रचनाएँ खोजकर पढ़ें

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -


विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग तेलुगु कवयित्री रचित, 'श्री मोल्ल रामायण तथा उसके अल्पज्ञात प्रसंग’ - डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता

साझा करें:

श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग तेलुगु कवयित्री रचित, 'श्री मोल्ल रामायण तथा उसके अल्पज्ञात प्रसंग’ दो. - प्रथम भगति संतन्ह कर संग...

श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग

तेलुगु कवयित्री रचित, 'श्री मोल्ल रामायण तथा उसके अल्पज्ञात प्रसंग’

दो. - प्रथम भगति संतन्ह कर संगा।

दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।।

श्रीरामचरितमानस अरण्यकाण्ड ३५-४

श्रीराम ने शबरी के आश्रम में जाने के बाद उन्हें नवधा भक्ति बताई, जिसमें पहली भक्ति संतों का सत्संग है तथा दूसरी भक्ति में श्रीराम ने अपने कथा-प्रसंग और उनमें प्रेम रखने का बताया था। इसी क्रम में इस आलेख में तेलुगु साहित्य की प्रथम कवयित्री मोल्ल और उनकी कृति 'श्री मोल्लरामायण’ के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंगों का विवरण दिया गया है।

आध्यात्मिकता भारतीय राष्ट्र की प्राण वायु एवं शक्ति है। वैदिक काल से लगाकर आज तक आधुनिक युग में अनेक रूप रूपान्तरों और प्रकारान्तरों में यही शक्ति भारत को स्पन्दित और नियंत्रित करती रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन और कृतित्व हमारी आध्यात्मिक संस्कृति की धरोहर है। इस कारण श्रीराम का व्यक्तित्व और कृतित्व को समय-समय पर अनेक महर्षियों, मुनियों और समर्पित भक्तों एवं कवियों ने अपनी दृष्टि से आंकलन किया।

आंध्रप्रदेश और तेलुगु भाषा में श्रीराम काव्य की जितनी प्रचुरता एवं बहुलता है, शायद ही वह दूसरे अन्य क्षेत्र अथवा भाषा में उपलब्ध नहीं है। तेलुगु भाषा में रचित राम-काव्यों में 'श्री मोल्ल रामायण’ एक संक्षेप काव्य के रूप में सर्वाधिक लोकप्रिय, मार्मिक एवं हृदयस्पर्शीय है। आज से लगभग ५०० वर्ष पूर्व सामन्तकालीन युग में पिछड़ी हुई जाति में जन्म लेकर एक नारी मोल्ल ने कैसे इस प्रकार की श्रेष्ठ साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रचुरताओं से परिपूर्ण रचना की परिकल्पना एवं सृष्टि की होगी? आंध्रप्रदेश की सामाजिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टताओं की सुगंध से 'श्री मोल्ल रामायण’ श्रीराम के जीवन और चरित्र की एक अद्भुत कृति है। इस तरह श्री मोल्ल रामायण तेलुगु भाषा का अनमोल-अनुपम ग्रंथ रत्न है।

सामान्यत: तेलुगु साहित्य की राम-काव्य परम्परा में महिलाकृत चार रामायण है- श्री मोल्ल रामायण, मधुर वाणीकृत संस्कृतिकृत रघुनाथ रामायण, शीरमु सुभद्रमाम्बा कृत सुभद्रा रामायण, चेब्रोलु सरस्वती कृत सरस्वती रामायण। इन सबमें प्रचार-प्रसार एवं ख्याति की दृष्टि से श्री मोल्ल रामायण अग्रगणीय है। आन्ध्रप्रदेश के निवासियों के लिए श्रीराम से बढ़कर कोई दूसरा इष्टदेव नहीं हैं और रामायण से बढ़कर अन्य कोई भक्ति कथा नहीं है। साहित्य में दैनिक जीवन में जहाँ भी सुना जाए, यह एकमात्र श्रीराम का पवित्र नाम घर-घर में प्रतिध्वनित होता सुनाई पड़ता है। श्रीराम के वनवास के चौदह वर्ष से अधिक समय (यात्रा) आन्ध्रप्रदेश में दण्डकारण्य और गोदावरी के किनारों पर ही व्यतीत हुआ है। उस पावन स्मृति को जाग्रत करने वाले अनेक स्थान और चिह्न इस प्रदेश में आज भी यत्र-तत्र दृष्टिगोचर होते हैं। यही कारण है कि मर्यादा पुरुषेात्तम श्रीराम की पुनीत गाथा गाने वाले भक्तों-संतों, महानुभावों से आन्ध्रप्रदेश भरा पड़ा है।

