कविता लिखना और उसका तरीका - खान मनजीत भावड़िया मजीद

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खान मनजीत भावड़िया मजीद कविता लिखना और उसका तरीका कविता लिखने के लिए अपने मन के भाव को उजागर करना ही असली कविता है और जो अपने आसपास घटनाएं घ...

खान मनजीत भावड़िया मजीद

कविता लिखना और उसका तरीका

कविता लिखने के लिए अपने मन के भाव को उजागर करना ही असली कविता है और जो अपने आसपास घटनाएं घट रही है उन घटनाओं को मध्य नजर रखते हुए हम अपनी कलम के माध्यम से कागज पर उकेरते हैं। कविता लिखने के लिए कविता के अंदर प्रेम, सौंदर्य से लेकर खेत खलिहान के जंग लगे दरवाजे तक और मजदूर, औरत और मेहनतकश को अपना विषय बनाकर कविता का निर्माण करना चाहिए।

कविता लिखने के लिए जो भाव मन में प्रकट होते हैं उन्हीं भाव को हम कागज पर उतारते हैं । इसके साथ साथ हम जितनी बार भी अपनी कविता लिखते हैं उसमें हम एक अलग ही रंग डालते हैं अलग ही रंग भरते हैं चाहे उसमें रंग किसी भी चीज का हो मजदूर का हो ,औरत का हो, खेतों का हो ,किसानों का हो, उस कविता में अलग अलग रंग, अलग-अलग कविता में दिखाई देते हैं ‌ और हर कविता के साथ अपना पैना पन लाने की कोशिश करता है और उसने अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जब वह कविता लिखने की शुरुआत करता है तो उसके मन में शब्दों का समावेश नहीं हो पाता लेकिन जब कागज और कलम उठा लेता है और थोड़ा बहुत दिमाग लगाता है तो वह है पूरी कविता लिख डालता है लेकिन वह कविता कैसी है यह उसको केवल पाठक ही बताता है और उसकी शुरुआत कैसे करें और किस शब्द से करें यह उन्हें कड़ी मेहनत से करना पड़ता है और सोचना पड़ता है ।

मैं चाहता हूं की कविता लिखने के लिए एक निश्चित कौशल हो और उसको स्कूल को हासिल करें उसके लिए बहुत सी हम कार्यशाला का ओरिजिन करवाएं निर्माण करवाएं जिससे कविता लिखने वाला अपनी कविता में दिन प्रतिदिन सुधार कर सके और उस कविता की सामग्री में भी सुधार कर सके और अपना अभ्यास जारी रख सके शब्दों का भी मेलजोल अच्छी तरह से कर सके यही सबसे बड़ी बात है।

कविता लिखने की शुरुआत हम सब एक पद के टुकड़े से करते हैं ताकि हमने यह महसूस हो कि हम कविता लिखने में समर्थ है या नहीं बस एक या दो पंक्ति से हम अपनी कविता शुरू करने लग जाते हैं और जैसे-जैसे हमारी दिमाग में शब्दों का उत्पन्न होता है वैसे वैसे हम कविताओं की नगरी में अपना कदम रख देते हैं चाहे हम छंद मुक्त लिखते हो ,खुली कविता लिखते हो ,संयुक्त लिखते हो हायकू लिखते हो और भी विधा में लिखते हो कविता तो हम समाज के चारों ओर घट रही घटनाओं के हिसाब से लिखते हैं और जब हमारे मन में शब्दों का ज्वाला फूटता है और नए समझ मिलते हैं तब हम कविता का निर्माण करते हैं अलग-अलग मन के अलग-अलग शब्द अलग अलग ज्वाला और अलग-अलग समुद्री तट कविताओं के समुद्र तट हो सकते हैं वह कविता लिखने वाले पर निर्भर करता है की उसने जो ज्वालामुखी का ज्वाला फूटा है वह कितना लंबा चौड़ा फैलता है या वही दब कर रह जाता है।

