलो, हँसना तो सीखो॥
तेरे बिन जीया नाराज है खुद से………

मैंने तो तुम्हें फूल समझा था।
कब मैं तेरी राहों का काँटा था?
खून से तुझको सींचा।
कभी ना सूखने दिया॥
फिर काहे को तू रूठती है हमसे………

हम से तुम रूठ गये तो
जीते जी मर जायेंगे समझो।
खिला था जीवन अपना जो
खड़ा है अब उजड़ने को॥
प्रेम की कर दो बरसात ये हमपे………

- रतन लाल जाट

24.गीत- दर-दर भटकूँ मैं

दर-दर भटकूँ मैं, मन्नत माँगूँ तेरे लिए
अकेले में पुकारूँ तुझे, दिल ना लगे बिन तेरे

नींद ना आये, याद ही हरपल सताये
चेहरा है आँखों में, नाम तेरा ही लबों पे
क्यों हुए हम जुदा रे? दिल बार-बार पुकारे

जैसे मेरी दुनिया है तू
बस, तुझमें ही समाया हूँ
मेरा अपना कुछ नहीं है, तू ही सब कुछ है

दिल को चैन ना, ना तड़प हुई कम
हाल बुरा है लेकिन, तेरा ही हमको गम
कब तक करूँ इन्तजार मैं, दिन बड़ी मुश्किल से निकले

- रतन लाल जाट

25.गीत- झगड़ा करना, फिर गले लगाना

आँखों का मिलना, चेहरे का खिलना।
गुस्से से देखना, हँसके फिर बोलना॥
झगड़ा करना, फिर गले लगाना-२

तड़प दिल में है अपने।
दुनिया से खफा दोनों है॥
इक रूठ जाता, दूसरा मनाता।
इशारे करना, फिर समझाना………

कभी ना हम दूर जाते।
जुदा होकर भी मिलते॥
यादों में आते, सपनों में जीते।
विश्वास करना, वादा निभाना………

जो भी माँगें वो दे दूँ।
जो भी गम हो वो ले लूँ॥
हर बात पर है हामी।
फिर किस बात की है खामी॥
शरारत करना, फिर रूठ जाना………

इक-दूजे के बिन क्या जीना?
लगता है जग सारा ही सूना॥
दिल की बात कहो ना, दिल से अपनी सुनो ना।
कसमें याद रखना, सब रस्में पूरी करना………

मीठा-मीठा है प्यार।
कभी नशा है खुमार।।
साथ देना, हाथ थामना।
सच कहना, बातें सारी बोलना………

- रतन लाल जाट

26.गीत- कल जो कही थी बातें

कल जो कही थी बातें
आज वो फिर कहना है।
दिल के अरमां बाकी है
वापस हमको मिलना है॥

हाथ थामके साथ चलने का
मन करता है क्यों मेरा?
रूकना है हमको अब कहाँ
एक नया जहाँ हो वहाँ॥
दिल अपना ऐसा करता है………

तुझमें ही मैं समा जाऊँ
या मुझमें ही तुम्हें बसाऊँ।
कभी ना तेरा साथ छोड़ूँ
चाहे दुनिया मैं आज ही खोदूँ॥
अब नहीं हमको डरना है………

ऐसा लगता है जैसे जन्नत
बिना तेरा नहीं है रौनक।
तुझसे ही है मेरा जीवन
बिन तेरे कहानी खत्म॥
बाकी है जो लिखना है………

पूरे करने हैं सपने वो
साथ देखे थे हमने जो।
छुप-छुप मिल रहे हैं क्यों
चुप-चुप प्यार करते हैं क्यों?
हमको तो ऐसा ना करना है………

सूरज निकलने से पहले साथ हम
दिन ढ़लने के बाद भी हैं पास हम।
एक-दूजे के बिना है गम ही गम
मुश्किलों में भी प्यार ना होता कम॥
रब से यह दुआ माँगना है………

- रतन लाल जाट

27. किताबें खोलूँ तो

किताबें खोलूँ तो तेरा नाम दिखे,
किसी से बोलूँ तो तेरा नाम आये।
जहाँ भी देखूँ मैं तू ही तू दिखे,
कहीं भी जाऊँ मैं तेरी याद आये॥

हर चेहरे में सूरत तेरी दिखती है।
बिन तेरे जिन्दगी ठहरी लगती है॥
अगर तुम ना साथ मेरे होते,
तो दिन-रात रहते तुझमें खोये।

अपने हमको हँसाने की कोशिश करते हैं।
पर हँसने की जगह उनसे ही खफा हो जाते हैं॥
कोई भी जीवनभर हमको वो खुशी ना दे पाये,
जो तुम हमको एकपल में ही दे जाते।