सदियों के पूर्व एक सामान्य कुम्हार परिवार की अल्प शिक्षित महिला द्वारा रचित आन्ध्रप्रदेश में सर्वाधिक लोकप्रिय, सरल-सुबोध फिर भी अनेक अलंकारों से सुशोभित श्री मोल्ल रामायण जैसा भक्ति काव्य भारत के लिए भारतीय नारी के लिए और हम सब भारतवासियों के लिए बड़े ही गौरव की बात है।

श्रीराम-काव्य की रचनाकार आतुकूरि मोल्ल तेलुगु साहित्य की प्रथम कवयित्री मानी गई है। प्राचीन कवियों की परम्परा के अनुसार मोल्ल के जीवन के संबंध जैसे वह किस जाति की थी? उसके माता-पिता कौन थे? वह किस गाँव में रहती थी? वह कितने वर्ष जीवित रही? वह विवाहित अथवा अविवाहित थी?

अन्त: साक्ष्य के आधार पर गुरुलिंग जंगम की अर्चना में तत्पर शिवभक्तिरत मोल्ल आतुकूरि केसन की वर पुत्री मानी जाती है। ऐसा सुना गया है कि श्री कण्ठ मल्लेख के वर-प्रसाद से कविता करना वह सीख गई। यह गोपरम वर्तमान में नेल्लूर के समीप एक गाँव माना जाता है। 'केसन सेट्टी तनय’ मानने के कारण लोग इसे मोल्ल वैश्य होने का अनुमान भी करते हैं किन्तु जनश्रुतियों-किंवदन्तियों में उसका कुम्हारिन होने के पक्ष में हैं। मोल्ल का जीवनकाल लगभग ई. सन् १३२०-१४०० माना गया है। मोल्ल ब्रह्मचारिणी रही होगी। पिता शिव के भक्त थे तो मोल्ल श्रीराम की भक्त थी।

इस प्रकार पिता और पुत्री दोनों के अंतरंग में शिव-राम की अद्वेत भक्ति का भाव पल्लवित-पुष्पित हुआ और वह रामफल के रूप में आंध्र जनता रूपी शुकों को रुचिकर ही नहीं अमृत तुल्य सिद्ध हुआ। प्रधान कथा को भंग न करते हुए मोल्ल ने भी अपनी रुचि के अनुसार, प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप प्रसंगों को घटा-बढ़ाकर इस रामायण की अद्भुत रचना की है। इस रामायण में छ: काण्ड एवं नौ सौ पद्य हैं। श्री मोल्ल रामायण के अद्भुत प्रसंग ये हैं-

तेलुगु श्री मोल्ल रामायण में हनुमान जी का सीतान्वेषण प्रसंग

सीतान्वेषण में सुग्रीव ने अपनी अनगिनत वानर सेना श्रीराम को दिखाई। सुग्रीव ने सीतान्वेषण में समर्थ अधिक शक्तिशाली वानरोत्तमों को नियोजित कर दिशाओं में भेजने के लिए कहा, पूर्व में मेंद को, पश्चिम में सुषेण को, उत्तर में शतबली को नियाजित कर उनकी सहायता में लाख-लाख संख्या में वानर वीरों को देकर, जानकीजी के रहने की जगह का पता लगाकर, एक माह के भीतर लौट आने को भेजा। तत्पश्चात् हनुमान जी को बुलाकर कहा कि, 'तुम दक्षिण में जाओ।’ उस समय श्रीराम ने हनुमान जी के विश्वास आदि गुणों की प्रशंसा कर अपने समीप बुलाकर कहा कि-

