शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2013

जसबीर चावला की चुनावी आचार संहिता पर 5 'अचारी कविताएं'

आचार संहिता पर 5 'अचारी कविताएं'
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हनीमून और आचार संहिता
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
विवाह बाद
कब कहाँ जायेगा
हनीमून
नव विवाहित जोड़ा
बोला समधन से
कन्या का पिता
परिहास से बोली समधन
कैसे जा सकते हैं
जानते नहीं
चुनाव घोषित हो गये
लग चुकी है
आचार संहिता
००


सास बहू ओर आचार संहिता
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
सास ने कहा
बहू से
जानती हूँ मैं
अच्छा लगता है अचार
तुझे
'इन दिनों'
छोड़ चिंता
खा ले तू भी खा ले
जब सारे दल
खा रहे
तोड़ रहे हैं
आचार संहिता
००


आचार मुक्त संहिता
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
लग गई आचार संहिता
तो क्या
हमारे आचार / विचार / संस्कार अलग
क़ानून / दलील / नज़ीर अलग
ठसक / अकड़ / गुरुर जुदा
हमारा भगवान
हमारा खुदा
हमारी अपनी मुक्त संहिता
ठेंगे पे आचार संहिता
सुना नहीं
शत्रुघ्न का जुमला
हम जहाँ खड़े होते
वहीं से लाईन शुरु होती
जो हम कहें
वही है आचार संहिता
हम नोट बाँटे / झाँझ बजाएँ
घुट्टी पिलाएँ
यही आचार है
तुम पकड़ बैठे रहो
लिये अपनी संहिता
००


बेटी ओर आचार संहिता
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
पत्नि ने कहा
तल्ख़ी से पति को
मैं न कहती थी
जल्दी जाओ
बहू को बिदा करा लाओ
अब मना कर देगा
बहू का पिता
हंस कर कहेगा
क्षमा समधीजी
बेटी भेज नहीं सकता
लग चुकी है
आचार संहिता
००


जज और आचार संहिता
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
जज साहब
बहुत हो गया सहते
अब साथ नहीं रह सकते
ख़त्म हो कटुता
अब जारी कर ही दो
तलाक का आदेश
मिटे दुख क्लेष चिंता
जज ने कहा
भुगता है कुछ दिन ओर भुगत
घोषित हो चुकी है
आचार संहिता
००

7 blogger-facebook:

  1. bahut sundar vyng hai ,ati sarvtra varjyet ka behtreen udaharn hai

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut sundar vyng hai ,ati sarvtra varjyet ka behtreen udaharn hai

    उत्तर देंहटाएं
  3. श्री चावलाजी,आपके आचारी कविताओं में अचार -सा सोंधापन है..पढ़ कर मजा आ गया...बधाई...प्रमोद यादव

    उत्तर देंहटाएं
  4. धन्यवाद प्रमोदजी.

    उत्तर देंहटाएं
  5. धन्यवाद प्रमोदजी.

    उत्तर देंहटाएं

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