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रम्य रचना - कोरोना का भूत - हनुमान मुक्त

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कोरोना का भूत आजकल मुझे नींद नहीं आ रही है। कोरोना के बताए लक्षण मुझ में नहीं है फिर भी मुझे लगता है कहीं मुझे कोरोना तो नहीं हो गया है।रात ...

कोरोना का भूत

आजकल मुझे नींद नहीं आ रही है। कोरोना के बताए लक्षण मुझ में नहीं है फिर भी मुझे लगता है कहीं मुझे कोरोना तो नहीं हो गया है।रात को सोने से पहले यह सोच कर सोता हूं कि चैन से सोऊंगा ।रात में नहीं उठूंगा। लघुशंका करने भी नहीं ।

इस शंका को खत्म करने के लिए मैं सोने से पहले ज्यादा पानी भी नहीं पीता। खाना खाने के बाद थोड़ी चहलकदमी भी कर लेता हूं। बावजूद इसके रात को नींद बार-बार खुल जाती है ।

देश में सदी का सबसे बड़ा लांक डाउन हो गया है ।घर से बाहर निकलने पर पाबंदी है। प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री बार-बार अपील कर रहे हैं कि घर में ही रहो ।घर से बाहर मत निकलो। खूब खाओ ।पियो सोओ लेकिन उनके कहने के बावजूद नींद है कि आने का नाम नहीं ले रही ।वे कह रही है कि मुझे देश की चिंता के कारण नींद नहीं आ रही। मैं इतना बेवकूफ नहीं हूं ।

कोरोना को रोकने का जिम्मा हमारे देश के नेताओं को सौंपा हुआ है । प्रशासन को सौंपा हुआ है।चिंता करें तो वे करें।

हम चिंता क्यों करें। वे कहते हैं कि हमें घर में रहकर अपने आप को बचाना है‌ अपनों को बचाना है। मोहल्ले वालों को बचाना है। अपने शहर को बचाना है ।अपने राज्य को बचाना है। देश को बचाना है। जान है तो जहान है।

घर से बाहर नहीं निकले । घर में ही रहो। खूब खाओ। पियो। सोओ।

लेकिन मेरे अंदर जो बार-बार घर से बाहर निकलने का वायरस अंदर भरा हुआ है ।वह कोरोना वायरस पर भारी पड़ता जा रहा है। मैं नींद नहीं आने से परेशान हूं ।रात को नींद नहीं आने से दिन भर परेशान रहता हूं‌ मन चिड़चिड़ा रहता है। कुछ करने का मन नहीं करता।

बिना कुछ किए ही वे मेरे बारे में अलग-अलग अनुमान लगाने लगे हैं। मेरी आंखों को देख कर मेरे पड़ोसी तो यह तक कहने लगे हैं। आज कल दिन में भी शुरू कर दी है क्या । उन्हें कौन बताए कि आजकल ये सब दुकानें बंद है। चाह कर भी दिन में क्या मैं रात को भी नहीं लगा पा रहा ।

मेरे पास जवाब नहीं था ।नींद लाने के लिए मैंने योगा भी करना शुरू कर दिया है । अनुलोम विलोम, कपालभाति सुबह-शाम करता हूं ।दिमाग पर जोर डालना भी बंद कर दिया। बावजूद इसके नींद नहीं आ रही।

घर वाले परेशान हैं ।परेशान सबसे ज्यादा मेरी पत्नी है ।रात को कभी उठ जाता हूं। चलना शुरू कर देता हूं ।मेरे उठते ही पत्नी की नींद खुल जाती है।

उन्हें लग रहा है कि मुझ पर किसी प्रेतात्मा का असर हो गया है। पहले देर रात घूमा करता था। शायद रात को किसी भूत-प्रेत या चुड़ैल के चक्कर में आ गया हूं । वे मुझसे कह रही थी मैं रात को बड़बड़ाता हूं ।कोरोना का जाप करता हूं। हो सकता है कोई व्यक्ति कोरोना से तड़प कर मर गया हो और अब वही मुझे परेशान कर रहा हो।