सपनों में परियों के बीच तू है।
खयालों में लहरों जैसे तू है॥
तेरी इन तरंगों में हम डूब जाये,
कभी पार करके दूर जाना ना चाहे।

काँटों में खिलते कँवल को पाना है।
राहों में कभी ना किसी से डरना है॥
मौत भी हमको रोक ना पाये,
जब तक वो ईशारा ना कर जाये।

- रतन लाल जाट

28.गीत- यारी तुम निभाना

यारी तुम निभाना जैसे- श्रीकृष्ण ने निभायी थी।
सालों गुजर गये, फिर भी मिलन की इच्छा अधूरी थी॥

एक राजा बन गया, पर बिसारा तक नहीं रंक मीत को।
सुध-बुध अपनी गँवा, सुदामा दौड़े प्रभु सन्देश पाके वो॥
यही नाता मानवता का, जो कभी टूटता नहीं।
टूटता है वो रिश्ता, कभी रिश्ता कहलाता नहीं॥

आँखों से लगी आँसू की झड़ी, कभी ना एक पल थमी।
जान की भी परवाह नहीं, फिर क्या है हीरे-मोती॥
देखते ही एक-दूजे पाँव कभी रूके नहीं।
आते ही पास गले लगाने को बाँह फैल गयी॥

ऐसा लगा जैसे चाँद निकला, चाँदनी पसरी गगन से।
अब तक मुरझाया था चेहरा, खिला जैसे फूल बसंत के॥

एकपल भी दिल से तेरी लगन कभी ना गयी।
हजार खुशियाँ भी तेरा गम भूल कम कर ना सकी॥

दोस्ती के रंग है कुछ ऐसे गजब के।
कभी बातें खट्टी तो मीठी मुलाकातें॥
मरने तक कभी छुटती नहीं है यारी।
कोई भी अपनों को जुदा कर सके नहीं॥

- रतन लाल जाट

29.गीत- कभी ना करे जीया मेरा

कभी ना करे जीया मेरा
संग छोड़के जाऊँ मैं तेरा।

तुझमें ही मेरी दुनिया बसी
बिन तेरे है दुनिया कैसी?
सब कुछ मैं भूला दूँगा
पर तुम ना ठुकराना।
जग तो मुझको तड़पाता
पर तुम ना कभी रुलाना।।

अपनों-परायों ने कभी समझा नहीं
जो ना अपना-पराया जानेदिल है वही।
जिस दिल में छुपा है, प्यार अपने लिए
सपने भी आँखों में, है किसी के लिए॥
उससे जुदा कभी करे ना
खुदा तू इतना तो बुरा है ना

दरिया में डूब जाऊँ
आगि में जल जाऊँ।
मेरा जीवन रोशन जिससे
वो बात्ती-दीया तू है।
सब कुछ तेरा है या
तू ही है जीवन मेरा

- रतन लाल जाट

30.गीत- मिलना तो नसीबों की बात है

मिलना तो नसीबों की बात है।
वरना जग में कहाँ आसान है?

कोई बरसों तक साथ हमारे हैं
मगर वो नहीं लगते अपने हैं।
कभी वो मिले थे एकपल के लिए
देखते ही अपना मान लिया दिल ने।।

दिल की बात कैसे समझे कोई
समझाने पर भी ना समझे कोई।
सब कुछ रब के हाथों लिखा है।
जाने-अनजाने में यही होना है॥

जब तुमको देखा तो,
लगा जैसे दिल के मेहमान हो।
हम-तुम पहले ना मिले थे,
फिर भी लगा कि बरसों से जानते।

इतने दिन हुआ ना मिलन अपना,
अब हुआ तो ना हो कभी हम जुदा।
जन्मों से कोई तो साथी अपना है।
धरती पर नाम बहुत रिश्ते का है॥

चाहे मिलना अपना,
कभी-कभी ही होता।
मगर दिन-रात सदा,
लगता है साथ तेरा॥
सबसे प्यारा, सबसे न्यारा,
रिश्ता अपना, नाम दें क्या?
जगवाले हमको कभी ना समझते।
पहरा लगाते कभी मिलने ना देते॥

दिल में छुपा लूँ,
सीने से लगाऊँ।
आ गले मिल तू,
बाँहों में भर लूँ।
गोद में तुझको उठाके
प्यार से चूम लूँ मैं।
धरती-गगन संग चाँद-सितारे।
प्यार एक ही सिक्के का पहलू है॥

- रतन लाल जाट

31.गीत-अपना भी कभी अपना नहीं होता

अपना भी कभी अपना नहीं होता।
फिर पराया क्यों अपना होता?
जिनके साथ रहते दिन-रात।
खाते-पीते सब उनके संग-साथ॥
फिर भी ना समझते हैं वो बात।
कि दिल में अपने क्या है छुपा राज?
जैसे एक सपना है, पलभर मिलना है।
नहीं वो पास है, फिर भी क्यों खास है?
कैसे पता है? हाल-ए-दिल अपना,
नहीं बताया फिर कैसे मालूम होता?

