श्रीनारायण चतुर्वेदी का व्यंग्य : पत्नी और धर्मपत्नी

SHARE:

उस दिन एक नये मिल मिलने आये। 'नये' इसलिए कहता हूं कि मेरी वय इतनी हो गयी है कि पुराने मित्र दिनोंदिन कम! होते जा रहे हैं। जो थोड़े-बह...

उस दिन एक नये मिल मिलने आये। 'नये' इसलिए कहता हूं कि मेरी वय इतनी हो गयी है कि पुराने मित्र दिनोंदिन कम! होते जा रहे हैं। जो थोड़े-बहुत रह भी गये हैं, वे या तो अशक्त हैं या अन्य प्रकार से आने में असमर्थ हैं-जैसे जो लोग तीन मील पैदल चलकर आ नहीं सकते, उनसे एक ओर का किराया रिक्शावाला तीन रुपया मांगता है। अतएव अब अधिकतर नये मिल ही यदा-कदा आ जाने की कृपा करते हैं।

पुराने मित्र मेरी तरह ही दकियानूसी हैं। वे पत्नी को लेकर 'काल करने नहीं आते। नये युग में 'बेहतर अंग' के बिना व्यक्तित्व अधूरा रह जाता है। मेरे अधिकांश नये मित्र भी, जो मेरी 'सनकों' और दकियानूसीपन को जान गये हैं, वे प्राय: अकेले ही आ जाते हैं, किंतु जिन व्यक्तियों से नया परिचय या मिलता हो जाती है, वे आधु- निक रीति से 'पूर्णांग' होकर आते हैं, विशेषकर यदि पत्नी आधुनिक, सोसायटीप्रिय और साहित्यिक अभिरुचि की हुई।

जैसाकि मैंने कहा, एक नये मित्र मिलने आये। वे पूर्णांग' थे। उनकी सहचरी विदुषी, शिष्ट, आधुनिक अभिजात परिधान से वेष्टित और दर्शनीय थीं। वाणी मधुर और सुसंस्कृत थी। नमस्कार करके मेरे मिल ने कहा, ' 'ये मेरी धर्मपत्नी हैं। इनका नाम...है। सोशियालाजी में एम० ए० हैं। इनके पिता अमुक विभाग में डिप्टी डायरेक्टर और भाई एलाइड सर्विसेज में आ गये हैं। इन्हें हिंदी 'साहित्य में विशेष रुचि है। हिंदी में कविता भी करती हैं।' फिर श्रीमती जी से कहा, ' 'पंडित जी को प्रणाम' करो।'' वे मेरे चरण स्पर्श करने को झुकीं। मैंने मना करते हुए कहा, ''बेटी, मैं पुराने ढंग का आदमी हूं। हम' लोग तो बेटियों के पैर पूजते हैं, उनसे चरण स्पर्श नहीं कराते। भगवान तुम्हारा मंगल करें।''

मेरे नये मित्र की भी हिंदी और साहित्य में रुचि है। आधुनिक हिंदी उपन्यासकारों की तरह मैं 'मनोविज्ञानी' नहीं हूं, इसलिए कह नहीं सकता कि उस समय क्यों पंडित श्री विनोद शर्मा (पं ० श्रीनारायण चतुर्वेदी अपने हास्य-व्यंग्य लेख श्री विनोद शर्मा नाम! से लिखते हैं-सं ० ) मेरे मस्तिष्क पर हावी हो गये। मैंने उनसे बड़े सहज भाव, किंतु बनावटी गांभीर्य से एक बेहूदा बात कह दी, ' 'अच्छा! ये आप की धर्मपत्नी हैं। इनसे मिलकर बड़ी प्रसन्नता हुई। किंतु आपने अपनी पत्नी के दर्शन कभी नहीं कराये।''

