कविताएँ और ग़ज़लें

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मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ व गीत : वो सागर पीकर भी, प्यासा ही रहा ! मै बूंद से गला , तर करती गयी !  --- जब मेरा जिक्र आया तो तेरी आँखों म...

मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ व गीत :

वो सागर पीकर भी,

प्यासा ही रहा !

मै बूंद से गला ,

तर करती गयी ! 

---

जब मेरा जिक्र आया तो

तेरी आँखों में नमी क्यों

खामोश रही  जुबान जो बरसों,

आज बोलने को बेताब क्यों

जख्मों को छिपाए रहते थे

आज हर एक को दिखते क्यों

--

आज सूरज को मैंने ,

अँधेरी कोठरी में,

उतरते देखा !

अँधेरे- उजालों को ,

लिपट कर

एक साथ सोते देखा  !

--

सफेद बालों के झुरमुट से !

एक अकेला काला बाल,

झाँक रहा था !

और मगरूर हो रहा था ,

उस पर वक्त का बुरा

असर नहीं पड़ा !

पर कितना नादान था ,

उसे नहीं मालूम था !

सफेद बालों ने,

अनुभवों का कितना

स्वाद चखा था !

खोखली होकर भी, मधुर धुन छेडती बांसुरी !

भरी होकर भी बन्दूक ,  आग उगलती है !

---

मेरी नन्ही परी की तेजस्वी आँखों में,

मैंने भविष्य का सूरज उगते देखा है

किरणें जैसे उसके पांव पखारे

सुबह उसी के लिए होती है

धरती अपना आंचल बिछाए

भूले से भी उसे ठोकर ना लग जाये

पर्वत जिसके आगे झुक जाए

नदियाँ जैसे खुद थम जाये

तूफान की क्या मजाल जो

उसका रास्ता रोके

--

मैं गौरव गाथा गाऊंगी,

हर समय हर हाल में ,

तिरंगा लहराऊंगी !

मैं शहीदों की चिताओं पर ,

हर शाम, हर मौसम में ,

दीप जलाऊँगी !

मैं भारत की मिटटी के,

कण-कण में हर वक्त,

वीरों की फसल उगाऊँगी !

मैं गौरव गाथा गाऊँगी !

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मोतीलाल की कविताएँ

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मेरे आँगन से

 

 अभी-अभी शाम की लालिमा 

जिस झुरमुट की ओट मेँ

इतराने को आतुर

मचलती हुई सी बैठी है

दिल मेँ सावन की झड़ी लिए

वहाँ दिल अभी कहाँ मचली है

कि राग की रागिनी

अभी कहाँ फूट पायी है

कि लहरोँ का संगीत

अभी कहाँ उतरी है

कि बादल अभी कहाँ बरसा है

अभी-अभी तो शाम

सभी फुनगियोँ को चूमकर

मेरे आँगन मेँ पसरी है

और रात-रानी की खुश्बू

महकने को आतुर है

तभी तो सुगन्ध के लिए

सारी बजने की मिठास

और झंकार का साया

किसी गजल की तरह

पूरी देह मेँ

तरंगित हे रही है

मेरे दिल के कोने मेँ

कोई अंधेरा नहीँ है

और उजाले की तमन्ना मेँ

कोई राख भी नहीँ बुझी है

मेरे चूल्हे मेँ

कि वसंत इतनी जल्द बीत जाए

और सावन की घटा

खेतोँ से फिसलकर

आँखोँ से ओझल हो जाए

मालूम ही नहीँ था

नहीँ तो

पलाश के फूल सा

आकाश को रंग देता मैँ

फिर देखता

कैसे साँझ की लालिमा

आँखोँ से ओझल हो पाती है ।

--

 

खौफ

 

 मैँ जब 
घर से बाहर निकलता हूँ 
अपनी आँखोँ को 
दराज मेँ 
कानोँ को 
अलमारी मेँ 
और जुबान को 
किताब के भीतर 
बंद कर जाता हूँ 
मैँ जब 
घर वापस आता हूँ 
अपनी आँखोँ को 
दराज से 
कानोँ को 
अलमारी से 
और जुबान को 
किताब से 
निकालकर लगा लेता हूँ 
क्या मैँ 
बहुत डरा हुआ आदमी हूँ 
बेशक हूँ 
तभी तो मैँ 
खौफ से घिरा रहता हूँ ।
 

* मोतीलाल/राउरकेला

* 9931346271

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देवेन्द्र कुमार पाठक के नवगीत  - 
 
धुप्पल मारेँ  
 
भरे पेट की गर्राहट मेँ        
हम कविताई धुप्पल मारेँ;       
यानी चालू मुहावरे मेँ                 
शब्द-शूर हम,                   
बाल उखाड़ेँ !  
 
