उत्तराखण्ड की लोककथा - जीवन कथा - डॉ. उमेश चमोला

SHARE:

उत्तराखण्ड की लोककथा जीवन कथा - डॉ. उमेश चमोला आम का एक बडा पेड़ था। उस पर नर एवं मादा पक्षी घोंसला बनाकर रहते थे। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे ...

उत्तराखण्ड की लोककथा

जीवन कथा

- डॉ. उमेश चमोला

आम का एक बडा पेड़ था। उस पर नर एवं मादा पक्षी घोंसला बनाकर रहते थे। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे भी थे। एक बार मादा पक्षी बीमार पड गई। उसने नर पक्षी से कहा, ’’ मुझे लगता है इस दुनियाँ में मेरा समय पूरा हो गया है। मौत पर किसका बस चला ? परन्तु तुम्हें मुझे वचन देना होगा।’’

’’क्या’’ ? - नर पक्षी उत्सुकता से बोला।

’’हमारे दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं। मुझे इनकी चिन्ता है। मेरे मरने के बाद तुम दूसरा ब्याह नही

रचाओगे। हो सकता है दूसरी मादा इन बच्चों को मार दे।’’ - मादा पक्षी ने अपने हृदय की व्यथा को प्रकट किया।

’’भगवान पर विश्वास रखो। तुम कुछ दिन में ठीक हो जाओगी। तुम ऐसा कहती हो तो मै वचन देता हूँ ‘‘- नर पक्षी ने कहा।

कुछ दिनों के बाद मादा पक्षी मर गई। नर पक्षी को कुछ समय तक अपने दिए वचन याद रहे लेकिन एक दिन उसने सोचा - ’’अब हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं। कुछ दिनों में ये घोंसला छोडकर फुर्र उड जाएंगे। तब मैं अकेले कैसे जीवन बिताऊंगा ?’’ उसने दूसरी मादा पक्षी से ब्याह रचा दिया। मादा से उसने यह वचन भी ले लिया कि वह उन दो बच्चों का पूरा ध्यान रखेगी। नई मादा पक्षी दुष्ट थी। वह सोचने लगी -’’मैं इस उम्र में दूसरों के बच्चों की देखभाल कर रही हूँ। मुझे तो अपने बच्चों की देखभाल करनी चाहिए थी।’’

एक दिन नर पक्षी दाना लेने बाहर गया हुआ था। मादा पक्षी ने उन बच्चों को मारकर झाड़ी में फेंक दिया। नर पक्षी जब घर आया वह रोते हुए बोली -

’’आज बाज पक्षी यहाँ आया था। उसने मुझ पर हमला किया। मैं जान बचाकर भागी तभी उसने हमारे दो बच्चों को मार दिया।’’

जिस आम के पेड़ पर यह घटना हुई वह राजमहल के नजदीक था। इस कारूणिक दृश्य को राजा अक्षत की रानी सुमेधा ने देखा। वह फफक कर रो पड़ी। रात को सुमेधा ने अपने पति को पूरा वृतान्त सुनाया। वह सोचने लगी -’’पक्षी दंपति की तरह हमारे भी दो बच्चे हैं। यदि मेरी असमय मौत हो

गई। मेरे मरने के बाद अक्षत ने दूसरा विवाह कर लिया तो कही दूसरी रानी उस मादा पक्षी की तरह ही मेरे बच्चों को मार न दे।’’ यह सोचकर रानी सुमेधा सुबकने लगी। राजा के पूछने पर उसने अपने दिल की बात राजा को बता दी। राजा ने रानी की भावुकता को मजाक में लेते हुए दूसरा ब्याह न करने का उसे वचन दिया।

कुछ समय बाद रानी सुमेधा बीमार पड़ गई। दैवयोग से वह दुनिया से चल बसी। अक्षत ने सुमेधा को दिए वचनों को याद करते हुए दूसरी शादी न करने का निश्चय किया।