नपुड़ श्रीराम भूपालुंडु वानि विश्वासादि गुणम्मुलकु

मेचिनवाडै दग्गरगा बिलिचि नीवु शौर्यवंतुडवु हितुंडवुनु

गावनु नीचेत मत्प्रयोजनं बीडेरुननि पलिकि तनचेति

यंगुलळीयकं बतनि चेतिविच्चि यीमुद्रिक जनकराज नंदनकु

समर्पिचि या जानकी। शिरोरत्नबुं माकानवालुगा दम्मनि

यनूप नंतडिय्यकोनि भोविकन नात निकि दोडुगा

नंगदजांबपदायुलं गूर्चि यनिपे न

श्री मोल्ल रामायण किष्किन्धाकाण्ड २७

'तुम हनुमान् शौर्यवान हो, हितेषी हो। अत: तुमसे मेरा प्रयोजन सिद्ध होगा। इतना कहकर श्रीराम ने अपने हाथ की अँगूठी उन्हें देकर, जनकराज नन्दिनी को समर्पित कर उस जानकी के शिरोरत्न (चूड़ामणि) को अपनी पहचान के रूप में लाने को कहकर उन्हें भेजा। हनुमान जी ने यह बात स्वीकार कर श्रीराम को प्रणाम् किया। उसके बाद अंगद, जाम्बवान् आदि को भेजा।

इस प्रकार इस श्री तेलुगु मोल्ल रामायण का सीतान्वेषण प्रसंग अन्य श्रीरामकथाओं (रामायणों) से भिन्न है, क्योंकि इस रामायण में श्रीराम ने हनुमान जी को सीताजी से भेंट कर उनकी पहिचान कर उनसे चूड़ामणि लेकर अपनी अँगूठी देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही साथ श्रीराम ने हनुमान जी की शक्ति को प्रशंसा कर कहा कि मेरा प्रयोजन तुमसे ही सिद्ध होगा।

हनुमान जी ने भी अशोक वाटिका में जाकर श्रीराम का गुणगान करने के पश्चात्, उनका दूत बताकर सीताजी को उनके द्वारा दी गई अँगूठी सीताजी को समर्पित कर दी। हनुमान जी ने बाद में कहा कि अब खाली हाथों जाना दूतों के लिए उचित कार्य नहीं है तथा सीताजी से कहा कि आपके दर्शन प्राप्त किए। इसका विश्वास जताने के लिए आप अपना शिरोरत्न मुझे दे दीजिए। यह सुनकर सीताजी ने कहा कि मैंने तुम्हारे द्वारा मेरे नाथ (स्वामी) का क्षेम (कुशल समाचार) सुन लिया, फिर भी तुम्हारे निज रूप को देखे बिना मैं अपना शिरोरत्न तुम्हें नहीं दूँगी। यह सुनकर हनुमान जी ने भी अपना विशाल रूप दिखाया, इसे देखकर सीताजी प्रसन्न हो गई तथा श्रीराम को पहिचान के रूप में शिरोरत्न दे दिया।

श्रीरामचरित मानस में सीतान्वेषण-हनुमान् प्रसंग

सुग्रीव के आदेशानुसार नील, अंगद, जाम्बवान् और हनुमान जी दक्षिण दिशा में सीताजी का पता लगाने के लिए तैयार होकर जाने लगे। उस समय श्रीराम ने जो कुछ किया तथा कहा वह इस प्रकार है।

पाछें पवन तनय सिरु नावा। जानि काज प्रभु निकट बोलावा।।

परसा सीस सरोरुह पानी। करमुद्रिका दीन्हि जन जानी।।

बहु प्रकार सीतहि समझाएहु। कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहूँ।

हनुमत जन्म सुफल करिमाना। चलेउ हृदयँ धरि कृपानिधाना।

श्रीरामचरितमानस किष्किन्धाकाण्ड २३-५-६

इन सबके (नील, अंगद और जाम्बवान्) पीछे पवनसुत श्रीहनुमान जी ने श्रीराम को सिर नवाया। कार्य का विचार करके श्रीराम ने हनुमान जी को अपने पास बुलाया। उन्होंने अपने कर कमलों से उनके सिर को स्पर्श किया तथा अपना सेवक जानकर उन्हें अपने हाथ की अँगूठी उतार कर दी। तत्पश्चात् उन्होंने हनुमान जी से कहा कि तुम बहुत प्रकार से सीताजी को समझाना और मेरा बल तथा विरह (प्रेम) का कहकर तुम शीघ्र लौट आना। यह सुनकर हनुमान जी ने अपना जन्म सफल समझा और कृपानिधान प्रभु को हृदय में धारण करके सीताजी की खोज में चल पड़े। यहाँ इस कथा प्रसंग में श्रीराम ने सीताजी के पास से पहिचान के रूप में चूड़ामणि लाने का हनुमान जी को कुछ भी नहीं कहा था।

