मार्मिक कहानी आपदा और मध्यमवर्गीय परिवार का दर्द - दीपक कुमार त्यागी

SHARE:

मार्मिक कहानी आपदा और मध्यमवर्गीय परिवार का दर्द देश में आपदा के हालात चल रहे है, इस स्थिति में लोग ना जाने कैसे-कैसे अपने व अपने परिवार का ...

मार्मिक कहानी

आपदा और मध्यमवर्गीय परिवार का दर्द

देश में आपदा के हालात चल रहे है, इस स्थिति में लोग ना जाने कैसे-कैसे अपने व अपने परिवार का पेट भर रहे है, उस स्थिति पर  एक बहुत ही मार्मिक कहानी प्रस्तुत है।

राजू - नमस्कार जी क्या आप आपदा कंट्रोल रूम से बोल रहे हैं।

ऑफिसर - हां जी बोलिए आपदा कंट्रोल रूम से ही बोल रहे है।

राजू - लड़खड़ाती जुबान से, साहब हमारे घर के पास झुग्गियों में कुछ बेहद लाचार मजबूर किस्मत के मारें मजदूर लोग रहते है, जो की अपना राशन खत्म होने के कारण कई दिनों से भूख से तड़प रहे है, साहब इन बेचारों की तुरंत मदद करवा दो, उनकी जान बचा लो साहब।

ऑफिसर - हड़काते हुए, उन लोगों ने मदद मांगने के लिए फोन क्यों नहीं किया और तुम क्यों कर रहे हो।

राजू - साहब कृपया गुस्सा नहीं हो वो बेचारे भूख से बहुत परेशान है वो बात करने की स्थिति में नहीं है।

ऑफिसर - ठीक है एड्रेस बताओं कहा मदद पहुंचवानी है और वो कितने लोग है।

राजू - जी साहब लिखों मकान नबंर 1008 सेक्टर 27 सिटी सेंटर और यहाँ 2 बच्चे व 4 बड़े लोग हैं।

ऑफिसर - क्या तेरा दिमाग खराब हो गया है, अभी तो झुग्गी बता रहा था और अब मकान का पता लिखवा रहा है, वैसे भी इस सेक्टर में तो सब पैसे वाली पार्टी रहती है।

राजू - जी साहब दिमाग भी खराब है और समय भी व किस्मत भी आजकल खराब चल रही है, आप सब कुछ ठीक कह रहे है कि इस सेक्टर में सब पैसे वाले लोग रहते है, लेकिन साहब झुग्गी का कोई नंबर तो होता नहीं और अगर आपकी टीम झुग्गी ढूंढने में इधर-उधर भटकती रही और उनको मदद देर से पहुंची तो उन मुसीबत के मारे दुखियारों पर भूख के चलते पहाड़ टूट सकता है साहब, उनकी जान जा सकती है, इसलिए मैंने अपने घर का पता लिखवा दिया है साहब।

ऑफिसर - अच्छा तुम्हारी बातों से लगता है कि उन लोगों की बहुत गंभीर स्थिति है तो चलो ठीक है हम तुरंत मदद भिजवा रहे है, लेकिन तुमको जरा भी इंसान व इंसानियत की फिक्र नहीं है, एक टाइम रोटी बनवाकर तुम भी उन बेचारों को खिलवा सकते थे तुम्हारा कुछ बिगड़ नहीं जाता, खैर मैं तुरंत मदद करने वाली जिला राहत टीम को आपके पास भेज रहा हूँ वो आधे घंटे में तुम्हारे पास उन लोगों के लिए खाना व एक माह का राशन लेकर पहुंच रहे हैं।

राजू - बहुत-बहुत धन्यवाद साहब मैं आपका हमेशा बहुत एहसानमंद रहूंगा, वो मजबूर व लाचर भूखे लोग आपको हमेशा दिल से दुआ देंगे साहब।

ऑफिसर - ठीक है मैने टीम के वरिष्ठ अधिकारी विजय की ड्यूटी लगा दी इस काम के लिए वो खाना व राशन लेकर निकलने वाला है, तुम उनका इंतजार करना। इतने इन लोगों ढ़ाढस बनाकर रखना।

राजू - जी साहब मैं उनके इंतजार में बैठा हूँ और आप चिंता ना करें मैं पिछले कई दिनों से इन लोगों का ढ़ाढस बनाकर रख रहा हूँ।

लगभग आधें घंटे बाद राजू के मोबाइल की घंटी बजती है, मैं जिला राहत टीम से विजय बोल रहा हूँ, घर के बाहर आ जाओं।