हम किसी भी बड़ी कवि की कविता पढ़ते हैं या उसकी किताब का अध्ययन करते हैं और उसकी कविताओं का हम कौशल देखते हैं उनकी कविताओं का स्टाइल देखते हैं उसी के हिसाब से हम कविता लिखना सीखते हैं और एक दिन फिर हम उस की कविता की बराबरी तो नहीं कर पाते लेकिन समाज उस कवि के नाम से कहता है की जिस तरह फलां कवि लिखता था उसी तरह यह लिखता है। उसी कविता के हिसाब से लिखता है जिस हिसाब से उसने कविताओं की किताब पढ़ी है और आज के समय में इंटरनेट के माध्यम से भी कविता लिखना सीख रहे हैं।

जो हम इंटरनेट पर कविता पढ़ते हैं और जो कविता में अच्छी लगती है उसको इतना को भी हम अपनी कविता का एक जरिया बना लेते हैं उसको इतना के ऊपर भी हम दो-तीन लाइनें लिखने की कोशिश करते हैं ताकि हम अपनी कविता लिख सकें उन पंक्तियों में अपने कागज में करने की कोशिश करते हैं जो पंक्तियां उसने उसकी खुद की कविता में लिखी थी। अपनी कलम जब हम अपनी कागज पर लिखते हैं और हम तभी अच्छी कविता का है निर्माण कर सकते हैं विषय चाहे कोई भी हो लेकिन विषय ऐसा हो जो आपके समाज के चारों तरफ हो ताकि लोग पढ़कर यह कहे कि हमारे समाज का ही इसने यथार्थ वर्णन किया है खुद की कविता लिखना किसी कवि की कविता लिखना और उन दोनों में अंतर देखना जब अंतर हम ढूंढने लग जाएंगे तब यह मानो कि हम वाक्य में एक कवि बनने के कगार पर है और पूरा पूरा प्रयास कर रहे हैं अन्यथा हमें कविता लिखने का कोई हक नहीं है जो अपने मन शब्द आ आ जावे और विचार आ जावे जो विचार मन में थे बनने वाले शब्द कोही कविता कहते हैं । उन्हीं शब्दों को हम पंक्तिबध करें और एक कविता का रूप दें और कविता का खाका तैयार करें और उस खाकर को हम दूसरी कविताओं को साथ मिलाकर उसकी त्रुटियां खामियां दुरुस्त करें तभी हम एक अच्छे कवि या कलमकार बन सकते हैं।

जिस परिदृश्य से हम संबंध मैं अपने कविता लिखा और उस कविता ने आप लोगों तक पहुंचाण की कोशिश करते हैं यही अपना प्रयास होना चाहिए जैसे कि हमने प्रकृति से संबंधित लिखना है तो उसके लिए हमने बाग, जंगल, खेत खलिहान मैं जा रहा पड़ेगा और जब अपना मन उन्हीं चीजों को लेकर फिर कागज पर उकेरने कोशिश करते हैं जो जो शब्द हम कागज पर उकेरते हैं दरअसल वह शब्द हमारे दिमाग और मन हृदय में होते हैं और जब तक उन शब्दों का प्रयोग नहीं करते तब तक हम प्राकृतिक दृश्य को हम संपूर्ण नहीं समझ सकते और ना ही से संबंधित हम किसी को प्रेरणा दे सकते ।

आप अपने चहेते कवियों की कविताओं से उत्प्रेरित होकर हम उनकी कविताओं के शब्दों की पूरी छानबीन करते हैं और जो भी अपने मन में प्रचलित गाने होते हैं अपने उन पंक्तियों ने उस गाने की पंक्तियों में जोड़ देते हैं और फिर उस गाने में खंगालते हैं फिर गाकर देखते हैं। आप अपनी कविताओं का जितना मेलजोल बुढाओगे आपकी कविताओं में उतना ही सौंदर्य पूर्ण सौदर्यबोध और सुगठित, परिशोधित होती आएगी। अपने कानों को सुशिक्षित करा और अपनी तरह की सोच रखने वाले आदमियों से मिलां और उन्हें अपने कविता सुनाएं और कविता पाठ करें कविता पाठ कवि सम्मेलन मुशायरे जैसे कार्यक्रम हम देखें जिनके माध्यम से आप अपनी कविता वो सुधार और लय वह गान का पता चलता है और अपने कुछ प्रिय गीत के बोला ने प्राप्त करके ताकि ठीक तरह से पढ़ी जाए। जानने वाले को आश्चर्य गांव की सुनने और गाने में कितना अंतर है।