जनमत की लाठी से हमने   
ठलुए मुफ्तख़ोर हैँ हांके ;  
प्रजातंत्र का खेत आज भी   
पाथर चाटे,धूधुर फांके ; 
                                            
वही पादुका-पूजन, 
विरुदावलि-गायन, जयकारेँ                                       
नई सदी की गर्म हाट मेँ      
सजी सूचना-संजाली ;     
उतरेँ-चढ़ेँ मूल्य या मानक  
हर मुद्रा मेँ पुजे दलाली ;  
                                      
बाज़ारू उस्तरे अधमरी -   
प्रजा-गऊ की खाल उतारेँ.                                       
अँधरी लिप्सा काजर आँजे  
देख रही दुनिया सतरंगी ;  
ज़श्न मनाए ताज़ पहनकर 
आधी दुनिया हो अधनंगी ;                                       
प्रायोजित बक-झक मेँ बढ़  चढ़,
बक-चातुर विश्लेषण झाड़ेँ. 
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अनुराग तिवारी की कविता
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यूं न उड़ाकर ले जाओ हवाओं!
 
यूं न उड़ाकर ले जाओ
बादलों को मेरे शहर से।
मुद्दतों बाद ये फिर 
आज नजर आये हैं,
प्यासी धरती की 
आस बन के छाये हैं।
खेत में किसान 
माथे पर हाथ रख;
देखता आसमान,
चिन्तित, किन्तु आशावान;
दीख पड़ता मेघ का 
कोई एक टुकड़ा,
दीप्त होती क्षीण आशा;
स्वप्न तिर जाते नयन में
असंख्य करता परिश्रम,
बहाता पसीना,
धीरे-धीरे अपने पंखों से 
इन्हें नीचे उतार 
भर दो हर खेत,
गली, कुन्ज, द्वार....
बरसा दो जीवन-सपने 
हो सकें पूरे;
जन-जन के तन-मन को
पुलकित कर दो....
हवाओं! यूं न उड़ाकर ले जाओ
बादलों को मेरे शहर से।



सी ए. अनुराग तिवारी
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शेर सिंह की कविता


समय



लम्‍बे पंजों / तीखी चोंच से

ले जाता है सब / सुख

समय / नोंचकर

अंगार से भर दिये हों / आंखों में

और कंठ में / ढोल / दांतों में जकड़े / झंकार फूटे न

मुंह के / कपाट खोलकर ?

समय का ही / दिया है

ये सब / राहें / चीन्‍हें - अनचीन्‍हें/ और कहीं- कहीं

कर्म का ही / दूध पिलाया है ।

मुखौटे के अंदर / मुखौटा

सादे आवरण में / धारियां

सत्‍य को / छिपा लो / मिथ्‍या को बढ़ा दो

समय / सब कुछ / उजागर -

कर ही डालता है ।

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शेर सिंह

के. के.- 100

कविनगर, गाजियाबाद- 201 001

E -Mail: shersingh52@gmail.com

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मोहसिन खान की ग़ज़ल


ग़ज़ल-1

दिल में उठा है दर्द रात कटेगी कैसे ।

हो गई बरसात अब थमेगी कैसे ।

बारिशों के धुएँ में चिंगारी सी तुम,

लग गई आग अब बुझेगी कैसे ।

कर दिया पहाड़ों को परेशान तुमने,

बर्फ़ उनकी अब जमेगी कैसे ।

घर की खिड़कियों को छोड़ दिया खुला,

कोई नज़र अब झुकेगी कैसे ।

उठी है दिल में शिद्दत से कोई बात,

होठों तक आकार अब रुकेगी कैसे ।

 

ग़ज़ल-2

हमको तुम्हारी कमी लगने लगी ।

बदली-बदली ज़मीं लगने लगी ।

घर की हदों से बाहर किधर जाएँ,

हर शक्ल अजनबी लगने लगी ।

हर रुत से बेअसर बूत से क्यों हो गए,

सांसें रुकीं, धड़कन थमीं लगने लगी ।

इक तेरे होने से दिले-सुकून कितना था,

रूहे-ग़म की बेचैनी लगने लगी ।

ख़ुश्क मंज़र, ख़ुश्क सबा, ख़ुश्क मैं भी,

फिर क्यों आँखों में लगने लगी ।

डॉ. मोहसिन ख़ान ‘मनमीत’