वे मेरी बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गये। एकाएक उनकी समझ में नहीं आया कि मैं क्या कह गया। कुछ लोग तो साठ वर्ष के होने पर ही बुढभस के शिकार हो जाते हैं। मैं तो नवां दशक पूरा करने के निकट हूं। उन्होंने समझा कि यह प्रश्न मेरे आसन्न बुढभस का लक्षण है। किन्तु वे इतने शिष्ट हैं कि यह बात कह नहीं सकते थे। कुछ देर चुप रहकर बोले, ' 'धर्मपत्नी से मेरा तात्पर्य 'वाइफ' से ही है।''

मैंने कहा, ' 'भाई, हिंदी में लोग कहते हैं-ये मेरे. धर्मपिता हैं, अर्थात् पिता नहीं हैं, किन्तु मैंने इन्हें धर्मवश पिता मान लिया है। मैंने सुना था कि :

जनिता चोपनीता च यस्तु विद्या प्रयच्छति।

अन्नदाता भयत्राता पंचैते पितर: स्मृता।।

पैदा करनेवाला तो पिता है, शेष 'पितर: स्मृता:' अर्थात् पितातुल्य मान लिये गये हैं। इसी तरह से कुछ लोग किसी शिष्य या बालक को पालते-पोसते हैं, या उससे अत्यंत स्नेह करते हैं। उसे वे अपना 'धर्मपुत्र' कहते हैं। आप अपने पिता को केवल 'पिता' कहते है, 'धर्म- पिता' तो नहीं कहते और न अपने पुत्र को 'धर्मपुत्र' कहेंगे। 'धर्मपिता' या 'धर्मपुत्र' कहने से यह अर्थ निकलता है कि वास्तव में वे मेरे पिता या पुत्र नहीं हैं, मैंने धर्म से इन्हें पिता या पुत्र मान लिया है। वास्तविक पिता या पुत्र के आगे 'धर्म' शब्द लगाते हुए किसी को सुना है?”

उन्हें कहना पड़ा, ''नहीं।''

''तब'',मैंने कहा, ''पत्नी वही है, जिससे आपका विधिवत् विवाह हुआ है। वह विवाह संस्कार द्वारा या अदालत में रजिस्ट्री द्वारा हो सकता है। उसके बाद वह आपकी पत्नी हो गयी। अंग्रेजी में भी 'फादर-इन-ला, ब्रदर-इन-ला, सिस्टर-इन-ला' शब्द चलते हैं, पर 'वाइफ-इन-ला' तो मैंने सुना नहीं। उन लोगों में तलाक के बाद कानून से विवाह संबंध विच्छेद हो जाता है, किन्तु जब तक तलाक नहीं होता तब तक वह केवल 'वाइफ' है न कि 'वाइफ-इन-ला ?''

वे मेरी ऊटपटांग बाते अवाक् हो सुनते रहे। तब मैंने कहा, ''जिस प्रकार धर्मपिता के तात्पर्य हैं कि वह व्यक्ति जिसे हम धर्म- पिता कहते हैं, वास्तव में मेरा पिता नहीं है, मैंने इसे केवल धर्मवश पिता मान लिया है और वह भी मुझे पुत्र की तरह मानता है, उसी प्रकार 'धर्मपत्नी' शब्द से मेरी मोटी अक्ल में यह बात आती है कि वह मेरी वास्तव में पत्नी नहीं है, किंतु मैंने उसे धर्म या कर्मवश या व्यावहारिक रूप से अपनी पत्नी मान लिया है। 'कर्मवश' या 'व्यावहारिक' पत्नी कहना कुछ अच्छा नहीं लगता! प्रतिष्ठित शब्द 'धर्म' का उपयोग अच्छा लगता है। धर्म के अर्थ अनेक हैं। प्रेम' भी तो मनुष्य के मन का नैसर्गिक धर्म है। वह किसीसे भी हो सकता है। आवश्यक नहीं कि वह ब्याहता स्त्री अर्थात् पत्नी से ही हो। अधिक कहने की आवश्यकता नहीं। आप समझ गये होंगे कि मैं 'धर्म- पत्नी' किसे समझता हूं और क्यों पत्नी और धर्मपत्नी में भेद करता हूं। आप मुझे गलत न समझें, आप इन्हें भले ही अपनी 'धर्मपत्नी' कहें, किंतु मैं इन्हें आपकी पत्नी ही मानता हूं। मुझे कोई भ्रम नहीं है।''