समय बीतता गया। राजा अक्षत के दो बच्चे सूर्यप्रकाश और चन्द्रप्रकाश भी कुछ बड़े हो गए थे। राजा के वजीर एवं अन्य दरबारी राजा पर दूसरा विवाह करने का दबाव बनाने लगे। राजा सुमेधा को दिए वचनों पर दृढ़ रहा।

एक दिन वजीर ने राजा से कहा - ’’महाराज ! स्वर्गीय रानी ने आपके बच्चों के लालन-पालन एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही आपसे दूसरा ब्याह न करने का वचन लिया होगा। अब राजकुमार बड़े हो गए हैं। अब आपको दूसरा ब्याह कर लेना चाहिए। ’’ राजा ने वजीर की सलाह मान ली किन्तु अपने ब्याह के लिए शर्त रखी कि वह उसी राजकुमारी से विवाह रचाएगा जिसके बाल सोने के हों।

वजीर को मछली खाने का शौक था। एक बार मछली के मुंह में सोने का बाल वजीर को दिखाई दिया। उसे राजा की शर्त याद आ गई। उसने सोचा हो सकता है किसी सोने के बाल वाली कन्या ने नदी में अपना सिर धुला हो। इसी से यह बाल मछली के मुहँ में आया हो। वजीर ने मछुआरे से मछली पकड़ने की जगह का पता किया।

मछुआरे की बताई हुई जगह पर वजीर पहुँच गया। थोडी देर में वहाँ पर एक कन्या अपने बालों को धुलने लगी। उसके बाल सोने जैसे थे। वजीर ने उस कन्या से परिचय पूछा। वह बोली - ’’ मैं पड़ोस के राजा शिवनाथ की लड़की हूँ। मेरा नाम स्वर्णकन्या है।’’

बजीर ने राजा अक्षत को स्वर्णकन्या के बारे में बताया। राजा शिवनाथ की सहमति से अक्षत का विवाह स्वर्णकन्या से हो गया। स्वर्णकन्या खूबसूरत थी। राजा अक्षत स्वर्णकन्या के रूप माया जाल में उलझ गए थे। रानी स्वर्णकन्या जितनी सुन्दर थी उतनी ही चंचल और दुश्चरित्रा भी।

एक दिन चन्द्रप्रकाश और सूर्यप्रकाश गेंद खेल रहे थे। खेलते-खेलते गेंद राजा-रानी के निवास कक्ष में चली गई। बड़ा राजकुमार सूर्यप्रकाश गेंद लेने गया। उस समय वहाँ स्वर्णकन्या अकेले ही थी। ’’माँ ! हम गेंद खेल रहे थे। गेंद इस ओर आ गई थी। क्या आपने देखी ?’’ - सूर्यप्रकाश ने स्वर्णकन्या से पूछा।

’’सूर्यप्रकाश ! इधर बैठो। तुम बहुत अच्छे हो। मुझे माँ मत कहो मेरा नाम स्वर्णकन्या हैं। मुझे इसी नाम से पुकारो‘‘ - स्वर्णकन्या बोली’’

’’माँ ! बाबू (पिता) की लाई हुई ब्वे (माता) और ठाकुर (राजा) की लगाइ स्ये (मुहर,स्याही ) अमिट होती है। तुम मेरी पूज्या माता हो। मैं तुम्हें नाम लेकर कैसे पुकार सकता हूँ ?‘‘- सूर्यप्रकाश ने कहा।

’’देखो ,सूर्यप्रकाश ! तुम्हारी और मेरी आयु में काफी कम अन्तर है। हम दोनो जवान हैं। मैं तुमसे प्यार करती हूँ।’’

स्वर्णकन्या की इस बात को सुनकर सूर्यप्रकाश वहाँ से बाहर दौड़ पड़ा। सूर्यप्रकाश ने चन्द्रप्रकाश को भी यह बात बताई। शाम को जब अक्षत अपने निवास कक्ष में आया तो स्वर्णकन्या ने सूर्यप्रकाश की झूठी शिकायत की - ‘‘ महाराज ! सूर्यप्रकाश मुझे बुरी दृष्टि से देखता है। आज उसने मुझसे प्रणय निवेदन किया। आपने उसे मृत्युदण्ड नहीं दिया तो मैं आत्महत्या कर लूंगी।‘‘

