रचनाकार में खोजें...

रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

धर्म का बिगड़ता स्वरुप

SHARE:

डॉ. बी.सी. जोशी भक्त , ध्वनि-विस्तारक यंत्रों के माध्यम से लोगों को यह अवगत कराते हैं कि यह पूजा-पाठ मेरे यहाँ हो रहा है। यह धार्मिक कार्...

image

डॉ. बी.सी. जोशी

भक्त, ध्वनि-विस्तारक यंत्रों के माध्यम से लोगों को यह अवगत कराते हैं कि यह पूजा-पाठ मेरे यहाँ हो रहा है। यह धार्मिक कार्य मैं करा रहा हूँ। भजन संध्या का आयोजन भी कराया जा रहा है। वास्तव में यह भक्ति नहीं है।

ध्वनि-विस्तारक यंत्रों के साथ धार्मिक कार्य सम्पन्न कराने का प्रमुख उद्देश्य है अपने 'मैं' यानी अहंकार का प्रदर्शन।

ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग कई बार सात्त्विक भक्त भी देखा-देखी में कर लेते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अल्पज्ञता हो सकता है, 'मैं' अर्थात् अहंकार की भावना नहीं। इस तरह की पूजा-पाठ और भजन संध्याओं के आयोजन से अड़ौस-पड़ौस में रह रहे बच्चों, बूढ़ों, बीमार व्यक्तियों एवं अध्ययनरत छात्रों को बहुत परेशानी होती है। किसी को परेशान करना हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिये। धनाढ्य, साधन सम्पन्न अहंकारी व्यक्ति जगह-जगह इस तरह के धार्मिक आयोजन करा कर ''मैं'' यानी अपने अहंकार का प्रदर्शन करते रहते हैं।

धार्मिक कार्य हो या किसी मंदिर का निर्माण, अहंकारी भक्त दानदाताओं की सूची में अपना नाम सबसे ऊपर देखना चाहते हैं। मंदिर में लगे पत्थर के शीर्ष पर अपना नाम खुदा हुआ देख कर खुश होते हैं। हर अहंकारी व्यक्ति दिये गये दान की सूची देखने मंदिर में आता है। कथा सुनना, भजनों का आनन्द लेना या मंदिर में भगवान का दर्शन करना उसका उद्देश्य नहीं होता। अहंकार को प्रभु का नाम याद नहीं आता। वह तो सभी के मुँह से अपना नाम सुनना चाहता है, अपना नाम (अहंकार) ढूँढ़ता रहता है। यह धार्मिक कार्य ''मैंने'' सम्पन्न कराया है, यह मंदिर 'मैंने' बनाया है, 'हमने' बनाया है, अपने वैभव और कालेधन के बलबूते पर हमने भगवान को अपने वश में कर लिया है। अहंकारी को जीवन में औंकार नहीं मिल सकते, यह एक कटु सत्य है। प्रभु तो उसी भक्त को मिलते हैं जिसका मन निर्मल हो, अहंकार रहित हो। अहंकारी व्यक्ति पर यदि प्रभु की कृपा हो जाए तो उसका अहंकार धीरे-धीरे कम होकर अन्ततः समाप्त हो जाता है। यदि प्रभु की कृपा नहीं होती है तो उसका अहंकार निरन्तर बढ़ता ही रहता है और उसे जीवन में सत् (परमात्मा) नहीं मिलता।

धनाढ्य व्यक्ति यदि परोपकारी है, निरभिमान है, तो अपार सम्पत्ति पाकर भी विनय से झुका रहता है।

फल भारन नमि बिटप सब रहे भूमि निअराइ। पर उपकारी पुरुष जिमि नवहिं सुसंपति पाइ।। रा.च.मा. ३/४०

फलों के बोझ से झुक कर सारे वृक्ष पृथ्वी के पास आ लगे हैं, जैसे परोपकारी पुरुष बड़ी सम्पत्ति पाकर विनय से झुक जाते हैं।