राजू - जी साहब में अभी आया, वह घर से बाहर निकला तो उसने देखा एक जीप में दो लोग उसका खाना व सामान लेकर इंतजार कर रहे हैं, वो उनके पास घबराते हुए पहुंचा और बोला साहब नमस्कार में राजू हूँ।

विजय - ठीक है बताओं वो कौन सी झुग्गी है जिनके लोगों को खाना व राशन की मदद करनी है।

राजू - जी आप क्यों परेशान होते हैं, आप खाना व सामना मुझे दे दो, मैं उनकी झुग्गी पर अभी खुद ही पहुंचा दुंगा।

विजय - नहीं मैं खुद देकर आऊंगा मेरे साहब का आदेश है कि उन बेचारे मुसीबत के मारे लोगों से मिलकर जरूर आना और उनकी कोई जरूरत हो उसको पूछ कर आना, तुम मुझको जल्दी उनसे मिलवाओं जिससे में समय से अपना काम करके, किसी दूसरे व्यक्ति की मदद करने जाऊं।

राजू - पसीने से तरबतर होकर घबराते हुए बोला जी ठीक है जैसा आपका आदेश चलों।

और वो विजय को अपने छोटे से अव्यवस्थित घर के अंदर ले जाने लगा।

विजय - बेहद गुस्से में आकर उससे बोला, तुम आपदा के समय में मेरा टाईम खराब नहीं करो और जरूरतमंदों की भी हमको सहायता करनी है। जल्दी से उन झुग्गियों पर ले चलों।

राजू - उससे नजरें छिपा कर बोला साहब मैं आपका टाईम खराब नहीं कर रहा बल्कि आपको जरूरतमंद लोगों के पास ही ले जा रहा था।

विजय - मैं तुमको अभी जेल भिजवाता हूँ, तुमने इस भयंकर आपदाकाल में झूठ बोलकर हमारा टाईम खराब किया, तुम इस समय इंसान व इंसानियत के दुश्मन हो, जिस घर में तुम चलने के लिए बोल रहे हो, उस घर के लोगों को मदद की आवश्यकता बिल्कुल नहीं हो सकती, इस बात का घर व गाड़ी देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है। मैं फोन करके अभी पुलिस को बुलाता हूँ और तुमको गिरफ्तार करवाकर जेल भिजवाता हूँ।

और विजय गुस्से से लाल होकर अपने मोबाइल से कोई नंबर मिलाने लगता है, राजू ने उसकी मानमनौव्वल करके उसको जैसे तैसे रोका तो वो बेहद गुस्से में होकर वापस अपनी गाड़ी की तरफ जाने लगा।

राजू - उससे रोकते हुए बोला साहब भगवान के लिए वो खाना और राशन तो दे जाते आपका बहुत एहसान होगा, हम लोगों की जान बच जायेगी। मुझे और मेरे घर वालों को खाने व राशन की बहुत ज्यादा आवश्यकता है साहब।

विजय - क्यों झूठ बोल रहे हो, तुमको भीख मांगते हुए व जरूरतमंद लोगों का अधिकार मारते हुए शर्म नहीं आती, तुम्हें व तुम्हारे घर के लोगों को मदद की क्या जरूरत वो तो स्वयं सक्षम है। तुम लोग क्यों लाचार, मजबूर व गरीबों का हक मारना चाहते हो, ईश्वर से ड़रों और भयावह आपदा के काल में इतना बड़ा अपराध नहीं करो और वैसे भी तुमने मदद झूठ बोलकर किसी अन्य व्यक्ति के लिए मंगवाई है।

राजू - साहब कुछ तो रहम करों मुझ पर और मेरे परिवार पर, हम लोग सक्षम नहीं है आप एकबार घर के अंदर जाकर देखों तो सही, हमको मदद की बहुत ज्यादा आवश्यकता है साहब।

विजय - अगर तुम्हारी बात झूठ निकली तो मैं तुम्हें अब जेल भिजवाकर ही दम लुंगा। ठीक है चलों तुम्हारे घर के अंदर चलकर देखते हैं।

राजू - घबराते हुए मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना करते हुए, लड़खड़ाते हुए विजय को अपने घर के अंदर ले जाने लगता है।