राजा अक्षत स्वर्णकन्या के मोहपाश में बंध चुका था। उसने उसके कथन पर विश्वास कर लिया। राजा ने कहा - ’’महारानी ! मै सूर्यप्रकाश को कोई और सजा दे सकता हूँ किन्तु मृत्युदण्ड नहीं।’’

’’तो राज्य से निकल जाने का आदेश तो दे सकते हो।’’- स्वर्णकन्या बोली।

राजा ने दूसरे दिन सूर्यप्रकाश को राज्य से निकल जाने का आदेश दे दिया। चन्द्रप्रकाश भी उसके साथ चला गया। रास्ते में चलते-चलते वे थककर चूर हो गए थे। दोनों को नींद आने लगी। उन्होंने तय किया बारी-बारी से एक भाई उठा रहेगा दूसरा सो जाएगा। सबसे पहले सूर्यप्रकाश सो गया और चन्द्रप्रकाश उठा रहा। इस समय आसमान में शिव और पार्वती की सवारी चलने लगी। पार्वती ने शिव से कहा - ’’महादेव! नीचे देखो। राज परिवार में जन्म लेने के बाद भी वे दोनो भाई दुर्भाग्यवश भटकने को मजबूर हैं। तुम तो करूणा के सागर हो। इन पर दया करो।‘‘

’’ देवी ! इस जीवजगत में हर प्राणी पूर्व जन्मकृत पाप-पुण्यों के बन्धन से बंधा हुआ है। इसी के अनुरूप फल भोगने को मजबूर है। अभी पेड़ से एक फल गिरकर चन्द्रप्रकाश के सामने गिरने वाला है। इन दो भाइयों में जो फल की गुठली खाएगा उसके जीवन में कम संघर्ष रहेगा। वह पहले राजा बनेगा। जो फल का गूदा खाएगा उसे अभी बहुत संघर्ष करना होगा। वह भी राजा बनेगा किन्तु देर

से।’’

थोड़ी देर में चन्द्रप्रकाश के सामने एक फल गिरा। उसने शिव-पार्वती की बातें सुन ली थी। उसने जानबूझकर फल का गूदा खाया और गुठली सूर्यप्रकाश के लिए रख दी जिससे सूर्यप्रकाश राजा बन सके।

सूर्यप्रकाश के उठने पर चन्द्रप्रकाश ने उसे पूरी बात बता दी। उसने चन्द्रप्रकाश को खाने को फल की गुठली दी और सो गया। चन्द्रप्रकाश को गहरी नींद आ गई। सूर्यप्रकाश को जोर की भूख लगी हुई थी। उसने सोचा चन्द्रप्रकाश ने लालच में आकर फल का गूदा तो स्वयं खा दिया। झूठी कहानी उसे सुना दी। सूर्यप्रकाश को गुस्सा आया। चन्द्रप्रकाश को गहरी नींद में छोड़कर वह वहाँ से चला

गया।

चलते चलते सूर्यप्रकाश एक राजा के दरबार में पहुँचा। राजा ने उसे अपना नौकर रख दिया। वह उसकी बुद्धिमानी और चातुर्य से प्रभावित हुआ। राजा बूढ़ा हो गया था। उसका कोई पुत्र नहीं था। उसने अपनी इकलौती लड़की का ब्याह सूर्यप्रकाश से कर दिया। उसने सूर्य प्रकाश को अपने राज्य की बागडोर सौंप दी। सूर्यप्रकाश के राज्य में एक राक्षस ने आतंक मचा रखा था। उस राज्य के हर निवासी को बारी-बारी से राक्षस के पास जाना पडता था। राक्षस उसे खा जाता था।