आप अपने बाय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड खातिर भी हम कविता लिखते हैं।उनका प्रेम प्रर्दशित करके भी कविता लिखते हैं किसी भी दुखद घटना का जिक्र भी करते हैं उस घटित घटना में उस जगह और उस व्यक्ति का जिक्र भी हम अपनी कविता में करते हैं और उनको श्रद्धांजलि देते हैं जैसे आजकल चली हुई महामारी कोरोना वायरस पर भी हम ढेरों कविताएं गीत ग़ज़ल लिख रहे हैं शायद आप भाषा की परीक्षा में अव्वल दर्जा पाना चाहते हैं आपको इतना क्यों लिख रहे हैं किस लिए लिख रहे हैं किसके लिए लिख रहे हैं यह सबसे अहम मुद्दे इसके साथ साथ यह भी बात है कि हम जो कविता लिख रहे हैं वह किसके अनुसार लिख रहे हैं क्या लिखने का तरीका है किस तरीके से अपने शुरू की है वह भी एक है यह बहुत सारे प्रश्न कविता लिखिन अपने मन में आते हैं ।

कविता लिखने की अनेक विधियां और अनेक शैलियां है क्वीन अपनी शैली खुद चुनकर वह कविता लिखता है चाहे वह तुकांत ,अतुकांत ,गेय,गीत ,रागिनी ,भजन, गजल, नजम आदि हो सकती है आप शंभू के बंधन से भी स्वतंत्र हो सकते हो और छंद मुक्त काव्य भी रचना कर सकते हो छंद बंद मैं भी लिख सकते हो कविता का चयन इतना सरल ना हो कि दूसरा आसानी से समझ सके मगर कविता की काव्य शैली लेखन के समय स्वयं ही प्रकट हो जाए।
कविता में आप जिन शब्दों को चुनते हुए उनका आकार भी समझना बहुत जरूरी है क्या वह शब्द उस कविता के हिसाब से सही और सटीक बैठ पाते हैं या नहीं लेकिन कई कविताएं ऐसी होती है जिनमें कुछ शब्द तो सही होते हैं और कुछ नहीं होते लेकिन वह भी कविता है‌। आप अपनी कविता पर तब तक काम करो जब तक आप काम करना चाहे ताकि कविता के शब्दों का आप एक मजबूत ढांचा तैयार कर सकें केवल उन्हीं शब्दों का चयन करें जो आवश्यक हो जो कविता के अर्थ में वृद्धि करें परंतु शब्दों का चयन सावधानी से करें ताकि सुनने वाले को सुनाई देने वाले शब्दों का अर्थ और उनका अंतर समानार्थक शब्दों का प्रयोग मजेदार शब्द क्रीडा में हो सके जब कविता को हम पूर्ण रूप से तैयार कर लेते हैं तब आप अपनी कविता को कहीं अखबार पत्रिका में छपवाने की तैयारी कर लेते हैं आप तो तुकबंदी वाली कविता लिखने की सोच रहे हो।

तब शब्दों का चयन करने के लिए दिमाग में जोर डालना पड़ेगा और विषय का भी चुनाव करना पड़ेगा उसके उपरांत उससे संबंधित एक पंक्ति लिखें ताकि अगली पंक्ति की पिछली पंक्ति की से ना मिले उन शब्दों के बारे में सोचना और शब्दों को ढूंढना पड़ेगा और ढूंढने की कोशिश करनी पड़ेगी और शब्दों को ऐसे तोड़ मरोड़ करना सामने लाना पड़ेगा कि अर्थ बदले बिना हर पंक्ति के अंत में अंत तक तुकबंदी हो जाए।