- रतन लाल जाट

32. कितना भी समझाओ?

कितना भी समझाओ?
दिल समझता नहीं है।
कितनी ही कोशिश करो?
पर हार ही मिलती है।।
इस दिल के आगे
एक ना किसी की चलती है।
सब इसके पीछे
हाथ जोड़े रहते हैं।।
दिल ने जो चाहा है,
वही यह करता है

ये ना किसी की मानता है।
कहने से भी ना सुनता है॥
इसकी बातें बड़ी अजब-सी है।
कोई ना करे जो यह करता है॥
प्यार में जगता है रात-रात भर
सुख भी लगता है दुख और गम
उसके हँसने से हँसते हैं सब
रोने से उसके रोते हैं हम।
लगता हमको उसके बिन,
जैसे कि हम अधूरे हैं सब।
जब दिल ना अपना साथ देता है।
और नैनों में कोई और रहता है॥
तब कहना हम ना किसी का मानते हैं।
ना सुनते कभी किसी की एक है॥
सबका वो सरदार है,
रब भी उसका कहा सुनता है।
     
लाख पहरे लगाकर भी,
दिल को कोई रोक पाया नहीं।
डरकर ना छिपता है कभी,
बस चलता रहता है हरघड़ी।
दिन-रात बस जलना और जलाना
सबकी सुनना और अपनी सुनाना।
सपने सँजोना, वादे करना
जीतना ना कभी हारना॥
दुनिया की सब खबर है
इस दिल को मालूम है।

- रतन लाल जाट

33.गीत- दिल को

दिल को नहीं बदलना आसान है।
चाहे जो भी दो उसे बड़ी सजा है॥
दिल नहीं डरता है।
ना ही वो हारता है॥

कानून नहीं कोई मानता।
अपनी मरजी से चलता॥
कौन इसे रोक पाये?
कभी ना यह रूकता है॥
ये तो है राजा अपना।
ना गुलाम है किसी का॥
यह कब जागे कब सोये।
कोई नहीं जानता है।।

इस दिल की दुनिया में हैं रंग सातों।
कभी खुशी तो है कभी गम साथ दोनों॥
दिल को दिलदार प्यारा है।
उस पर जान गँवारता है॥

बात इसकी समझकर।
फिर उठाना तुम कदम॥
चलना दिल के आगे।
कभी नहीं मुमकिन है॥

- रतन लाल जाट

34.गीत- दिल में जिसकी तस्वीर है

दिल में जिसकी तस्वीर है।
हर जगह नजर वो आती है॥
प्यार जिसे भी हुआ है।
लगती उसको दुनिया प्यारी है॥

अगर कलम उठाये
तो नाम उसका लिख जाता है।
जब कोई पुकारे
तो लगता कि उसने पुकारा है।।

किताबों के हर पन्नों पर
और बाजार में चिपके पोस्टर पर चेहरा उसका है॥
ऐसा लगता कि मेरा प्यार
सबको ही लगने लगा वो प्यारा है॥

जब कोई उसको प्यार दे
तो दिल अपना घबराये।
और कोई उससे बात करे
तो भी गुस्सा हमको आये॥

हर वक्त तड़प है।
पल भर ना चैन है॥
और सपने में भी साथ है।
कभी ना मुझसे दूर जाये॥

- रतन लाल जाट

35.गीत- चाँद पूनम की तरह

चाँद पूनम की तरह
दिल के आकाश पर-२


अपनी आभा से तुम
जगमगाते हो प्रतिपल
मिट जाता है निराशा तम
हो जाती है खुशियाँ रोशन

चारों ओर तेरा ही साया
जहाँ भी देखो चेहरा नजर आया
अब नहीं है जरूरत यहाँ
किसी को जलाने की बतियाँ

डगर भूलने का नहीं है डर
अब आता है सब साफ नजर
बेखबर हो निडर हम
बढ़ाते है आगे अपने कदम

- रतन लाल जाट

36.गीत- प्यार में

प्यार में लोग जगते हैं ना सोते
सभी दिलवाले जीते हैं ना मरते
प्रेम से बढ़कर ना कोई दौलत है
दिल से बड़ी ना कोई चीज है

मोहब्बत से रंगीन कोई फूल नहीं
प्यार से हसीन कोई चाहत नहीं
दवा तो बहुत है तन के रोगों की
दिल की दुनिया में लाइलाज है सभी

मिल जाये दिलदार तो काम संजीवन का करे
कोई तड़प दे जाये तो बेचैन दिल को सुकून दे
एक पल में सौ-सौ बार रोते हैं
सात जन्म भी ना साथ छोड़ते हैं

