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मुस्कुराना जिसका लगता है जैसे हो कोई धुन - कविताएँ - पंकज जैन

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मुस्कुराना जिसका लगता है जैसे हो कोई धुन है नहीं कोई और जानम वो हो सिर्फ तुम तुमसे जुड़े सब एहसास वाकई में कमाल हैं गोरे गाल और घुँघरा...

मुस्कुराना जिसका लगता है
जैसे हो कोई धुन
है नहीं कोई और जानम
वो हो सिर्फ तुम

तुमसे जुड़े सब एहसास
वाकई में कमाल हैं
गोरे गाल और घुँघराले,
लिपटे तुम्हारे बाल हैं

तुमसे जुड़ी सब वो यादें
दिल में आज भी कायम हैं
तुम्हारी हथेलियों का स्पर्श
आज तक भी मुलायम है

कसूर आईने का ना निकालना
गर तुम्हें तुम्हारी नज़र लग जाए
तुम्हारी मौजूदगी ही ऐसी है
कि हर लम्हा यादगार बन जाए

चमक ऐसी मानो दीप दमकता है
पावन मानो तुलसी सी पवित्रता है
तुममें है चंदन जैसा आकर्षण
और गुलाब जैसी कोमलता है

हिम जैसी है तुममें शीतलता
नदी की धारा सी चंचलता
चाँद सी है मोहक अदाएँ
तुम्हारे गुणगान से मिले सफलता

जानता हूँ तुम्हारी सुंदरता का राज़
मधुर वाणी और हो सच्ची हमराज़
सब कुछ कह जाते तुम्हारे दो नैन
तुम ना दिखो तो मन होता बेचैन

गालों पर बिखरा जीवन का मधुमास
रोम रोम पुल्कित और मन में उल्लास

ये आईने न दे सकेंगे तुम्हें
तुम्हारे सौंदर्य की कोई ख़बर
जानना हो तो पढ़ लो मेरी आँखें
विश्वास ना हो जो तुम्हें अगर

दुनिया में खूबसूरती तुम्हारी
सदा यूँ ही सलामत रहे
सदियों तलक सर-ज़मीं पर
तेरे हुस्न की कयामत रहे

पंकज जैन

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  लट्टू, कंचे, पतंग और गुलेल
रोमांचक थे अपने सारे खेल

पिड्डू, पोषम-पा और सरिया-गपाई
याद है गुलाम लकड़ी और छुपन-छुपाई

किन-किन काँटा, खो-खो, घोड़ा बादाम छाई
मारम-पिट्टी, साँप-सीढ़ी की यादें ताज़ा हो आई

टायर,गिप्पा, लंगड़ी और कैरम
खेलने से इनके बीमार होते थे कम

कागज़ की नाव, ऐरोप्लेन और
वो घर की पतंग
खुशियाँ दी असीम और मन में
भर दी उमंग

आईस-पाईस, जॉली,स्टेचू और गिल्ली-डंडा
खेलते रहना मस्ती में, ये जीवन का फंडा

चिड़िया उड़, London और खेलते थे ताश
लौट के आ जाएं वो बचपन के दिन काश

इनसे बढ़ता था भाई-चारा और जान पहचान
स्वस्थ, तंदुरुस्त और रहता था शरीर बलवान

इनमें लगता था नाम मात्र का पैसा
दे नही सकता मज़ा कोई इनके जैसा
.... पंकज जैन ( यश आर्ट्स )
Enjoy childhood

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कुदरत की कहानी उसी की ज़ुबानी

वृक्ष, मिट्टी, वायु, जीव और निर्मल जल
इनके बचने पर ही रहेगा आने वाला कल

प्रकृति में निहित संसाधन हैं प्रचुर
लुटाती दोनों हाथों से मैं भरपूर

बुझाती हूँ मैं सबकी प्यास
देती पवन और शीतल छाया
पाने की कुछ आस न रखती
इसके एवज में क्या है पाया ?