सुबह उठते ही वे मुझसे रात को बड़बड़ाने के बारे में पूछती है। मेरे पास उसके प्रश्न का कोई जवाब नहीं होता है ।

रात को मैं क्या बड़बड़ाता हूं। मुझे कुछ याद नहीं रहता। उसी ने बताया मैं रात कोरोनों कोरोना करता हूं।

सोने से पहले भी अपने हाथों को 20 सेकंड साबुन से साफ करता हूं । दिन भर घर में रहता हूं। तब भी हर 2 घंटे में हाथों को साफ करता हूं। सोने से पहले ऊपर से नीचे तक अपने आप को सैनिटाइज करता हूं। कहीं कोरोना वायरस मुझ पर हमला नहीं कर दे। इतना ध्यान रखता हूं फिर भी मुझे रात को नींद नहीं आती।

मेरी परेशानी से परेशान हो वे लांक डाउन की परवाह किए बगैर डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय एक ओझा के पास मुझे ले गई। नींद नहीं आने और रात में बड़बड़ाने के बारे में उसे बताया।

ओझा मुझे देखकर आंखें बंद कर अलग ही भाषा में कुछ बुदबुदाया। उसने हाथ में चिमटा ले मेरे चारों ओर घेरा बनाया। आंखें बंद कर कुछ सोचने का स्वांग किया।

बोला ,इसे बहुत ही ताकतवर भूत ने जकड़ लिया है अब तक जाने कितने लोग उसके शिकार हो चुके हैं उससे बचना मुश्किल है।

उसकी इतना कहते ही मेरी पत्नी मेरी मृत्यु की आशंका से डर गई या मन ही मन खुश हुई मुझे पता नहीं।

उसने मुझसे कहा टीवी पर इतने बड़े-बड़े विज्ञापन आ रहे हैं क्यों नहीं एक दो करोड रुपए का बीमा करवा लो ।बार-बार वे कह रहे हैं ।जिंदगी के साथ भी ।

जिंदगी के बाद भी ।अपनी नहीं तो अपनों की तो चिंता करो।

बार बार हाथ धोने से, अपने आप को सैनिटाइज करने से मुंह पर मास्क लगाने से कुछ नहीं होने वाला ।तुम्हें इतने बड़े भूत ने जकड़ लिया है इसलिए भूत भगाने के इन्तजाम के साथ-साथ तुरंत बीमा करवाओ।

अपनी नहीं तो अपनों की तो चिंता करो।

मेरे चेहरे पर उसकी बात सुनकर हल्की सी मुस्कान आ गई थ। मुझे ऐसा देख, वे ओझा की ओर मुखातिब हो बोली,देखो कितना ताकतवर भूत है अपनी मौत को सामने देख कर भी इनके चेहरे पर मुस्कान आ रही है।

मेरी पत्नी को ओझा से ऐसी बातें करते देख मुझे और तेजी से हंसी आ गई। मैं बोला, ओझाजी जो व्यक्ति खुद मरा हो ।भला वह मुझे परेशान क्यों करेगा।

मुझे ऐसा कहते देख ओझा मेरी पत्नी की ओर मुखातिब होकर बोला ,देखो -देखो यह कैसे मुझे बेवकूफ बना रहा है। यह खुद नहीं कोरोनासुर की प्रेतात्मा बोल रही है । इसका इलाज कराना बहुत आवश्यक है वरना यह अपने साथ साथ पूरे परिवार को जकड़ लेगा।

पूरे परिवार का नाम सुनते ही मेरी पत्नी डर गई। ओझा के पैरों में पड़कर मेरी जान बचाने की गुहार करने लगी । अब बीमा कराने का विचार उसे नहीं रहा। जब सारे परिवार पर ही आ जाएगी तो उन करोड़ों रुपए का क्या होगा ।उसे समझ में आ गया था।