अधिकतर काव्य किसी ने किसी तरह पाठक के लेखन में पूरी तरह से डूब जाने में सहायता करता है और किसी ने किसी तरह की चेतना देता है और उस चेतना में लोगों ने भी प्रभावित करता है जब आप विवरण तैयार कर रहे हो तो तब उनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है प्रेम गिरना प्रसंता इस सारी की सारी भावनात्मक संकल्पनाएं लाए हैं बहुत अधिक कविताओं में देखा जा सकता है इन की गहराई को मनोभाव और संकल्पनाओं के बारे में मैं ही विचार किया जाता है ताकि मात्र संकल्पनाओं के माध्यम पर मजबूत कविता लिखना कठिन हो जाता है यह तो दिलचस्पी भी नहीं होता संकल्पनाओं की जगह ऐसे ठोस प्रतीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए जिन्हें आपकी इंद्रियां भी महसूस कर सकें जैसे कि गुण फूल आदि कविता में निष्पक्ष सहसंबद्धता होनी चाहिए।

निष्पक्ष सहसंबद्धता का अर्थ है घटनाओं की श्रृंखला जिनसे किसी मनोभाव या कविता के विचार उत्पन्न हो जाते थे वास्तव में प्रभावशाली कविताओं में नए केवल ठोस प्रतीकों का उपयोग होता है अपितु उसका विषद विषय से भी हो सकता है आप अपने पाठकों और श्रोताओं को दिखाइए कि आप क्या कर रहे हैं आप अपनी कविता में प्रयुक्त कल्पनाओं का अनुभव होने में कितना फायदा करता है यही वे शब्द है जो उन चीजों का वर्णन करते हैं जिन्हें आप हर रोज सुन सुनने से, देखने से ,चखने से, छूने से और सुघंने से महसूस करते हैं ताकि पाठक अपने अनुभव को पहचान सके ।
सबसे जानी-मानी तिकड़म बाजी तुकबंदी आपकी पंक्ति में असमंजस से का समावेश कर सकते हैं अर्थ बढ़ सकता है या कविता को अधिक जोड़ सकें है और कविता को अधिक सशक्त बना सकता है और उसको सुंदर भी बना सकता है पर तुकबंदी की मत करिए की यह तो अपराध के बराबर है विद्यापति की राह चुन रहे हैं तब चैन के लिए तीन विद्या मूल रूप से है दोहरा ,तिहरा या गीत है दोहरा मतलब दो दोहा एक औरत हो दोहे अर्थ दौरे के अंत में तुकबंदी होनी बहुत जरूरी है जब अंतिम पंक्ति का अंतिम शब्द ऊपर वाली पंक्ति से मिलन करेंगे और फिर तुकबंदी करेंगे तो भी अपना बढ़िया दवा माना जाएगा फिर आप उस पे नाम पैमाने में पैमाने ने पकड़ लेते हो तभी अपना बढ़िया दवा माना जाएगा तिहरे में तीसरी पंक्ति के अंत में उसकी तुकबंदी होनी चाहिए जैसे की पहली और दूसरी लाइन में तुकबंदी होगी तो दोहा माना जाएगा और पहली दो लाइन में तुकबंदी नहीं है तो तीसरी में फिर छटी लाइन में तो तुकबंदी है तो वह 3 पंक्तियों की तुकबंदी मानी जाएगी। चौपाई या चौथाई का अर्थ है कि पहले तीन बिना तुकबंदी के हो और चौथी पंक्ति में उस तुकबंदी को बदल देता है वह चौथाई या चौपाई भाषा के माध्यम से उनमें चौकलिया भी कहा जा सकता है।
1-देख कर परदेशी की नजर,
उस ने घोल दिया है जहर ।