प्रकृति है ईश्वर की अद्भुत रचना
इसके पतन से हम सब को बचना
अगर बरती अब लापरवाही इसमें
प्रलय का हाहाकार शीघ्र है मचना

पेड़ों को तुम रोज काट रहे,
  प्रदूषण को शौक से पाल रहे
हे मानव, इस जीवन को तुम
क्यों संकट में खुद डाल रहे ?

मैं हूँ तुम सबकी पालनहार
फिर क्यों होते मुझ पर प्रहार

वसुंधरा को पहचानो, यही तो है सबकी जननी
झूठी शान की ख़ातिर मेरा
किया क्यों सीना छलनी

बहती नदियां, पहाड़ और खेत खलिहान
कितने लोगे मेरे सब्र के और इम्तिहान

मेरी छाती पर हल तू है चलाता
तब कहीं सबका पेट भर पाता

मेरी कीमत पर मत करो ऐसा विकास
दुःखद परिणामों का कर लो आभास

मैंने दिया कितना पर कभी ना गिनाया
मुझ पर ज़रा भी तरस नहीं आया

हर काम नहीं आएंगे विज्ञान और तकनीक
भूकंप, सुनामी प्रलय से कुछ तो सीख

अल्प दान देकर यूँ ना इतराओ
प्रकृति सा दानी बनकर दिखाओ

धन-दौलत कमाई जो, सब है नश्वर
मेरी सम्पदा ही है सच्ची धरोहर

खाते हो रोज़ सब बड़ी बड़ी कसमें
समय रहते कर लो संरक्षण की रस्में

मुझसे ना करना अब और छेड़खानी
मेरे बगैर असंभव तुम्हारी ज़िंदगानी

जिसने भी जाना मेरा क्या है मोल
उसके जीवन में खुशियाँ दूंगी मैं घोल

जो भी करता है प्रकृति से प्यार
सुख का वही है सच्चा हक़दार

Love & save Environment.
Keep clean, Be green .
  Pankaj Jain , Bhopal.
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मेरा भारत महान

कर लो सैर दुनिया की, पाओगे अपना देश भारत महान
इतनी विविधता, आज़ादी और कहाँ?, ढूंढ लो सारा जहान

यहीं पर कौम, त्योहार अनेक और मिलते हैं रीति- रिवाज़
हर सौ km पर बदलती है बोली और भाषा की आवाज़

अल्प ही देशों में मिलेंगी
साल में बदलती ऋतुएं चार
लोग रहते हैं कई जाति के, फिर भी दिल में उमड़े प्यार

इतने धर्म, भाषा, संस्कृति, फूल और कहां सजते बाज़ार
इतिहास सँजोए प्राचीनतम, राम,बुद्ध,महावीर के हुए अवतार

चंद्रगुप्त, अशोका,शिवाजी, अकबर ने शौर्यता से किये थे राज
लक्ष्मीबाई, अहिल्या, जोधा के पराक्रमी किस्से भी जीवंत हैं आज

बोस, आज़ाद, गांधी, पटेल ने दिया आजादी में अपना बलिदान
नेता तो आज भी हैं मिलते पर स्वार्थ के नीचे दबा उनका स्वाभिमान

रामानुजन,भाभा,बासु,रमन के जग विख्यात हुए अविष्कार
टाटा, बिड़ला के बुलंद इरादों ने अंग्रेजों से मानी नही हार

रिलायंस,इंफोसिस, विप्रो, हीरो,TCS, L&T या हो महारत्न भेल
पैर पसारे दुनिया भर में, उत्पाद इनके रहते उत्कृष्ट
और बेमेल

IIT, IIM के उम्दा ब्रेन ड्रेन
होने जाते सुदूर विदेश
R&D की हो सुविधा बेहतर, तो सिरमौर होगा अपना देश

लता, ध्यानचंद, BIG B, सचिन का, लोहा पूरी दुनिया ने माना
नई पीढ़ी है बेहद टैलेंटेड, जग में है इनको छा जाना

दिल्ली, मुम्बई विश्व के दस, टॉप शहरों में है शामिल
बैंगलोर ने यूं ही नही किया, silicon वैली का तमगा हासिल

हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे या फिर,
हो भारत का मैनचेस्टर अहमदाबाद
फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, OLA, Paytm स्टार्टअप हुए, कम समय में जग विख्यात

भारत का प्लस पॉइंट या ताक़त है
उसकी शिक्षित और स्वस्थ आबादी
देशवासी गर हो जाए अनुशासित, मेहनती,
तो चीन की तय मानों बर्बादी

व्याप्त समस्या और चैलेंज हैं, उनमें देखो स्वर्णिम अवसर भरपूर
स्वच्छता, सुशासन से बनेंगे सरताज, दिन अब नहीं है वो दूर

सांसे हो रही कम, चलो वृक्ष लगाएं मिलकर हम
आओ दोस्तों लें यह प्रण, हरित और स्वच्छ हो पर्यावरण
गणतंत्र दिवस की समस्त भारतवासियों को शुभकामनाएं


Proud to be Indian

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मोबाइल का संसार

20वीं सदी का साबित हुआ
ये अत्यंत लोकप्रिय आविष्कार
इसने बदलकर रख दिया
हम सबका सुस्त संसार

मोटोरोला के मार्टिन कूपर ने
किया ब्रिलियंट इनोवेशन
मोबाइल ने मिटा दी दूरियाँ
चाहे जो हो डेस्टिनेशन

इसके पूर्वज रहे थे फोन
पेजर, फैक्स और टेलिग्राम
इसके आ जाने से लाइफ में
हो गए सब काम आसान

द्रुतगति से चलते हैं अब
सभी के रोजमर्रा के काम
क्या आदमी, क्या औरत
और बच्चे, बूढ़े या जवान

हर पल की खबरों का होता
पलक झपकते ही संचार
सोशल मीडिया के क्या कहने
सबको हुआ है यह बुखार

पुराने, बिछड़े दोस्तों को
एक दूजे से मिलवाया
ग्रुप बनाकर आपस में
लोगों ने मेल-जोल बढ़ाया

व्यापार की तो मान लो
जैसे बदल कर रख दी तस्वीर
कईयों के खुल गए भाग्य
और चमक गई तक़दीर

हर घर में इसने अपनी
घुसपैठ जबर्दस्त बढ़ाई
बच्चों की तो होती मोबाइल पर
आजकल virtual पढ़ाई

एक क्लिक में उपलब्ध है
हर विषय की जानकारी
इसके बगैर मुश्किल है अब
कल्पना जीवन की हमारी

वीडियो कॉल से मिलता
जैसे आंखों देखा हाल
फोन स्विच ऑफ होने पर
होता दिल का बुरा हाल


अब तक किया इसकी
अच्छाइयों का गुणगान
इसके addiction के होंगे
भयंकर ,गम्भीर दुष्परिणाम

घरों में होने लगा अब
आपसी वार्तालाप नगण्य
इसी से सीख रहा इंसान
करना नए अपराध जघन्य

गप्पे, निरर्थक चैट में होता
सबका अमूल्य वक़्त बर्बाद
इससे बेहतर है करें
हम परस्पर संवाद

फ़िज़ूलख़र्चों की लग गई लत
हैकिंग के हुए कई शिकार
जल्दी हो रही आँखें कमज़ोर
लोग मानसिक रूप से विकार

इसके बगैर जीने की सोचना
अब करना है बेमानी
सीमित उपयोग करने से
फिर हसीन होगी ज़िन्दगानी

........... पंकज जैन

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  Rose Day के अवसर पर:-

नागपुर का वो मेरा कॉलेज,
लिया था नया एडमिशन
उम्र हो गई थी 18 पार
हिचकोले खाने लगा था मन

एक दिन जा रहा था
यूँ ही मैं तो अकेला
टिकी अँखियाँ जिस पर
जैसे मदिरा का हो प्याला

सहसा कानों में गूंजी
पायलों की खनक
एहसास हुआ कि ये ही
होती होगी मोहब्बत

उठाकर सिर मैंने अपना
मिलाई उससे जो नज़र
चेहरा भूल न पाए आज तक
ऐसा गहरा हुआ असर

भगवान की वो अनुपम रचना
हीरोइन सब fail उसके आगे
बात भले न हुई थी अबतक
ख़्वाब में सजने लगे थे साफे