विजय - घर के अंदर की हालात देखकर विजय के पैरों तले की जमीन खिसक जाती है, वहां की हालत देखकर उसकी आँखें फटी रह जाती है, वहां पर भूख से बिलखते 12 व 15 साल के दो बच्चे व राजू के 65 साल के बुजुर्ग  माता-पिता व उसकी 40 वर्षीय पत्नी मौजूद होती है, जिनकी स्थिति बेहद दयनीय व खराब होती है, यह देखकर विजय कुछ नहीं बोलपाता है वो तुरंत ही उन लोगों की जांच के लिए चिकित्सक को बुलाने के लिए फोन करता है और साथ आये आदमी से गाड़ी से खाना व राशन घर के अंदर रखने के लिए बोलता है।

राजू - यह सब देखकर उसकी आँखों से अश्रु की धारा फूट पड़ती है और वह कहता है साहब आज आपने मेरे परिवार की जान बचाकर मुझको अपना हमेशा के लिए ऋणी बना लिया, साहब एक हफ्ते से मेरा परिवार भूखा है और मुझको कोई मदद नहीं मिल पा रही थी, इसलिए साहब आज मैंने परिवार की जान बचाने की खातिर झुग्गियों का नाम लेकर झूठ बोलकर राहत सामग्री मंगवाई थी, साहब मैं आपका जीवन भर एहसानमंद रहुंगा।

ऐसा बोलकर राजू जमीन पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगा,

विजय - उसका धीरज बांधते हुए उसको चुप करवाता है और फिर राजू से कहता है जब तक डॉक्टर साहब आते है तब तक जरा मुझे अपने वारें में विस्तार से बताओं और यह घर और गाड़ी तो तुम्हारी ही है ना।

राजू - हाँ जी साहब यह घर भी मेरा है यह गाड़ी भी मेरी है, अभी 1 साल पूर्व अपनी व माता-पिता की ताउम्र की कमाई व बैंक से लोन लेकर दोनों खरीदे थे। लेकिन साहब यह पता नहीं था कि लोन लेने के एक साल बाद ही आपदा के चक्कर में एकाएक मेरी नौकरी चली जायेगी और हमारी दर-दर की ठोकर खाने वाली स्थिति हो जायेगी। क्योंकि साहब हमारी कमाई तो बैंक के लोन पटाने में व बच्चों की पढाई में ही खत्म हो जाती है। घर का खर्चा पिताजी की पेंशन से बड़ी ही मुश्किल से चल पाता है साहब। किसी तरह की कोई भी बचत हमारे पास हो नहीं पाती साहब, हम मध्यवर्गीय तो आज के व्यवसायिक दिखावे वाले दौर में केवल कर्ज चुकाने के लिए जिंदा है साहब।

विजय - लेकिन तुम अपने पड़ोसियों, परिचितों, रिश्तेदारों व यार दोस्तों से तो मदद मांग सकते थे।

राजू - आप ठीक कह रहे है साहब, मैंने मदद लेने के लिए बहुत प्रयास किये, लेकिन हर कोई मदद की बात को मजाक मानकर डाल देता था, यह उधार की गाड़ी व मकान आज मेरी व मेरे परिवार की जान का दुश्मन बन गया है साहब, इसके चलते कोई भी मेरी मदद करने के लिए तैयार नहीं है। कई बार मदद के लिए आपदा कंट्रोल रूम भी फोन किया लेकिन उन्होंने भी परिचय सुनते ही मुझको बार-बार झिड़क दिया और दुत्कारते हुए कहा कि तुम गरीबों का हक मारना चाहते हो। मैं खुद कई बार सामाजिक संगठनों के द्वारा बट़ने वाला भोजन व राशन भी लेने गया साहब, लेकिन वहां पर वो लोग मदद करते समय फोटो खींच रहे थे इसलिए शर्म व बच्चों के भविष्य के बारें में सोचकर मैं बार-बार वहां से वापस आ जाता था।

राजू की बेहद खराब वित्तीय स्थिति समझने के बाद विजय की आँखों में आंसू आ जाते है, वह निशब्द हो जाता है, वह सोचता है कि एक मध्यवर्गीय परिवार भी इतने गंभीर आर्थिक संकट में हो सकता आज उसकी समझ में आ गया और उसने इतने ही घर के गेट पर डॉक्टर की गाड़ी आकर रुकता देख उनको अंदर बुलाया, विजय डॉक्टर को घर के अंदर उपस्थित लोगों की स्थिति से अवगत कराता है, डॉक्टर व उसकी टीम उन सभी का चैकअप करती है और डॉक्टर विजय से कहता है भगवान का लाख-लाख शुक्र है जो आपने मुझे बुला लिया भूख के चलते इन लोगों की हालत बहुत खराब है अगर इनको आज समय पर भोजन व चिकित्सा नहीं मिलती तो इनकी जान किसी भी समय जा सकती थी, अब मैंने इनकों एक हफ्ते की दवाई व विटामिन की गोलियां दे दी है अपना मोबाइल नबंर भी दे दिया है अगर कोई दिक्कत होगी तो ये मुझको फोन करके बुला लेंगे वैसे एक हफ्ते बाद में स्वयं इनकों देखने आ जाऊंगा, मैंने इनको थोड़ा-थोड़ा खाना खिलाकर अभी की दवाइयां खिला दी है और बाकी कैसे खानी वो समझा दी है, सुबह तक यह लोग अपने आपको काफी ठीक महसूस करने लगेंगे और डॉक्टर फिर वहां से चला जाता है।

