।। एक अच्छे बाल साहित्यकार भी हैं रमेशराज।। +निश्चल

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(रमेशराज) ।। एक अच्छे बाल साहित्यकार भी हैं रमेशराज।। +निश्चल ---------------------------------- रमेशराज जी से मेरा कोई बहुत पुराना या लम्बा...

(रमेशराज)


।। एक अच्छे बाल साहित्यकार भी हैं रमेशराज।।

+निश्चल

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रमेशराज जी से मेरा कोई बहुत पुराना या लम्बा परिचय नहीं है। लेकिन जितना भी परिचय है उसमें, उन्हें और जानने-समझने की जरूरत होती है। वे सामान्य वेश-भूषा वाले असाधारण व्यक्तित्व हैं। आप जब सासनीगेट के ईसानगर में, संकरी-सी गली में दुकानदारी करते देखेंगे तो आपको आश्चर्य ही होगा कि यह व्यक्ति इतने शोरगुल-व्यवधान में दूकानदारी के बीच भी इतना शांत रहकर साहित्य की साधना में रत है। आज जहाँ लोग बहुत बढ़िया स्टडीरूम बनवाकर और शानदार ऑफिसनुमा कमरे में बैठकर घंटों बर्बाद कर ढंग की एक रचना नहीं कर पाते, ऐसे में रमेशराज जी इन सब विषमताओं में अनेकानेक रचनाओं को यों ही रच डालते हैं।

आप जब रमेशराज जी के पास जाते हैं तो उन्हें कई तरह से जानने का अवसर मिलता है। जब उनसे किसी विषय पर बात की जाये तो वे उस विषय को पूरी तरह से खंगाल देते हैं। चाहे साहित्य हो, राजनीति हो, क्रिकेट हो, सामाजिक विषय हो, इतिहास हो या और भी कुछ, उन्हें हर तरह का ज्ञान है, और उसके प्रति अपनी सटीक व स्पष्ट सोच भी है। रमेशराज जी को यूं तो मैं नाम से और कभी-कभार की मुलाकातों के आलावा ज्यादा नहीं जानता था। और इन सब मुलाकातों में मेरे मन में केवल यह छवि थी कि जैसे बहुत से कवि हैं, ऐसे ही एक कवि रमेशराज भी हैं। लेकिन ऐसा नहीं था। वो ऐसे आकाश हैं, जिसको जितना देखो, उतना ही विस्तृत-विशाल हो सकता है कि कुछ पाठकों को ऐसा लगे कि मै उनकी केवल तारीफ कर रहा हूँ। बल्कि ऐसा नहीं है, आप जब तक रमेशराज जी के साथ कुछ समय अनौपचारिक रूप से नहीं बिताएंगे, तब तक हो सकता है, ऐसा लगे।

मैं बाल-रचनाकारों की पत्रिका ‘ अभिनव बालमन ‘ की प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली कार्यशाला के लिए किसी स्थायी रूप से सन्दर्भदाता की तलाश कर रहा था। ऐसे में रमेशराज जी को जब पत्रिका देने गया तो उनसे कुछ बातें हुईं। बातों ही बातों में बात ग़ज़ल पर आ गयी। क्यों कि मैं ग़ज़ल के बारे में बहुत से लोगों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करता रहा था सो मैंने भी इसके बारे में बात की। धीरे-धीरे रमेशराज जी की कुछ परतें मेरे सामने खुलीं और मुझे लगने लगा कि यह सज्जन मुझे जो चाहिए वो बता सकते हैं। इस तरह मेरा स्वाभाविक रूप से उनकी ओर रुझान हुआ। इसी दौरान मैंने उनसे कार्यशाला में कविता के लिए सन्दर्भदाता के रूप में उन्हें आने का आमन्त्रण दिया। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा कि ये काम है तो मुश्किल, लेकिन करूंगा। इसके बाद उनसे मुलाकातें होती रहीं और वे ‘ अभिमन बालमन ‘ द्वारा आयोजित कार्यशाला सृजन-12 में अपनी गठिया की बीमारी और तेज गर्मी जिसमें 44 से 45 तक तापमान रहा, के बावजूद नियमित रूप से आये और बाल रचनाकारों को कविता की बारीकियां सिखायीं।

कार्यशाला के बाद जब मैं थोड़ा जिम्मेदारियों से हल्का हुआ, तो अपनी रचनाओं की छायाप्रति लेकर उनके पास जा पहुंचा। रचनाओं का पुलिंदा मैं उनके पास छोडकर आ गया। एक दिन बाद उनका फोन आया कि भाई रचनाएँ परमार्जित करने का समय साथ बैठें तो बेहतर होगा। मैं तो जैसे यह चाह ही रहा था तो मैंने झट से हाँ कर दी। अब तो रमेशराज जी के साथ तीन-चार घंटे बैठकर चर्चा करने का , समझने, सीखने का अवसर मिलने लगा। मैं संतुष्ट था कि मुझे जिसकी तलाश थी, मैं उसे पा चुका था।

