सतीश चन्द्र श्रीवास्तव की क्षणिकाएँ

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

क्षणिकाएँ :

1.

मुझे ख़ाक समझ कर

उड़ा न देना

पड गया आँख में

तो मुश्किल होगी

 

2.

दवा न दे सको

तो दर्द ही दे देना,

सुना है

दर्द में दर्द दवा होती है

 

3.

चूहे सेठों के गोदामों

कूदते है

चूहे ग़रीबों के पेट में

कूदते है

चूहे बाज़ारों से निकल कर

आम आदमी की जेब

कुतर रहे है

खाकी वर्दी में चूहे

देश कॊ लूट रहे है

चूहे सफेद टोपी में

संविधान कुतर रहे हैं

 

4.

ज़िन्दगी हमदर्द नहीं

आतताई है,

मैंने तो हर जगह

मात खायी है ।

कहाँ तक साथ दे

कोई किसका,

रिश्तों को सुविधा ही

रास आयी है ।

हैरान हूँ,

अपनी ज़िन्दगी से मिलकर,

बहारों का मौसम है

या ख़िजा आयी है ।

 

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव

प्रकाशित रचनाएं

कहानी :- दैनिक हिन्दुस्तान,अनुगमन,अम्रत प्रभात           

कविता:- कादम्बिनी, तेवर, उम्मीद,प्रतिश्रुति, कारखाना, प्रयाग राज टाइम्स 

सम्प्रति :- मण्डल रेल प्रबन्धक कार्यालय, इलाहाबाद   

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव

          ५/२ए रामानन्द नगर

अल्लापुर, इलाहाबाद

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "सतीश चन्द्र श्रीवास्तव की क्षणिकाएँ"

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.