सोमवार, 25 जून 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - छल

image

मोहनी राधिका से कह रही थी ‘देख बेटी परिवार के बुजुर्ग तुम्हें कॉलेज भेजने के खिलाफ थे। लेकिन मैंने सबको समझा-बुझाकर मना लिया कि मोहल्ले की किसी एक लड़की की गलती की सजा सभी लड़कियों को देना कहाँ का न्याय है ? कुछ भी हो अपनी राधिका वैसी नहीं है। उसको हमने अच्छे संस्कार दिए हैं। वह हम लोगों का नाम रोशन करेगी। अतः बेटी हमारी लाज रखना। सुमन की तरह कुछ मत करना कि समाज में हम लोगों की नाक नीची हो’।

राधिका बोली ‘क्या आपको मुझपे विश्वास नहीं है ? माँ जी मैं कसम लेती हूँ कि कभी भी और कुछ भी आप से नहीं छुपाऊँगी। और न ही कुछ ऐसा करूँगी जिससे आपको अपने निर्णय पर पछताना पड़े’।

राधिका कॉलेज जाने लगी। फर्स्ट ईयर पास भी कर लिया। छुट्टी चल रही थी। और छाया नामकी उसकी किसी सहेली का फोन अक्सर आया करता था। एक दिन मम्मी को समझा-बुझाकर और छाया का जन्मदिन बताकर वह छाया के घर भी गई थी।

एक दिन उसकी माँ एक रेस्तरां में बैठी हुई थी। वहाँ पर दो लड़के आपसे में झगड़ सा रहे थे। बीच-बीच में वे राधिका नामकी किसी लड़की का नाम ले रहे थे। इसलिए मोहनी उनकी बात ध्यान से सुनने लगी।

उनमें से एक बोला ‘मोहन तुमने आज कमसे कम दो सो रूपये खर्च करने को कहा था। लेकिन काम हो जाने पर अब अपने वादे से मुकर रहे हो। मेरा काम आसान नहीं है। आसान हो अथवा नहीं। उसके बिना तुम राधिका से बात भी तो नहीं कर सकते। उसके घर वाले पुराने खयालात के हैं। राधिका को किसी लड़के से बार-बार फोन पर बात करने की इजाजत नहीं है। और तुम लड़की की आवाज भी नहीं निकाल पाते हो। इसलिए ही तुम्हें हमारी मदद की आवश्यकता पड़ती है’।

मोहन बोला ‘है तूँ सच में बड़ा काम का आदमी। कैसी एक्टिंग करता है। आंटीजी नमस्ते ! मैं राधिका की सहेली छाया बोल रही हूँ। उससे बात करा दीजिए’। उसके बाद राधिका जैसे फोन पर आई तुम्हारी छुट्टी। फिर तो मैं घंटों की खबर लेता हूँ। आज जाने दे। कल दो सो नहीं पूरे पाँच सो खर्च करूँगा। बस तूँ नाराज न हो। अभी छुट्टी दो हफ्ते शेष है’।

मोहनी को लगा जैसे पूरा रेस्तरां गोल-गोल घूम रहा है। उसने सर टेबल पर रख लिया। एक ही ख्याल उसके दिमांग में आ रहा था कि राधिका भी सुमन के रास्ते पर ही चल निकली। वह समझ नहीं सकी कि राधिका ऐसा छल क्यों कर रही है ?

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

*********

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------