इन चर्चाओं के दौरान रमेशराज के व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानने को तो मिला ही, साथ ही साहित्य की विविध विधाओं के बारे में ईमानदारी से जानने और सीखने को मिला। इसतरह रोज की चर्चाओं और मार्गदर्शन के साथ जहाँ मेरी रचनाएँ परिष्कृत हो रहीं थीं, वहीं मैं भी अपने आप को परिष्कृत पा रहा था। रमेशराज जी की छंद पर जो पकड़ है और केवल पकड़ ही नहीं, जिस प्रकार से वे सामने वाले को समझाते हैं, उससे भी महत्वपूर्ण कि उसे संतुष्ट करते हैं, वो अपने आप में अभिनव है। वे जब रचनाओं पर अपने विचार देते हैं तो एक अच्छे सर्जन की तरह उसके खराब अंगों को न केवल निकाल देते है और उसके मूल स्वरूप को भी विकृत नहीं होने देते। वे आपको उपदेश नहीं देते, बल्कि आपके साथ में कलम लेकर साथ-साथ आपकी भावनाओं को महसूस कर, जैसा आप चाहते हैं, उसको सटीक ढंग से ठीक करने का माद्दा रखते हैं। इसी के साथ वे अपने ज्ञान को किसी पर लादते नहीं। बल्कि सहज भाव से वे आपको और आप उनको उनके विचारों को स्वीकार करते हैं। वे आत्म-प्रशंसा करने या करवाने वालों में से नहीं हैं, बल्कि हर सही बात को प्रखरता से रखते हैं। उनके साथ और रचना परिष्कार कराने के बाद आप यह महसूस करते हैं कि अब कोई भी इस रचना में दोष नहीं निकाल सकता। लेकिन इस सबके बावजूद वे सहज भाव से कहते हैं कि हो सकता है कुछ गड़बड़ी रह गयी हो।

अपनी दूकान की प्रमुख व्यस्तताओं के अलावा वे दैनिक जागरण समाचार पत्र के चण्डीगढ़ संस्करण के लिए भी लेख लिखा करते हैं। उनकी निर्लिप्तता देखिए कि वे तमाम लेख जिनका कि उनको बाकायदा मानदेय मिलता है, के बावजूद उन्होंने कभी भी अपने प्रकाशित लेख वाला दैनिक जागरण मंगाकर संग्रह करने की कोशिश नहीं की। जबकि आजकल तो लोग अख़बार में नाम आने भर से उसकी कटिंग हाईलाइट करके अपने पास सुरक्षित कर लेते हैं।

इस सबके साथ ही रमेशराज जी केवल अभ्यास ही नहीं करते वरन वे चिन्तन और शोध कर नयी बातें खोजते हैं। यह सब तर्क की कसौटी पर सम्पन्न होता है। तभी तो रसों के विविध रूपों का विश्लेषण करने के बाद उन्होंने एक नये रस-‘विरोधरस ’ की स्थापना की है।

काव्य की विविध विधाओं पर आपका पूरा अधिकार है। यही नहीं आपने कुंडलिया, तेवरी, ग़ज़ल, दोहे आदि में नये-नये दुष्कर प्रयोग किये हैं। रमेशराज जी की एक खासियत यह और है कि वे अपनी रचनाओं में हिंदी के ही शब्दों का अधिकतर प्रयोग करते हैं। जहाँ आज कोई साहित्यकार आवश्यक हो न हो अन्य भाषाओँ के शब्दों का प्रयोग करते हैं, ऐसे में रमेशराज जी बड़ी सरलता और सहजता से हिंदी के शब्द सटीक ढंग से अपनी रचनाओं में पिरो देते हैं। उनकी यह खूबी उनके पास आने वालों को एक प्रमाण देती है कि अपनी भाषा में जब पर्याप्त शब्द-भंडार है तो कहीं और भटकने की आवश्यकता क्या है