मैं ठहरा सिविल का छात्र
उसकी ब्रांच थी केमिकल
होगी उससे कभी तो बात
इन्तज़ार किया हर घड़ी, पल

अक्सर कैंटीन, लाइब्रेरी में
टकरा जाया करते थे हम
कशिश थी उसमें ऐसी
कि भूल जाते थे सब ग़म

जैसे तैसे पूछ पाछ कर
पता किया सुंदरी का नाम
तिशा बुलाते थे उसको
अब पढ़ाई से क्या था काम

मन होने लगा था अब
उसके ही ख़यालों में व्यस्त
उससे बात कैसे हो ये
मार्ग नहीं हो रहा था प्रशस्त

उसका हँसता वो बिंदास चेहरा
दिल के अंदर बसता गया
एकतरफा प्यार में ये दिल
उलझता और फंसता गया

सोचने में ही निकाल दिए
कॉलेज के सारे साल
जमशेदपुर वापस हुई रवाना
करके हमरा वो बुरा हाल

इसीलिए कहता हूं यारों
मत पालो इतने ज़ज़्बात
जब भी मिल जाए मौका
कर डालो दिल की बात

उसको एक गुलाब न दिया
बस इसी का है मलाल
पर रब ने दी है बीवी शानदार
जो है उससे भी कमाल


Happy Rose Day

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  वैलेंटाइन डे

अकेलेपन में मन जब भटके
और छाने लगती है निराशा
हाथ बढ़ाकर साथ दे कोई
यही है प्यार की परिभाषा

प्यार वो सच्चा, जो संग हो तेरे
जब आफत,कठिनाई का साथ रहे
चल रही हो कहर की आँधी
तेरे हाथ में बस उसका हाथ रहे

प्रेम, मोहब्बत, Love या प्यार
इनका करो प्रिये से इज़हार
अच्छे होते जब हों इसमें बीमार
जान पर कर लो तुम जाँ-निसार

प्यार है आशा, प्यार ही है नताशा
अभिलाषा प्यार की, सब हटाए हताशा

प्यार की न सीमा, बढ़े सर्वत्र महिमा
करो इसकी अनुभूति, स्तुति और गरिमा

करो पूजा प्यार की, अर्चना और आराधना
समझो भावना प्यार की, करते रहो वंदना

प्यार ही भक्ति, प्यार ही दर्शन
प्यार विश्व भारती
प्यार पर रखो अटूट श्रद्धा
जैसे अर्जुन के कृष्ण सारथी


जागृति मिले प्यार से,
प्यार से ही तृप्ति
प्रीति बढ़ाओ प्रेम की
लगाकर प्यार की विभूति

प्यार सरस्वती, दीप्ति और दुःखों की मुक्ति
उज्ज्वला की ज्योति, अदिति,
बढ़ाए ये कीर्ति

प्रेम से मिले तिशा
हो पूरी अभिलाषा
यही है तनीषा, दीक्षा
और किसी की ईशा

प्यार की न कोई एक ऋतु
है कुदरत का ये करिश्मा
मन को हर्षाती है ये
निराली इसकी उपमा

प्यार है ममता, स्नेहा
और खुशबू है चंदन की
बगिया में पुष्प की पंखुड़ी
और वीणा हो गुंजन की

प्यार की नहीं कोई राशि
फिर भी अनोखी माया
इसके माधुर्य की किरण से
क्या कोई है जो बच पाया

इसकी नहीं कोई आकृति
नहीं होती कोई रेखा
जी भर के कर लो प्यार
किसने कल है देखा

बजे सब ओर प्रेम की मृदंग
घूमा जग का हर कोना
पुष्प की कस्तूरी जैसे
और हो मन की कामना

प्रेम ही गीता, प्रेम ही कविता
देती खुशी और मुस्कान
चंदा की रश्मि, जूही की महक
तभी तो होता इसका गुणगान