श्री मोल्ल रामायण एवं अन्य रामायणों में सेतुबंध कथा प्रसंग

श्री मोल्ल रामायण में रामसेतु निर्माण का प्रसंग अन्य रामायणों से कुछ परिवर्तन के साथ वर्णित है। अत: अन्य रामायणों अथवा श्रीरामकथाओं में से इस प्रसंग को जानना आवश्यक होगा।

वाल्मीकि रामायण में रामसेतु प्रसंग

श्रीराम के विशाल अमोघ बाण से कुक्षिस्थान के दग्ध हो जाने पर सरिताओं के स्वामी समुद्र (सागर) ने श्रीराम से कहा-

अयं सौम्य नलो नाम तनयो विश्वकर्मण:।

पित्रा दत्तवर: श्रीमान् प्रीतिमान् विश्वकर्मण:।।

वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड सर्ग २२-४५

सौम्य! आपकी सेना में जो नल नामक कान्तिमान् वानर है, साक्षात् विश्वकर्मा का पुत्र है। नल को इसके पिता ने यह वर दिया है, 'तुम मेरे समान समस्त शिल्पकला में निपुण होओगे।’ प्रभो। आप भी तो इस विश्व के सृष्टा विश्वकर्मा हैं, इस नल के हृदय में आपके प्रति बड़ा प्रेम है। यह वानर अपने पिता के समान ही शिल्पकला में समर्थ है, अत: यह मेरे ऊपर पुल का निर्माण करें। सागर ने कहा कि मैं उस सेतु (पुल) को धारण करूँगा। यह सुनकर नल ने उठकर श्रीराम से कहा मैं इस महासागर पर सेतु बाँधने में समर्थ हूँ। अत: सब वानर आज ही सेतु बाँधने का कार्य आरम्भ करें। श्रीराम की आज्ञा होते ही वानरों साल अश्वकर्ण, धव, बाँस, कूटज अर्जुन, ताल, तिलक, तिनिश, बेल, छित्वन खिले हुए कनेर, आम और अशोक आदि वृक्षों से तथा पर्वतों शिखरों को तोड़-तोड़ कर समुद्र को पाटने लगे। श्रीराम सेतुबंध सौ योजन लम्बा तथा दस योजन चौड़ा बनाने का लक्ष्य था। प्रथम दिवस १४ योजन लम्बा, द्वितीय दिवस २० योजन, तृतीय दिवस २१ योजन, चतुर्थ दिवस २२ योजन एवं पंचम् दिवस २३ योजन। इस प्रकार १४+२०+२१+२२+२३=१०० योजन सेतु का निर्माण कर दिया।

श्रीरामचरितमानस में रामसेतु कथा प्रसंग

श्रीराम ने सागर से कहा कि हे तात्! जिस प्रकार वानरों की सेना पार उतर जाए वह उपाय बताओ तब सागर ने श्रीराम से कहा-

नाथ नील नल कपि द्वौ भाई। लरिकाई रिषि आसिष पाई।।

तिन्ह के परस किएँ गिरि भारे। तरिहहिं जलघि प्रताप तुम्हारे।।

श्रीरामचरित मानस सुन्दरकाण्ड ६०-१

हे नाथ! नील और नल दो वानर भाई हैं। उन्होंने लड़कपन में ऋषि से आशीर्वाद पाया था। उनके स्पर्श कर लेने से ही भारी-भारी पर्वत भी आपके प्रताप से समुद्र पर तौर जाएंगे। इस प्रकार उनके स्पर्श और श्रीराम के प्रताप से सेतुबंध का निर्माण किया गया।

तेलुगु श्री मोल्ल रामायण में समुद्र पर

सेतुबंध तथा पर्वतों को निगलने वाले महामस्त्य

श्रीराम के सामने समुद्र ने मानव के रूप को धारण कर दैन्यभाव प्रकट करते हुए प्रणाम कर कहा अब सेतुबंध में विलम्ब क्यों? इनकुलाधीश्वर (राम)! कपियों को भेजकर शीघ्र सेतु निर्माण कराओ। वारिधि को बाँधकर पार करो। यह सुनकर कन्द-