2-मोनू सोनू दो भाई
इनके एक बहन बताएं
अनोखा वरदान लगाकर तड़का ‌।

एक बालक के पास था एक खिलौना
उसको बड़ा रखा था बिछड़ना
काला चश्मा पहन के लड़का ।।

कहने का अर्थ है कि तीसरी और छोटी लाइन की फिल्म ऐसी होती है जैसे ऊपर दिखाया गया है हालांकि एक कविता नहीं है लेकिन कविता लिखने का तरीका बताया है। कुछ कविताएं ऐसी होती है जिसमें तुकबंदी नहीं होती अगर गीत में तो तुकबंदी नहीं है तो मैं गीत नहीं माना जाएगा गीत लिखा है गीत लिखने के लिए तुकबंदी का होना बहुत जरूरी है
जैसे मैं मिला हूं तेरे से
यू है मेरा पागलपन
अगर यह है मेरा नंबर
करेगी ना बात ना हो अनबन
चार पंक्तियों वाली कविता इस तरह लिखेंगे जैसे
दिन निकला जब पी ली थी लालिमा काम करें चल पड़ा
खेत तो मेरे दूर थे पैदल पैदल चल पड़ा
रस्ते में गिरा था विश्राम रस्ते में हुआ था मैं खड़ा
खड़ा-खड़ा मेरे मन में अनेक प्रश्न उत्तर आए
इस तरह 4 लाइन का प्रयोग करेंगे जिसमें हर अंतर की आखरी लाइन में गंदी होगी और पहले 3 लाइन में सामान तुकबंदी होगी।

कांगो लिखने के अलग-अलग तरीके और अलग-अलग तिकड़म बाजी है इनमें मुख्यत है मीटर,रूपक,स्वर साम्य, अनुप्रास, पुनरुक्ति आदि भी पता नहीं चलता जब आप कविता लिखने बैठ जाते हो और कविता लिखकर जब उसकी दौराई करते हो तब इन चीजों का पता चलता है यह अपने आप आ जाते हैं अगर आपको नींद के बारे में ज्यादा पता नहीं है तो उनका संबंधित बहुत सारी किताबों का अध्ययन करना पड़ेगा तब जाकर हम छंद ,अनुप्रास आदि की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

आप किसी भी प्रकार की कविता लिखते हो कल किसी भी प्रकार का लहजा हो लेकिन जो महत्वपूर्ण संदेश है वह आप आखरी लाइनों में या आखरी पंक्तियों में डालते हैं और वह कविता देखनी पड़ेगी की वह कितनी महत्वपूर्ण है गंभीर है हास्य व्यंग्य है प्रायोजित है या जनवादी है इन सब को ध्यान में रखकर हमने अपनी कविताओं की रचना करना पड़ेगा ताकि पाठक अपनी किताब में अच्छी तरह से पढ़ सकें और उसकी समीक्षा, आलोचना भी अच्छी तरह से देश के किसी भी कविता का अंत हम महत्वपूर्ण मुद्दे के हिसाब से और विचार मगन के हिसाब से शब्द जोड़ते हैं।

आजकल केवल कवियों ने और लोगों ने कविता का लिखित रूप देखा है मगर कविता को सुनने वालों को अगर सुनाने वालों को आपस में तालमेल नहीं दिखाया तो हम उनकी कविताओं को अच्छी और बुरी नहीं बता सकते क्योंकि एक कविता सुनने वाला या श्रोता उस कविता सुनाने वाले का निर्णायक होता है आज की कविता की धोनी की अहम भूमिका है आप अपनी कविता का लिखने और संपादित करने उसे खुद अपने मन से पढ़ें फिर औरों को पढ़ाएं और सुनाओ फिर दूसरों से पूछना कि मेरी कविता कैसी लगी आपने तो उसका कविता का परिणाम खुद ब खुद अपने सामने होगा ‌।

कविता का लिखना उसके अंतर्मन को समझना उसकी सरंचना आमतौर पर तुक और ताल पर आधारित होती है इन दोनों का होना बहुत जरूरी है ताल व तुम दोनों होने बहुत ही जरूरी है क्योंकि यह कविता की असली जड़ है बोलचाल की भाषा और लघु उद्योग वाले अक्षरों का संयोजन करना बहुत जरूरी है क्योंकि गीत रागिनी गजल इन सब के संयोजन के आधार पर ही निर्भर होते हैं इनके अंदर मात्राओं का हिसाब किताब देखकर ही लिखे जाते हैं जिसमें पंक्तियों काम दो भागों में बांट देते हैं उसमें एक भाग में 11 मात्रा व दूसरे भाग में तेरा मात्रा रखनी होती है भक्ति काल में तो कविता ने अनेक दोहे बिना खींचे मात्राओं के अक्षर प्रारंभ करके शुरू करें गई जिसके कारण कविता की जाती है नियमितता मीटर के कारणउसकी धुन में अथवा लय की खोज करनी बिल्कुल आसान हो जाती है और धूल और लाइक की खोज करनी भी बहुत जरूरी है जब तक का धुन और ना होगी तब तक हम उस गीत को आसानी से गा सकते हैं अगर आप इस तरह की कविता लिखो तो आप की उपयोगिता में सुनते हैं आपकी गीत नए भी पसंद करेंगे और उस गीत में भी याद कर लेंगे क्योंकि जो गीत लयबद्ध में होते हैं उन्हीं को याद आसान हो जाता है।