मन हो जाता है प्रफुल्ल
पाए जो प्यार की एक झलक
चेतना से भरे नीचे वसुन्धरा
और ऊपर वो नीला फलक

दुआ मांगते बहुतों से
इबादत चन्द से होती है
इश्क बहुतों से हो सकता है
पर मोहब्बत कम से होती है

ख़ुदा से है एक गुज़ारिश
तेरे प्यार के सिवा कोई बन्दगी ना मिले
साथी मिले तुम जैसा या फिर
कभी ज़िन्दगी ही ना मिले

पंकज जैन

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बॉलीवुड - दिलों की धड़कन

भारत की जनता है फिल्मों की दीवानी
बॉलीवुड की कहानी सुन लो मेरी ज़ुबानी

राजा हरिश्चन्द्र थी फीचर फिल्म पहली
बोलती फ़िल्म थी अर्देशिर की "आलम-आरा"

अमृत मंथन थी सिल्वर जुबली प्रथम
"यादें" में सुनील दत्त ने किया अभिनय सारा

इंद्रसभा थी पिक्चर ऐसी जिसमे थे पूरे 71 गाने
सत्यजीत, बिमल रॉय का लोहा पूरी दुनिया माने

फिर आया स्वर्णिम युग छाए जब
गुरुदत्त, राजकपूर और दिलीप कुमार
नूतन, नर्गिस ने छोड़ी छाप अमिट
मधुबाला ने करके हल्का श्रृंगार

देवानंद, अशोक दा, मीना कुमारी
देखी नैसर्गिक वहीदा रहमान
लता,रफी,मुकेश, नौशाद,किशोर
का संगीत में रहा अमर योगदान

70-80 के दशक था वो जब
आया मसाला फिल्मों का दौर
राजेश,धर्मेंद्र,हेमा,संजीव,रेखा
पर बच्चन साहब बने सिरमौर

प्रकाश मेहरा, रमेश सिप्पी और
जनक कहलाए मनमोहन देसाई
दर्शकों ने किया इन्हें बेहद पसंद
फिल्मों ने करी रिकॉर्डतोड़ कमाई

90 का decade कहलाया प्यार
एक्शन और कॉमेडी का दशक
आमिर,सल्लू,शाहरुख के संग
अनिल,अक्षय ने बिखेरी चमक

माधुरी, श्रीदेवी, जूही, तब्बू
ऐश्वर्या, प्रियंका ने जलवे दिखाए
उदित, शानू, सोनू, अलका के
गीत आज भी हम गुनगुनाएं

जावेद, गुलज़ार, रहमान और
सबको नचाती फरहा खान
फेरहिस्त बनाने में रहेंगे शुमार
ये हैं ऐसे कुछ नाम महान

21वीं सदी की बात करें तो
मिलेंगे बेहतरीन सितारे नायाब
दीपिका, कंगना,अनुष्का, विद्या
की Fan-following देख लें आप

रणवीर,विक्की,इरफ़ान,आयुष्मान
ने सब पर छोड़ी एक गहरी छाप
दमदार अभिनय से कायल बनाया
पब्लिक में जमाई अपनी साख़

मायावी, चमचमाती और फैंटेसी की
दिखती भले हो दुनिया फ़िल्मी
राह होती नही इतनी आसान
नज़र आती जो हमें तिलस्मी

मनोरंजन, ज्ञान का अच्छा साधन
भूल जाते हम दुःख और ग़म
लाखों पेट पलते इसके ज़रिये
सभी कलाकारों को मेरा नमन


  पंकज जैन

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जीवन का सफ़र
ईश्वर का तय किया कर रहे सब सफ़र
नहीं पता कब होगा हमारा आखिरी पहर

जीता रहा अब तलक, नहीं देखा दुनिया का क़ायदा
निभाया सब कुछ दिल से,कभी देखा नहीं फ़ायदा