- रतन लाल जाट


37.गीत- दिल ये

दिल ये तुझको बार-बार है बुलाता।
आँखों ने भी तुझे इधर-उधर तलाशा॥
सब कुछ लग रहा है अब बदला-बदला।
कुछ भी नहीं दिल को भा रहा तेरे बिना॥

आसान नहीं है देखना एक-दूजे को।
बात करना भी है मुश्किल अब तो॥
लग रहा जैसे हम जुदा हो गये।
मानो अब कभी ना मिल सकें।।
फिर भी सदा ये दिल है तुम्हारा-२

जब याद बहुत आती है तो आँखें बन्द लेते।
दिल ही दिल में तुमसे बातें कर लेते॥
प्रेम पल में कोसों तक जाता है।
जंजीर भी इसे बाँध ना पाती है॥
और रिश्ता ये कभी ना टूटता-२

दुनिया इस प्यार को दूर ना कर सकती।
मौत भी अब इसे कभी रोक ना सकती॥
दिल की ये सदाएं हर तरफ है गूँज रही।
फिर भी ये दुनिया क्यों ना सुन रही।।
मिलन तो एकदिन होना ही है अपना-२

- रतन लाल जाट

38.गीत- तेरे लिए जीना है

तेरे लिए जीना है
तेरे बिन मर जाना
एक पल चैन ना है
अब मुश्किल है जीना

तुम मुझसे जुदा हुए तो
हम मर जायेंगे
ऐसा ना कभी खुदा करे
वरना टूट जायेंगे
बस मैं इतना ही कहूँगा

देखके सूरत तेरी
मिलती है खुशी
रब के जैसी ही
लगती है प्यारी
फिर कैसे मैं चाहूँ ना

- रतन लाल जाट

39.गीत- ये रात हमको लगती

ये रात हमको लगती
एक नागिन के जैसे।
जो हरपल दिल में
डसती रहती है॥

इसको प्यारे आँसू
सबको तड़पाती है।
इंसान को दर्द से
सोने ना देती है।।
जिसके मन में विश्वास ना।
जीवन में उसके प्यार ना॥
वो इस चोट से
टूट ही जाता है।

कुछ ना भाता है,
ना दिल लगता है।
सब सूना-सूना है,
कोई ना प्यारा है॥
ऐसी हालत हो जाती
जोर ना चलता है।

- रतन लाल जाट

40.गीत-आँखों में आँसू पहचान लो

आँखों में आँसू पहचान लो,
प्यार की छुपी कहानी जान लो।
चेहरा तुम देखते हो क्यों?
यार दिल के अन्दर झाँक लो॥

प्यार में अकसर यही होता है।
पहले होता झगड़ा फिर ईश्क होता है॥
ईश्क की बातें, सब समझते नहीं।
भीतर ही लिखी है सारी कहानी॥
प्यार में नींद ना क्यों,
जागे भी सोये लगते हो।

प्यार है तो गम भी गम ना लगता है।
वो नहीं तो हर सुख गम लगता है॥
मालूम नहीं, अपना हाल कैसा है।
हम करते उसकी, सार-संभाल है॥
हर खुशी मिले उसको
अपनी नहीं है फिक्र हमको।

अब लगता है अपना भी पराया।
और वो लगे जान से भी प्यारा॥
इसके आगे कोई ना जीता।
जो सबसे बड़ा है वो हारा॥
इस प्यार में देखो
कितना जादू  है जो?

- रतन लाल जाट

41.गीत-प्यार करके तू निभा यारी

प्यार करके तू निभा यारी।
संग चलके तू बढ़ा गाड़ी॥
तोड़ ना कभी ये डोरी।
प्यार की हथेली है कोरी॥
 
आगे बढ़ूँ जब हाँ हो तेरी।
बहुत हो गया अब ना कर देरी॥
आज सपनों में है दीवानगी।
होश खो रही है पागल जवानी॥

कोई चमन ना उजड़े।
प्यार को प्यार मिले॥
अपने खातिर तबाह ना हो जिन्दगी।
फूल खिले बगिया हो हरी-भरी॥

दुख में तू भाग ना।
सुख उसे भूल ना॥
कहानी अपनी है नयी।
जब दिल से है दोस्ती॥

- रतन लाल जाट

42.गीत- एक लड़की मेरी

एक लड़की मेरी, जान से आ खेली।
पास आकर उसने आँख है लड़ायी॥
चुराके ले भागी दिल मेरा दिवानी।
वो आयी ईश्क की दवा पिलायी॥

पागल कर गयी, वो मतवाली।
एक लड़की मेरी, जान से आ खेली॥

दिल खोलकर वो बातें करने लगी।
धीरे-धीरे दिल में मेरे उतरने लगी॥
अब दुनिया अपनी वो बन गयी।
जन्मों का नाता जोड़ गयी।

जाने कहाँ गयी, खोज करूँ हरकहीँ।
एक लड़की मेरी, जान से आ खेली॥

क्यों मुझसे दूर गयी?
क्यों मेरा दिल ले गयी?
कब मिलेगी? प्यार करेगी।
पता नहीं कितना चाहेगी?
शायद वो बातें भूला गयी।
नींद मेरी रातभर उड़ा गयी॥

यादों में समायी है तस्वीर उसकी॥
एक लड़की मेरी, जान से आ खेली॥

- रतन लाल जाट

43.गीत- ओ नखरेवाली!

