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दामोदर लाल जांगिड़ की नूतन वर्षाभिनंदन ग़ज़ल

 

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ग़ज़ल

दें परस्‍पर इस तरह नव वर्ष की शुभकामनाएँ ।

कल्‍पतरुरों कतारें मन मरुस्‍थल में लगाएं॥

 

नग्‍न नर्तन हो रहा भय भूख भ्रष्‍टाचार का,

जूझने का इनसे हम,संकल्‍प सामूहिक दोहराएं।

 

हैं चतुर्दिक आज हिंसा दहशतों का बोलबाला,

हैं इन्‍हें जड़ से मिटाना,ये सभी सौगंध खाएं।

 

नित्‍य नूतन नव सृजनरत सूर्य की पहली किरण,

कहती हैं बीते हुए अध्‍याय सारे भूल जाएं ।

 

महजबी,सूबाई नफरत द्वेष को जड़ से मिटाकर।

है तक़ाजा वक्‍त का कि सोच में बदलाव लाएं।

 

एक अदना आदमी जो लड़ रहा है सबके लिए,

उसकी हां में हां मिला कर हौसला उसका बढ़ाएं।

1 टिप्पणियाँ

  1. एक अदना आदमी जो लड़ रहा है सबके लिए,

    उसकी हां में हां मिला कर हौसला उसका बढ़ाएं।

    बेहतरीन
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
    vikram7: आ,साथी नव वर्ष मनालें......

    जवाब देंहटाएं

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