नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

ये रंग नूर के - संजय कर्णवाल

1 - सच्चे शुभ चिंतक

हरियाली और खुशहाली की गाथा सदा जग ने गायी
इसमें बसी हुई है ,  मेरे  साथियों सारे जग की भलाई
हम अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाएं
उनको पुष्पित पल्लवित हम कर दिखायें
देते हैं हम  सबको ये सदा जीवन दायिनी हवा

देते हैं फल और छाया, बरसती इनसे घटा
रहे इनके लिए हम सब सजग बनके
यही सच्चे शुभ चिंतक सबके जीवन के

2  ये रंग नूर के

ये रंग नूर के शामिल किये फ़िज़ाओं ने
कोई प्यारा सा सन्देशा दिया इन हवाओं ने
सारे क़ायनात मे है विद्यमान अनमोल निधि
बड़ी ही सहज से रची है उसने विधान विधि
  जो भी समझे अपने मन से वही सच्ची श्रद्धा
जिसकी बदौलत हम आगे बढ़े हो वचनबद्धता


3      करके कर्म
  करके अच्छे कर्म रे बन्दे,
नाम तेरा होगा जग में।
छू लेगी कामयाबी तुझे
जब शक्ति होगी पग पग में।।

सारे जग में फैले अपनी यश कीर्ति
बन जाय हम भी ,हे प्रभु ऐसी हस्ती
सबके लिए भी हो सारी खुशियां
बस जाय अपने अरमानों की बस्ती।

जो सपने मन ने सजाए है,
जो अपने मन की हलचल है।
उसे हम समझे पल पल
कुछ दामन में लपेटे हर कल है।

4          अ मन मेरे

अ मन मेरे जरा सुनले,ये राहे दे रही बड़ी परेशानियां
जो तड़फती हमें रह रह कर ये घड़ियां होती हैरानियां
चलते ही रहो करके पक्का इरादा दिन रात यूँ ही
हम न हारे हालातों के आगे,रहे अपना साथ यूँ ही       
बाधाओं के आगे न झुकते कभी भी, न रुकते कभी भी
ये जो दूर दूर तक जाने वाले हार नहीं सकते कभी भी।

5    फूल बहारों में

खिले है फूल बहारों में और नजारों में।
महकी है सांसे मौसम के इन सरारों में।
मिले हैं सब लोग यहाँ,कोई तो संयोग यहाँ
जो उनको मिल जाते हैं, अपने देखो यहाँ वहाँ
जो है नसीबों की सारी बातें, मिली जो हमको सौगातें
हम ढूँढे उनको ही ,करे उनसे कुछ ऐसी मुलाकातें।

6 उत्तम कल्पना

जो भी हम जान सके  वो जान ले बेहतर
आगे बढ़ता ही जाता है ये जिंदगी का सफर
सोच में अपनी नई नई उत्तम कल्पना करें
कर्तव्य जो अपना है, कर्तव्य वो अपना करे
नहीं दूर कोई हो किसी से,किसी से किसी बात से


नहीं हो हम अनभिज्ञ कभी किसी के जज्बात  से

7    मिल गया जीने का हमको कोई सबब।
लगने लगा हमें अपना हर पल अजब।।

कोई जान गया अपने को जग में
शक्ति आ जाती हैं  उसकी रग रग में
हैरान बड़े हो जाते हैं देख के सब।

जब दिल के अरमां खिल खिल जाते हैं
  और धीरे     धीरे हर एक ख़ुशी वो पाते है
मानो मिल जाता है जैसे हमें रब


8  मन में यकीं

कोई बात करे, दिलों से मुलाकात करें ।
सभी काम जरूरी मिलके साथ साथ करे।।
नहीं किसी से शिकवा कोई,
न मन में कोई बात है।
दूर रहे झूठी बातों से सदा,
मन में यकीं दिन रात है।।
भर गया दामन खुशियों से,
जब तुमने पुकारा प्यार भरी आवाजों से।
खिल खिल जाय मन की बगिया,
मीठी मीठी बातें आ रही मन के दरवाजों से।

9    हवा

सर सर करती बहती जाती है हवा
सोंधी सोंधी सी मिट्टी की खुश्बू लाती है हवा
महकते फूलो को छूकर महक जाती है हवा
दूर दूर से मौसम की खबर लाती हैं हवा
रूखे रूखे आलम को ताजगी से भर जाती है हवा
कभी तेजी से, कभी हौले से गुजर जाती हैं हवा।

10     सही

लोग कहते हैं सही,यहाँ सोच समझकर चलना है ।
समय के साथ साथ खुद को भी हमें बदलना है।।
जग को अपना समझके यहाँ करो नेक काम।
करो मन से अपने मिलेगा तुमको नेक अंजाम।
राह कोई मुश्किल नहीं हिम्मत से बढ़े जो कदम।
बढ़ते ही जाय आगे ही आगे न रुके कहीँ हम।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.