इधर चन्द्रप्रकाश सोकर उठा। उसे अपना भाई दिखाई नहीं दिया। वह अपने दुर्भाग्य को कोसने लगा। वह कई वर्षो इधर-उधर भटकता रहा। एक दिन रास्ते में उसे दूर एक झोपड़ी दिखाई दी। वह वहीं पहुंच गया। उसमें झोपड़ी में एक बुढ़िया थी। वह रो रही थी। चन्द्रप्रकाश ने बुढ़िया से रोने का कारण पूछा। बुढ़िया बोली- ’’मेरा एक ही बेटा है। इस इलाके में एक राक्षस ने आतंक मचा रखा है। यहाँ के हर निवासी को बारी-बारी से राक्षस के पास जाना पड़ता है। राक्षस उसे खा जाता है। आज रात को मेरे लड़के की बारी है।’’

’’मै भी तुम्हारे बेटे के समान हूँ। आज तुम्हारे बेटे की जगह पर मैं उस राक्षस के पास  जाऊँगा।‘‘ - चन्द्रप्रकाश ने बुढि़या से कहा।

रात को उस बुढि़या के बेटे की जगह चन्द्रप्रकाश राक्षस के पास गया। चन्द्रप्रकाश को उसके राज पुरोहित ने अभिमन्त्रित बभूत दी थी। चन्द्रप्रकाश ने उस बभूत को राक्षस की ओर फेंक दिया। चीखते-चिल्लाते राक्षस की मौत हो गई।

राक्षस को मारकर जब चन्द्रप्रकाश बुढि़या की झोपड़ी की ओर वापस आ रहा था। राज्य के कुछ दरबारियों ने उसे देख लिया। ’’इतनी रात गए तुम कहाँ जा रहे हो ?’’ - उन्होंने चन्द्रप्रकाश से पूछा। चन्द्रप्रकाश ने उन्हें राक्षस को मारने वाली बात बता दी। राज दरबारियों ने सोचा -’’जब राजा को पता चल जाएगा कि राक्षस को इस राहगीर ने मारा है तेा इसे इनाम मिलेगा। इसलिए इस राहगीर को ही मार देना चाहिए।’’ उन्होने चन्द्रप्रकाश को पकड़कर मिटटी की खाणी (खान) मे दबा दिया। वे राजा के पास गए। उन्होंने राजा को बताया - ’’ महाराज! हमने मिलकर उस राक्षस को मार दिया है।’’

राजा सूर्यप्रकाश ने उन दरबारियों को इनाम दिया। उन्हें पदोन्नत भी किया गया। सुबह एक कुम्हार मिट्टी लेने जैसे ही खाणी पहुँचा। उसे खाणी की मिट्टी हिलती हुई दिखाई दी। उसने वहाँ से मिट्टी हटाई तो उसे चन्द्रप्रकाश दिखाई दिया। वह बेहोश हो गया था। कुम्हार उसे अपने घर ले

गया। उसने उसे होश में आने की जड़ी दी। वह होश में आ गया। अब चन्द्रप्रकाश कुम्हारे के साथ रहने लगा। एक दिन चन्द्रप्रकाश कुम्हार के साथ नाव में घड़े ले जा रहा था। राजा के उन्हीं दरबारियों ने उसे देख लिया जिन्होने उसे मिटटी की खाणी में दबा दिया था। चन्द्रप्रकाश के पास आकर वे बोले - ’’भाई ! हमें क्षमा कर दो। हमसे भूल हो गई थी। हमारे साथ राजदरबार चलो। हम तुम्हें राजा से इनाम दिलवाएंगे । ‘‘ उन्होने चन्द्रप्रकाश पर चोरी का झूठा आरोप लगाया और उसे जेल में डलवा दिया। जेल डालने से संबन्धित फैसले राजा का वजीर करता था। इसलिए सूर्यप्रकाश को चन्द्रप्रकाश के जेल में होने की जानकारी नहीं थी।