ओ नखरेवाली!
तेरी आँखें हैं काली-काली।
करती हैं बातें दिलों की।।

आ जा आग बुझा दे।
जो कब से लगी है॥
बता दे तू कौन है मेरी?
ओ नखरेवाली!

सारे जहाँ में तू बसी।
सबकी नजर में छायी॥
जता दे क्या है मर्जी तेरी।
ओ नखरेवाली!

कहाँ धरती? है कहाँ आसमां?
हमको लगता है सबकुछ यहाँ॥
आँचल तेरा है धरती।
सिर है आसमां जैसा ही॥
कह दे तू बातें दिल की।
ओ नखरेवाली!

होश मेरे उड़ा गयी।
पागल वो कर गयी॥
कहाँ तू जा छिप गयी?
कहाँ पर करें खोज तेरी?
पता अपना लिख दे चिट्ठी ।
ओ नखरेवाली!

चलता है जादू, जहाँ भी देखूँ।
यहाँ-वहाँ हर कहीं,तुझको ही पाऊँ॥
जादू यह तुम ना हो जानती।
ओ नखरेवाली!

रहते हम जहाँ भी है।
लगता कि- तू संग है॥
लहराते तेरे बाल हैं।
चमकते नयन हैं।।
और बाँहें है फैली-फैली।
ओ नखरेवाली!

इंद्रधनुष बनता है चुराके सात रंग तेरे
बादल और बिजली दिल का हाल कहते हैं।
प्यार की इस बारिश में खूब रहे
फिर भी हम ना अब तक हैं भीगे।।
इसका राज समझा दे प्यारी।
ओ नखरेवाली!
- रतन लाल जाट

44.गीत- अम्बर कहता

अम्बर कहता,
धरती बिन नहीं जीना।
अपना साथ है सदा,
कभी ना जुदा होना।।

जैसे फूलों में खुशबू रहती है
और बगिया खूब महकती  है
वैसे ही दिल में तू रहती है
एक भी पीड़ा नहीं सताती है

धड़कन में बसी तू,
आँखों में तस्वीर तेरी।
बनी है जिन्दगी तुझसे,
तुम बिन हर खुशी अधूरी॥

- रतन लाल जाट

45.गीत- जिसकी बातें करते कभी ना थकते

जिसकी बातें करते कभी ना थकते।
देखके उसको हम फूला नहीं समाते॥
पल-पल करके दिन संग उसके बीत जाये।
पता नहीं कब सवेरा साँझ में बदल जाये॥

हम-तुम संग है, तो जन्नत से भी प्यारा संसार है।
दिल में कभी प्यार कम नहीं होता जब तक साँस है।।
उसने बाँहों में अपने जुल्फें है फैलायी।
जाने किस सपने में सोकर खो गयी।।

जब दूर जाने को वक्त कहता।
तब दिल और भी पास  रहता॥
खुद थोड़ा तड़पता, उसको समझाता।
बहुत मुश्किल काम करना हमको होता।।

भोली-भाली सूरत, प्यारी-प्यारी आँखें।
दिल में है अपनी दुनिया, कई सारी बातें॥
गले लगाकर बातें वो सारी भूला देती।
इशारों में ही हाल अपना कह देती।।

बिन उसके ना मौत है।
ना ही है जिंदगी अपनी॥
एक डोर में बंधा रिश्ता।
कभी ना टूटे ये धागा॥

- रतन लाल जाट

46.गीत- प्यार तो होकर रहता

प्यार तो होकर रहता।
दुनिया से कब डरता?
आँखों में सहसा पनपता।
धीरे-धीरे दिल में बढ़ता॥

प्यार में एक जादू है।
किसी का नहीं काबू है॥
जिन्दगी में रंग भरता।
बाग-बाग हो जाती दुनिया।।

प्यार अमर है, सदियों रहता है।
हरपल जगता, कभी ना सोता है॥
दिल की दुनिया हसीन लगती।
हर मुश्किल आसान हो जाती॥

इसके आगे झूक जाती दुनिया।
काल भी रहता है डरा-डरा॥
प्यार के बिन दुनिया है बेगानी।
प्यार के संग जन्नत की मस्ती॥

