आशीष कुमार त्रिवेदी की बाल कहानी - चमत्कारी फल

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चमत्कारी फल 

बबलू  एक साधारण लड़का था। उसमें आत्म विश्वास की कमी थी। वह कोई भी काम करने जाता तो उसे अधूरा ही छोड़ देता था। उसके स्कूल में स्पोर्ट्स वीक मनाया जाने वाला था। उसमें बहुत सी प्रतियोगिताएं होनी थीं। उसने भी रेस में भाग लिया था। वह रोज़ अभ्यास भी करता था किन्तु फिर भी उसे डर था। 

बबलू  अक्सर कार्टून्स में देखता था की कैसे अलग अलग चरित्रों को कोई न कोई असाधारण शक्ति मिली है। वह सोचता की काश उसे भी कोई ऐसी शक्ति मिल जाए।

रेस के एक दिन पहले वह बहुत ही परेशान था। बार बार उसके मन में यह विचार आ रहा था की वह बीमार होने का बहाना कर रेस में भाग न ले। वह कुछ तय नहीं कर पा रहा था। वह सर झुकाए बैठा था। तभी पूरा कमरा तेज़ रोशनी से भर गया। उस रोशनी में उसे कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था। जब रोशनी कुछ कम हुई तो उसने देखा की उसके सामने एक परी खड़ी  थी। परी बोली " क्या बात है तुम इतने परेशान क्यों हो?" बबलू ने कहा " परी कल मुझे रेस में भाग लेना है। पर मैं डर रहा हूँ क्या तुम मेरी मदद करोगी। तुम मुझे ऐसी शक्ति दो की मैं सबको पीछे छोड़ दूं।" परी मुस्कुराते हुए बोली " बस इतनी सी बात" उसने अपनी जादू की छड़ी घुमाई और एक सेब उसकी तरफ बढ़ा दिया " कल रेस से पहले इसे खा लेना।" कहकर वह गायब हो गयी। बबलू खुश होकर सो गया। 

अगले दिन वह पूरे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचा। जब रेस की बारी आई तो उसने परी का दिया सेब खा लिया। उसे विश्वास था की सेब की चमत्कारी शक्ति उसे अवश्य जिताएगी। रेस शुरू होने पर वह पूरी ताक़त से भागा। वह रेस में प्रथम आया। वह बहुत प्रसन्न था। अपना ईनाम लेकर जब वह घर आया तो परी के बारे में सोचने लगा। एक बार फिर कमरा रोशनी से भर गया। उसके सामने परी खड़ी थी। परी को देख वह उछल पड़ा " देखो मुझे रेस में ईनाम मिला है। यह सब उस जादुई फल का चमत्कार है।" उसकी बात सुन कर परी जोर जोर से हँसने लगी " तो तुम्हें लगता है की यह सब उस सेब के कारण हुआ।" " तो फिर और क्या" बबलू ने आश्चर्य से पूछा। परी बोली " वह तो साधारण फल था उसमें कुछ नहीं था। देखो, बबलू शक्ति बाहर नहीं व्यक्ति के भीतर होती है। तुम रेस में जीते क्योंकि तुम्हें यह विश्वास था की तुम जीतोगे। आत्म विश्वास से बढ़ कर कोई शक्ति नहीं है। अपने भीतर आत्म विश्वास पैदा करो। फिर तुम किसी से पीछे नहीं रहोगे।" यह कह कर परी अंतर्धान हो गयी।

बबलू  परी की बात पर विचार करने लगा उसने निश्चय किया की अब वह खुद पर यकीन करना सीखेगा।

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