मैंने आगे कहा, ''शायद आप भी ऐसे प्रकरण जानते हों और मैं तो ऐसे कई प्रकरण जानता हूं, जिनमें बिना किसी प्रकार के विवाह- बंधन में पड़े स्त्री और पुरुष पति-पत्नी की तरह रहते हैं। मैं एक जोड़े को जानता हूं जो बीस वर्ष से अधिक समय से इसी प्रकार रह रहा है। दोनों आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, क्योंकि दोनों ही सरकारी नौकरी में हैं। वे इतने स्वतंत्र हैं कि घरवाले चाहते या न चाहते, वे पारंपरिक प्रथा से विवाह कर सकते थे, उन्हें कोई रोक नहीं सकता था। यदि वह उन्हें स्वीकार न होता तो मजिस्ट्रेट के सामने कानूनी विवाह कर सकते थे किंतु उन्होंने इसकी आवश्यकता नहीं समझी। जो लोग असली बात नहीं जानते, वे उन्हें ब्याहता पति-पत्नी ही समझते हैं। मैं यह रहस्य जानता हूं और उनकी श्रीमती जी को सदा उनकी धर्मपत्नी कहता हूं, क्योंकि पत्नी न होते हुए भी वे पत्नी का धर्म निर्वाह कर रही हैं। वे स्वयं उन्हें धर्मपत्नी नहीं कहते। औरों से उनका परिचय 'मेरी वाइफ' या 'मेरी श्रीमती' कहकर कराते हैं।''

मेरे नवीन मित्र ने पूछा, ''क्या 'श्रीमती' में पत्नी का भाव नहीं आता? ''

मैंने कहा, '' 'श्रीमती' वह है जो आपकी 'श्री' की वृद्धि करे, या जिसकी श्रीवृ द्धि आपके कारण होती हो। यह काम! पत्नी और धर्म- पत्नी समान रूप से कर सकती हैं। अतएव यह शब्द दौनों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।'

मैंने अनुभव किया कि श्री विनोद शर्मा ने 'अति' कर दी है। अब उन्हें विदा कर देना चाहिए। अतएव मैं उस देवी की ओर मुड़ा जो न मालूम क्या आशा लेकर मुझसे मिलने आयी थी और मेरी अप्रत्या- शित ऊलजलूल बातों को सुनकर यदि खीज न रही होगी तो बोर तो अवश्य ही हो रही होगी। मैंने उससे कहा, ' 'तुम्हारे पति ने तुमसे कहा था कि मैं तुम्हें एक साहित्यिक से मिलाने ले चल रहा हूं। तुम स्वयं साहित्य में रुचि लेती हो। मेरे बारे में तुम्हारे पति का विचार कितना गलत है, यह तो तुम्हें मेरी बातों से मालूम हो ही गया होगा। किंतु शायद मेरी ऊलजलूल बातों से तुम्हारा कुछ मनोरंजन हुआ हो। लो, अब मेरे हाथ की बनाई चाय पियो। आशा है कि वह इतनी मीठी न होगी, जितनी मेरी बातें। मुझे कविता सुनने का शौक है और तुम! कविता करती हो। चाय पीने के बाद अपने कुछ गीत सुनाकर एक बूढ़े का मनोरंजन करने का पुण्य लो। आशा है कि तुम मेरी बातों को एक बूढ़े की बकवास समझकर उसपर अधिक ध्यान न दोगी। किंतु इन्हें कह देना कि भविष्य में तुम्हें अपनी पत्नी कहें, धर्मपत्नी नहीं.

--

(श्रीनारायण चतुर्वेदी के व्यंग्य संग्रह से साभार)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: श्रीनारायण चतुर्वेदी का व्यंग्य : पत्नी और धर्मपत्नी
श्रीनारायण चतुर्वेदी का व्यंग्य : पत्नी और धर्मपत्नी
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/12/blog-post_9817.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/12/blog-post_9817.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content