भजन कीर्तन करो, सत्संग करो। सत् (परमात्मा), संग (सत्पुरुषों का सानिध्य)। यदि जीवन में परमात्मा का साथ पाना है तो संत पुरुषों, महापुरुषों की वाणी सुनो, शास्त्रों का अध्ययन करो, धर्म-ग्रंथों का अध्ययन करो। आजकल मंदिरों में जाने वाले अधिकतम भक्त गर्व और अहंकार से परिपूर्ण है। उनमें सेवा और भक्ति की भावना नहीं है। ये अपने समय का दुरुपयोग कर स्वयं को दुःखी कर रहे हैं, साथ ही मानवता के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। इस घारे कलयुग में अधिकतम लोगों ने भय को धर्म बना दिया है। भय के कारण लोग भगवान का भजन कर रहे हैं। भय के कारण समृद्ध व्यक्ति भागवत् कथा कराते हैं, अखंड रामायण पाठ कराते हैं। अतिसमृद्ध व्यक्ति यज्ञ का आयोजन कराते हैं। इन सभी आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग किया जाता है। सच्चा प्रेम ही धर्म है, शुद्ध अन्तःकरण से अपने प्रभु से प्रेम करना ही धर्म है। भय के कारण किये जा रहे सभी धार्मिक आयोजनों में भावना का पूर्ण अभाव है, धर्म का पूर्ण अभाव है। यह बात प्रत्येक मनुष्य के समझ में आनी चाहिये। क्या दिखावा करने से भगवान मिलते हैं? इसका उत्तर खोजने के लिये धर्म के दस लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।

धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।।

(1) धृत (धैर्य)

(2) क्षमा (क्षमाभाव)

(3) दम (मन, बुद्धि आदि का निग्रह)

(4) अस्तेय (चोरी न करना)

(5) शौच (बाह्याभ्यान्तर की शुद्धि)

(6) धी (आस्तिक्य बुद्धि)

(7) विद्या (सा विद्याया विमुक्तये) विद्या वही है जो मुक्ति प्रदान करे

(8) सत्य

(9) अक्रोध (क्रोध का सर्वथा अभाव)

(10) इन्द्रिय निग्रह

धर्म को हम मानवता का मेरुदण्ड भी कहते हैं। धर्म मानवता को तोड़ने का नहीं जोड़ने का काम करता है। 'वसुधैव कुटुम्बकम' - विश्वबन्धुत्व स्थापित करता है। मंदिर में भक्त कानफोड़ आवाज में ढोलक मंजीरे व तालियाँ बजा कर चीख रहे हैं। मंदिरों के आस-पास रहने वाले लोग ध्वनि प्रदूषण के कारण मानसिक एवं शारीरिक कष्ट झेल रहे हैं। क्या आप ऐसा करके सामाजिक व्यवस्था का पालन कर रहे हैं? ध्वनि प्रदूषण के कारण मानसिक एवं शारीरिक कष्ट झेल रहे इन सभी पड़ौसियों में उसी परमपिता परमेश्वर की छवि है, जिसे प्रसन्न करने के लिये आप भजन कर रहे हैं। आप दूसरों को कष्ट देकर आनन्द का अनुभव कर रहे हैं। सर्वव्यापी प्रभु भी इस बात को भलीभांति समझ रहे हैं कि ऐसे कर्म करने वाले भक्तों को मेरी सर्वव्यापकता की जानकारी नहीं है।

हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना।। रा.च.मा. १/१८५/५

भगवान सब जगह समानरुप से व्यापक हैं। प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं।

जो भक्त मंदिर में जाकर प्रभु का सम्मान करते हैं उन्हें मंदिर में बैठे हुए अन्य भक्तों का, मंदिर के आसपास रहने वालों का, बीमार, बूढ़े, असहाय और लाचार लोगों के साथ ही अध्ययनरत विद्यार्थियों का महासम्मान करना चाहिये। यदि ये एसे ा नहीं करते हैं तो इनकी भक्ति निरर्थक है। ऐसे भक्तों को जीवन में भगवान प्राप्त नहीं हो सकता। यह मैं नहीं कह रहा हूँ, परमपूज्य मोरारी बापू अक्सर अपने प्रवचनों में इस बात का जिक्र करते रहते हैं। प्रत्येक भक्त का कर्तव्य दूसरों की सेवा व सामाजिक व्यवस्था का पालन करना होना चाहिये। दूसरों को कष्ट पहुँचा कर भक्ति करने का अर्थ तो यही हुआ कि हम प्रभु की सृष्टि एवं व्यवस्था में अवरोध उत्पन्न कर, उसकी सर्वव्यापकता को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।