ओझा इसी ताक में था। उसने एक लंबी लिस्ट निकाल कर मेरी पत्नी को थमाते हुए कहा।

इस सारी सामग्री इंतजाम करो। अनुष्ठान जल्दी करना पड़ेगा। लिस्ट ले , वे मुझे लेकर घर की और चल दी।

ओझा द्वारा दी गई लिस्ट को देखते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई । ओझा भूत भगा रहा था या सारे भूतों की जमात को भोज पर बुला रहा था ।सामान की लिस्ट बहुत लंबी थी। मैंने पत्नी को कहा ,मुझे कोई भूतवूत नहीं है ।

आजकल समूचा देश लॉक डाउन है। घर पर ही 24 घंटे पड़ा रहता हूं। सारे दिन टीवी देखता हूं। टीवी पर कोरोना कोरोना सुनकर यह मेरे दिमाग में बैठ गया है।इसलिए रात को मैं कोरोना कोरोना बड़बड़ाता हूं । जब यह लांकडाउन खत्म हो जाएगा। टीवी पर कोरोना कोरोना का जाप बंद हो जाएगा। तब मैं भी धीरे-धीरे बड़बड़ाना बंद कर दूंगा। मुझे भी नींद आ जाएगी।

पत्नी मेरी कोई बात सुनना नहीं चाहती थी वह भूत को भगाने के लिए कृतसंकल्प थी। उसने साफ-साफ कह दिया ।मैं कुछ नहीं जानती । ओझाजी ने जो सामान बताया है उसका इंतजाम करो।मैं भूत भगाना चाहती हूं। मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

यह जिंदा रहते हुए भी और मरने के बाद भी लोगों को परेशान करता है। जो व्यक्ति इसके चंगुल में आ जाता है उसकी इसी प्रकार से नींद उड़ जाती है।

मैंने कहा , मुझे कुछ नहीं हुआ है ओझा के चक्कर में मत आओ। यदि तुम्हें कुछ करना ही है तो किसी डॉक्टर से कंसल्ट करो। उससे मेरी बात कराओ। मुझे नींद आ जाएगी।

मेरी पत्नी ने कहा मैं भी चाहती तुम्हें नींद आए ।कोरोनावायरस जो तुम्हारे दिमाग में कहीं घुस गया है । दिमाग से निकल जाएं। तभी दरवाजे की घंटी बजी‌ । कोरोना की सारे शहर में जांच हो रही थी। कोरोना वायरस की जांच करने चिकित्सा कर्मियों का दल हमारे घर आया था ।उसने बारी-बारी से हम सबकी जांच की। मैंने मुझे नींद नहीं आने की समस्या उन्हें बतायी। उन्होंने बैग से एक छोटी सी गोली मुझे दी। हम में से किसी को भी कोरोना नहीं था । पूरी तरह से हम स्वस्थ थे। सभी को घर में रहकर चेहरे पर मास्क लगाने हाथों को बार-बार 20 सेकंड तक धोने एवं सैनिटाइजर से स्वच्छ रखने की एवं किसी भी प्रकार के कोरोना से संबंधित लक्षण होने पर दिए गए मोबाइल नंबर पर सूचना देने की हिदायत देकर वे चले गए।जांच रिपोर्ट सुनकर मेरी पत्नी खुश थी। बोली, क्यों नाटक करते हो ।तुम्हें कोई कोरोना बोरोना नहीं है। शांति से सो खुद भी सोओ और हमें भी सोने दो।

मैं डॉक्टर द्वारा दी गई गोली लेकर शाम को सो गया। सच। उस रात मुझे गहरी नींद आ गई। मेरे दिमाग से कोरोना का भूत उतर चुका था।

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#हनुमान मुक्त

93 ,कांति नगर, गंगापुर सिटी (सवाई माधोपुर) राजस्थान

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रचनाकार: रम्य रचना - कोरोना का भूत - हनुमान मुक्त
रम्य रचना - कोरोना का भूत - हनुमान मुक्त
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