गुरुवार, 17 जनवरी 2013

गिरिराज भंडारी की तीन ग़ज़लें

image

ग़ज़लें

( 1)

वो असला मौन कोने में पड़ा है।

 

वज़न कंधों में सबके आ पड़ा है ,

कितना बेरहम ,कितना बड़ा है ।

 

कोई भूखा है ठंडी में अकड़ते,

संसद में अभी ताला पड़ा है ।

 

सियासी रोटियां सिकने लगी है ,

तवा भी गर्म और काफ़ी बड़ा है।

 

सशंकित हूँ मै, कुछ उत्तर नहीं है ,

विचारों का अभी अंतर अड़ा है ।

 

कहीं पे गिर न जाए सच हमारा,

वो जिसपे बैठा है, उल्टा घड़ा है ।

 

वो खा पाएंगे,इसमें शक मुझे है,

ये सच तो स्वाद में कड़वा बड़ा है।

 

जिसपे था यकीं ये कारगर है ,

वो असला मौन कोने में पड़ा है।

 

 

(2)

मैं सच कहूँगा

 

आँखे बंद कर के यूँ चादर ना तन लो ,

मैं सच कहूँगा आके सब मेरा बयां लो ।

 

प्रकाश आज भी वही सूरज भी वही है ,

आखें खुली रखने की एक शर्त मन लो ।

 

अकेले किसी के घर नहीं आते हैं,ये दोनों,

दुख लंगड़ा,अंधी ख़ुशी ये बात जान लो।

 

यूँ ही मिले से चीज़ की कीमत नहीं होती,

पाने के लिए भाई जी,कुछ तो थकान लो।

 

भीड़ में तो भीड़ का हिस्सा ही रहोगे ,

ऊँचे में जाके तुम कहीं अपना मचान लो ।

 

बिन मांगे तो खुदा भी कुछ देते नहीं यारों,

तुम भी कहो,गूंगे हो तो मेरी जुबान लो ।

 

( 3 )

हर दिन नया घुमाव है

प्राप्त स्वाद खो चुके ,अप्राप्त से खिंचाव है ,

अपनों से बेरुखी यहाँ ,गैरों का रख रखाव है ।

 

भूलना चाहूं भी तो ,हर घाव है हरा अभी ,

टीसता है हर घड़ी ,बाक़ी अभी रिसाव है ।

 

उथलों में कब रुक है वो, बह के दूर जा चुका,

गहरी ज़मी मिली जहाँ उस जगह जमाव है ।

 

भाषा बड़ी तटस्थ थी, हाव भाव संतुलित ,

आंखे बयान कर गयी,किस तरफ़ झुकाव है ।

 

चंचल बड़ी है ज़िंदगी,तय यहाँ कुछ भी नहीं,

हर दिन है नए रास्ते,हर क्षण नया घुमाव है

--

गिरिराज भंडारी

1A /सड़क 35 /सेक्टर 4

भिलाई ,जिला -दुर्ग (छ.ग.)

7 blogger-facebook:

  1. "har din naya ghumav hai" acchi lagi..

    उत्तर देंहटाएं
  2. "har din naya bhumav hai " acchi lagi

    उत्तर देंहटाएं
  3. "chancnal badi hai zindagi,tay yaha kuch bhi nahi" these are very true lines

    उत्तर देंहटाएं
  4. i liked these lines "chanchal badi hai zingadi, tay yaha kuch bhi nahi"

    उत्तर देंहटाएं
  5. vo asla maun kone men pada hai ! dil ko sprsh karane vaali gajal. achchilagi. prayaas saraahnia hai.

    उत्तर देंहटाएं
  6. App sabhi ko mera svinay dhanyawad,aapne meri rachna pasand kar aage likhte rahne kii
    badi himmat dee.pun: dhanayawad.

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------