प्यार खुदा है, सबसे बड़ा है।
प्यार में कोई ना पराया है॥
प्यार से बड़ी कोई, दौलत नहीं है।
सबसे प्यारी दास्तां इसकी है॥

- रतन लाल जाट

47.गीत- ओ सजना

ओ सजना, ओ सजना।
कर लो ना, मुझसे प्यार यारा॥

आँखें मिली, कुछ बातें हुई।
फिर देखा, एक सपना।
बिन कहे, सब जान लिया॥

प्यार की एक अजब कहानी है।
मिलन की आयी कठिन घड़ी है॥
आँखों से, झलके प्यार।
देख रहा , मैं चुपचाप॥
दिल में हैं छिपे अपने अरमां।

हर किसी को मिलता नहीं।
इस दुनिया में अपना कभी॥
कई जन्मों की मुद्दतों के बाद,
मिलता है जीवन में एक साथ।
एक-दूजे के नाम, सबकुछ भूल गया।

- रतन लाल जाट

48.गीत- जब प्यार

जब प्यार आँखों के बसा हो।
और बात कभी ना अपनी हो॥
तब हाल-ए-दिल कैसे  बयां हो?

प्यार चाहता है, संग अपना।
पल-पल देखता, एक सपना॥
प्यार के आगे, कुछ भी नहीं है जहां।
प्यार से अच्छा, जन्नत भी होगा क्या?
दुआओं में माँगा नया संसार हो

दिल सदा ही चाहे।
कभी ना दूर जाये॥
जिन्दगी भर, साथ रहे।
चाहे सब, आज ही जायें॥
यह आरजू हर एक दिल में बसी हो

भले ही मर जायें।
तुम्हें ही सदा चाहें॥
दिन-रात रोये।
मगर पल ना जीये॥
दिल से निकली यह पुकार हो

खुदा भी तू है, दुनिया भी तू है॥
दूर तुमसे बता, कैसे जाऊँ मैं?
नाम तेरे लिख-लिख मर जाऊँ।
या सबकुछ तेरे नाम कर जाऊँ।।
ऐसी धून प्यार में सबके  लगी हो

- रतन लाल जाट

49.गीत- कैसे भला तुम आये?

कैसे भला तुम आये?
कैसे भला हम आये?
पता नहीं क्या बतायें?
दिल अपने क्या चाहे?

मिलना नसीब में था।
हमने कभी ना सोचा।।
ना ही कोई सपना देखा।
मिलन अपना ऐसा होगा।।
कितने खुशनसीब हैं, जो हम मिल गये

भूल गये हम, अपने सारे गम।
एक नयी दुनिया में, जन्में हैं दुबारा॥
चलो, दिल की बात सुनें।
देखो, आँखें ये क्या कहें?
एक-दूजे को, दिल कब पहचान गये

- रतन लाल जाट

50.गीत- याद सताती है

जाने फिर क्यों उनकी याद सताती है?
जिन्होंने ही दिल की दुनिया उजाड़ी है।।
अपनों के संग रहकर भी दिल लगता नहीं है।
पल-पल तड़पता मन खोया-सा कहीं है।।


वो भी क्या अपने हैं?
जो हाल दिल का ना समझे॥
इस दुनिया में कौन अपना है?
जो हर बात पर अहसान जताये।।


कभी ना मुझसे कुछ माँगा।
जान-ओ-तन अपना दे डाला॥
ऐसे इंसान को भला मैं कैसे?
निकाल पाऊँ अपने दिल से।

- रतन लाल जाट

51.गीत- होली संग

होली संग गली में,
टकराये हम तुमसे।
रंग लगाये फिर,
तेरे गालों पर
रंग-बिरंगे।
और सजने लगे
सपने अपने
पल-पल दिल में।
भीग गये हैं,
तन-मन अपने।।

मन में एक आग सुलगी।
फिर जोर से बरसात हुई।।
तो बरसों बाद, सोया प्यार।
जाग गया, मेरे यार।।
दिल के सारे गम मिट गये।
बस, हमको ये प्रेम-रंग लुट गये॥

इन रंगों से प्यार हो गया।
दिल में तूफान जाग उठा।।
देखो, सब मस्ती से
मदहोशी में झूम रहे।
दिल की धड़कनें
प्यार की धून गा रही है।
ऐसे में भला कोई रोके,
तो खुद को कैसे रोके?