भगवान की उपासना, भजन कीर्तन, सत्संग आदि आत्मा के लिये अतिआवश्यक एवं सर्वोत्तम आहार है। इस आहार को पाकर उपासना करने वाला निरभिमान हो जाता है। उसके विचार सात्विक हो जाते हैं। सत्संग का अर्थ है अविनाशी का संग। लेकिन आज प्रायः सभी मंदिरों में सत्संग का स्वरुप बदल गया है। मानवीय विकारों के कारण सत्संग, असत्संग हो चुका है। असत्संग का दूसरा नाम मानवीय विकार है। आजकल मंदिरां के पुजारी भगवान की आरती कानफोड़ स्वचालित ड्रम व घंटियों से कर रहे हैं। वेदों में कहा गया है, तीखी तेजध्वनि स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होती है। सारे दिन कान फाड़ने वाली ध्वनि के साथ भजन कीर्तन करने से सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा व बहरापन होने का खतरा बराबर बना रहता है। संकीर्तन करते समय भक्ति संगीत की ध्वनि धीमी हो, मधुर हो। जिuUÊया अग्रे मधु मे जिuUÊमूले मधूलकम्।

ममेदह क्रतावसो मम चित्तमुपायसि।।

अथर्ववेद १/३४/२ अर्थात् मेरी जीभ से मधुर शब्द निकले, भगवान का भजन कीर्तन करते समय मूल में मधुरता हो। मधुरता मेरे कर्म में निश्चय से रहे। मरे े चित्त में मधुरता बनी रहे। इसलिये भक्तगण इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि भक्ति प्रधान भजनों में मधुरता हो। भजन करते समय भद्रपुरुषों के समान मधुरता से भजनकीर्तन किया जावे ताकि चारों तरफ शांति का वातावरण यथावत बना रहे।

तृणादपि सुनीचेन तरोरपि सहिष्णुना।

अमानिना मानदेन कीर्तनीयः सदा हरिः।।

(महाप्रभु चैतन्य-शिक्षाष्टक)

अपने को तृण से भी अत्यन्त तुच्छ समझ कर, वृक्ष की तरह सहनशील होकर, स्वयं अमानी रह कर और दूसरों को मान देते हुए सदा श्रीहरि का कीर्तन करना चाहिये। सत्य युग में ध्यान से, त्रेतायुग में यज्ञ से, द्वापर में देवताओं की विधिवत पूजा करने से भगवान मिलते थे। लेकिन कलयुग में तो भगवान का नाम लेने से, प्रभुनाम का संकीर्तन करने से व संत महात्माओं का सानिध्य पाकर प्रभु नाम लेने मात्र से ही भगवान की कृपा प्राप्त हो जाती है। भक्त को इच्छित फल-प्राप्त हो जाते हैं, और उसका चित्त शुद्ध हो जाता है।

कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग। जो गति होइ सो कलि हरिनाम ते पावहिं लोग।। रा.च.मा. ७/१०२ख सत्ययुग, त्रेता और द्वापर में जो गति पूजा, यज्ञ और योग से प्राप्त होती है वही गति कलयुग में लोग केवल भगवान के नाम से पा लेते  हैं।

कलयुग में इस भवसागर को पार करने के लिये भगवन्नाम का नित्यप्रति स्मरण, ध्यान, यज्ञ, तीर्थ, व्रत, दान आदि से अधिक प्रभावी है। भगवान की कृपा बनी रहे, भगवान का सानिध्य प्राप्त होता रहे, इसके लिये इस घोर कलयुग में शुद्ध अन्तःकरण से शान्तिपूर्वक हरिनाम, संकीर्तन, हरिनाम का पठन व श्रवण किया जाए, लेकिन इससे आसपास की शांति भंग नहीं हो, ध्वनि प्रदूषण नहीं हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जावे। सभी भक्त विनम्र एवं निरभिमान हो कर भजनभाव करें इसी में हम सभी की भलाई है। कल्याण में प्रकाशित इस शिक्षाप्रद कथा को प्रत्येक भक्त अवश्य पढ़ें-

नरोत्तम नाम का ब्राह्मण तपस्वी बन गया और अपने माता-पिता को घर में अकेला छोड़ कर तीर्थयात्रा पर निकल गया। तपस्या और तीर्थयात्रा के प्रभाव से उसके गीले कपड़े आकाश में ही सूख जाते थे। इस चमत्कार को देख कर उसके मन में अभिमान उत्पन्न हो गया। उसने आकाश की ओर देखा और कहा, 'है ऐसा कोई दूसरा तपस्वी जिसके गीले कपड़े आकाश में ही सूख जाते हों।' वाक्य पूरा होने से पहले ही एक बगुले ने उसके मुँह में बींट कर दी। क्रोधित तपस्वी ने बगुले को शाप दे दिया। बगुला जल कर भस्म हो गया। बगुले के भस्म होते ही ब्राह्मण की तपस्या और तीर्थयात्रा का प्रभाव पूर्णतः नष्ट हो गया। उसके गीले कपड़े आकाश में सूखने बंद हो गये। तभी आकाशवाणी हुई। हे तपस्वी ब्राह्मण! तुरन्त मूक चाण्डाल के घर चले जाओ, वहाँ तुम्हें धर्म का

