शनिवार, 19 मार्च 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌ का होली पर एक हास्य व्यंग्य‌ - मेरा बाप मिनिस्टर है तेरा बाप क्या है

राष्ट्रीय पर्व तिरंगा होता है तो होली का पर्व रंग बिरंगा होता है। ऐसे ही एक होली पर जब मैंने घर की दहलीज़ के बाहर अपने चरण कमल रखे तो पड़ोसी के घर के सामने यारों को घोंटते हुये और सूंतते हुये पाया। कालेज के दिनों में अपन भी बादाम और केसर मिला मिला कर भाँग घोंटते थे और चार पांच गिलास तक सूंत जाते थे। उन्हीं दिनों की एनिवर्सरी मनाने के मूड में हमने भी पड़ोसी से दो गिलास‌ फुल टेंक कराये और हलक के नीचे उतार लिये और चल पड़े अपने मंत्री पिता के कार्यालय के बाजू मे बने उनके विश्राम कक्ष की ओर। कमरे में नेतागिरी की तीव्र गंध आ रही थी।

एकाएक मेरी दृष्टि टेबिल पर पड़े बहुत सारे बधाई पत्रों पर पड़ी जो पिताजी के मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें भेजे थे। मैंने उत्सुक्तावश पत्र खोलकर पढ़ना शुरू कर दिया। एक पत्र में संदेश था " आपको आपके पिटाई दिवस पर शुभकामनायें , यह दिन बार बार आये " दूसरे पत्र में लिखा था की उस सिकंदरी दिवस पर जिसने आपको देश का महान आदमी बना दिया मैं हार्दिक बधाई देता हूँ , आशा है जूतम पैजार के उन यादगार क्षणों को आप कभी विस्मृत नहीं होने देंगे जिन्होंने आपको समाजवादी अवसरवादी नेतृत्व के गुण प्रदान किये। सभी दूसरे पत्रों मे भी पिटाई दिवस को यादोन्मुखी बनाने के चिरस्थाई करने के संदेश थे। यह रहस्य संदेश मुझे गीता रहस्य की तरह लगे।

मैंने जेम्स बांड बनकर जासूसी प्रारंभ कर दी और अलमारी की दराज खोलकर पिटाई दिवस पर अनुसंधान करने लगा। मुझे आमंत्रण पत्र का वह नमूना जो पिताजी ने अपने मित्रों को भेजा था , पढ़ने मिल गया जो इस प्रकार था " आज का दिन मेरे जीवन का सबसे अहम और अमूल्य दिन है , आज के दिन मैं शहर के व्यस्ततम चौराहे पर कुछ बौद्धिक एवं सामाजिक तत्वों द्वारा शर्मसार होकर बेशरमी से पीटा गया था। मेरा अपराध यह था कि मैंने एक पाकिट मारने का असफल प्रयास किया था और चौराहे की तीसमारखां भारतीय भीड़ ने बहती गंगा में हाथ धोने की कहावत को मेरे शरीर एवं आत्मा पर घूंसों लातों एवं जूतों द्वारा सिद्ध कर दिया था।

यह हल्ला बोल हमला मेरी प्रसिद्धि के लिये मील का पत्थर बना एवं राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण का प्रवेश द्वार बनकर नेतृत्व के गुणों को विकास की पायदान चढ़ाता हुआ मुझे वर्तमान पद तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हुआ।| इस अविस्मरणीय यादगार को जीवंत रखने के लिये प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी आपको सादर आमंत्रित करता हूं। समारोह में उपस्थित होकर मुझे आशीर्वाद प्रदान करें और मेरा अभिनंदन करें।"

पिताजी के अभूतपूर्व बलिदान को देखकर मेरी आंखें भर आईं। देशप्रेम एवं नेता बनने की ऐसी मिसाल न कहीं देखी थी न सुनी थी। पांच फुट के आदरणीय पिताजी पिटते रहे लातें और घूंसों का सेवन करते रहे और साढ़े पांच फुट के इस नालायक बेटे को खबर भी नहीं। खैर गुजरे जमाने को कौन वापिस ला सकता है किंतु मैं एक नेक पिता का नेक पुत्र हूं और अपने इस महान परिवार की वंश परंपरा को मैं भी आगे बढ़ाऊंगा ऐसा सोचकर मैंने भी प्लान बना लिया कि मैं भी पिताजी की ही तरह शहर के प्रमुख चौराहे पर क्लासिक तरीके से पिटूंगा और उन्हें एवं दुनिया वालों को सरप्राइज़ दूंगा। अखबारों में सामने के पेजों पर छपूंगा और टेलीविज़न पर पिटाई का कवरेज आधा घंटे का होगा। कार्यक्रम को मूर्त रूप देने के लिये मैं होली के इस पतित पावन अवसर पर कुछ भारतीय भद्र जनियों से छेड़छाड़ जैसे हसीन एवं रंगीन जुर्म में शहर के व्यस्ततम और चालू चौराहे पर पिटने लगा।

पीटने वाले हाय तौबा मचा रहे थे "मारो साले लफंगे को, अपने आप को समझता क्या है, इसकी औकात क्या है और मैं प्रत्येक पीटने वाले को चिल्ला रहा था' मेरा बाप मिनिस्टर है तेरा बाप क्या है?अचानक किसी ने मेरा हाथ पकड़कर झकझोर दिया 'क्यों चिल्ला रहे हो? ,मेरी आंख खुल गई। सामने श्रीमतीजी खड़ी‍ मेरा हाथ पकड़कर हिला रहीं थीं।

" धत तेरे की कितना हसीन और सुंदर सपना देख रहा था सब गुड़ गोबर कर दिया" मैं उन पर लगभग चीख पड़ा। वे मेरे इस अनोखे व्यवहार पर भौंचक्की रह गईं। किंतु जब मैंने उन्हें सपने में पिटने वाली बात बताई तो वे बहुत पछताईं कहने लगीं कि 'मुझे पता होता तो दो चार हाथ मैं भी मार लेती वर्षों की मनोकामना पूर्ण हो जाती"

मैं बिस्तर से उठा और अपने हाथ पैर सही सलामत पाकर सपने वाले मंत्रीजी एवं उनके तथा कथित बेटे के बारे में सोचने लगा जो वर्तमान परिवेश के पिता पुत्र थे, क्या नहीं थे?

--

2 blogger-facebook:

  1. शानदार रोचक प्रस्तुति.
    होली के पावन रंगमय पर्व पर आपको और सभी ब्लोगर जन को हार्दिक शुभ कामनाएँ.
    'मनसा वाचा कर्मणा'पर भी आते रहिएगा.

    उत्तर देंहटाएं
  2. पिचकारी की धार,
    गुलाल की बौछार,
    अपनों का प्यार,
    यही है यारों होली का त्यौहार.
    होली की ढेरों बधाई व शुभकामनायें ...जीवन में आपके सारे रंग चहकते ,महकते ,इठलाते ,बलखाते ,मुस्कुराते ,रिझाते व हसाते रहे

    manish jaiswal
    bilaspur
    chhattisgarh

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------