राक्षस के मारे जाने के बाद सूर्यप्रकाश का राज्य निर्विघ्न चल रहा था। एक दिन सूर्यप्रकाश ने महल के आंगन में पेड़ से एक फल गिरते हुए देखा। उसे चन्द्रप्रकाश की याद आ गई। उसे यह भी याद आया कि उसके भाई ने फल का गूदा स्वयं खा लिया था और सूर्यप्रकाश के लिए यह कहकर गुठली दे दी थी कि महादेव शिव के अनुसार जो गुठली खाएगा उसके जीवन में कम संघर्ष रहेगा। वह पहले राजा बनेगा। आज उस भविष्यवाणी के सच साबित होने पर सूर्यप्रकाश की आंखों में आँसू आ

गए। सूर्यप्रकाश ने स्वयं को धिक्कारा कि उसके भाई ने उसके लिए कितना त्याग किया था और एक वह है जिसने क्रोध में आकर उस भाई को अकेले ही छोड़ दिया था। सूर्यप्रकाश के मन में चन्द्रप्रकाश से मिलने की तीव्र इच्छा पैदा हो गई। उसने सोचा -’’ इतने सालों बाद पता नहीं वह कहाँ होगा ? सूर्यप्रकाश ने राज्य भर में घोषणा करवा दी कि जो भी व्यक्ति चन्द्रप्रकाश का पता लगाएगा, उसे मनचाहा इनाम दिया जायेगा। इनाम के लालच में राज्य कर्मचारियों और प्रजा ने चन्द्रप्रकाश को ढूंढने की कोशिश की। कोई भी व्यक्ति चन्द्रप्रकाश का पता नहीं लगा पाया।

राजा सूर्यप्रकाश को कथा सुनने का शौक था। साल में एक बार उसके राज्य में कथा सुनाने की प्रतियोगिता की जाती थी। इसमें राज्य का कोई भी व्यक्ति, कर्मचारी, यहाँ तक कि जेल में बन्द कैदी भी भाग ले सकते थे। राजा को जो कहानी पसन्द आती राजा उसे सुनाने वाले को पुरस्कार देता। इस बार भी कथा सुनाने की प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। कैदियों की ओर से चन्द्रप्रकाश ने भी कहानी सुनाने की इच्छा प्रकट की। चन्द्रप्रकाश की लंबी दाढ़ी उग गई थी। उसे सूर्यप्रकाश नहीं पहचान पाया। चन्द्रप्रकाश ने महल के आँगन में गेंद खेलने से फल की गुठली अपने भाई को देने तक की पूरी कहानी सूर्यप्रकाश को सुना दी। इसके बाद राक्षस को मारने, मिट्टी की खाणी में दबाए जाने और झूठे आरोप में जेल में बन्द होने तक की कहानी भी सुना डाली।

सूर्यप्रकाश ने अपने छोटे भाई चन्द्रप्रकाश को पहचान लिया। उसे आधे रास्ते में छोड़कर आने के लिए क्षमा मांग दी। चन्द्रप्रकाश को मिट्टी की खाणी में दबाने और झूठा आरोप लगाकर जेल में डालने वालों को कठोर सजा दी गई। सूर्यप्रकाश ने अपने राज्य का आधा भाग चन्द्रप्रकाश को दे दिया। दोनो सुखपूर्वक राज करने लगे।

- डॉ. उमेश चमोला , शिक्षक – प्रशिक्षक राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् उत्तराखंड , राजीव गांधी नवोदय विद्यालय भवन नालापानी रायपुर देहरादून , उत्तराखंड

ई मेल - u.chamola23@gmail.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: उत्तराखण्ड की लोककथा - जीवन कथा - डॉ. उमेश चमोला
उत्तराखण्ड की लोककथा - जीवन कथा - डॉ. उमेश चमोला
http://2.bp.blogspot.com/-q72HBd_xSsg/XombnY6hV_I/AAAAAAABR2w/0Bf2mYywLzwVyG60mGTUlzyxFAWwB1dhgCK4BGAYYCw/s320/hiipeackoahknimk-769906.png
http://2.bp.blogspot.com/-q72HBd_xSsg/XombnY6hV_I/AAAAAAABR2w/0Bf2mYywLzwVyG60mGTUlzyxFAWwB1dhgCK4BGAYYCw/s72-c/hiipeackoahknimk-769906.png
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_23.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_23.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content