सूनी गलियों में मरते नज़र आए एहसास
मैले से दिखने लगे भरोसे के वो लिबास

अपनों ने कब खोया, दूसरों को कब पा गया
ज़िन्दगी की आपाधापी में, न जाने कहाँ आ गया

चकाचौन्ध भरी जिंदगी में कभी सहम जाता हूँ
लाखों की भीड़ में खुद को तन्हा पाता हूँ

मेरे लिए तो वो बचपन ही बड़ा प्यारा था
साधारण ही सही वो घर अपना हमारा था

खरीद लो चाहे दुनिया के सारे ऐश-ओ-आराम
बमुश्किल ही चुका पाते हम सुकून के दाम

सांसारिक जीवन में भोग लो चाहे जितने राज-विलास
प्यास शान्त करता है शीतल जल का एक गिलास

जीवन एक संघर्ष है कर लो हँस के पार
मुश्किल में ले लो अपनों से प्यार का उधार

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  कोरोना वायरस : - एक संदेश

चीन ने की तरक्की भरपूर
यह है उसका उजला पक्ष
दुनिया पर राज उसी का हो
निर्धारित किया घातक लक्ष्य

कोरोना को किया लैब में तैयार
ताकि दुश्मन की कर दे तबाही
उसका पैंतरा पड़ गया उल्टा
चीन में मचा दी वायरस ने त्राहि

कोरोना की हुई थी भविष्यवाणी
जान गवाएंगे निर्दोष लाखों प्राणी
जैविक हथियारों से भी अत्यन्त विनाशक
मिसाईल, बमों से ज्यादा विध्वंसक

माँसाहार की हदें करी चीन ने पार
साँप, बिच्छु, बिल्ली ये सब खाते
जीवों पर करते तुम किंचित दया
अपने को दुःखी, बेबस न पाते

फाइबर ऑप्टिक्स का नम्बर 1 उत्पादक
हुबेई प्रान्त की राजधानी वुहान
Covid-19 बन गया घातक इतना
बिना युद्ध से हुआ हो क़त्ल-ए-आम

चीन, कोरिया, इटली और ईरान
से फैलकर पहुंचा US, स्पेन
दुनिया भर में बढ़ रहा इन्फेक्शन
लोगों का छिन गया अमन-चैन

खरबों डॉलर का हो चुका नुकसान
स्थिति अब भी है अत्यंत गम्भीर
सफाई का रखें विशेष ध्यान सब
अब तो संभलो जाओ अरे ए इंसान

गर्मी बढ़ने से कम होगा प्रकोप
ऐसी कर रहे हैं वैज्ञानिक आशा
मूक पशुओं से करें सब प्यार
परस्पर समझ लें प्रेम की भाषा

Be Safe, Be Healthy
God bless everybody

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पूरा विश्व है परेशान, मचा है कोहराम
क्या चीन, इटली, स्पेन या जापान

प्रकृति से किया है इंसानों ने खिलवाड़
कुदरत ने दिया अब इंसान को लताड़

सूक्ष्म जीव में भी थी साँस और जान
अपनी इच्छाओं पर लगाई नहीं हमने लगाम

हमने सदा ही सोचा केवल बस अपना
बेजुबानों का भी तो होता होगा सपना

प्राचीन परंपराओं का हमने किया उपहास
जग ने समझा अब कि हैं कितनी वो ख़ास

चीनियों ने नहीं दिखाई कभी कोई जीव दया
निर्मम, क्रूर बनकर की है  अनगिनत हत्या

विपदा को इंसान ने स्वयं दिया है बुलावा
नहीं है उपाय, जाप स्तुति करने के अलावा

मकसद नहीं है मेरा धर्म- मज़हब की करना बात
अब नहीं जागे तो नुकसान का लगा लो अन्दाज़

सब मिलकर करें रोज बस यही दुआएं
हमसे न हो किसी का बुरा, मिटे सब विपदाएँ

पंकज जैन, भोपाल

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जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: मुस्कुराना जिसका लगता है जैसे हो कोई धुन - कविताएँ - पंकज जैन
मुस्कुराना जिसका लगता है जैसे हो कोई धुन - कविताएँ - पंकज जैन
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