विजय - राजू की तरफ रुख करके उसको अपना पर्सनल नबंर देता है और उससे बोलता है कि तुमने मेरी आँखें खोल दी, शासन-प्रशासन व जिला राहत टीम ने यह कभी भी नहीं सोचा था कि एक मध्यवर्गीय परिवार पर भी आपदा के कारण इतनी भयंकर मार पड़ सकती है, मैं अभी ऑफिस जाकर अपने सीनियरों को स्थिति से अवगत करवाऊंगा और भविष्य में मध्यमवर्गीय परिवारों की मदद का भी प्रावधान करवाऊंगा।

राजू - एकबार फिर साहब आज आपने मेरी व मेरे परिवार की जान बचा ली, मैं जिंदगी में कभी आपके इस ऋण को चुका नहीं पाऊंगा। बस साहब मेरा भी आपसे एक यही निवेदन है कि सरकार को अब मध्यवर्गीय परिवारों पर मदद के लिए भी अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए , क्योंकि उनकी मदद लेते समय फोटो ना खिचवाने पाने की मजबूरी व लाचारी अब उनके जीवन पर बहुत भारी पड़ सकती है, इसलिए सरकार को उनका ध्यान रखना चाहिए।

विजय - बिल्कुल तुमने हमारी आँखें खोल दी है और अब हम मध्यमवर्गीय परिवारों के सहयोग के लिए भी हर संभव प्रयास करेंगे, वो अपनी जेब में रखे 5 हजार रूपये राजू के बहुत इंकार करने के बाद भी उसको अधिकार के साथ जबरन देते हुए बोला सब का ध्यान रखना कोई दिक्कत हो तो मुझको फोन करना अच्छा अब मैं चलता हूँ और वह घर से निकल कर गाड़ी में बैठकर आँखों में आंसू लिए अपने ऑफिस की तरफ यह सोचता हुआ चल दिया कि धनवान लोगों के पास दौलत की कोई कमी नहीं वह आपदा में भी साधन इकट्ठा करके जीवन जी लेंगे, गरीब की मदद सरकार व समाजसेवी और धनवान लोग करते है वह उस मदद के सहारे जीवन जी लेता है, लेकिन एक मध्यवर्गीय परिवार के पास ना तो दौलत है ना वो गरीब है जो कोई उसकी मदद करें तो वो आपदा के वक्त में कैसे अपना और अपने परिवार का गुजारा करेगा। जरा आप सभी लोग भी सोचों और विचार करों और सरकारी तंत्र को भी समय रहते इस तरह के हालात बनने से पहले ही मध्यमवर्गीय परिवारों की इस समस्या का समाधान करना चाहिए। हमारे देश के सिस्टम को ध्यान रखना चाहिए कि मजबूरी, लाचारी किसी भी वक्त किसी भी व्यक्ति के सामने आ सकती है, इसलिए हमेशा मानवीय मूल्यों व संवेदनाओं के आधार पर भी मदद का प्रावधान करना चाहिए।

--

*लेखक*

दीपक कुमार त्यागी

स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व रचनाकार

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: मार्मिक कहानी आपदा और मध्यमवर्गीय परिवार का दर्द - दीपक कुमार त्यागी
मार्मिक कहानी आपदा और मध्यमवर्गीय परिवार का दर्द - दीपक कुमार त्यागी
http://4.bp.blogspot.com/-8cQKJesi7qw/XqGMed7T23I/AAAAAAABSSY/IkKsA48vIQAdZB_U9eAr61fBG0T0MVwdACK4BGAYYCw/s320/IMG-20200227-WA0000-758343.jpg
http://4.bp.blogspot.com/-8cQKJesi7qw/XqGMed7T23I/AAAAAAABSSY/IkKsA48vIQAdZB_U9eAr61fBG0T0MVwdACK4BGAYYCw/s72-c/IMG-20200227-WA0000-758343.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_663.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_663.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content