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एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - छल

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मोहनी राधिका से कह रही थी ‘देख बेटी परिवार के बुजुर्ग तुम्हें कॉलेज भेजने के खिलाफ थे। लेकिन मैंने सबको समझा-बुझाकर मना लिया कि मोहल्ले की किसी एक लड़की की गलती की सजा सभी लड़कियों को देना कहाँ का न्याय है ? कुछ भी हो अपनी राधिका वैसी नहीं है। उसको हमने अच्छे संस्कार दिए हैं। वह हम लोगों का नाम रोशन करेगी। अतः बेटी हमारी लाज रखना। सुमन की तरह कुछ मत करना कि समाज में हम लोगों की नाक नीची हो’।

राधिका बोली ‘क्या आपको मुझपे विश्वास नहीं है ? माँ जी मैं कसम लेती हूँ कि कभी भी और कुछ भी आप से नहीं छुपाऊँगी। और न ही कुछ ऐसा करूँगी जिससे आपको अपने निर्णय पर पछताना पड़े’।

राधिका कॉलेज जाने लगी। फर्स्ट ईयर पास भी कर लिया। छुट्टी चल रही थी। और छाया नामकी उसकी किसी सहेली का फोन अक्सर आया करता था। एक दिन मम्मी को समझा-बुझाकर और छाया का जन्मदिन बताकर वह छाया के घर भी गई थी।

एक दिन उसकी माँ एक रेस्तरां में बैठी हुई थी। वहाँ पर दो लड़के आपसे में झगड़ सा रहे थे। बीच-बीच में वे राधिका नामकी किसी लड़की का नाम ले रहे थे। इसलिए मोहनी उनकी बात ध्यान से सुनने लगी।

उनमें से एक बोला ‘मोहन तुमने आज कमसे कम दो सो रूपये खर्च करने को कहा था। लेकिन काम हो जाने पर अब अपने वादे से मुकर रहे हो। मेरा काम आसान नहीं है। आसान हो अथवा नहीं। उसके बिना तुम राधिका से बात भी तो नहीं कर सकते। उसके घर वाले पुराने खयालात के हैं। राधिका को किसी लड़के से बार-बार फोन पर बात करने की इजाजत नहीं है। और तुम लड़की की आवाज भी नहीं निकाल पाते हो। इसलिए ही तुम्हें हमारी मदद की आवश्यकता पड़ती है’।

मोहन बोला ‘है तूँ सच में बड़ा काम का आदमी। कैसी एक्टिंग करता है। आंटीजी नमस्ते ! मैं राधिका की सहेली छाया बोल रही हूँ। उससे बात करा दीजिए’। उसके बाद राधिका जैसे फोन पर आई तुम्हारी छुट्टी। फिर तो मैं घंटों की खबर लेता हूँ। आज जाने दे। कल दो सो नहीं पूरे पाँच सो खर्च करूँगा। बस तूँ नाराज न हो। अभी छुट्टी दो हफ्ते शेष है’।

मोहनी को लगा जैसे पूरा रेस्तरां गोल-गोल घूम रहा है। उसने सर टेबल पर रख लिया। एक ही ख्याल उसके दिमांग में आ रहा था कि राधिका भी सुमन के रास्ते पर ही चल निकली। वह समझ नहीं सकी कि राधिका ऐसा छल क्यों कर रही है ?

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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