रामुनि पंपुन ब्लवग

स्तोमं बट्लरिगियरिगि दौड्डगु कोडल्

क्षेममुन देच्चि जलनिधि

रामाज्ञानु वैचिरधिकरभसं बोप्पन।।

श्री मोल्ल रामायण युद्धकाण्ड प्रथमाश्वास-४१

श्रीराम के आदेश को सुनकर प्लवंग-स्तोम (समूह) ने चल-चलकर बड़े-बड़े पहाड़ों को कुशलता से लाकर राजाज्ञा से जलधि में उत्साह से डाल दिया। वानरों के पर्वत-पाषाण तथा वृक्ष-समूहों की लाख-लाख की संख्या में लाकर सागर में डालने पर उनसे भयंकर ध्वनि हो रही थी। उन वानरों में ऐसा उत्साह था कि उनकी चीख-पुकार, उछलकूद, अट्टहास एवं हँसी मजाक से ब्रह्माण्ड मानों फट गया हो। वानरों द्वारा लाए गए सभी पर्वतों, वृक्षों एवं पाषाणों को तिमिंगल (तिमिंगल बड़ी भारी सामुद्रीय मछली) निगलने लग गए। उस समय बार-बार पर्वतों के पाषाणों को तैरते नहीं देखकर श्रीराम ने संदेह के साथ रत्नाकर (समुद्र) से इसका कारण पूछा। सागर (रत्नाकर) ने उनसे तुरंत कहा- हे मेदिनीश! रावण की आज्ञा से सभी पाषाणों को मछलियाँ निगली जा रही है। ये सब रावण की आज्ञा से तिमि और तिमिंगल मुझ (सागर) में ऐसा कर विचरण कर रहे हैं।

हे राम! यदि नल के द्वारा बांधा नहीं जाएगा तो सेतु (बांध) नहीं टिकेगा। इसलिए आप नल नामक वानर को वहाँ भेजिए। इतना कह कर सागर चले गए। सागर के तट पर महावीर वानरों के साथ पर्वतों के लाने पर श्रीराम के आदेश से नल ने उसी दिन दस योजन तक सेतु का निर्माण किया तथा सूर्यास्त हो गया।

वानरेन्द्रों की सेना उस सेतुबंध की प्रात:काल तक रक्षा की तथा सूर्योदय होते ही महाबलशाली हनुमान जी ने सुवेलाद्रि जाकर उस पर्वत के समीप स्थित हेमकूट्, नागपर्वत, सिहाचल नामक तीन पर्वतों के वालपाश से उखाड़कर निम्बफल के सदृश फूलों को गेंदों के समान उछलते हुए आकर नल को (हाथों में) दिया। तीन पर्वत कुल मिलाकर नव्वद (नब्वे) योजनों की लम्बाई से युक्त हुए। तत्पश्चात् शतयोजनों की लम्बाई और दस योजनों का चौड़ा सागर को बाँधकर नल ने सेतुबंध का निर्माण किया।

---

डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता

'मानसश्री’, मानस शिरोमणि, विद्यावाचस्पति एवं विद्यासागर

सीनि. एमआईजी-१०३, व्यास नगर,

ऋषिनगर विस्तार, उज्जैन (म.प्र.)

Email : drnarendrakmehta@gmail.com

पिनकोड- ४५६ ०१०

-----****-----

|दिलचस्प रचनाएँ:_$type=blogging$count=5$src=random$page=1$va=0$au=0$meta=0

|समग्र रचनाओं की सूची:_$type=list$count=8$page=1$va=1$au=0$meta=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग तेलुगु कवयित्री रचित, 'श्री मोल्ल रामायण तथा उसके अल्पज्ञात प्रसंग’ - डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता
श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग तेलुगु कवयित्री रचित, 'श्री मोल्ल रामायण तथा उसके अल्पज्ञात प्रसंग’ - डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता
https://3.bp.blogspot.com/-6fzC7FQBOU4/XE7VT__dkvI/AAAAAAABG0Q/j2fnXXdK1CQw2CPBkE9sfk9ZH7tUa_2wQCLcBGAs/s200/%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%2B%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0%2B%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25BE.png
https://3.bp.blogspot.com/-6fzC7FQBOU4/XE7VT__dkvI/AAAAAAABG0Q/j2fnXXdK1CQw2CPBkE9sfk9ZH7tUa_2wQCLcBGAs/s72-c/%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%2B%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0%2B%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25BE.png
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/01/blog-post_49.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/01/blog-post_49.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