हर दिल प्यार माँगें।
चाहे आँखों में बसाले॥
बस करे इशारे।
जो दिल ही जाने॥

- रतन लाल जाट

52.गीत- प्यार में दिल

प्यार में दिल दो धार पे चलता है।
चाहकर भी वो दूर ना होता है॥
खुद मरकर भी औरों के लिए जीता है।
अपना खयाल छोड़ वो दूसरों की फिक्र करता है॥
प्यार करके दिल दो धार पे चलता है…………

प्यार में दिल तड़पके रह जाता।
कहकर भी वो ना कुछ कह पाता॥
अपने सुख में भी दुःख डसता है।
टूटके के भी वो जिन्दा रहता है॥
प्यार करके दिल दो धार पे चलता है…………

दिल अपना हमको ही धोखा दे जाता।
जिस्म में रहके भी वो ना अपना होता॥
दिल खुद दिल का गुलाम बन रहता है।
ठण्डी रात में भी वो आग से जलता है॥
प्यार करके दिल दो धार पे चलता है…………

प्यार में कुछ भी बर्दाश्त ना होता है।
अपनों के साथ ये ना कोई चाहता है।।
प्यार एक मौत से भी कठिन सजा है।
हाल कभी अच्छा तो कभी बुरा रहता है॥
प्यार करके दिल दो धार पे चलता है…………

- रतन लाल जाट

53.गीत- हमको तो तुमसे

हमको तो तुमसे इतना जो प्यार हुआ है, हुआ है।
हमने तुमको दिलऔजान दोनों दिया है, दिया है॥
ये दिल अपना होकर भी तेरे लिए ही धड़कता है, धड़कता है।
वो अपनी नहीं बस तुम्हारी ही परवाह करता है, करता है॥

आँखों ने उम्मीदें जगायी,
बस तुमको ही देखा करे।
जुबां पे बस नाम यही,
पल-पल तुझे पुकारे॥
बस यही तो अपने दिल का एक सपना है, सपना है।
हमको तो तुमसे इतना जो प्यार हुआ है, हुआ है……

एकपल भी मिलना,
हमारे लिए नसीब है बड़ा।
मुश्किल है तुम्हें भूलना,
कभी ना तुम दूर जाना॥
रब से बस यही मेरा कुछ कहना है, कहना है।
हमको तो तुमसे इतना जो प्यार हुआ है, हुआ है……

- रतन लाल जाट

54.गीत- प्रेम-मोहब्बत में

प्रेम-मोहब्बत में वो ताकत है।
जो मौत से भी जा टक्कर ले॥
बुझे चिराग फिर एकबार जल उठे।
नामुमकिन को मुमकिन प्यार करे॥

इस प्रेम ने एक सूखी डाल पर,
खिलाये हैं फूल कई सुन्दर।
पानी में भी आग उठती है जल,
हवा भी रूक जाये क्षणभर॥
यह सब इस मोहब्बत का असर है…………

प्यार ने ही हमको दिया है एक नया जीवन।
इसके आगे कुछ भी नहीं है हर मुश्किल॥
दुनिया के जुल्मों से लड़ना।
प्रेम ही सबको सिखलाता॥
सबकुछ बदल जायेगा, दिन में रात हो जाये।
युगों-युगों तक प्रेम रहेगा, जगमगाता आसमां में।
बस दिलों का मिलन ही बहुत है……………

- रतन लाल जाट

55.गीत- दुनिया हमेशा

दुनिया हमेशा प्यार को तड़पाती है।
एकपल भी दिल को चैन आता नहीं है।।
यादें सताती और नैन बरसते।
कभी रोते हैं तो कभी हँसते॥

हँसकर गम सहना,
हर गम में मुस्कुराना
सच्चे दिल में बसता प्यार
कराता है एक नया अहसास
सावन सूखा निकल जाये
आँखें तरसती ही रह जाये

बिन बुलाये, बिन कहे
जो आते थे मिलने
जिसका था इन्तजार हमें
उसके लिए पल-पल तरसे

उनका हाल क्या होगा
इस बात का है फसाना
रह-रहकर दिल में शूल चूभते
जिन्दा होकर भी जैसे मर हम रहें
प्यार वालों की किस्मत में
कब गुल खिलते-मुरझाते

- रतन लाल जाट

56.गीत- गिन-गिनगिनके कैसे दिन गुजरेंगे

गिन-गिनके कैसे दिन गुजरेंगे?
हर एक दिन पर्वत जितने बड़े होंगे॥
हरपल वो मुझको तड़पायेंगे।
हर बात पर  याद कोई दिलायेंगे॥

मेरे सामने हो चाहे कोई,
आवाज वो हमको देती है सुनाई।
चुपके-से कोई गुजरे,
तो लगता है वो आया है जैसे।।
हर तरफ बस तेरा ही साया है।
गिन-गिनके कैसे दिन गुजरेंगे?

