सोमवार, 21 जनवरी 2013

बच्चन पाठक 'सलिल' की लघुकथा - मोह-भंग

लघु कथा 

मोह-भंग 

         -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

तिवारी जी एक स्थानीय इस्पात कम्पनी से अवकाश प्राप्त कर चुके थे। पैंतीस वर्षों की सेवा थी।

उन्हें भविष्य निधि, ग्रेच्युटी आदि के सात लाख रुपये मिले थे।

उन्होंने अपनी पत्नी से कहा- गाँव चलेंगे। दो-दो भतीजे हैं। बार-बार कह रहे हैं कि चचाजी आइए । कोई कष्ट नहीं होगा। हमें सेवा का अवसर दें।

उन्होंने अपने मित्र शर्माजी से कहा- यह घर बेचवा दीजिए। डेढ़ दो लाख भी मिलेंगे तो कोई हर्ज़ नहीं। 

शर्मा जी अनुभवी थे । बोले- गाँव में पहले स्थापित हो जाइए। फिर आइएगा। पंद्रह दिन भी रहियेगा तो ग्राहक मिल जायेंगे। ऐसे हडबडा कर मत बेचिए।

तिवारी जी गाँव गए। दोनों भतीजे अलग अलग रहते थे। दोनों ही अपने यहाँ उनको रखना चाहते थे।

शर्त  ही थी कि तिवारी जी अपने और भतीजे के नाम पर जॉइंट एकाउंट खोलकर सारी राशि जमा कर दें।

दो तीन दिनों के बाद उनके द्वार पर तीन चार युवक आए। उनमे एक मुखिया का बेटा था, दूसरा एक स्थानीय पार्टी का नेता था।उनमे से एक बोला- बाबा,आप तो खूब कमाएं हैं। अब यहाँ चैन से रहिए।

तीन लाख रुपये हमें दे दें,कोई आपको कुछ नहीं कहेगा। अगर किसी ने कुछ कहा तो हम सबकी बंदूक उस पर तन जाएगी। यही आजकल यहाँ का नियम है। पास के घटौली गाँव के युवकों को कुछ नहीं दिया। एक दिन खेत में गोली से उड़ा दिए गए।

युवक चले गए। तिवारी जी ने यह बात अपने बाल सखा नन्द कुमार को सुनाई।नन्द कुमार ने कहा-

बात सही है। ये गुंडे पढ़ लिख कर बेकारी के दिन गाँव में गुजारते हैं। बिना लाइसेंस की बन्दूक रखते हैं और धमका कर रंगदारी वसूल करते हैं। अपनी कमाई का एक भाग विधायक और पुलिस को भी देते हैं। इनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता ।

रात भर तिवारी जी को नींद नहीं आई। वे सोचते थे कि गाँव में जाकर रोज पोखरे में स्नान करेंगे, शंकर जी की पूजा करेंगे,आम के समय आम खायेंगे। मक्का के समय  में मचान बांध कर टीन पीट कर जानवर भगायेंगे।

अपने द्वार पर रामायण पाठ कराएँगे। बचपन की स्मृतियो को फिर से ताज़ा करेंगे।

अब उनका मोह भंग हो चुका था । दुसरे दिन ट्रेन से वे वापस लौटे। यहाँ अपने मित्र को कह दिया- अब घर बेचने की जरुरत नहीं है। जन्म भूमि से कर्म भूमि का कम महत्व नहीं है। गाँव में अब मेरा कोई मित्र नहीं। कुछ मर गए कुछ अन्यत्र बस गए। अब मैं यहीं आप लोगों के साथ रहूँगा

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जमशेदपुर 

फोन- 0657/2370892

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