सहा.प्राध्यापक हिन्दी

जे.एस.एम. महाविद्यालय,

अलीबाग (महाराष्ट्र)

मो. 09860657970

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संशर्मा (संजीव शर्मा की कविताएँ)

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माँ

माँ मुझे बदली-बदली सी नज़र आती है ,

माँ जो सबसे अच्छी लगती है

पर अब पहले की तरह

लगता है मुझको प्यार नहीं करती

माँ पापा की तरह कमाती है

सुबह खाना बनाकर नहीं देती

पैसे देकर यूंही टरका देती है

नए कपडे लाती है पर

कपडे तैयार नहीं करती

पहले जब माँ बनाती थी

कितनी अच्छी लगती थी

अब हर बात पर झिड़क देती है

छोटी-छोटी बात पर चिल्लाती है

माँ सबसे हंसकर बात करती है

पर मुझे ही क्यों डांट देती है

लगता है माँ बदल गई है

कि माहोल ने बदल दिया है

माँ अब बदली बदली सी नज़र आती है,

पहले माँ पलकों पर उठाये रहती थी

हर पल दुलारती थी

मेरे सब नखरे उठती थी

मेरी हर इच्छअ पूरा करती थी

अब तो माँ का रूप भी बदल गया है

माँ का पहनावा बदल गया है

माँ का श्रृंगार बदल गया है

माँ का सत्कार बदल गया है

माँ अब बनावट सी लगती है

माँ अब बदली-बदली सी नज़र आती है.

 

तेरे बगैर

तेरे बगैर अब तो मुझे नींद भी न आएगी

लगता है ये जिंदगी ऐसे ही गुजर जाएगी

मैं तुझे चाहता हूँ तुझसे मैं कैसे कहूं

मेरी ख़ामोशी मेरी जान ले के जायेगी

एक झोंके की तरह मेरी सिम्त आना तेरा

उम्र भर के लिए तनहाइयाँ दे जायेगी

तू भी जो मेरी बेकसी की पा ले अगर

मेरे अरमानों को शक्ल सी मिल जाएगी

बख्त है बेवफा शिकवा हो क्या ज़माने से

प्यार की हर नजर जज्बा नया दिखाएगी

एक मुद्दत के बाद आस्तां पे तू है खड़ी

सोचता हूँ की कहर किस तरफ से आएगी

मुझे मैय्यत सी नजर आती है मेरी ख़ुशी

मैं तो 'मुर्दा' हूँ मेरे प्यार मैं तू क्या पायेगी

 

मुहब्बत

लोग कहते हैं कि मैं तुझसे प्यार करता हूँ

लोग कहते हैं तो ठीक ही कहते होंगें

मुझे भी लगता है कि दिल के किसी कोने से

एक ही नाम बार-बार कहीं गूंजता है

तुझे शायद कि इस बात का अहसास नहीं

मुझको इस बात से जीने कि वजह मिलती है,

लोग तो ये भी कहते हैं कि मुहब्बत करके

सैंकड़ों जख्म इस दिल पे उठाये जाते हैं

मैं तो सदियों से मुहब्बत तुझे करता हूँ

और ये मुझको कभी ग़मज़दा नहीं करती,

ये और बात है कि तू मुझे चाहती नहीं लेकिन

हर गली, हर सड़क, हर नुक्कड़ पर

मैं तुझे यूं ही भटकता हुआ मिल जाऊँगा

जिस एक तेरी गली में तेरे दरवाजे पर

रोज सर अपना झुककर मैं चला आता हूँ

जब भी जाता हूँ तो नई उम्मीद के साथ

और आता हूँ तो फिर उन्हीं मायूसियों के साथ.

 

हरजाई

दिल करता है दिल से खेलूं और वफ़ा बदनाम करुं

करते हैं जो छुपके मुहब्बत उनके चर्चे आम करुं

रात गुजारी पी के घर पर और सुबह मंसूर हुए

ऐसे लोगों के मंसूबे नई शाम तक आम करुं

छुप छुपकर उस चन्द्र बदन ने कईयों को बर्बाद किया

उफ़ क़यामत उसके जलवे उसके क्या क्या नाम धरूँ

घुट घुट कर जीने को उस हरजाई ने मजबूर किया

हाय उस कमबख्त के मैं अब और क्या नाम करुं.

संशर्मा (संजीव शर्मा)

1/2750 Ram Nagar

Shahdara, Delhi 110032

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड 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