हम अपनी कविता में पूर्ण रूप से लिखकर और उसने कुछ दिन के लिए हम हटा देते हैं या कर हम रख देते हैं और कुछ समय बाद फिर हम उसी कविता को दोबारा पढ़ते हैं तब हमको उसकी हानि और लाभ का भी पता चलता है क्योंकि उस उस वक्त आप अपने मन को सुनाते हैं और मन के लिए पढ़ते हैं शब्दों का चयन का ताल से समतुल्य है अगर आपको लगता है कि इस कविता में अनावश्यक शब्दों का प्रवेश है तो आपको शब्दों को उस कविता से उखाड़ दीजिए फिर अपनी कविता की नई संरचना कर लोगों को और अपने पास को सुनाएं कुछ लोग तो कविता एक बार में अपनी कविता पास कर लेते हैं अगर कुछ लोग उसको अन्य को भी पढ़ा कर या सुना कर उसकी त्रुटियां या आलोचना को दूर करते हैं उसकी गलतियों का सुधार करते हैं तो उसकी कविता दिन प्रतिदिन रंग लाती है ।

यह जरूरी नहीं है कि त्रुटियां दूर होने के बाद भी आप की कविता अच्छी हो और यह भी जरूरी नहीं है कि अच्छी ना हो क्योंकि उस वक्त आप चाहे दूसरी कर सकते हैं और दूसरी कविता लिख डालिए क्योंकि एक तो कविता की ताकत पाठकों को पसंद आती है तभी आप दूसरी कविता लिखी है अगर आपने लगे कि मेरी इस कविता में कोई ग़लत पंक्ति है इतना ने ऐसी पंक्ति है जो तुरंत हटा देनी चाहिए उस पंक्ति को हटा दीजिए तभी आप आगे बढ़ पाएंगे ऐसा करने के लिए आप हिचकिचाहट पैदा ना करें।

अगर आप खुद की कविता की आलोचना करना मानते हो तो वह करता अपने मित्रों को दिखाएं जिससे उस कविता की त्रुटि को भी दूर करेंगे और सुझाव भी देंगे जिससे आपका अनुभव और भी बढ़ेगा या फिर आप अपनी कविता इंटरनेट पर डाल दीजिए जिसे आपको अपने आप सुझाव और त्रुटि अपने आप आ जाती हैं आपको कुछ लोग मार्गदर्शक भी मिलेंगे जैसे आपकी कविता और भी सुनहरी और बेहतरीन बनाने की कोशिश करेंगे आपके कविता का फीडबैक कैसा है यह भी आपको बताएंगे औरों को भी दिखाएंगे अपने मित्रों से कहे कि आपके काम की आलोचना कर सकें ताकि आपने कैसा लिखा है उसका अच्छी तरह से पता चल मेरा उन सब से निवेदन है कि उसकी तकलीफ देह हो मगर वह रहे ईमानदार बाकी अब दूसरी कोई दूसरे की कविता चुरा करो कोई जोड़ तोड़ ना करें वही सबसे अच्छा कवि है।

आप जैसे भी टूटी-फूटी लिखते हैं आप वैसे लिखिए लेकिन किसी की कविता के साथ या आर्टिकल के साथ छेड़खानी ना करें यही सबसे अच्छा है अगर आपकी आलोचना हो रही है तो आप शर्मिंदा ना हो क्योंकि यह कदम आपको आगे बढ़ाने वाला है इसलिए आप अपनी कविताओं का अभिमत आपको पर केंद्रित होता है और पाठक ही आपकी प्रतिक्रिया और चटनी करते हैं जिसे हमें स्वीकार कर लेना चाहिए और अपनी पूर्णता का इच्छा अनुसार उसका संपादन करिए आप दूसरों अकेला चना करने का भी प्रस्ताव रखिए दूसरे की आलोचना भी करिए उस आलोचना में थी और अपनी होनी चाहिए । लेकिन जब हम आलोचना करते हैं किसी की कविता की तो हमने पूर्ण रूप से पढ़ कर और समझकर ही करनी चाहिए और उस कविता का नजरिया भी देखना चाहिए।

