दामोदर लाल जांगिड़ की नूतन वर्षाभिनंदन ग़ज़ल

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

 

image

ग़ज़ल

दें परस्‍पर इस तरह नव वर्ष की शुभकामनाएँ ।

कल्‍पतरुरों कतारें मन मरुस्‍थल में लगाएं॥

 

नग्‍न नर्तन हो रहा भय भूख भ्रष्‍टाचार का,

जूझने का इनसे हम,संकल्‍प सामूहिक दोहराएं।

 

हैं चतुर्दिक आज हिंसा दहशतों का बोलबाला,

हैं इन्‍हें जड़ से मिटाना,ये सभी सौगंध खाएं।

 

नित्‍य नूतन नव सृजनरत सूर्य की पहली किरण,

कहती हैं बीते हुए अध्‍याय सारे भूल जाएं ।

 

महजबी,सूबाई नफरत द्वेष को जड़ से मिटाकर।

है तक़ाजा वक्‍त का कि सोच में बदलाव लाएं।

 

एक अदना आदमी जो लड़ रहा है सबके लिए,

उसकी हां में हां मिला कर हौसला उसका बढ़ाएं।

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "दामोदर लाल जांगिड़ की नूतन वर्षाभिनंदन ग़ज़ल"

  1. एक अदना आदमी जो लड़ रहा है सबके लिए,

    उसकी हां में हां मिला कर हौसला उसका बढ़ाएं।

    बेहतरीन
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
    vikram7: आ,साथी नव वर्ष मनालें......

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.