ज्ञान होगा। ब्राह्मण, मूक चाण्डाल के घर पहुँचा। चाण्डाल का घर बिना खम्भों के ही आकाश में टिका था और उसके घर में एक ब्राह्मण बैठा था। नरोत्तम ब्राह्मण ने चांडाल से कहा, 'मुझे धर्म का ज्ञान दो।' चाण्डाल ने बहुत ही विनम्र होकर उत्तर दिया, 'अभी मैं अपने माता-पिता की सेवा कर रहा हूँ।' यह सुन कर ब्राह्मण को क्रोध आ गया। क्रोधित ब्राह्मण को देख कर चाण्डाल ने कहा, 'मैं बगुला नहीं हूँ, आपके शाप से नहीं जलूँगा। यदि इतनी ही जल्दी है तो पतिव्रता के घर चले जाइये।' नरोत्तम आगे बढ़ा तो चाण्डाल के घर में बैठा हुआ ब्राह्मण भी उसके साथ हो लिया। नरोत्तम ने ब्राह्मण से पूछा, 'ब्राह्मण होकर आप चाण्डाल के घर में क्यों रहते हैं?' ब्राह्मण ने उत्तर दिया, 'अन्तःकरण शुद्ध होते ही तुम सब कुछ समझ जाओगे। जिस पतिव्रता के घर तुम जा रहे हो वह असीम शक्तियों से परिपूर्ण है।' यह कह कर वह ब्राह्मण अदृश्य हो गया। पतिव्रता के घर में प्रवेश करते ही नरोत्तम ने यहाँ भी उसी ब्राह्मण को बैठे देखा। नरोत्तम ने पतिव्रता से कहा, 'हे देवी! मुझे धर्म का ज्ञान दो।' पतिव्रता ने कहा, 'पुत्र के लिये माता-पिता की सेवा से बढ़कर दूसरा धर्म नहीं है। एक पत्नी के लिये पति सेवा से बढ़ कर दूसरा धर्म नहीं है। आप मेरे अतिथि हैं। पति की सेवा पूरी होते ही मैं आपकी सेवा करुंगी और धर्म का ज्ञान भी दूँगी।

यदि आपको जल्दी है तो तुलाधार वैश्य के घर चले जाइये।' नरोत्तम तुलाधार वैश्य के घर की तरफ बढ़ा तो वही ब्राह्मण फिर साथ हो लिया और वैश्य का घर आते ही अदृश्य हो गया। नरोत्तम ने वैश्य से कहा, 'मुझे धर्म का ज्ञान दो।' वैश्य ने कहा,

'व्यापार ही मेरा मुख्य धर्म है, अभी मैं व्यापारियों की सेवा कर रहा हूँ। इनमें समरुप से व्याप्त

भगवान की ही सेवा कर रहा हूँ। इस परमधर्म का निर्वाह करने के बाद ही मैं आपकी सेवा करुँगा।