जो लोग आपके काम की सराहना ना करें और आपके साथ कदमताल नहीं करें तो उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है और ना ही किसी को बार-बार परेशान करने की जरूरत है अगर हम उनको परेशान करते हैं यही हमारे आगे बढ़ने की सबसे बड़ा काटा है जॉनी यही वह सबसे बड़ी भूल है जो आपको कोई बनाने में अड़चनें पैदा करती है मगर आपने किस-किस नई चीज को साथ लेकर उस पर काम करना चाहिए आप के समर्थकों को लेखन कला की भी समझ होनी चाहिए ताकि उस आलोचना को शहर देता से आलोचना करने को कहें थोड़ा बहुत आराम भी करना जरूरी है टहलते हुए भी आप अपने विचारों को भी संकलित कर सकते हैं जब आप लिखे तो उस समय किसी भी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए जब आपके अंदर भावनाओं का सागर उमड़े तब अपने विचारों को लाना बहुत जरूरी है अगर आप इससे शुरुआत कर पाएंगे तो रूढोक्तियों और अतिशय प्रयुक्त कल्पना से बचना बहुत जरूरी है इस तरह की कविता कभी भी कामयाब नहीं होती जब आप लिख रहे हो तो आप अपनी भावना को ठेस ना पहुंचाओ।

आप कविता लिखने के लिए आगे बढ़ते जाओ जो भी आपके मन में भाव आवे आते हैं उन्हें भाव को अब अपने शब्दों में एक कविता के माध्यम से प्रयोग करो और आप अपनी कविता लिख डालिए बाकी आप समाज और पाठकों पर छोड़ दीजिए आप अपने साथ एक नोटबुक जरूर रखें जो भी आपको जाना हो अगर आपको कहीं पर भी कोई पंक्ति याद आती है उसको तुरंत प्रभाव से लिख डालिए जब भी आपको अंदर कविता लिखने का विचार आता है तब आप उस नोटबुक में लिख डालिए लेकिन करता यथार्थवादी सृजनात्मकता होनी चाहिए उसके अंदर यह दोनों चीज जरूरी है यह जरूरी नहीं कि आपकी कविता बंद हो क्योंकि मुताबिक हृदयस्पर्शी हो सकती है और सुंदर भी हो सकती है बहुत देर तक मत लिखिए बीच-बीच में ठहरिए। क्योंकि इससे आपके दिमाग को राहत मिलेगी कविता लिखने के लिए आप अपने मन में विश्वास बनाए रखें और आप लिखने का पूरा पूरा प्रयास करिए आप अपनी कविता के विचार किस प्रकार से लिखते हैं वह आप अच्छी प्रकार से लिखे कविता की रचनात्मकता के अंदर जनवाद की लहर यथार्थवादी सृजनात्मकता का होना बहुत जरूरी है इन सभी पैरों के आधार पर ही अपनी कविता मानी जाती है अगर यह पहलू नहीं है बेकार है और समाज के हित के लिए नहीं है।

इसलिए मेरा आप सब से निवेदन है कि आप अपनी कविता के अंदर मजदूर किसान महिला पुरुष छात्र भिखारी और गरीब से गरीब का और हर पहलू को छूने वाली कविता लिखें ताकि पढ़ने वाले को आपकी कविता हृदय से स्पर्श करते हों।

खान मनजीत भावड़िया मजीद
गांव भावड तहसील गोहाना ज़िला सोनीपत

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. 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श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: कविता लिखना और उसका तरीका - खान मनजीत भावड़िया मजीद
कविता लिखना और उसका तरीका - खान मनजीत भावड़िया मजीद
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