दिल तुमसे बातें करता है।
पास अपने बुलाता है॥
वो प्यारी सूरत और आँखें।
अपनी आँखों को नजर आती है।

धरती-अम्बर से चाँद-सितारों तक।
फूलों और काँटों से नदी-नालों तक॥
दिन हो या रात, सुबह हो या शाम।
इस दिल में कमरे में है उसका वास॥
चाहे मिलन हो ना हो।
दिल कभी जुदा ना हो पायेंगे।

- रतन लाल जाट

57.गीत- जी नहीं करता

जी नहीं करता-२ कभी तुझे छोड़कर जाऊँ।
मेरा बस चलता-२ तो जिन्दगी सारी संग गुजार दूँ॥
बस, यूँ ही तुमको देखा करूँ।-२
फिर भी ना कभी मैं पलक झपकाऊँ॥-२

मेरी आँखों में तेरी तस्वीर है।
तेरी बाहों में मेरी दिल-जान है॥
दिल से दिल मिले, तो इस बगिया में।
प्रेम के फूल खिलते हैं रंग-बिरंगे॥
उस खुशबू से, संसार महके।
कभी बसंत ये, प्यार का न उजड़े॥
ना मैं ऐसा-२ कभी सपने में सोच पाऊँ।
जी नहीं करता-२ कभी तुझे छोड़कर जाऊँ

चार दिन की जिंदगी,
सदियों जैसे है लगती।
और पलभर का मिलन भी,
लगता है स्वर्ग से सुन्दर भी।।
मौत आये, जब तुम पास हो।
तू साथ है, तो सह लें हर गम को॥
जीते-मरते भी-२ तेरा नाम जपा करूँ।
जी नहीं करता-२ कभी तुझे छोड़कर जाऊँ

तेरे खातिर जहर का घूँट पी जायेंगे।
आखिर साँस तक साथ हम निभायेंगे॥
तेरे सुख में खुशी मेरी है।
तेरे चेहरे में मुस्कान मेरी है।।
  दिलोंजान है तू, और क्या में कहूँ?
जी नहीं करता-२ कभी तुझे छोड़कर जाऊँ

- रतन लाल जाट

58.गीत- एक तड़प है दिल में

एक तड़प है दिल में।
और तेरा ही नाम है॥-२
चाहे मैं ना रहूँ, मगर तू सदा रहे।-२

तेरे सिवाय कौन मेरा-अपना?
कोई नहीं है तुमसे प्यारा॥
ये दिल, ये जान,
बस तेरे ही हैं॥

बिन तेरे नहीं है ख्वाहिश कोई ।
हर लम्हा तुम बिन अधूरा होई।
दुनिया में बहुत जरूरत है।
मुझे सिर्फ तेरी जरूरत है॥

- रतन लाल जाट

59.गीत- अब इस दिल में

अब इस दिल में, चूभता है कोई काँटे-सा।
हर खुशी थी, अब मुश्किल है जीना॥
एक फूल को हमने सींचा,
और जान से भी था वो प्यारा।
बड़े प्यार से उसे महकाया,
अब एक कँटीली डार बन गया॥

आज इतना दूर है कि
सुगन्ध तक आती नहीं।
आँखें बन्दकर सोचते फिर भी
वो दिखता है ना कहीं॥
क्या कसम खायी थी, जो अब याद नहीं।
पल-पल जो दिल में था, उसे दिल जानता नहीं॥
सबकुछ उसके संग अच्छा लगता था।
यहाँ तक उसकी छाया से भी प्यार था॥
इतना ही नहीं उसका ख्वाब, अपना सपना था।
अब इस दिल में, चुभता है कोई काँटे-सा…………

कहते थे एक पल भी भूलते नहीं।
मरके भी हमको बिछुड़ना है नहीं॥
एक-दूसरे के खातिर करना है कुछ भी।
चाहे जान चली जाये अपनी अभी॥
पर जिन्दगी में कुछ और लिखा था।
जिसे नहीं कोई आज तक बदल पाया॥
नसीब के खेल में, क्या हारना और क्या जीना?
अब इस दिल में, चूभता है कोई काँटे-सा…………

- रतन लाल जाट

60.गीत- तेरे प्यार में

तेरे प्यार में-२ मैं दिन-रात जागा।
एकपल भी दिल में, चैन ना आया॥

प्यार में जीने की, कुछ बात ही अलग है।
दिल के बंधन, तोड़ना नहीं आसान है॥
आज तक राज ये कोई समझ ना पाया।
छोटी-सी बात जिसे दिल के अंदर छुपाया॥
बड़ी अजीब है दिलवालों की दुनिया।
रब भी पूरा इसको जान नहीं पाया।।

जो प्यार करते हैं,
वो चुप लबों को भी पढ़ लेते हैं।
औरों को क्या मालूम है?
प्यार में कितना जादू है?
कैसे अपने दिल मिलते?
कैसे आँखों से इशारे करते?
और क्यों कहते प्यार नहीं मरता?
यह रिश्ता जन्मों-जन्मों का होता।

- रतन लाल जाट

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