यदि आप को जल्दी है तो धर्माकर के घर चले जाइये।' नरोत्तम धर्माकर के घर की तरफ बढ़ा तो वही ब्राह्मण फिर साथ हो लिया। नरोत्तम ने ब्राह्मण से पूछा, 'यह धर्माकर कौन है?' ब्राह्मण ने बताया, 'एक राजकुमार छह महीने के लिये बाहर चला गया और अपनी सुन्दर नवयौवना पत्नी को धर्माकर के पास छोड़ गया। ब्रह्मचारी धर्माकर ने पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन कर उसकी सेवा की। लेकिन लोग उसके बारे में तरह-तरह की बातें करने लगे। छह महीने बाद राजकुमार वापस आया तो उसने भी धर्माकर के बारे में बहुत कुछ सुना। धर्माकर ने अपने घर के मुख्य द्वार पर लकड़ियाँ इकट्ठी की और उसमें आग लगा दी। तभी राजकुमार वहाँ पहुँच गया तो उसे देखकर उसकी पत्नी बहुत खुश हुई लेकिन धर्माकर चिंतित हो गया। जैसे ही राजकुमार ने पूछा, मित्र कैसे हो! धर्माकर धधकती आग में कूद गया। उसका बाल भी बाँका नहीं हुआ। जिन लोगों ने उसे शंका की दृष्टि से देखा था उनके मुँह पर कोढ़ हो गया। धर्माकर का ब्रह्मचर्यव्रत व परस्त्री की सवे ा को देख कर देवता प्रसन्न हो गये और धर्माकर सज्जनाद्रोहक हो गया। किसी से वैर नहीं, शत्रु से भी प्रेम उसका धर्म बन गया। राजकुमार अपनी पत्नी को लेकर राजमहल को चला गया।' यह कहानी सुनाते-सुनाते अद्रोहक धर्माकर का घर आ गया, ब्राह्मण फिर अदृश्य हो गया। नरोत्तम, अद्रोहक धर्माकर से मिला तो उसने वैष्णव सज्जन के पास जाने की सलाह दी। अद्रोहक के घर से बाहर निकलते ही वही ब्राह्मण फिर साथ हो लिया तो नरोत्तम ने उससे वैष्णव की विशेषताएं पूछी। ब्राह्मण ने बताया, 'वैष्णव भगवान से बहुत प्रेम करता है इसलिये भगवान हमेशा उसके निज मंदिर में निवास करते हैं।' वैष्णव का घर आते ही ब्राह्मण फिर गायब हो गया। नरोत्तम वैष्णव से मिला तो उसने कहा,'अन्दर जाकर-भगवान के दर्शन करो, सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जायेंगी।' नरोत्तम मंदिर के पास गया तो देखता है कि वही ब्राह्मण यहाँ आसन पर विराजमान है। बार-बार साथ चलने वाले व बार-बार अदृश्य होने वाले इस ब्राह्मण से नरोत्तम ने कहा, 'प्रभो! यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं तो अपने दिव्य स्वरुप का दर्शन कराए।' ज्योंही भगवान ने दिव्य दर्शन दिये, नरोत्तम धन्य हो गया।

भगवान ने नरोत्तम से कहा,'तपस्वी हो, धर्म कर्म में प्रवीण हो लेकिन अपने माता-पिता का आदर नहीं करते हो, स्वभाव से बहुत क्रोधी हो। तुम्हारे माता-पिता दुःखी हैं। उनके दुःख के कारण ही तुम्हारी तपस्या पूरी नहीं होती। जिस पर माता पिता का कोप हो वह सीधा नरक में जाता है। अपने क्रोध का त्याग करो, घर जाओ और अपने माता-पिता की सेवा करो। उनमें मेरा स्वरुप देख कर उनकी पूजा करो।' साक्षात् भगवान ने ब्राह्मण का रुप धारण कर नरोत्तम को मूक चाण्डाल के यहाँ पितृतीर्थ, पतिव्रता के यहाँ पतितीर्थ, तुलाधारी वैश्य के यहाँ समता तीर्थ, धर्माकर के यहाँ अद्रोह तीर्थ और वैष्णव के यहाँ धर्मतीर्थ के दर्शन कराये। तपस्वी नरोत्तम इन तीर्थों का महत्त्व समझ गया और अपने माता-पिता का सम्मान कर, उनकी सेवा करने लगा और मूक चाण्डाल की तरह उनकी सेवा कर परमगति को प्राप्त हुआ।

COMMENTS

BLOGGER

|ताज़ातरीन_$type=complex$count=8$com=0$page=1$va=0$au=0

|कथा-कहानी_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लोककथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|आलेख_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|संस्मरण_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=blogging$au=0$com=0$label=1$count=10$va=1$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3753,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,325,ईबुक,181,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,243,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2731,कहानी,2039,कहानी संग्रह,223,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,482,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,82,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,213,लघुकथा,793,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,16,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,302,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1865,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,618,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,668,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,49,साहित्यिक गतिविधियाँ,179,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,51,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: धर्म का बिगड़ता स्वरुप
धर्म का बिगड़ता स्वरुप
http://lh3.googleusercontent.com/-afbsheDNo7c/VaotOUq51kI/AAAAAAAAlHE/JEKwUO3OaQM/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh3.googleusercontent.com/-afbsheDNo7c/VaotOUq51kI/AAAAAAAAlHE/JEKwUO3OaQM/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2015/07/blog-post_63.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2015/07/blog-post_63.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