रमेशराज जी उन कार्यों को करने में आनन्द लेते हैं या ये कहा जाये कि जोखिम उठाते हैं, जिनको करने में शायद ही कोई लाभ प्राप्त हो। बाल रचनाकारों की पत्रिका ‘ अभिनव बालमन ‘ में हम बाल रचनाकारों की रचनाएँ प्रकाशित करते हैं। ऐसे में एक समस्या यह आती है कि कक्षा 6 या उससे ऊपर की कक्षाओं के बच्चों को यदि कहा जाये कि आप कविता की रचना करो तो वे किस प्रकार अपने भावों को कविता में पिरोयें ? ऐसे में रमेशराज जी से चर्चा हुयी और मैंने उनसे कहा कि ‘क्यों न आप बच्चों को कविता लिखने के गुर सिखाएं ?’ उन्होंने सहज भाव से इस प्रस्ताव को स्वीकार किया। जब उन्होंने पहली किश्त लिखी तो बोले-‘ वास्तव में यह कठिन कार्य है कि बच्चे के स्तर पर जाकर उसे यह सिखलाया जाये कि कविता की रचना कैसे की जा सकती है ?’ तब मैंने कहा कि ‘ यह काम केवल आप ही कर सकते हैं। वरना तो लोग यह सोचते हैं कि इतनी माथा-पच्ची इसके लिए करेंगे, उतनी देर में तो जाने कितनी रचनाएँ रचकर अपना भंडार बढ़ाएंगे और पुरस्कार की लाइन में जुगाड़ लगायेंगे।’ यहाँ एक बात और जोड़ना चाहूँगा कि जिस प्रकार स्वयं पढ़ना आसान है, अपेक्षाकृत किसी और को पढ़ाने के, ऐसे ही कविता रचने से अधिक किसी बच्चे को सिखाना दुष्कर है कि कविता किस प्रकार रची जा सकती है। क्योंकि यह कार्य केवल वही व्यक्ति कर सकता है जो न केवल बच्चों जैसा मन रखता हो बल्कि आचार्य जैसा ज्ञान भी रखता हो। इसी के साथ रमेशराज जी की नियमितता और तत्परता देखिये कि आज इस ‘ आओ बच्चो कविता सीखें ‘ स्तम्भ की पांच किश्तें प्रकाशित हो चुकी हैं और न जाने कितने बाल रचनाकार इस स्तम्भ से लाभान्वित हो रहे हैं। इस सबके पीछे एक बात और द्रष्टव्य है कि रमेशराज जी ऐसा इसलिए भी कर पाते हैं कि वे स्वयं भी एक अच्छे और चर्चित बाल रचनाकार हैं।

बहुत कम लोगों को पता होगा कि लोग जब बाल साहित्य के बारे में ढंग से जानते भी नहीं थे, तब वे न केवल बाल कविताएँ रचा करते थे बल्कि उस समय की स्थापित बाल एवं अन्य प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रमुखता के साथ वे प्रकाशित भी हुआ करते थे। उनकी बाल कविताओं में बीस-पच्चीस साल पहले वो ताजगी और नयापन था, जो आज बड़े-बड़े बाल साहित्यकार बहुत कोशिश कर भी नहीं ला पाते हैं। उनकी रचनाओं में समानता, नैतिकता आदि के भाव इस प्रकार हैं कि बच्चे आसानी के साथ गाते-गाते, खेल-खेल में कविता के फूल को पकड़े हुए उसमें से नैतिकता, ज्ञान, सौहार्द्र आदि की खुशबू को महसूस कर प्रसन्न हो जाता है और यह खुशबू उसके मन में जाकर उसके व्यक्तित्व का निर्माण करने में सहायक होती है।

रमेशराज जी के व्यक्तित्व के विविध पहलुओं में से एक पहलू है कि वे धैर्यवान बहुत हैं। वे रचना करते समय जल्दबाजी में कभी नहीं रहते। वे रचना-परिमाण बढ़ाने के बजाय रचना के परिणाम, प्रभाव और मूल्य पर विशेष ध्यान देते हैं। उनके तेवरी-शतकों में आप देख सकते हैं कि वे किस तरह, न केवल छंद बल्कि कथ्य से भी सबको आश्चर्यचकित कर देते हैं।

रमेशराज जी की एक और विशेषता है कि वे केवल अपने ही बारे में नहीं सोचते बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी आगे बढ़ाने, सिखाने का भी प्रयास करते हैं। उनके साथ जो लोग रहे हैं, उनमें से कई आज अच्छे रचनाकार हैं और वे रमेशराज जी की ही तरह किसी पौप्यूलरटी या दिखावे के बिना अपने श्रेष्ठ रचनाकर्म में रत हैं। आप जब रमेशराज जी के पास जायेंगे तो अवश्य ही किसी न किसी की रचनाएँ उनकी पारखी नज़र में होंगी। इस तरह से वो जो अपना समय देकर औरों के समय को मूल्यवान बनाते हैं, वास्तव में उनका यह अमूल्य योगदान प्रणम्य है।

कहा जाता है कि संसार में एक चीज़ ऐसी है जो आप एक से मांगते हैं तो हजार लोग देते हैं, वो है सलाह। किन्तु जो चीज़ रमेशराज जी से मिलती है, सच में वह हजारों में से एक है। एक अच्छा व्यक्ति जो सबके हितों की सोचता है, वो है रमेशराज।

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निश्चल,

सम्पादक-अभिनव बालमन, शारदायतन, पंचनगरी, सासनीगेट, अलीगढ़-202001,

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड 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पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ 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रचनाकार: ।। एक अच्छे बाल साहित्यकार भी हैं रमेशराज।। +निश्चल
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